NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कटाक्ष:…और अब सब का प्रयास!
बिजय बनिया ने ‘सब का प्रयास’ का मॉडल तो अब पेश किया है, जब प्रधानमंत्री जी अमेरिका में हैं, विकास का अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करने।
राजेंद्र शर्मा
25 Sep 2021
Assam
वायरल तस्वीर। 

आप बिजय शंकर बनिया को तो जानते होंगे? कम से कम तस्वीर तो देखी होगी। असम के दरांग से आयी तस्वीर तो सुनते हैं कि वायरल भी हो चुकी है। वही तस्वीर जिसमें नंगे पांव और नंगे सिर, सिर्फ बनियान और लुंगी पहने, एक शख्स खेत की सी जमीन पर लेटा है, सीने पर गोली से हुए छेद से निकलते खून का निशान लिए। नहीं-नहीं, वह बिजय नहीं है। वह क्या मोदी जी के सब का प्रयास का मॉडल बनेगा! वह तो मामूली किसान है। इतना गरीब कि जब अपनी जमीन छिनने से बचाने के लिए, बंदूकों वाली पुलिस से भिडऩे के लिए चल पड़ा तो, उसे पुश्तैनी लाठी से महंगा कोई हथियार नहीं मिला। वह तो विकास में बाधक था, वह क्या विकास को सबका साथ, सबका विश्वास के बाद, अब सब का प्रयास तक ले जाने का रास्ता दिखाएगा।

जरा ध्यान से देखिए, हमारा हीरो बिजय शंकर बनिया भी उसी तस्वीर में है। नहीं पुलिस वालों की युद्ध की वर्दी में नहीं, आम लोगों की सादा वर्दी में बल्कि गले में कैमरा लटकाए और पीठ पर छोटा सा पिट्ठू  लटकाए, फोटो-पत्रकार की सी ड्रेस में। न-न, फोटो खींचते हुए नहीं बल्कि जमीन पर लाश बनकर पड़े, विकास-शत्रु को अपने बूटों से कुचलने के लिए दूर से छलांग लगाते और फिर लाश बने शख्स पर कसकर घूंसा जमाते हुए खुद तस्वीर में है।

और अगर कहीं आपने वीडियो देखा होगा तब तो आप किसी भी तरह से बिजय जी की तस्वीर को ही नहीं, उनके जोश को भी मिस कर ही नहीं सकते हैं। बंदे ने बाकायदा शादी की फोटोग्राफी की तरह रीप्ले कर के दिखाया है--वही छलांग, वही पांवों से कुचलना और वही पलटकर जोरदार घूंसा जमाना, एक नहीं दो-दो बार। होने को वहां वर्दीवाले भी थे। कुछ ने बिजय के आगे पीछे, उसी लाशनुमा चीज पर इक्का-दुक्का लाठियां जमायी भी। पर कहां लाश मानकर मरे-मरे हाथ से चलायी जाती लाठियां और कहां बिजय का जोश। बिना जोश का मॉडल भी क्या विकास को आगे ले जाएगा, लल्लू!

मोदी जी के विरोधियों ने पहले, सबका प्रयास के इस मॉडल को मिटाने के लिए, यह फेक न्यूज चलाने की कोशिश की कि यह विकास के लिए आम आदमी के जोश का नहीं, फोटो पत्रकार के जोश का मामला है। पर बेचारे फोटो पत्रकारों में इतना जोश झेलने की ताब कहां? मालिकान कितना ही विकास का रास्ता साफ करने के लिए तिकतिकाएं, एंकर लोग शब्दों से कितना ही खून-खराबा कराएं, पर मैदान में पत्रकारों के तो खून देखते ही हाथ-पांव फूल जाते हैं। उल्टे उन्होंने यह कहकर हाथ झाड़ लिए कि बंदा गर्दन में कैमरा लटकाए जरूर है, पर पुलिस का फोटोग्राफर है, जिसे अपने कारनामे दर्ज करने के लिए पुलिस साथ लेकर चलती है। लेकिन, यह अर्द्ध-सत्य है। शर्त लगा लीजिए, बंदा पुलिस वाला नहीं हो सकता।

