NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
बिहार के ग्रामीण खेत मज़दूरों का ऐलान : 8 जनवरी 2020 को भारत बंद सफल करेंगे!
अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मज़दूर सभा के आह्वान पर 9 व 10 नवंबर को पटना में 1000 से भी अधिक खेत व ग्रामीण मज़दूरों का सम्मेलन हुआ। सम्मेलन से आगामी 27 नवंबर को राज्य के सभी प्रखंडों पर खेत व ग्रामीण मज़दूर अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की गई है।
अनिल अंशुमन
16 Nov 2019
farmer protest

9 नवंबर को जब सबकी नज़रें अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट से होने वाले फ़ैसले पर टिकी हुई थीं और इसी दिन बिहार के दसियों हज़ार ग्रामीण 'हमें काम चाहिए और काम का पूरा दाम चाहिए!' जैसे नारों के साथ राजधानी पटना में इकट्ठे हुए। इन ग़रीबों के जुटान ने दिखा दिया कि सत्ता-सियासत द्वारा ‘भटकाव के उन्मादी मुद्दे‘ थोपकर उनके बुनियादी मुद्दों को हाशिये पर धकेलने की साज़िशों को वे समझने लगे हैं।

अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मज़दूर सभा के आह्वान पर 9 व 10 नवंबर को राजधानी पटना के गर्दनीबाग गेट पब्लिक लाईब्रेरी परिसर में आयोजित रैली व सम्मेलन के तहत विभिन्न ज़िलों–अंचलों से आए गांवों के ग़रीब-गुरबों का यह जुटान हुआ। सम्मेलन में 1000 से भी अधिक खेत व ग्रामीण मज़दूर शामिल हुए, साथ ही महिला व पुरुष प्रतिनिधियों ने भागीदारी निभाई। इस सम्मेलन में वर्तमान की केंद्र और बिहार की सरकारों द्वारा भूमि, आवास, शिक्षा व रोज़गार के अधिकारों को छीने जाने के ख़िलाफ़ संघर्ष के कार्यक्रम तय किए गए।

साथ ही ग्रामीण पलायन रोकने के लिए यूपीए सरकार के समय से ही चलाई जा रही मनरेगा योजना में कटौती कर उसे समाप्त करने की साज़िशों को रोकने के उपायों पर भी बातें हुईं। सम्मेलन से आगामी 27 नवंबर को राज्य के सभी प्रखंडों पर खेत व ग्रामीण मज़दूर अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन करने तथा मोदी सरकार की मज़दूर विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ आगामी 8 जनवरी 2020 को विभिन्न ट्रेड यूनियनों के भारत बंद को पूरी सक्रियता के साथ सफल बनाने की घोषणा की गयी। सम्मेलन से मनरेगा बचाने के संघर्ष के लिए बिहार प्रदेश मज़दूर सभा का भी गठन किया गया।

पटना ग्रामीण क्षेत्र से सैकड़ों महिला–पुरुष ग्रामीण खेत मज़दूरों को रैली व सम्मेलन में लेकर आए युवा जितेंद्र पासवान ने बताया कि गाँव के ग़रीबों को उज्जवला गैस और शौचालय योजना जैसी योजनाओं का शोर मचाकर सिर्फ़ विकास राशियों का बंदरबाँट किया गया। व्यापक ग़रीबों के पेट और हाथ ख़ाली के ख़ाली रखकर सिर्फ़ रोज़ रोज़ के करोड़ी प्रचार से गाँव के लोगों को फ़ायदा पहुंचाने का सिर्फ़ शोर मचाया जा रहा है। मधुबनी ज़िले से आई 50 वर्षीय धनिया देवी ने राशन में मची लूट पर क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि मोदी–नितीश की सरकार सिर्फ़ ग़रीबों को ठगने का काम कर रही है। भभुआ–कैमूर के दुखिराम ने कहा, "गाँव के ग़रीबों को भूमि और आवास देने की बात सिर्फ़ हवा हवाई है उल्टे जल संरक्षण के नाम पर आहार–पोखर और सड़क किनारे वर्षों से बसी हुई उनकी बस्तियों को उजाड़ने का सरकार ने फ़रमान जारी कर दिया है।"

खेमस 5.jpg

नालंदा से आए दलित ग्रामीण मनरेगा मज़दूर अजित रविदास ने कहा, "मोदी और एनडीए शासन हम ग्रामीण ग़रीबों के लिए तो काल बनकार आया है। बड़े-बड़े चँवर–पोखर की ज़मीनों पर क़ब्ज़ा किए बैठे सामंतों–भूमिपतियों को हर तरह से सरकार–प्रशासन का संरक्षण मिल रहा है और हमें उजाड़ा जा रहा है।"

ग्रामीण खेत मज़दूरों की रैली को संबोधित करते हुए भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपांकर ने कहा, "पूरा देश जिस आर्थिक मंदी और भारी आर्थिक अस्तव्यस्तता की चपेट आया हुआ है वह सब मोदी सरकार की ही देन है। जिसने नोटबंदी और आधा अधूरा जीएसटी लाकर अर्थव्यवस्था की रही सही कम तोड़ दी। इसीलिए मज़दूर–किसानों पर कोई बात नहीं हो रही है। भूख से लगातार मौतें हो रहीं हैं और ग़रीबों की राशन व्यवस्था तहस नहस करके सबको मंदिर–मस्जिद विवाद में उलझाया जा रहा है। एनडीए सरकार गांवों के ग़रीबों को फिर से ज़मींदारी दौर में ले जाना चाहती है।"

