NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
यूरोप
यूक्रेन के ख़िलाफ़ चल रहे रूसी सैन्य अभियान नये चरण में दाखिल
बेलारूस में रूसी-यूक्रेन के बीच की वार्ता में जो कुछ भी होगा, वह निर्णायक होगा।

एम के भद्रकुमार
09 Mar 2022
ship
रूस के काला सागर बेड़े के उभयचर व हमलावर जहाज

पिछले दो दिनों की लड़ाई के बाद यूक्रेन में रूस के 'विशेष सैन्य अभियान' एक अहम चरण में दाखिल हो जायेंगे। इसकी पूर्व पीठिका के तौर पर फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉ की ओर से राष्ट्रपति पुतिन के साथ निजी स्तर पर की गयी मध्यस्थता के मुताबिक़, चार क्षेत्रों में मानवीय गलियारे खोले गये हैं। संघर्ष विराम का भी ऐलान कर दिया गया है।

ये चार क्षेत्र हैं: राजधानी कीव, सुमी और खार्किव के दो पूर्वी शहर और आज़ोव सागर पर स्थित दक्षिणी रणनीतिक बंदरगाह शहर मारियुपोल।

दिलचस्प बात यह है कि रूस ने अपने क्षेत्र से निकासी और इसके अलावे अलग-अलग जगहों पर,जो जहां जाना चाहता है,उसे परिवहन की पेशकश भी की गयी है। इससे चरमपंथियों के कहीं और जाकर लड़ने की संभावना कम हो जायेगी। लेकिन, यह देखना अभी बाक़ी है कि आम नागरिकों को इस प्रस्ताव का इस्तेमाल करने की इजाज़त कब तक दी जायेगी। यूक्रेन का मास्को की ओर से 'नाज़ीकरण से मुक्त' किये जाने का एक अहम सियासी मक़सद है और इस क्षेत्र में अपने पैर जमाये नव-नाजी मिलिशिया ज़ोर  से चल रहे इन रूसी अभियानों को थामने के लिए 'मानव ढाल' का इस्तेमाल करने की सोच रहे हैं।

ऐसे में कोई शक नहीं कि आने वाले दिनों में उक्त क्षेत्रों में रूसी सैन्य अभियानों को और तेज़ किये जाने की तैयारी है।दरअस्ल इस युद्धविराम की रूसी पेशकश नागरिकों को ख़तरे से बचने का आख़िरी मौक़ा है।

आगे चलने वाले सैन्य अभियानों का मक़सद कीव, सुमी, खार्किव और मारियुपोल को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर करने पर केंद्रित करना होगा। इसके अलावा, काला सागर पर ओडेसा बंदरगाह (नाटो की वहां पहुंच बनने से रोकने वाला बंदरगाह) पर नियंत्रण करने के लिए बाक़ी सैन्य अभियान शुरू किये जायेंगे, जिसमें दक्षिण से जल-थल दोनों ही हमले और उत्तर से ज़मीनी हमले की तमाम संभावनायें शामिल होंगी।

इसके अलावा, संभवतः रूसी सेना का लक्ष्य यूक्रेन की धुर दक्षिण-पश्चिमी सीमा के साथ कटे हुए ट्रांसनिस्ट्रिया में अपने मौजूदा सैन्य आधार के साथ मिलाने का भी हो सकता है।

इस पूरे परिप्रेक्ष्य की बड़ी तस्वीर यह है कि यूरोपीय (और, निश्चित रूप से बाइडेन प्रशासन) को पहले से ही एहसास हो गया हो कि ये रूसी अभियान नीपर नदी के पूर्व और काला सागर तट के साथ लगने वाले क्षेत्रों (जो कि रूस में रोस्तोव-ऑन-डॉन से क्रीमिया तक लगा हुआ एक भूमि गलियारा मुहैया करा देता है,नीचे नक़्शा में देखें) में मास्को के उद्देश्यों को पूरा कर पाने में काफ़ी हद तक सफल रहे हैं।

