NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
रूस ने हमले रोकने की मांग करने वाले संरा के प्रस्ताव पर वीटो किया
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शुक्रवार को इस प्रस्ताव के पक्ष में 11 और विपक्ष में एक मत पड़ा। चीन, भारत और संयुक्त अरब अमीरात मतदान से दूर रहे।
एपी/भाषा
26 Feb 2022
veto

संयुक्त राष्ट्र:  रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव पर वीटो कर दिया है जिसमें मॉस्को से यूक्रेन पर हमला रोकने और सभी सैनिकों को वापस बुलाने की मांग की गयी है।

अमेरिका और उसके समर्थक जानते थे कि यह प्रस्ताव विफल हो जाएगा लेकिन उन्होंने दलील दी कि इससे रूस अंतरराष्ट्रीय रूप से अलग-थलग पड़ेगा।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में शुक्रवार को इस प्रस्ताव के पक्ष में 11 और विपक्ष में एक मत पड़ा। चीन, भारत और संयुक्त अरब अमीरात मतदान से दूर रहे।

इस प्रस्ताव के विफल होने से समर्थकों के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा में ऐसे ही प्रस्ताव पर शीघ्र मतदान कराने की मांग का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

उल्लेखनीय है कि 193 सदस्यीय महासभा में वीटो का प्रावधान नहीं है। अभी यह तय नहीं है कि कब मतदान होगा।

संयुक्त राष्ट्र में इस प्रस्ताव पर मतदान में दो घंटे की देरी हुई। प्रस्ताव के सह-प्रायोजक अमेरिका और अल्बानिया इस पर समर्थन जुटाने के लिए इससे हिचकिचाने वाले देशों को एक साथ लाने की कवायद में जुटे रहे। अपने सहयोगी देश के साथ वीटो का इस्तेमाल करने के बजाय इससे दूर रहने के चीन के फैसले को कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

अमेरिका की राजदूत लिंडा थॉमस ग्रीनफील्ड ने अपने रूसी समकक्ष से कहा, ‘‘आप इस प्रस्ताव पर वीटो कर सकते हैं लेकिन आप हमारी आवाज पर वीटो नहीं कर सकते। आप सच पर वीटो नहीं कर सकते। आप सिद्धांतों पर वीटो नहीं कर सकते। आप यूक्रेन की आवाम पर वीटो नहीं कर सकते।’’

ब्राजील के राजदूत रोनाल्डो कोस्टा फिल्हो ने कहा कि उनकी सरकार रूस की सैन्य कार्रवाई को लेकर ‘‘बहुत चिंतित’’ है। उन्होंने कहा, ‘‘हद पार की गयी है और यह परिषद चुप नहीं बैठ सकती।’’

इनके जवाब में संयुक्त राष्ट्र में रूस के राजदूत ने अपने देश के उन दावों को दोहराया कि वह पूर्वी यूक्रेन के लोगों के लिए खड़ा है, जहां रूस समर्थित अलगाववादी आठ वर्षों से सरकार से लड़ रहे हैं। उन्होंने पश्चिमी देशों पर वहां यूक्रेन की ज्यादतियों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, ‘‘आपने अपने भू-राजनीतिक खेल में यूक्रेन को एक मोहरा बना दिया है, जिसमें यूक्रेन के लोगों की हितों की कोई परवाह नहीं है।’’ उन्होंने विफल प्रस्ताव को ‘‘कुछ नहीं बल्कि यूक्रेन के इस शतरंज में एक और क्रूर, अमानवीय कदम’’ बताया।

संयुक्त राष्ट्र में चीन के राजदूत झांग जुन ने कहा कि सभी प्रयास कूटनीतिक समाधान के लिए होने चाहिए और कहा कि सुरक्षा परिषद को ‘‘आग में घी डालने के बजाय बेहद सावधानी से कदम उठाना चाहिए।’’ उन्होंने आगाह किया कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों से ‘‘शांतिपूर्ण समाधान का दरवाजा पूरी तरह बंद हो सकता है’’ और उन्होंने रूस के उन दावों को दोहराया कि पिछले कुछ वर्षों में नाटो के विस्तार से उसे धमकाया जा रहा है।

झांग ने कहा, ‘‘रूस की वैध सुरक्षा आकांक्षाओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए तथा उचित तरीके से उनसे निपटना चाहिए। यूक्रेन को पूर्वी और पश्चिम के बीच एक पुल बनना चाहिए न कि प्रमुख शक्तियों के बीच टकराव के चौकी।’’

