NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
भारत
राजनीति
बीएचयू : नहीं थम रहा संस्कृत प्रोफेसर विवाद, लेकिन उम्मीद की किरण अभी बाकी है!
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में मुस्लिम प्रोफेसर की नियुक्ति को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। एक ओर जहां प्रोफेसर फिरोज खान के समर्थन में गुरुवार को विश्वविद्यालय के अन्य विभागों के छात्र आ गए तो दूसरी ओर विरोध में धरना दे रहे छात्रों के समर्थन में अब हिंदू धर्मगुरु भी उतर आए हैं।
सोनिया यादव
21 Nov 2019
BHU Protest

देश की सांस्कृतिक राजधानी और गंगा-जमुनी तहजीब की पहचान रखने वाला बनारस इन दिनों सुर्खियों में है। महामना मदन मोहन मालवीय की कर्म भूमि काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में बीते 5 नंवबर, 2019 को एक गैर हिंदू यानी मुस्लिम असिस्टेंट प्रोफेसर फिरोज खान की नियुक्ति हुई। जिसके बाद बीएचयू की दो तस्वीर उभर कर सामने आई हैं।

एक जिसमें संकाय के छात्रों ने गैर हिंदू की नियुक्ति का विरोध कर पठन-पाठन का कार्यक्रम ठप्प कर दिया। इसके विरोध में धरना दिया, कुलपति को ज्ञापन सौंपा और अब कोर्ट जाने की बात कर रहे हैं। तो वहीं दूसरी तस्वीर इसी अंधेरे में मिली रोशनी की है। जहां प्रोफेसर फिरोज खान के समर्थन में सैकड़ों छात्रों ने मार्च निकाला, प्रोफेसर का बीएचयू में स्वागत किया और संविधान की किताब को सर्वश्रेष्ठ बताया।

उन्नीसवीं सदी में मशहूर अमरीकी लेखक मार्क ट्वेन ने बनारस के बारे में कहा था कि ये प्राचीन से भी ज्यादा प्राचीन लगता है। हालांकि इस बदलते बनारस में बहुत कुछ बदला नज़र आता है। कभी भारतरत्न बिस्मिल्ला खान यहां रियाज किया करते थे, जिनकी शहनाई की धुन से आज भी आकाशवाणी के दिन की सभा प्रारंभ होती है।

बनारस ने ना सिर्फ उन्हें पहचान दी बल्कि उन्हें खुले दिल से अपनाया। आज उसी बनारस के बीएचयू में कुछ छात्रों को किसी गैर हिंदू से संस्कृत पढ़ाना नहीं रास नहीं आ रहा है। उनका कहना है कि फिरोज खान एक मुसलमान हैं और एक मुसलमान धर्म शास्त्र कैसे पढ़ा सकता है? संस्कृत, गीता और वेद कैसे पढ़ा सकता है?
2019_11image_16_51_252319879hh-ll.jpg
छात्रों का कहना है कि मुस्लिम प्रोफेसर की संकाय में नियुक्ति महामना मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित सनातन परंपरा के अधिनियम के खिलाफ है और इस षड्यंत्र के तहत हिंदु संस्कृति को आघात पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

इस संबंध में धरने पर बैठे संस्कृत संकाय के छात्र और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य चक्रपाणि ओझा ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, 'हम महामना जी के मूल्यों पर चलने के लिए कटिबद्ध हैं। इस विश्वविद्यालय के स्थापना के समय जो काशी विश्वविद्यालय अधिनियम बनाया है, ये नियुक्ति उसके विरुद्ध है। बीएचयू के शिलालेख पर भी लिखा है कि संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में गैर हिंदू ना ही अध्ययन कर सकता है और ना ही अध्यापन।'