संगठन के राष्ट्रीय महासचिव धीरेन्द्र झा ने खेत मज़दूरों के जुटान में आए लोगों का स्वागत किया। रैली व सम्मेलन से आगामी संघर्ष के 10 सूत्री प्रस्ताव भी पारित किए गए। समापन के पूर्व जहानाबाद में खेत मज़दूरों के अधिकारों की नेता मंजू देवी के शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि दी गयी।

होली–दशहरा–दीपावली और छठ पूजा के अवसरों पर देश की रेलगाड़ियों के बाथरूम तक में घुसे जिन यात्रियों की तस्वीरें सामने आती हैं, अधिकांश वे बिहार के ग्रामीण मज़दूरों की ही होती हैं। हर साल काम धंधे की तलाश में पलायन करके परदेस की ठोकरें खाने वालों में आज भी बिहार के ग्रामीण मज़दूरों की तादाद सबसे अधिक रहती है। जो कभी कश्मीर में मारे जाते हैं तो कभी गुजरात और मुंबई से पीट–पीटकर भगाए जाते हैं तो कभी सुदूर मणिपुर तो कभी कहीं और से।

जबकि गाँव के ग़रीबों के पलायन रोकने और उन्हें वहीं काम धंधा उपलब्ध कराने के नाम पर आए दिन सरकारें बड़ी–बड़ी योजनाओं के ढोल पीटती नज़र आती हैं। लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त इससे पूरी तरह अलग और भयावह है। ऐसे में खेग्रामस के बैनर तले जुटे बिहार के ग्रामीण–खेत मज़दूरों का अपनी ज़िंदगी की बेहतरी और अधिकार सम्पन्न–सम्मान-जनक जीवन यापन के संघर्ष का हौसला स्वागत योग्य कहा जाना चाहिए।

Bihar
Rural farm laborers
Bharat band on 8 January 2020
भारत बंद
All India Farm and Rural Labor Conference
Ayodhya Dispute
Supreme Court
NDA Govt
farmers protest
MGNREGA

Related Stories

छत्तीसगढ़ : दो सूत्रीय मांगों को लेकर बड़ी संख्या में मनरेगा कर्मियों ने इस्तीफ़ा दिया

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

छत्तीसगढ़ः 60 दिनों से हड़ताल कर रहे 15 हज़ार मनरेगा कर्मी इस्तीफ़ा देने को तैयार

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

पटना : जीएनएम विरोध को लेकर दो नर्सों का तबादला, हॉस्टल ख़ाली करने के आदेश

लंबे संघर्ष के बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायक को मिला ग्रेच्युटी का हक़, यूनियन ने बताया ऐतिहासिक निर्णय

बिहार: 6 दलित बच्चियों के ज़हर खाने का मुद्दा ऐपवा ने उठाया, अंबेडकर जयंती पर राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाया

बिहार: विधानसभा स्पीकर और नीतीश सरकार की मनमानी के ख़िलाफ़ भाकपा माले का राज्यव्यापी विरोध

बिहार में आम हड़ताल का दिखा असर, किसान-मज़दूर-कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता


बाकी खबरें

  • रवि शंकर दुबे
    ‘’मुसलमानों के लिए 1857 और 1947 से भी मुश्किल आज के हालात’’
    05 Apr 2022
    ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव रहमानी ने आज के दौर को 1857 और 1947 के दौर से ज़्यादा घातक बताया है।
  • भाषा
    ईडी ने शिवसेना सांसद संजय राउत से संबंधित संपत्ति कुर्क की
    05 Apr 2022
    यह कुर्की मुंबई में एक 'चॉल' के पुनर्विकास से संबंधित 1,034 करोड़ रुपये के कथित भूमि घोटाले से जुड़े धन शोधन की जांच से संबंधित है। 
  • सोनया एंजेलिका डिएन
    क्या वैश्वीकरण अपने चरम को पार कर चुका है?
    05 Apr 2022
    पहले कोरोना वायरस ने एक-दूसरे पर हमारी आर्थिक निर्भरता में मौजूद खामियों को उधेड़कर सामने रखा। अब यूक्रेन में जारी युद्ध ने वस्तु बाज़ार को छिन्न-भिन्न कर दिया है। यह भूमंडलीकरण/वैश्वीकरण के खात्मे…
  • भाषा
    श्रीलंका के नए वित्त मंत्री ने नियुक्ति के एक दिन बाद इस्तीफ़ा दिया
    05 Apr 2022
    श्रीलंका के नए वित्त मंत्री अली साबरी ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। एक दिन पहले राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने अपने भाई बेसिल राजपक्षे को बर्खास्त करने के बाद उन्हें नियुक्त किया था।
  • भाषा
    हरियाणा के मुख्यमंत्री ने चंडीगढ़ मामले पर विधानसभा में पेश किया प्रस्ताव
    05 Apr 2022
    हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान मनोहर लाल द्वारा पेश प्रस्ताव के अनुसार, ‘‘यह सदन पंजाब विधानसभा में एक अप्रैल 2022 को पारित प्रस्ताव पर चिंता व्यक्त करता है, जिसमें सिफारिश की गई है कि…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License