असल में यूक्रेन को लड़ाकू विमानों की आपूर्ति (जबकि रूसियों का हवाई क्षेत्र पर नियंत्रण हैं!), निर्वासित सरकार, विद्रोह, आदि जैसी चीज़ें लाज बचाने के लिहाज़ से अमेरिकी प्रचार-प्रसार के हिस्से हैं। अमेरिकी प्रचार युद्ध चरम पर है। अफ़ग़ानिस्तान में मिली हार के तुरंत बाद हुई यह घटना यूरोप (और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी) में अमेरिकी प्रतिष्ठा के लिहाज़ से एक ज़बरदस्त झटका है।

मॉस्को को अब इस बात की उम्मीद है कि यूक्रेन का प्रतिनिधिमंडल बेलारूस में होने वाली वार्ता में आत्मसमर्पण की शर्तों पर अपनी प्रतिक्रिया देगा। पुतिन ने मैक्रॉ के साथ बातचीत में रूस की इसी बुनियादी बात को दोहराया है। रूस के इस आख़िरी चरण में सैन्य अभियानों से तौबा करने की कोई संभावना नहीं है। अच्छी बात यह है कि यूरोप के लोग भी अपने महाद्वीप पर लंबे समय तक संघर्ष नहीं चाहते हैं। वे इस बात को लेकर पूरी तरह से सचेत हैं कि अगर यह संघर्ष लम्बा चलता है,तो उन्हें हर तरह की तबाही और परेशानी झेलने के लिए तैयार रहना होगा।

6 मार्च को न्यूयॉर्क टाइम्स में ब्रिटिश के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के लिखे अतिथि आलेख से यह साफ़ हो जाता है कि 'बीटिंग ऑफ द रिट्रीट' यानी सेनाओं की बैरक में वापसी शुरू हो गयी है। अपनी तेज़-तर्रार बयानबाज़ी और पुतिन और ख़ुद के रास्ते में आने वाली कटुता के निशान की परवाह नहीं करते हुए जॉनसन ने अपने उस लेख में सही मायने में आगे आने समय के लिए 6 क़दम उठाये जाने के प्रस्ताव दिये हैं।ये छ: क़दम हैं- एक अंतर्राष्ट्रीय मानवीय गठबंधन को लामबंद करना; यूक्रेन को उसके बचाव में मदद करना; रूस पर आर्थिक दबाव को ज़्यादा से ज़्यादा बढ़ाना; अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रूस के इस 'आक्रामक' व्यवहार को सरेआम करते रहना; कूटनीति और सैनिक रूप से पीछे हटने के विकल्प का खुला रखना; और, यूरो-अटलांटिक सुरक्षा को मज़बूत करना।

यह बात ग़ौर करने लायक़ है कि इन 6 चरणों में जिन चीज़ों का ज़िक़्र नहीं किया गया है,वे हैं: लड़ाई को लंबा खींचने को लेकर यूक्रेन को आक्रामक हथियारों की आपूर्ति करते रहना या रूसियों का ख़ून बहाना, किसी भी तरह से निर्वासित सरकार की स्थापना, या रूसी सेना को एक 'दलदल' में फंसाये रखने के लिए एक संपूर्ण उग्रवाद को हवा देना या बनाये रखना।इनमें से तमाम बातें अमेरिका की तमाम तीखी बयानबाज़ियों में अक्सर शामिल होते हैं। साफ़ है कि ज़िम्मेदारी के स्तर पर यह एक सुखद अहसास है कि रूसी का सैन्य अभियान जारी है और इसके नतीजे की जहां तक बात है,तो उसका भी अपने अंजाम तक पहुंचना तय है ! सीधे-सीधे शब्दों में कहें तो अमेरिका ने भले ही प्रोपेगेंडा युद्ध जीत लिया हो,लेकिन असली युद्ध तो रूस ही जीत रहा है।

