NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कटाक्ष: टूल किट न बनाइयो कोई!
गांठ में बांध लीजिए, मोदी जी के न्यू इंडिया का असली दुश्मन है--टूल किट। पाकिस्तान भी नहीं, चीन भी नहीं, यहां तक कि अपोजीशन भी नहीं, असली दुश्मन एक ही है--टूल किट।
राजेंद्र शर्मा
23 May 2021
कटाक्ष: टूल किट न बनाइयो कोई!
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार: गूगल

मिल गयी, मिल गयी, मिल गयी! भारत के विश्व गुरु बनने के रास्ते की सारी रुकावटों की रुकावट, सारी समस्याओं की जड़ मिल गयी। गांठ में बांध लीजिए, मोदी जी के न्यू इंडिया का असली दुश्मन है--टूल किट। पाकिस्तान भी नहीं, चीन भी नहीं, यहां तक कि अपोजीशन भी नहीं, असली दुश्मन एक ही है--टूल किट, टूल किट, टूल किट। मोदी जी ने किसानों के भले के लिए तीन-तीन कानून बनाए, फिर भी लाखों किसान राजधानी वाली दिल्ली पर चढ़ आए। पूछिए तो भला कि क्यों? टूल किट की कारस्तानी और क्या, अब तो सारी दुनिया को पता चल गया है। वह तो शाह साहब ने ग्रेटा थनबर्ग को बच्ची जानकर छोड़ दिया और सिडीशन के लिए गिरफ्तारी करने के लिए दिल्ली पुलिस को विदेश भेजने की मंजूरी नहीं दी, वर्ना बाकी बची दुनिया भी जान जाती कि टूल किट हो या कोई और, न्यू इंडिया से दुश्मनी महंगी पड़ेगी। और बच्ची के चक्कर में, वयस्क होकर भी दिशा रवि, बुजुर्ग स्टेन स्वामी वगैरह के मुकाबले में काफी सस्ते में ही छूट गयी।

खैर! देश में खबर सुनने-पढऩे वालों को इसका कुछ अंदाजा तो लग ही गया कि टूल किट कितनी खतरनाक चीज है।

और अब इस कोरोना के बहाने से मोदी जी की छवि बिगाडऩे वाला टूल किट। आक्सीजन की कमी से लेकर गंगा के शव वाहिनी बनने तक के लिए मोदी जी से ही सवाल करने वाला टूल किट। नेगेटिविटी के वजन से पोजिटिविटी को इस कदर दबाने वाला टूल किट कि भागवत जी को खुद जैक लगाना पड़ा। भारत की इज्जत पर दाग लगाने वाला टूल किट। और तो और छप्पन इंच की छाती वालों की आंखों में आंसू ला देने वाला और फिर भी आंसुओं को घडिय़ाली आंसू बताने वाला टूल किट! इस सबसे पहले, शाह साहब के सीएए कानून के विरोध के नाम पर, शाहीनबाग से लेकर ट्रम्प के सामने मोदी जी को नीचा दिखाने वाला टूल किट। और उससे भी पहले भीमा-कोरेगांव वाला टूल किट, जेएनयू वाला टूल किट, वगैरह-वगैरह।

टूल किट ही टूल किट चले हैं न्यू इंडिया के खिलाफ, शाह जी गिन तो लें। फिर भी पता नहीं किस टूल किट के चक्कर में ट्विटर वाले, लेटेस्ट टूल किट को ही फर्जी साबित करने पर तुले हैं। क्या कहना चाहते हैं ये परदेशी कि, मोदी जी की छवि को कोई बिगाड़ नहीं रहा है? उनकी छवि के साथ जो हो रहा है, खुद ब खुद हो रहा है; उनके अपने ही कम किए और ज्यादा अनकिए की वजह से। और श्री छप्पन इंच के आंसू किसी ने निकलवाए नहीं हैं, खुद ही निकल गए हैं, अपनी छवि की दुर्दशा देखकर। संबित पात्रा के पकड़े टूल किट को ही फर्जी कहना, जरूर किसी और बड़े इंटरनेशनल टूल किट का हिस्सा है।

नासमझ हैं वे लोग जो टूल किट को कम्यूटर पर बनाया गया मामूली, शाकाहारी सा डॉक्यूमेंट मानते हैं। भोले हैं वे लोग जो यह कहते हैं कि कम्यूटर पर किसी ने कोई दस्तावेज बना भी लिया, तो उससे क्या फर्क पड़ता है। कम्यूटर-कम्यूटर है, जमीन-जमीन। जी नहीं। वो जमाने लद गए जब कम्यूटर और जमीन इतने अलग होते थे। बल्कि जमीन ही होती थी और कम्यूटर होते ही नहीं थे। नेहरू जी वगैरह को इसी का तो एडवांटेज था। छवि बनना, बिगडऩा सब जमीन पर था। किसी टूल किट का कोई खतरा ही नहीं था। कोई टेंशन नहीं। मोदी जी की बारी आते-आते विरोधियों ने खेल के नियम ही बदल दिए। कड़ी मेहनत से खरबपतियों से लेकर मीडियापतियों तक को साधकर, विरोधियों की छवि धुंधलाने और अपनी छवि चमकाने के टूल किट से कुर्सी तक पहुंच भी गए, पर उसके बाद भी बेचारों को चैन कहां। हर रोज छवि के गड्ढे भरवाओ, हर रोज छवि पर नयी पालिश चढ़वाओ, हर रोज नयी-नयी जगह अपनी तस्वीर लगवाओ। इस सब में बेचारों को जमीन को देखने का टैम ही नहीं मिला। सो टूल किट दर टूल किट, खतरे ही खतरे। छवि बिगड़ती ही गयी ज्यों-ज्यों पालिश चढ़ाई उन्होंने!