भारत ने कहा कि मतभेदों को दूर करने के लिए बातचीत ही एकमात्र रास्ता है। साथ ही भारत ने ‘खेद’ जताते हुए कहा कि कूटनीति का रास्ता छोड़ दिया गया।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी एस तिरुमूर्ति ने मतदान पर भारत का पक्ष रखते हुए कहा,‘‘भारत, यूक्रेन के हालिया घटनाक्रम से बेहद विचलित है। हम अपील करते हैं कि सारे प्रयास हिंसा और शत्रुता को तत्काल रोकने की दिशा में होने चाहिए।’’

ब्रिटेन की राजदूत बारबरा वुडवार्ड ने आत्म रक्षा में कार्रवाई करने के रूस के दावे को ‘‘बेतुका’’ बताया। उन्होंने कहा, ‘‘रूस ने आत्म रक्षा में केवल एक काम किया है और वह है आज इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट करना।’’

गौरतलब है कि सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी होता है। महासभा का प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होता लेकिन वह दुनिया की राय को दिखाता है।

Russia
ukraine
veto
Russia-Ukraine crisis

Related Stories

बाइडेन ने यूक्रेन पर अपने नैरेटिव में किया बदलाव

डेनमार्क: प्रगतिशील ताकतों का आगामी यूरोपीय संघ के सैन्य गठबंधन से बाहर बने रहने पर जनमत संग्रह में ‘न’ के पक्ष में वोट का आह्वान

रूसी तेल आयात पर प्रतिबंध लगाने के समझौते पर पहुंचा यूरोपीय संघ

यूक्रेन: यूरोप द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाना इसलिए आसान नहीं है! 

पश्चिम बैन हटाए तो रूस वैश्विक खाद्य संकट कम करने में मदद करेगा: पुतिन

और फिर अचानक कोई साम्राज्य नहीं बचा था

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

90 दिनों के युद्ध के बाद का क्या हैं यूक्रेन के हालात

यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई खाद्य असुरक्षा से बढ़ रही वार्ता की ज़रूरत

खाड़ी में पुरानी रणनीतियों की ओर लौट रहा बाइडन प्रशासन


बाकी खबरें

  • बी. सिवरामन
    खाद्य मुद्रास्फीति संकट को और बढ़ाएगा रूस-यूक्रेन युद्ध
    04 Apr 2022
    सिर्फ़ भारत में ही नहीं, खाद्य मुद्रास्फीति अब वैश्विक मुद्दा है। यह बीजिंग रिव्यू के ताजा अंक की कवर स्टोरी है। संयोग से वह कुछ दिन पहले न्यूयॉर्क टाइम्स की भी एक प्रमुख कहानी बन गई।
  • राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: सांप्रदायिकता का विकास क्या विकास नहीं है!
    04 Apr 2022
    वो नेहरू-गांधियों वाला पुराना इंडिया था, जिसमें सांप्रदायिकता को तरक्की का और खासतौर पर आधुनिक उद्योग-धंधों की तरक्की का, दुश्मन माना जाता था। पर अब और नहीं। नये इंडिया में ऐसे अंधविश्वास नहीं चलते।
  • विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: किसानों के सामने ही ख़ाक हो गई उनकी मेहनत, उनकी फसलें, प्रशासन से नहीं मिल पाई पर्याप्त मदद
    04 Apr 2022
    "हमारी ज़िंदगी ही खेती है। जब खेती बर्बाद होती है तो हमारी समूची ज़िंदगी तबाह हो जाती है। सिर्फ़ एक ज़िंदगी नहीं, समूचा परिवार तबाह हो जाता है। पक चुकी गेहूं की फसल की मडाई की तैयारी चल रही थी। आग लगी…
  • भाषा
    इमरान खान के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव खारिज किए जाने पर सुनवाई करेगा उच्चतम न्यायालय
    04 Apr 2022
    पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने देश के प्रधानमंत्री इमरान खान की सिफारिश पर नेशनल असेंबली (एनए) को भंग कर दिया है। इससे कुछ ही देर पहले नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष कासिम सूरी ने प्रधानमंत्री के…
  • शिरीष खरे
    कोविड-19 टीकाकरण : एक साल बाद भी भ्रांतियां और भय क्यों?
    04 Apr 2022
    महाराष्ट्र के पिलखाना जैसे गांवों में टीकाकरण के तहत 'हर-घर दस्तक' के बावजूद गिने-चुने लोगों ने ही कोविड का टीका लगवाया। सवाल है कि कोविड रोधी टीकाकरण अभियान के एक साल बाद भी यह स्थिति क्यों?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License