इस संबंध में बीएचयू के पूर्व छात्र आनंद शुक्ल जो पंजाब विश्वविद्यालय के प्रोफेसर भी रह चुके हैं का कहना है कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है। यह एक्ट के उल्लंघन का मामला नहीं है, ये सिर्फ एकाधिकार खत्म करने का मामला है। जो लोग विरोध कर रहे हैं उन्हें लग रहा है कि इस क्षेत्र से उनका अधिकार छिन जाएगा। ये किसी हाल में लोकतांत्रिक नहीं है। आप किसी भी क्षेत्र में किसी को धर्म या जाति के आधार पर रोक नहीं सकते हैं।

बता दें कि अब इस मामले में अब हिंदू धर्मगुरु भी उतर आए हैं। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के प्रमुख शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरनास्थल पर पहुंचे और उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर जरूरत पड़ने वह संतों का आह्वान करेंगे।

उधर, विरोध कर रहे छात्रों ने कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में मुस्लिम प्रोफेसर की नियुक्ति को ‘अनुचित’ ठहराते हुए कहा कि धर्म विज्ञान संकाय में अनुभवात्मक विषयों का अध्ययन होता है।
75453420_2867609519950420_7816543065119653888_n.jpg
उन्होंने कहा, ‘जिसको हमारे धर्म का अनुभव ही नहीं है, वह पोथी पढ़कर क्या पढ़ायेगा। महामना ने साफ कहा था कि सनातन धर्म का ज्ञान वही दे सकता है जो सनातन धर्मांवलंबी हो। धर्म विज्ञान संकाय में शिलापट्ट भी लगा है कि हिन्दू ही वहां व्याख्यान दे सकता है। यह भाषा का विषय नहीं है, हमारे धर्म का विषय है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर जरूरत पड़ने पर वह संतों का आह्वान करेंगे।’

इस मामले में फिरोज खान का कहना है कि किसी धर्म के इंसान को कोई भी भाषा सीखने और सिखाने में क्या दिक्कत हो सकती है? मुझे कभी एहसास नहीं हुआ कि मैं किसी दूसरे धर्म से हूं लेकिन बनारस ने मुझे ये एहसास करवा दिया कि मैं मुस्लिम हू्ं। मैंने संस्कृत को इसलिए पढ़ा कि इस भाषा के साहित्य को समझना था।

उन्होंने आगे कहा कि भारत की प्रतिष्ठा के दो आधार हैं- एक संस्कृत और दूसरा संस्कृति। अगर आप भारत को समझना चाहते हैं तो बिना संस्कृत पढ़े पूरी तरह से नहीं समझ सकते हैं। चाहे उर्दू हो या संस्कृत उसे किसी पंथ या जाति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

बता दें कि इस संबंध में विश्वविद्यालय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि फिरोज खान की नियुक्ति में पूरी पारदर्शिता अपनाई गई है और विश्वविद्यालय ने नियमानुसार योग्यतम पाए गए उम्मीदवार का सर्वसम्मति से चयन किया है। इस नियुक्ति में किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है।

जस्टिस गिरधर मालवीय ने छात्रों के विरोध को बताया गलत

बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में प्रोफेसर फिरोज खान की नियुक्ति पर चल रहे विवाद के बीच चांसलर जस्टिस गिरधर मालवीय ने कहा, 'छात्रों ने जो मुद्दा उठाया है वो पूरी तरह से गलत है। अगर बीएचयू के संस्थापक आज जिंदा होते तो इस नियुक्ति का जरूर समर्थन करते।'

छात्रों के विरोध पर सवाल उठाते हुए जस्टिस मालवीय ने कहा कि योग्यता का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होने कहा, 'छात्र किस आधार पर फिरोज खान का विरोध कर रहे हैं यह समझ से परे है। पहली बात तो यह है कि फिरोज खान को कर्मकांड पढ़ाने के लिए नहीं बल्कि साहित्य पढ़ाने के लिए रखा गया है। दूसरा यह कि यदि कर्मकांड के लिए भी नियुक्ति हुई है तो छात्रों को विरोध करने के बजाय पढऩा चाहिए।'

firoz-jpg_710x400xt.jpg
अब अगर दूसरी तस्वीर के पहलू को देखें तो बुधवार, 20 नवंबर को अन्य विभागों के छात्रों ने फिरोज खान के समर्थन में ‘वी आर विथ यू फिरोज़ खान’, ‘संस्कृत किसी की जागीर नहीं’ जैसे पोस्टर्स के साथ मार्च निकाला।

