NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कला
भारत
मंगलेश को याद करते हुए
मैं उसे किस रूप में याद करूं? ...मैं उसके उन इंसानी/वैचारिक पहलुओं के बारे में बात करना चाहूंगा, जो मुझे आज भी आकर्षित करते हैं।
अजय सिंह
16 May 2022
Manglesh Dabral

आज, 16 मई 2022, कवि-गद्यकार और मेरे प्यारे दोस्त मंगलेश डबराल (1948-2020) का जन्मदिन है। आज वह अगर ज़िंदा होता, तो अपनी ज़िंदगी के 74 साल पूरे कर चुका होता। मैं उसे किस रूप में याद करूं?

मैं उसकी कविताई या साहित्यिक महत्व के बारे में बात कम करूंगा, या शायद नहीं। मैं उसके उन इंसानी/वैचारिक पहलुओं के बारे में बात करना चाहूंगा, जो मुझे आज भी आकर्षित करते हैं।

मंगलेश ने अपनी एक कविता में कहा था कि मैं अपनी दोस्त के रुमाल को लाल झंडे की तरह फहराना चाहता हूं। दोस्त के रुमाल को लाल झंडे की तरह फहराना—यह हिंदी कविता में नया बिंब विधान था। मैं ज़ोर देकर कहना चाहता हूं कि, कुछ मानवीय कमज़ोरियों और कुछ वैचारिक विचलन के बावजूद मंगलेश आख़िर तक लाल झंडेवाला बना रहा।

इसी के बरअक्स एक शर्मनाक नज़ारा देखिये, जो हाल-फ़िलहाल का है। हिंदी के कुछ स्वनामधन्य कवि-आलोचक-लेखक बनारस में अपने माथे पर हिंदुत्ववादी सफेदा पोते हुए, गाल-नाक पर चकत्ते की तरह सफ़ेद-गेरुआ कुकुरमाछी लगाये हुए, दांतनिपोरी फोटू खिंचवा रहे हैं। या, राममंदिर के लिए दिये गये चंदे की रसीद की तस्वीर गर्व से लहरा रहे हैं।

यह नज़ारा बताता है कि हिंदुत्व फ़ासीवादी विचारधारा ने कई हिंदी साहित्यकारों के बीच अपनी पैठ बना ली है। इनमें से कुछ तो अपने को वामपंथी भी कहते हैं। ऐसे में मंगलेश का महत्व समझ में आता है।

हालांकि विडंबना यह है कि दांतनिपोरी साहित्यकारों में से कुछ तो मंगलेश के प्रिय भी रहे हैं! यह मंगलेश की वैचारिक कमज़ोरी थी कि वह चापलूस किस्म के कुछ लगुओं-भगुओं को अपने साथ लगाये रखता था और ये लगुए-भगुए मंगलेश से अपनी निकटता का फ़ायदा उठाते थे।

मंगलेश का महत्व क्या रहा है, इसे एक बात से समझा जा सकता है। हाल के वर्षों में हिंदी का जिस तेज़ी से हिंदूकरण हुआ है, और वह हिंदुत्व फ़ासीवाद की वाहक बनी है, मंगलेश उसका कट्टर आलोचक रहा है। नरेंद्र मोदी-अमित शाह-भाजपा-आरएसएस के नेतृत्व में भारत जिस गर्त में जा रहा है और हिटलरी जर्मनी का नया संस्करण बनने की तैयारी कर रहा है—मंगलेश ने इस पर बराबर कस कर हमला बोला। हिंदी के ‘हिंदूपने’ से आजिज़ आ कर उसने यहां तक कह दिया थाः ‘मुझे शर्म है कि मैं हिंदी में लिखता हूं!’ मंगलेश हिंदुत्व फ़ासीवाद के ख़िलाफ़ एक फ़ाइटर की भूमिका में था, और यह चीज़ मुझे आकर्षित करती है।

