NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
कटाक्ष: विश्व गुरु बनना नहीं आसां...
अब हरियाणा के कृषि मंत्री का ही किस्सा ले लो। बेचारे ने एकदम टॉप क्लास के फलसफे वाला ज्ञान दिया। जो किसान अस्सी दिन से दिल्ली के बार्डरों पर बैठे-बैठे मर गए हैं, उनके मरने में कैसी शहादत और कौन शहीद? लेकिन विरोधियों ने शोर मचा दिया...
राजेंद्र शर्मा
17 Feb 2021
Jp dalal
हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल। जिन्होंने अपने बयान पर काफी विरोध के बाद खेद जताया है। फोटो साभार: the chopal

हमारे मोदी जी और उनके संगियों ने तो भारत को कब का विश्व गुरु बना दिया होता। पर उनका विरोध करने वाले बनाने ही नहीं दे रहे हैं। ये बेचारे दिन में अठारह-अठारह घंटे मेहनत कर के विश्व गुरु के पदक वाला कोई काम करते हैं, पर दावा करने से पहले ही विरोधी कुछ न कुछ कर के भांजी मार देते हैं।

अब हरियाणा के कृषि मंत्री का ही किस्सा ले लो। बेचारे ने एकदम टॉप क्लास के फलसफे वाला ज्ञान दिया। जो किसान अस्सी दिन से दिल्ली के बार्डरों पर बैठे-बैठे मर गए हैं, उनके मरने में कैसी शहादत और कौन शहीद? उन्हें तो मरना ही था! घर में रहते तो क्या नहीं मरते!

आंकड़े के हिसाब से दो-ढाई महीने में, दो-ढ़ाई लाख में से, दो-ढाई सौ का मरना तो एकदम नॉर्मल है! और नार्मल मरने का नाते-रिश्तेदार, मुहल्ले-पड़ौस वाले या संगी-साथी अफसोस करें तो करें, संस्कारी पार्टी की सरकार में बैठने वाले अफसोस नहीं कर सकते। हां! दुर्घटना वगैरह में मरने की बात होती तो शायद मोदी जी अफसोस कर भी देते, पर ये तो जानबूझकर कर मरे थे; जिद पकडक़र सर्दी में बैठे जो थे।

जानबूझकर मरने वालों के लिए काहे का अफसोस? उल्टे जो बच गए हैं उन्हें शुक्र मनाना चाहिए कि आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए सरकार ने उन पर मुकदमा नहीं ठोक दिया! वर्ना मोदी जी और उनके संगी सरकार में रहते हैं तो कानून के मामले में एकदम जीरो टॉलरेंस में यकीन करते हैं। कोई कॉमेडियन मज़ाक सोचे उससे पहले ही पकड़कर जेल में बंद कर देते हैं, न मज़ाक सोचेगा और न किसी की भावनाओं पर आघात लगेगा। अब कोई कॉमेडियन जेल में डालने के जरा से मजाक से ही कॉमेडी करना छोड़ दे तो क्या इसका भी ठीकरा मोदी जी के ही सिर पर फोड़ा जाएगा।

ख़ैर! कॉमेडियनों को छोड़ें, वैसे भी विश्व गुरु बनना चाहने वाले देश को अलग से कॉमेडियनों की क्या जरूरत? दर्शन पर लॉटते हैं और दर्शन का निचोड़ यह है कि बार्डर पर सर्दी में बैठा हो या घर पर रजाई में दुबका हो, किसान के लेख में मरना लिखा है, वह तो मरेगा ही! सर्दी से नहीं मरेगा, तो पुलिस की मार से मरेगा, उससे भी नहीं तो कर्ज के बोझ से मरेगा वह भी नहीं तो भूख से मरेगा, पर किसान मरेगा जरूर।

गीता का यह ज्ञान दलाल साहब ने सारी दुनिया के लिए एकदम कैप्सूल में डालकर दे दिया था। पर विरोधियों को मोदी एंड कंपनी का भारत को फिर से विश्व गुरु बनाना कहां मंजूर। किसानों की शहादत के अपमान का शोर मचा दिया। विश्व गुरु के पदक पर दावे की तो छोड़ो, बेचारे दलाल साहब दार्शनिक ज्ञान देने के लिए माफियां मांगते फिर रहे हैं।

