NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
बिना पैसे और दस्तावेज़ों के कोविड-19 की जंग लड़ रहे हैं रोहिंग्या शरणार्थी
सरकार ने उन लोगों के लिए जांच और टीकाकरण के दिशा निर्देशों को आसान बनाया है जिनके पास पर्याप्त दस्तावेज नहीं है लेकिन कई शरणार्थियों का कहना है कि जमीनी स्तर पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ा है।
भाषा
20 May 2021
बिना पैसे और दस्तावेजों के कोविड-19 की जंग लड़ रहे हैं रोहिंग्या शरणार्थी

नयी दिल्ली: दिल्ली के कई शरणार्थी शिविरों में रह रहे रोहिंग्या मुस्लिमों के पास न तो इलाज के लिए पैसा है और न ही कोविड-19 रोधी टीका लगवाने के लिए दस्तावेज हैं जिससे महामारी के इस दौर में जीवित रहने के लिए वे खुद ही संघर्ष कर रहे हैं।

सरकार ने उन लोगों के लिए जांच और टीकाकरण के दिशा निर्देशों को आसान बनाया है जिनके पास पर्याप्त दस्तावेज नहीं है लेकिन कई शरणार्थियों का कहना है कि जमीनी स्तर पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ा है।

शहर के मदनपुर खादर शिविर में करीब 270 रोहिंग्या मुस्लिम रहते हैं जो अत्याचारों से बचने के लिए म्यांमा में अपने घरों से भाग आए। झुग्गी बस्ती में रह रहे कई लोगों का कहना है कि उन्होंने खुद से ही बीमारी के लक्षणों से लड़ना सीख लिया है जिसमें कई घरेलू उपचार जैसे कि नमक के पानी से गरारे करना और स्थिति गंभीर होने पर अपनी तंग झुग्गियों में ही पृथक रहना शामिल है।

ऐसे ही एक युवा दिहाड़ी मजदूर आमिर में कोरोना वायरस के लक्षण दिख रहे हैं और वह अपनी खांसी दूर करने के लिए दिन में चार बार नमक के पानी से गरारे कर रहा है। इससे कुछ राहत तो मिल रही है लेकिन उसे नहीं पता कि हालत बिगड़ने पर क्या करेगा। उसके पास न आधार कार्ड है और न ही कोई अन्य दस्तावेज। ऐसा ही हाल उसके साथ रह रहे अन्य लोगों का भी है।

पिछले महीने जब महामारी चरम पर थी तो मदनपुर खादर शिविर में करीब 50-60 रोहिंग्या शरणार्थियों में लक्षण दिखे थे। अब करीब 20-25 लोगों में लक्षण हैं।

इसे भी पढ़े :रोहिंग्या शरणार्थी : डर के साये में जीने को मजबूर!

गैर सरकारी संगठनों के अनुसार, भारत में करीब 40,000 रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं। मदनपुर खादर, कालिंदी कुंज और शाहीन बाग में शिविरों में करीब 900 शरणार्थी रह रहे हैं।

नासिर ने छह महीने पहले अपनी पत्नी को खो दिया था। उसे लगता है कि पत्नी को कोविड-19 था लेकिन वह यकीन से नहीं कह सकता। हालांकि किसी तरह वह उसे अस्पताल ले जा पाया था।

उसने कहा, ‘‘कोविड जैसे लक्षणों से जूझने के बाद मेरी पत्नी की मौत हो गई। मैं अपनी पत्नी को अस्पताल ले गया था लेकिन इलाज मिलने से पहले ही उसकी मौत हो गई थी।’’

उसने बताया कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी किए पहचान पत्र से उसे अस्पताल में भर्ती कराने में मदद मिली।

कई अन्य शरणार्थी ऐसा करने से डरते हैं क्योंकि उन्हें आशंका है कि शरणार्थी के तौर पर पहचाने जाने के बाद उन्हें प्रत्यर्पित कर दिया जाएगा।

पड़ोस में किराने की दुकान चलाने वाले नासिर ने यह भी कहा कि जब लोगों को लक्षण दिखते हैं तो वह डर जाते हैं।