और अब तो टूल किट से लडऩे की तस्वीर खिंचाकर पब्लिक का ध्यान बांटना भी मुहाल हो गया। घूम-घूमकर सारी दुनिया को बता रहे हैं कि टूल किट छवि खराब कर रहा है, टूल किट विश्व गुरु को बदनाम कर रहा है, लेकिन लोग हैं कि मानने को तैयार ही नहीं हैं। उल्टे टूल किट को ही फर्जी बता रहे हैं। मोदी जी ने वाइरस के बहाने से पहले ही इशारा कर दिया था कि यह टूल किट बहुरूपिया भी है और अदृश्य भी। बाद में उसकी धूर्तता की ओर भी इशारा किया। पर लोगों को टूल किट दिखाई ही नहीं दे रहा, उल्टे छवि के गड्ढे भरने का फर्जीवाड़ा समझ रहे हैं। पर सच पूछिए तो लोगों का भी ज्यादा कसूर नहीं है। धूर्त तक तो ठीक है, पर जो टूल किट बहुरूपिया और अदृश्य दोनों है, उसे लोग देखें भी तो कैसे? और अगर टूल किट दिखाई ही नहीं देगा, तो लोगों को जमीन पर फैली बीमारी और मौतों की नेगेटिविटी ही तो दिखाई देगी।

हम तो समझते हैं कि टूल किट के पीछे भागना, उससे लडऩा ही बेकार है। इससे बेहतर है कि सरकार कानून ही बना दे कि कोई आलोचना नहीं करेगा; न मोदी जी की, न उनकी सरकार की और न सिस्टम की। आलोचना करना एंटीनेशनल माना जाएगा, उससे देश की/ प्रदेश की/ जिले की/ शहर-गांव की बदनामी जो होती है। बेशक, डेमोक्रेसी भी रहेगी और खूब रहेगी और सत्ता पक्ष ही नहीं विपक्ष भी रहेगा। जब साहेब का विरुदगान हो तो, विपक्ष को तटस्थ रहने का अधिकार भी होगा। डेमोक्रेसी की डेमोक्रेसी रहेगी और देश से लेकर साहेब तक किसी की छवि खराब भी नहीं होगी। टूल किट हो न हो, कोई फर्क नहीं पड़ेगा। बस, 'मेरा साहब नंगा' कोई नहीं कहेगा।

(इस व्यंग्य आलेख के लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोकलहर के संपादक हैं।)

sarcasm
Toolkit
Narendra modi
modi sarkar
COVID-19
BJP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है


बाकी खबरें

  • RAHANE PUJARA
    भाषा
    रणजी ट्राफी: रहाणे और पुजारा पर होंगी निगाहें
    23 Feb 2022
    अपने फॉर्म से जूझ रहे आंजिक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा अब रणजी ट्रॉफी से वापसी की कोशिश करेंगे। 24 फरवरी को होने वाले मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों पर खास नज़र होगी।
  • ibobi singh
    भाषा
    मणिपुर के लोग वर्तमान सरकार से ‘ऊब चुके हैं’ उन्हें बदलाव चाहिए: इबोबी सिंह
    23 Feb 2022
    पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता ओकराम इबोबी सिंह ने कहा "मणिपुर के लोग भाजपा से ऊब चुके हैं। वह खुलकर कह नहीं पा रहे। भाजपा झूठ बोल रही है और खोखले दावे कर रही है। उन्होंने अपने किसी भी वादे को…
  • तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव: बीजेपी के गढ़ पीलीभीत में इस बार असल मुद्दों पर हो रहा चुनाव, जाति-संप्रदाय पर नहीं बंटी जनता
    23 Feb 2022
    पीलीभीत (उत्तर प्रदेश): जैसा वायदा किया गया था, क्या किसानों की आय दोगुनी हो चुकी है? क्या लखीमपुर खीरी में नरसंहार के लिए किसानों को न्याय मिल गया है?
  • vaccine
    ऋचा चिंतन
    शीर्ष कोविड-19 वैक्सीन निर्माताओं ने गरीब देशों को निराश किया
    23 Feb 2022
    फ़ाइज़र, मोडेरना एवं जेएंडजे जैसे फार्मा दिग्गजों ने न तो विश्व स्वास्थ्य संगठन के कोवाक्स में ही अपना कोई योगदान दिया और न ही गरीब देशों को बड़ी संख्या में खुराक ही मुहैया कराई है।
  • vvpat
    एम.जी. देवसहायम
    चुनाव आयोग को चुनावी निष्ठा की रक्षा के लिहाज़ से सभी वीवीपीएटी पर्चियों की गणना ज़रूरी
    23 Feb 2022
    हर एक ईवीएम में एक वीवीपैट होता है, लेकिन मतों की गिनती और मतों को सत्यापित करने के लिए काग़ज़ की इन पर्चियों की गिनती नहीं की जाती है। यही वजह है कि लोग चुनावी नतीजों पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License