NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
तीन केंद्रीय अस्पतालों के रेजिडेंट चिकित्सकों ने सोमवार से नियमित, आपात सेवाओं का किया बहिष्कार
रेजिडेंट चिकित्सकों ने नीट-पीजी 2021 की काउंसलिंग में देरी को लेकर एफओआरडीए द्वारा आयोजित देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के समर्थन में सोमवार से सभी नियमित और आपातकालीन सेवाओं का बहिष्कार किया।
भाषा
06 Dec 2021
RML

नयी दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा संचालित राम मनोहर लोहिया (आरएमएल), सफदरजंग और लेडी हार्डिंग अस्पतालों के रेजिडेंट चिकित्सकों ने नीट-पीजी 2021 की काउंसलिंग में देरी को लेकर फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (एफओआरडीए) द्वारा आयोजित देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के समर्थन में सोमवार से सभी नियमित और आपातकालीन सेवाओं का बहिष्कार किया।

रेजिडेंट चिकित्सकों के प्रदर्शन के बीच, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने नीट-पीजी 2021 की काउंसलिंग में विलंब पर रोक लगाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से हस्तक्षेप की मांग की है।

कोरोना महामारी की तीसरी लहर की आशंका और कोविड-19 के नये स्वरूप ‘ओमीक्रोन’ का पता लगने के परिप्रेक्ष्य में स्वास्थ्य क्षेत्र में लोगों की कमी पर चिंता जताते हुए आईएमए ने कहा है कि चिकित्सा महाविद्यालयों में नीट पीजी नामांकन स्थगित करना खतरनाक है।

चिकित्सकों के निकाय आईएमए ने कहा, ‘‘इसके परिणामस्वरूप स्नातकोत्तर के लगभग दो बैच की कमी हो जाएगी, एक बैच जो परीक्षा के लिए उपस्थित हो रहा है और दूसरा जो प्रवेश की प्रतीक्षा कर रहा है जिसके परिणामस्वरूप लगभग एक लाख युवा रेजिडेंट डॉक्टर संकट से निपटने के लिए उपलब्ध नहीं हो पाएंगे। आईएमए केंद्र सरकार से मांग करता है कि पीजी में नामांकन की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर होनी चाहिए। यदि पीजी नामांकन स्थगित करते हैं तो कोविड संकट से निपटने में बहुत देरी हो जाएगी।’’

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया को लिखे एक पत्र में, एफओआरडीए ने गत चार दिसंबर को कहा था कि देश भर के स्वास्थ्य संस्थानों में पर्याप्त रेजिडेंट चिकित्सकों की कमी है, जबकि वर्तमान शैक्षणिक वर्ष में अभी तक कोई नामांकन नहीं हुआ है।

इसमें कहा गया है कि भविष्य में कोविड-19 महामारी की लहर की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र में देश की आबादी पर इसका विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा।

पत्र में लिखा गया है, ‘‘ऐसा लगता है कि नीट-पीजी काउंसलिंग में तेजी लाने के लिए अभी तक कोई पहल या उपाय नहीं किया गया है। इसलिए दिल्ली के विभिन्न आरडीए प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श के बाद हमने सोमवार से स्वास्थ्य संस्थानों में अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने और सभी सेवाओं (नियमित और आपातकालीन) को वापस लेने का फैसला किया है।”

रेजिडेंट चिकित्सकों के काम के बहिष्कार के बीच, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) के सफदरजंग अस्पताल पहुंचने की खबर है, जहां उन्होंने रेजिडेंट चिकित्सकों से विरोध प्रदर्शन वापस लेने की अपील की, लेकिन उन्होंने (चिकित्सकों ने) इनकार कर दिया।

पत्र में कहा गया है, ‘‘हमें आपका ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए दुख हो रहा है कि हमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया या ठोस कदम की जानकारी नहीं मिली है।’’

सफदरजंग और लेडी हार्डिंग (एलएचएमसी) अस्पतालों के आरडीए ने भी इसी तरह के पत्र लिखे हैं।

चिकित्सा अधीक्षक को लिखे अपने पत्र में, सफदरजंग अस्पताल आरडीए ने कहा है कि 27 नवंबर को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के साथ एक बैठक में ‘‘उनके द्वारा दिए गए मौखिक आश्वासन का सम्मान करते हुए’’ मौन तरीके से एक प्रतीकात्मक विरोध जारी रखा गया।