उसने कहा, ‘‘वे खुद को पृथक कर लेते हैं, गर्म पानी पीते हैं, नींबू खाते हैं, प्याज खाते हैं। कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत, बुखार और सर्दी तथा खांसी होती है। कई लोग तो इसके बारे में बात भी नहीं करना चाहते।’’

रोहिंग्या ह्यूमैन राइट्स इनीशिएटिव के एक प्रतिनिधि ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाएं हमेशा रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए एक समस्या रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘रोहिंग्या कोरोना वायरस की चपेट में अधिक आते हैं क्योंकि वे तंग जगहों पर रहते हैं। कोरोना वायरस ही नहीं बल्कि वे अन्य बीमारियों की चपेट में भी आते हैं। हाल ही में शिविर में बच्चों के बीच डायरिया के कई मामले देखे गए थे।’’

उन्होंने पहचान न बताने की शर्त पर कहा, ‘‘हम ऐसे मामलों की पहचान करते हैं जहां कोरोना वायरस के लक्षण देखे जाते हैं। लेकिन आवश्यक दस्तावेजों के बिना इलाज कराना एक समस्या है और उन्हें टीका लगाना बहुत बड़ी चिंता है।’’

उन्होंने कहा कि अभी तक मदनपुर खादर में इस संक्रमण से किसी की मौत होने की खबर नहीं है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के हाल के दिशा निर्देशों के अनुसार जिनके पास आईडी कार्ड नहीं है उन्हें भी टीका लगाया जाएगा। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें शरणार्थी शामिल हैं या नहीं।

इसे भी देखे :रोहिंग्या शरणार्थी: "हम कहाँ जाएँगे"

Rohingya Refugees
COVID-19
Rohingya crisis

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां


बाकी खबरें

  • BIRBHUMI
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    टीएमसी नेताओं ने माना कि रामपुरहाट की घटना ने पार्टी को दाग़दार बना दिया है
    30 Mar 2022
    शायद पहली बार टीएमसी नेताओं ने निजी चर्चा में स्वीकार किया कि बोगटुई की घटना से पार्टी की छवि को झटका लगा है और नरसंहार पार्टी प्रमुख और मुख्यमंत्री के लिए बेहद शर्मनाक साबित हो रहा है।
  • Bharat Bandh
    न्यूज़क्लिक टीम
    देशव्यापी हड़ताल: दिल्ली में भी देखने को मिला व्यापक असर
    29 Mar 2022
    केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के द्वारा आवाह्न पर किए गए दो दिवसीय आम हड़ताल के दूसरे दिन 29 मार्च को देश भर में जहां औद्दोगिक क्षेत्रों में मज़दूरों की हड़ताल हुई, वहीं दिल्ली के सरकारी कर्मचारी और…
  • IPTA
    रवि शंकर दुबे
    देशव्यापी हड़ताल को मिला कलाकारों का समर्थन, इप्टा ने दिखाया सरकारी 'मकड़जाल'
    29 Mar 2022
    किसानों और मज़दूरों के संगठनों ने पूरे देश में दो दिवसीय हड़ताल की। जिसका मुद्दा मंगलवार को राज्यसभा में गूंजा। वहीं हड़ताल के समर्थन में कई नाटक मंडलियों ने नुक्कड़ नाटक खेलकर जनता को जागरुक किया।
  • विजय विनीत
    सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी
    29 Mar 2022
    "मोदी सरकार एलआईसी का बंटाधार करने पर उतारू है। वह इस वित्तीय संस्था को पूंजीपतियों के हवाले करना चाहती है। कारपोरेट घरानों को मुनाफा पहुंचाने के लिए अब एलआईसी में आईपीओ लाया जा रहा है, ताकि आसानी से…
  • एम. के. भद्रकुमार
    अमेरिका ने ईरान पर फिर लगाम लगाई
    29 Mar 2022
    इज़रायली विदेश मंत्री याइर लापिड द्वारा दक्षिणी नेगेव के रेगिस्तान में आयोजित अरब राजनयिकों का शिखर सम्मेलन एक ऐतिहासिक परिघटना है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License