पुलिस का भी हो तब भी, नौकरी करने वाले में इतना जोश कहां! जरूर बंदा दिहाड़ी का फोटोग्राफर होगा। पुलिस का हिस्सा कम और आम आदमी ज्यादा। विकास के लिए आम आदमी के जोश का मॉडल। सब का साथ, सब का विकास, सब का विश्वास वगैरह के बाद, अब सब का प्रयास का मॉडल! अब भारत को दुनिया में नंबर वन बनने से कोई नहीं रोक सकता है।

बिजय बनिया ने सब का प्रयास का मॉडल तो अब पेश किया है, जब प्रधानमंत्री जी अमेरिका में हैं, विकास का अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करने। इसका मतलब यह हर्गिज नहीं है कि इससे पहले, मोदी जी के विकास में सबका प्रयास का जोर लग ही नहीं रहा था। बेशक, सब का प्रयास शुरू तो काफी पहले ही हो गया था। जहां-जहां गाड़ी को डबल इंजन का पॉवर मिला था, वहां-वहां सब का प्रयास धड़ल्ले से चल रहा था। सच पूछिए तो शुरूआत तो मोदी जी के सिंगल इंजन के टैम में ही पुणे के टैकी से हो गयी थी। और जैसे-जैसे इंजन जुड़ते गए, सब का प्रयास बढ़ता गया। अखलाक, पहलू खान, गौरी लंकेश, कलबुर्गी, गोविंद पानसरे, जेएनयू, गोरक्षा, लव जेहाद, जबरन धर्मांतरण, आबादी जेहाद वगैरह, वगैरह, क्या अकेले सरकार कर सकती थी? डबल इंजन की सरकार भी नहीं। सब में लोगों साथ लगता है। और सब के लिए अलग-अलग तरीके से लोगों का साथ था भी। सिर्फ अपने लोगों का ही नहीं, दूसरे काफी लोगों का भी साथ था। और तो और बुलंदशहर के इंस्पेक्टर सुबोध सिंह वाले विकास में भी तो काफी लोगों का साथ था। लोगों का साथ नहीं होता तो मोदी-O.2 भला कैसे आती और वह भी पहले से ज्यादा वोट लेकर। सब क्या पुलवामा और ईवीएम की ही माया है, नागपुरी कमाल कुछ भी नहीं!

फिर भी, जब से डबल इंजन-2 की सरकार आयी है, तब से लोगों के साथ को नयी ऊंचाई मिल गयी है, एक नया ही आयाम मिल गया है। मोदी जी ने एलानिया कह दिया है, अब जो भी किया जाएगा, उसमें सब का प्रयास सुनिश्चित किया जाएगा। बनिया का मॉडल इसी फेज के लिए है। असम में डबल इंजन-2 की सरकार जो है। लेकिन, मोदी जी के राज में सिर्फ एक बनिया का मॉडल ही नहीं है। इतने विशाल देश में क्या सिर्फ एक मॉडल से काम चल सकता है! विविधता भी तो जरूरी है। सो हर रोज और भी मॉडल सामने आ रहे हैं, सब का प्रयास के।

बिजय की टक्कर का एक और एकदम नया मॉडल कर्नाटक में आया है। भगवा परिवार की ही एक दूर की शाखा ने एलान किया है कि जिस गुनाह के लिए उनके लोगों ने गांधी को नहीं छोड़ा, किसी ऐरे-गैरे को छोड़ेंगे क्या? यानी एलानिया गांधी को नहीं छोडऩे वालों का भी प्रयास लग रहा है। तीन साल के अबोध बच्चे के गलती से मंदिर में पांव रखने के लिए, उसके दलित पिता से कई हजार रुपये का जुर्माना उगाह लेने वालों का भी प्रयास लग रहा है। मठ की लड़ाई में अखाड़ा प्रमुखों को हत्या/आत्महत्या से स्वर्ग की यात्रा कराने वालों का भी प्रयास लग रहा है। तेल-वेल के चक्कर में जो बेहिसाब निचोड़े जा रहे हैं, उनका प्रयास भी। और कितना सब का प्रयास चाहिए, इस मुए विकास के लिए!