यह सही है कि मंगलेश के जीवन व विचार जगत में आत्मसंघर्ष और आत्मालोचन कम मिलता है, वैचारिक दुचित्तापन भी दिखायी देता है, और वामपंथ को लेकर अक्सर वह किंतु-परंतु करता रहा है। लेकिन मंगलेश ने वामपंथी धरातल को कभी नहीं छोड़ा। वह आजीवन वामपंथी बना रहा। वह जन संघर्ष व जन आंदोलन का संगी-साथी था और कंधे से झोला लटकाये सड़क पर जुलूस-धरना-प्रदर्शन में शामिल होता था। वह बुनियादी तौर पर लाल झंडेवाला और लाल सलाम वाला कवि, दोस्त, कॉमरेड व प्यारा इंसान था।

इस लेख को ख़त्म करते हुए मैं मंगलेश की एक छोटी कविता—महज़ चार लाइनों की—उद्धृत करना चाहूंगा, जो मुझे बहुत पसंद है। इसे उसने 1978 में लिखा था और यह उसके पहले कविता संग्रह ‘पहाड़ पर लालटेन’ (1981) में शामिल है। इसका शीर्षक है ‘कविता’:

‘कविता दिन भर थकान जैसी थी

और रात में नींद की तरह

सुबह पूछती हुईः

क्या तुमने खाना खाया रात को?’

अपने दोस्तों के बारे में मंगलेश की चिंता कुछ ऐसी ही थी।

(लेखक कवि व राजनीतिक विश्लेषक हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

manglesh dabral
Manglesh Dabral Birth Anniversary
Manglesh Dabral's Poems

Related Stories


बाकी खबरें

  • Why are you Making new India a Hateful Mobocracy, Modi ji!
    न्यूज़क्लिक टीम
    'नये भारत' को नफ़रती भीड़तंत्र क्यों बना रहे हैं, मोदी जी!
    26 Oct 2021
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने विज्ञापनों-फिल्मों से लेकर खिलाड़ियों को नफ़रती ब्रिगेड द्वारा निशाने पर लिये जाने के पीछे के मकसद का खुलासा किया। साथ ही भीमा कोरेगांव केस में जेल में बंद…
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    डीबीसी कर्मचारियों का धरना, लखीमपुर हिंसा पर SC में सुनवाई और अन्य ख़बरें
    26 Oct 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी दिल्ली में डीबीसी कर्मचारियों का धरना, सुप्रीम कोर्ट में लखीमपुर हिंसा पर सुनवाई और अन्य ख़बरों पर
  • cpim
    एम.ओबैद
    प्रीपेड बिजली मीटर के ख़िलाफ़ भाकपा-माले का प्रदर्शन, आंदोलन तेज़ करने का आह्वान
    26 Oct 2021
    पार्टी ने इसे ग़रीब और मध्यम वर्ग विरोधी बताया और सरकार से इस फ़ैसले को पलटने की मांग करते हुए पुराना पोस्ट पेड मीटर ही रखने की मांग की है।
  • Climate Change
    सीमा शर्मा
    उत्तराखंड: जलवायु परिवर्तन की वजह से लौटते मानसून ने मचाया क़हर
    26 Oct 2021
    मौसम वैज्ञानिकों ने असमय होने वाली बारिश के लिए, इस साल देश में ज़्यादा देर तक ठहरे दक्षिणपश्चिमी मानसून को ज़िम्मेदार बताया है। ज़मीन के ऊपर मौजूद ज़्यादा आर्द्रता ने मौसम की स्थितियों को एक नए मौसम…
  • Mehsi oyster button industry
    शशि शेखर
    बिहार: मेहसी सीप बटन उद्योग बेहाल, जर्मन मशीनों पर मकड़ी के जाल 
    26 Oct 2021
    बिहार के पूर्वी चंपारण के मेहसी स्थित विश्व प्रसिद्ध सीप-बटन उद्योग की मशीनों पर मकड़ी के जाले लग चुके हैं। बिजली की सप्लाई नहीं है। उद्योग यूनिट दर यूनिट बंद हो रहे हैं। इस उद्योग के कारीगर पंजाब-…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License