संक्षेप में कहा जा सकता है कि बेलारूस में रूसी-यूक्रेनी वार्ता में जो कुछ भी होगा, वह निर्णायक होगा। आज शाम का दौर अहम रहेगा। रूसियों को उम्मीद है कि यूक्रेनियन अपने आत्मसमर्पण की शर्तों को लेकर वाजिब प्रतिक्रिया देंगे। अगर अमेरिका इन शर्तों से यूक्रेनियन को अपने पैर खींच लेने के लिए प्रेरित करता है, तो रूसी जनरल अपने सैन्य अभियान के साथ आगे बढ़ सकते हैं और ज़्यादा से ज़्यादा ताक़त के साथ बाक़ी बाधाओं को ख़त्म कर सकते हैं और अगर ज़रूरत पड़ी,तो वे नाटो देशों के साथ लगने वाली यूक्रेन की पश्चिमी सीमाओं तक भी इस अभियान का विस्तार कर सकते हैं। लेकिन चीजें इतनी आसान नहीं होंगी,क्योंकि नाटो अपनी आत्मरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध दिख रहा है।

 

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

https://www.newsclick.in/Russia-Ukraine-Operations-Enter-New-Phase

ukraine
Russia
Ukraine Russia Conflict

Related Stories

बाइडेन ने यूक्रेन पर अपने नैरेटिव में किया बदलाव

डेनमार्क: प्रगतिशील ताकतों का आगामी यूरोपीय संघ के सैन्य गठबंधन से बाहर बने रहने पर जनमत संग्रह में ‘न’ के पक्ष में वोट का आह्वान

रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगाने के समझौते पर पहुंचा यूरोपीय संघ

यूक्रेन: यूरोप द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाना इसलिए आसान नहीं है! 

पश्चिम बैन हटाए तो रूस वैश्विक खाद्य संकट कम करने में मदद करेगा: पुतिन

और फिर अचानक कोई साम्राज्य नहीं बचा था

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

90 दिनों के युद्ध के बाद का क्या हैं यूक्रेन के हालात

यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई खाद्य असुरक्षा से बढ़ रही वार्ता की ज़रूरत

खाड़ी में पुरानी रणनीतियों की ओर लौट रहा बाइडन प्रशासन


बाकी खबरें

  • jammu and kashmir
    न्यूज़क्लिक टीम
    जम्मू-कश्मीर: पुलवामा में किसानों से छीनी गई ज़मीन
    30 Nov 2021
    उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के अधीन प्रशासन ने विभिन्न उद्देश्यों के लिए 28 अक्टूबर को सीआरपीएफ के पक्ष में 65 एकड़ से अधिक ज़मीन सहित राज्य की भूमि के हस्तांतरण को मंजूरी दी। भूमि का ये हस्तांतरण दक्षिण…
  • taliban
    एम. के. भद्रकुमार
    अफ़ग़ानिस्तान: सौ दिन का एकांत
    30 Nov 2021
    इस आर्टिकल में लेखक तालिबान के अधिग्रहण के 100 दिनों के बाद इस दौरान हुई घटनाओं पर नज़र डाल रहे हैं।
  • MSP
    विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: पूर्वांचल में 'धान का कटोरा' कहलाने वाले इलाके में MSP से नीचे अपनी उपज बेचने को मजबूर किसान
    30 Nov 2021
    "पूर्वांचल के किसी भी हिस्से में चावल मुख्य खाद्य पदार्थ है। अकेले चंदौली में करीब 1.25 लाख हेक्टयर में लगभग चार लाख टन धान का उत्पादन होता है। लाख प्रयास के बावजूद 50 हजार टन से ज्यादा धान की खरीद…
  • Abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    आज़ादी अमृतोत्सव: बीजेपी आज़ादी के मायने जानती है ?
    29 Nov 2021
    'न्यूज़चक्र' के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा देश में बढ़ती सामाजिक असुरक्षा पर चर्चा कर रहे हैंI बात चाहे कर्नाटक में ईसाई धर्म के लोगों की पूजा पर पाबन्दी की हो या मुन्नवर फ़ारूक़ी को…
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    दोनों सदनों में कृषि क़ानून वापसी बिल पास, मुनव्वर फ़ारूक़ी के शोज़ फिर रद्द और अन्य ख़बरें
    29 Nov 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी दोनों सदनों में कृषि क़ानून वापसी बिल पास, मुनव्वर फ़ारूक़ी के शोज़ फिर रद्द और अन्य ख़बरों पर।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License