बीएचयू के शोध छात्र विकास सिंह ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, 'इस देश में सबसे बड़ी किताब संविधान की है और वो किसी भी आधार पर किसी के साथ भेदभाव की इजाज़त नहीं देती। महामना के मूल्यों के नाम पर कुछ छात्र इस गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। महामना ने ऐसे समाज की कल्पना की जहां हर धर्म के लोग शिक्षा ग्रहण कर सकें।'

मामले का संज्ञान लेते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के निर्देश पर जिला कांग्रेस कमेटी की एक टीम ने फिरोज खान के समर्थन में कुलपति राकेश भटनागर से मुलाकात भी की। पूर्व विधायक अजय राय ने बताया कि कुलपति भटनागर ने बताया नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है।

वहीं, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि मुस्लिम समुदाय का व्यक्ति संस्कृत में स्कॉलर बना है तो ऐसे में बीजेपी और आरएसएस सबको इसका स्वागत करना चाहिए था, हिन्दू समाज के लिए गर्व की बात होनी चाहिए थी।

बता दें बीएचयू के कई पूर्व छात्रों ने इस नियुक्ति का समर्थन किया है। पेशे से पत्रकार उर्मिलेश कहते हैं, एक सेक्युलर राष्ट्र की यूनिवर्सिटी में धर्म और जाति को लेकर इस तरह का बर्ताव अलोकतांत्रिक है। अगर ये बात परंपरा में कहीं लिखी भी गई हो तो वह असंवैधानिक है और उसे लोकतांत्रिक भारत में नहीं माना-अपनाया जा सकता।

आकाशवाणी के पूर्व एडिशनल डायरेक्टर राजीव कुमार शुक्ल और पक्षकार अविनाश द्विवेदी भी इस नियुक्ति का समर्थन करते हैं। उनका कहना है कि देश में संविधान से बड़ा कुछ भी नहीं है और इसका हर हाल में सम्मान होना चाहिए। बीएचयू की एक अलग पहचान है, यहां हर धर्म और संस्कृति का सम्मान होता है। सभी को बराबरी का अवसर मिलता है।
77258586_971708289862370_7006144927490899968_n_0.jpg
कई लोगों का फिरोज खान के पक्ष में ये भी तर्क है कि वो बचपन से हिंदुओं की तरह रहे हैं। संस्कृत पढ़े हैं और उनके घर में संस्कृत का माहौल है इसलिए उनके साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। फिरोज के पिता मुन्ना मास्टर मंदिर में भजन गाते हैं इसलिए उन्हें ग़ैर-इस्लामिक समझा जाता है। हालांकि बीएचयू राजनीति विज्ञान के विद्यार्थी रहे पीयूष सिंह कहते हैं, 'ये आधार नहीं होना चाहिए किसी के समर्थन का, ये हमारी संस्कृति नहीं है। इस बीएचयू में सभी को बराबर समझा जाता है और इस बीएचयू पर हमें गर्व है।'

गौरतलब है कि छात्रों का ये धरना प्रदर्शन 7 नंवबर से जारी है। हालांकि इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इस नियुक्ति को लेकर एक स्पष्टीकरण भी जारी किया गया जिसमें साफ तौर पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना के उद्देश्यों का हवाला देते हुए यह कहा गया कि यह विश्वविद्यालय जाति, धर्म, लिंग और संप्रदाय आदि के भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्रनिर्माण हेतु सभी को अध्ययन व अध्यापन के समान अवसर देगा। लेकिन इसके बावजूद छात्र अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।

Banaras Hindu University
BHU protest
Dev Pujari
muslim teacher of sanskrit
Religion Politics
Professor Feroz Khan
Chief Minister Ashok Gehlot