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोकलहर के संपादक हैं।)

sarcasm
Assam
Photographer jumping on protester
Hate Crime
Bijay Shankar Baniya
Viral Photographer

Related Stories

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

कटाक्ष: महंगाई, बेकारी भुलाओ, मस्जिद से मंदिर निकलवाओ! 

असम में बाढ़ का कहर जारी, नियति बनती आपदा की क्या है वजह?

ताजमहल किसे चाहिए— ऐ नफ़रत तू ज़िंदाबाद!

असम : विरोध के बीच हवाई अड्डे के निर्माण के लिए 3 मिलियन चाय के पौधे उखाड़ने का काम शुरू

कटाक्ष: एक निशान, अलग-अलग विधान, फिर भी नया इंडिया महान!

कटाक्ष : बुलडोज़र के डंके में बज रहा है भारत का डंका

ज़मानत मिलने के बाद विधायक जिग्नेश मेवानी एक अन्य मामले में फिर गिरफ़्तार

फ़ैज़, कबीर, मीरा, मुक्तिबोध, फ़िराक़ को कोर्स-निकाला!


बाकी खबरें

  • up elections
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी चुनाव: सपा द्वारा पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने का वादा मतदाताओं के बीच में असर कर रहा है
    02 Mar 2022
    2004 में, केंद्र की भाजपा सरकार ने सुनिश्चित पेंशन स्कीम को बंद कर दिया था और इसकी जगह पर अंशदायी पेंशन प्रणाली को लागू कर दिया था। यूपी ने 2005 में इस नई प्रणाली को अपनाया। इस नई पेंशन स्कीम (एनपीएस…
  • फिल्म लेखक और समीक्षक जयप्रकाश चौकसे का निधन
    भाषा
    फिल्म लेखक और समीक्षक जयप्रकाश चौकसे का निधन
    02 Mar 2022
    जयप्रकाश चौकसे ने ‘‘शायद’’ (1979), ‘‘कत्ल’’ (1986) और ‘‘बॉडीगार्ड’’ (2011) सरीखी हिन्दी फिल्मों की पटकथा तथा संवाद लिखे थे। चौकसे ने हिन्दी अखबार ‘‘दैनिक भास्कर’’ में लगातार 26 साल ‘‘परदे के पीछे’’ …
  • MAIN
    रवि शंकर दुबे
    यूपी की सियासत: मतदान से ठीक पहले पोस्टरों से गायब हुए योगी!, अकेले मुस्कुरा रहे हैं मोदी!!
    02 Mar 2022
    छठे चरण के मतदान से पहले भाजपा ने कई नये सवालों को जन्म दे दिया है, योगी का गढ़ माने जाने वाले गोरखपुर में लगे पोस्टरों से ही उनकी तस्वीर गायब कर दी गई, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी अकेले उन पोस्टरों में…
  • JSW protest
    दित्सा भट्टाचार्य
    ओडिशा: पुलिस की ‘बर्बरता’ के बावजूद जिंदल स्टील प्लांट के ख़िलाफ़ ग्रामीणों का प्रदर्शन जारी
    02 Mar 2022
    कार्यकर्ताओं के अनुसार यह संयंत्र वन अधिकार अधिनियम का उल्लंघन करता है और जगतसिंहपुर के ढिंकिया गांव के आदिवासियों को विस्थापित कर देगा।
  • CONGRESS
    अनिल जैन
    चुनाव नतीजों के बाद भाजपा के 'मास्टर स्ट्रोक’ से बचने की तैयारी में जुटी कांग्रेस
    02 Mar 2022
    पांच साल पहले मणिपुर और गोवा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बहुमत के नजदीक पहुंच कर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी, दोनों राज्यों में भाजपा को कांग्रेस के मुकाबले कम सीटें मिली थीं, लेकिन उसने अपने…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License