NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
राज्यसभा में उठा जेएनयू में फीस बढ़ोतरी का मुद्दा
शून्यकाल में सीपीएम के राज्यसभा सदस्य के के रागेश ने सभापति की अनुमति से जेएनयू में फीस बढ़ोतरी का मुद्दा उठाते हुए इस मामले में सरकार को उसके फैसले की समीक्षा करने का निर्देश देने का सुझाव दिया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
22 Nov 2019
Rajya sabha
राज्यसभा में सीपीएम के के के रागेश। फाइल फोटो, साभार : राज्यसभा टीवी

दिल्ली : राज्यसभा में आज, शुक्रवार को विपक्षी दलों ने राजधानी के जवाहरलाल नेहरू विश्विवद्यालय में फीस बढ़ोतरी का मुद्दा उठाया और इसका विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का विरोध किया जबकि भाजपा के एक सदस्य ने फीस के विरोध में चल रहे आंदोलन के ‘‘औचित्य’’ पर सवाल उठाया।

शून्यकाल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के राज्यसभा सदस्य के के रागेश ने सभापति की अनुमति से जेएनयू में फीस बढ़ोतरी का मुद्दा उठाते हुए इस मामले में सरकार को उसके फैसले की समीक्षा करने का निर्देश देने का सुझाव दिया। उन्होंने फीस बढ़ोतरी के फैसले के खिलाफ छात्र आंदोलन को दबाने के लिये की गयी पुलिस कार्रवाई की न्यायिक जांच कराने की भी मांग की।

विपक्षी दलों के विभन्न सदस्यों ने रागेश द्वारा उठाये गये इस विषय से स्वयं को संबद्ध करते हुए उनकी इस मांग का समर्थन किया। माकपा के अलावा कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने जेएनयू में फीस बढ़ोतरी के विषय में अपना पक्ष सदन में शून्य काल में रखने की सभापति से अनुमति मांगी थी।

इस दौरान भाजपा के प्रभात झा ने भी शून्यकाल के दौरान जेएनयू में फीस बढ़ोतरी और छात्रों के अधिकारों के नाम पर चल रहे आंदोलनों के ‘‘औचित्य’’ पर सवाल उठाया। झा ने कहा कि जेएनयू का गौरवशाली इतिहास रहा है लेकिन ‘‘पिछले कुछ सालों से जेएनयू परिसर में छात्र आंदोलनों की आड़ में देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।’’ उन्होंने इसकी जांच कराने की मांग की।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

Rajya Sabha
JNU
CPM
K.K Ragesh
fee hike in JNU
BJP
modi sarkar

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी: अयोध्या में चरमराई क़ानून व्यवस्था, कहीं मासूम से बलात्कार तो कहीं युवक की पीट-पीट कर हत्या
    19 Mar 2022
    कुछ दिनों में यूपी की सत्ता पर बीजेपी की योगी सरकार दूसरी बार काबिज़ होगी। ऐसे में बीते कार्यकाल में 'बेहतर कानून व्यवस्था' के नाम पर सबसे ज्यादा नाकामी का आरोप झेल चुकी बीजेपी के लिए इसे लेकर एक बार…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ट्रेड यूनियनों की 28-29 मार्च को देशव्यापी हड़ताल, पंजाब, यूपी, बिहार-झारखंड में प्रचार-प्रसार 
    19 Mar 2022
    दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिए सभी ट्रेड यूनियन जुट गए हैं। देश भर में इन संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठकों का सिलसिला जारी है।
  • रवि कौशल
    पंजाब: शपथ के बाद की वे चुनौतियाँ जिनसे लड़ना नए मुख्यमंत्री के लिए मुश्किल भी और ज़रूरी भी
    19 Mar 2022
    आप के नए मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने बढ़ते क़र्ज़ से लेकर राजस्व-रिसाव को रोकने, रेत खनन माफ़िया पर लगाम कसने और मादक पदार्थो के ख़तरे से निबटने जैसी कई विकट चुनौतियां हैं।
  • संदीपन तालुकदार
    अल्ज़ाइमर बीमारी : कॉग्निटिव डिक्लाइन लाइफ़ एक्सपेक्टेंसी का प्रमुख संकेतक है
    19 Mar 2022
    आम तौर पर अल्ज़ाइमर बीमारी के मरीज़ों की लाइफ़ एक्सपेक्टेंसी 3-12 सालों तक रहती है।
  • पीपल्स डिस्पैच
    स्लोवेनिया : स्वास्थ्य कर्मचारी वेतन वृद्धि और समान अधिकारों के लिए कर रहे संघर्ष
    19 Mar 2022
    16 फ़रवरी को स्लोवेनिया के क़रीब 50,000 स्वास्थ्य कर्मचारी काम करने की ख़राब स्थिति, कम वेतन, पुराने नियम और समझौते के उल्लंघन के ख़िलाफ़ हड़ताल पर चले गए थे।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License