Related Stories

बीएचयू: लाइब्रेरी के लिए छात्राओं का संघर्ष तेज़, ‘कर्फ्यू टाइमिंग’ हटाने की मांग

बीएचयू : सेंट्रल हिंदू स्कूल के दाख़िले में लॉटरी सिस्टम के ख़िलाफ़ छात्र, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी

बीएचयू: 21 घंटे खुलेगी साइबर लाइब्रेरी, छात्र आंदोलन की बड़ी लेकिन अधूरी जीत

त्रिपुरा हिंसा: फ़ैक्ट फाइंडिंग टीम के वकीलों पर भी UAPA, छात्रों, वकीलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं का त्रिपुरा भवन पर प्रदर्शन

बीएचयू: यौन हिंसा के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन, प्रशासन का असंवेदनशील रवैया!

बीएचयू: सोते हुए छात्रों पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई, थाना घेराव के बाद गिरफ़्तार छात्र हुए रिहा

सांप्रदायिक दंगों के ज़रिये किसान आंदोलन से ध्यान भटकाने की कोशिश

बतकही: अब तुमने सुप्रीम कोर्ट पर भी सवाल उठा दिए!

यूपी: हिरासत, गिरफ़्तारी, नज़रबंदी के बाद भी बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे

किसान आंदोलनः ब्राह्मण बनिया राष्ट्रवाद बनाम असली भारत


बाकी खबरें

  • बिहारः कोरोना टीके से मौत का आरोप लगाकर चिकित्सा पदाधिकारी को बनाया बंधक
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः कोरोना टीके से मौत का आरोप लगाकर चिकित्सा पदाधिकारी को बनाया बंधक
    15 Dec 2021
    कोरोना टीके से मौत का आरोप लगाते हुए कटिहार में वैक्सीनेशन महाअभियान के तहत टीकाकरण के लिए मनसाही के छोटी बथना गांव गए चिकित्सा पदाधिकारी को ग्रामीणों ने दो घंटे तक बंधक बनाए रखा।
  • kisan@378
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसान आंदोलन : पूरे 378 दिनों का ब्यौरा
    15 Dec 2021
    ‘378’... ये महज़ एक संख्या नहीं है, बल्कि वो दिन और राते हैं, जो हमारे देश के अन्नदाताओं ने दिल्ली की सड़कों पर गुज़ारी हैं, उसके बाद उन्हें एक ऐतिहासिक जीत मिली है।
  • Asha
    सरोजिनी बिष्ट
    एक बड़े आंदोलन की तैयारी में उत्तर प्रदेश की आशा बहनें, लखनऊ में हुआ हजारों का जुटान
    15 Dec 2021
    13 दिसंबर को "उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन" (सम्बद्ध एक्टू) के बैनर तले विभिन्न जिलों से आईं हजारों आशा बहनों ने लखनऊ के इको गार्डेन में हुंकार भरी।
  • Uttrakhand
    सत्यम कुमार
    उत्तराखंड: गढ़वाल मंडल विकास निगम को राज्य सरकार से मदद की आस
    15 Dec 2021
    “गढ़वाल मंडल विकास निगम का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड राज्य में पर्यटन की सम्भावनाएँ तलाशना, रोजगार के अवसर तलाशना और पलायन को रोकना है ना कि मुनाफा कमाना”
  • अमेरिका में नागरिक शिक्षा क़ानूनों से जुड़े सुधार को हम भारतीय कैसे देखें?
    शिरीष खरे
    अमेरिका में नागरिक शिक्षा क़ानूनों से जुड़े सुधार को हम भारतीय कैसे देखें?
    15 Dec 2021
    "यह सुनिश्चित करना अति महत्त्वपूर्ण है कि हम अपने बच्चों को पढ़ाएं कि वे कैसे ज़िम्मेदार नागरिक बन सकें।" अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य के गवर्नर रॉन डेसेंटिस ने पिछले दिनों वहां के एक मिडिल स्कूल में यह…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License