इसमें कहा गया है, ‘‘हालांकि, 30 नवंबर को जारी अधिसूचना के अनुसार, सामाजिक न्याय मंत्रालय ने शीर्ष अदालत में अपनी रिपोर्ट जमा करने के लिए तीन सप्ताह की अवधि मांगी है, जो इस प्रक्रिया में तेजी लाने के संबंध में हमें दिए गए मौखिक आश्वासन के अनुरूप नहीं है।’’

एलएचएमसी आरडीए ने कहा, “चूंकि ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) और सभी नियमित सेवाओं के मामले में अधिकारियों की ओर से आश्वासन के अनुरूप कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली, इसलिए हम एलएचएमसी और संबंधित अस्पतालों के रेजिडेंट चिकित्सक एफओरआरडीए, इंडिया द्वारा बुलाए गए राष्ट्रव्यापी विरोध के समर्थन में सोमवार, 6 दिसंबर से सभी सेवाओं (नियमित और आपातकालीन) का बहिष्कार करेंगे।’’

RML
Safdarjung
Lady Hardinge

Related Stories

दिल्ली: लेडी हार्डिंग अस्पताल के बाहर स्वास्थ्य कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी, छंटनी के ख़िलाफ़ निकाला कैंडल मार्च

दिल्ली: कोविड वॉरियर्स कर्मचारियों को लेडी हार्डिंग अस्पताल ने निकाला, विरोध किया तो पुलिस ने किया गिरफ़्तार

लेडी हार्डिंग: एक तरफ फूल बरसाकर सम्मान, दूसरी तरफ़ नौकरी से निकालने का फ़रमान

एम्स, RML सहित कई अस्पतालों के डॉक्टरों ने पीएम केयर्स में पैसे देने से किया मना 

कोविड-19 से निपटने के लिए दिल्ली के अस्पताल कितने तैयार?


बाकी खबरें

  • Rakesh Tikait
    बादल सरोज
    अल्ला हू अकबर और हर-हर महादेव के युग्म से इतना क्यों डर गए हुक्मरान ?
    10 Sep 2021
    हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई समुदायों की यह साझेदारी तो दिल्ली के सभी तरफ से लगी किसानो की मोर्चेबन्दियों में दिखती है फिर ऐसी क्या ख़ास बात थी कि इसे विशेष रूप से दर्ज किया जाए ?
  • नौ साल पहले तालिबान द्वारा एक नौजवान का किया गया अपहरण बना अंतहीन आघात
    विक्रम शर्मा
    नौ साल पहले तालिबान द्वारा एक नौजवान का किया गया अपहरण बना अंतहीन आघात
    10 Sep 2021
    वर्ष 2000 में तालिबान लड़ाकों ने एक किशोर का अपहरण किया था। जब यूनाइटेड किंगडम में डॉक्टरों की एक टीम ने उसका मानसिक मूल्यांकन किया, तो तालिबान शासन के तहत जीवन की एक परेशान करने वाली तस्वीर उभर कर…
  • कोरोना
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 34,973 नए मामले, 260 मरीज़ों की मौत
    10 Sep 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 3 लाख 90 हज़ार 646 हो गयी है।
  • हड़ताल पर रोक लगने के बाद रक्षा कर्मचारी संघ ओएफबी के निगमीकरण के ख़िलाफ़ लड़ेंगे क़ानूनी लड़ाई
    रौनक छाबड़ा
    हड़ताल पर रोक लगने के बाद रक्षा कर्मचारी संघ ओएफबी के निगमीकरण के ख़िलाफ़ लड़ेंगे क़ानूनी लड़ाई
    10 Sep 2021
    एक अन्य कदम के बतौर 13 से 18 सितंबर के बीच एक जनमत-संग्रह आयोजित किया जाना है, जिसमें देश भर के आयुध कारखानों में मौजूद 76,000 रक्षा कर्मचारियों से केंद्र के कदम के बारे में अपना फैसला व्यक्त करने के…
  • देश बचाने की लड़ाई में किसान-आंदोलन आज जनता की सबसे बड़ी आशा है।
    लाल बहादुर सिंह
    देश बचाने की लड़ाई में किसान-आंदोलन आज जनता की सबसे बड़ी आशा है
    10 Sep 2021
    किसान-आन्दोलन ने न सिर्फ आज़ादी की लड़ाई की बलिदानी परम्परा, उसके नारों की याद ताजा कर दी है वरन आज़ादी के लड़ाई के महान मूल्यों को भी पुनर्जीवित कर दिया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License