पर ये विरोधी तो खुद मोदी जी को भी भारत के लिए विश्व गुरु का पदक जीतकर नहीं लाने दे रहे हैं। मोदी जी ने कैसे विश्व मानवता को एक नयी अवधारणा दी, एक नया विचार दिया! कोरोना को हराने के बाद, मोदी जी ने सारी दुनिया को एक नये और कोरोना से सौ गुने खतरनाक वाइरस की पहचान करायी--आंदोलनजीवी, परजीवी। बेशक, इसमें भी उच्च दर्शन है। विशेष रूप से आंदोलनकारी और आंदोलनजीवी के बहुत ही बारीक भेद में। पर इसमें कोरा दर्शन ही नहीं है। इसमें गहन न्यायशास्त्र भी है, क्योंकि आखिरकार तो यह एक जुर्म का मामला है।

और जो चीज छूत की बीमारी की तरह फैलती है, उसमें जीवविज्ञान से लेकर चिकित्सा विज्ञान तक तो खैर होंगे ही। सब को मिक्सी में डालकर अच्छी तरह घोंटकर मोदी जी ने सारी दुनिया के शासनों की सारी समस्याओं की रामबाण औषधि तैयार की थी! मगर क्या हुआ? विरोधियों ने आंदोलनविरोधी का हल्ला मचाया सो मचाया, किसानविरोधी का भी हल्ला मचा दिया। मोदी जी को, जी हां मोदी जी को, दो दिन में ही सफाई देनी पड़ी कि वह आंदोलन को तो बहुत ही पवित्र मानते हैं। इतना पवित्र कि कोई उसे छूकर अपवित्र कर दे, यह उन्हें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं है। उसकी पवित्रता की रक्षा के लिए ही तो मोदी जी, आंदोलन का सहारा लेकर जीने वालों को जेल में डालना चाहते हैं। ऐसी पवित्र आत्मा पर भगतसिंह, गांधी जी, सुभाष बोस वगैरह का अपमान करने का आरोप लगाना और वह भी सिर्फ इसलिए कि उन्होंने भी बार-बार आंदोलन किए थे, आंदोलन ही किए थे, घनघोर पाप है। ये सब पवित्र आंदोलनकारी थे, न कि नापाक आंदोलनजीवी।

आंदोलन के चक्कर में मारे जाने वालों को, मोदीजी भी आंदोलनजीवी कैसे कह सकते हैं? सिंपल है, जो खुद मर जाए, वह जीवी कैसे हो सकता है! और परजीवी होने के लिए बंदे को जीवी तो होना ही चाहिए। फिर भी मोदी जी सफाई देते ही रह गए, पर दुनिया भर के न जाने कैसे-कैसे इंडियाविरोधजीवी जमा हो गए शोर मचाने के लिए। फिर कहां का विश्व गुरु और कहां का पदक!

सच्ची बात यह है कि अब तो ख़बरिया वेबसाइट न्यूज़क्लिक पर प्रवर्तन निदेशालय का छापा ही हमें विश्व रिकार्ड बनाकर विश्व गुरु बनाए तो बनाए। छोटी सी ख़बरिया वेबसाइट पर 113-114 घंटे का छापा, हमें तो लगता है कि विश्व रिकार्ड कहीं नहीं गया है! वर्ना इसके बाद तो किसान आंदोलन के समर्थन के लिए टूल किट केस से लेकर, यूपी में सुंदर पिचाई के खिलाफ केस तक ही हमें, विश्व गुरु का पदक दिलाएं तो दिलाएं। किसी ने सच कहा है, विश्व गुरु बनना नहीं आसां...!

(इस व्यंग्य आलेख के लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोकलहर के संपादक हैं।)

Jp dalal
BJP
Haryana
farmers protest
Agriculture

Related Stories

ख़बरों के आगे-पीछे: केजरीवाल के ‘गुजरात प्लान’ से लेकर रिजर्व बैंक तक

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

इस आग को किसी भी तरह बुझाना ही होगा - क्योंकि, यह सब की बात है दो चार दस की बात नहीं

ख़बरों के आगे-पीछे: भाजपा में नंबर दो की लड़ाई से लेकर दिल्ली के सरकारी बंगलों की राजनीति

बहस: क्यों यादवों को मुसलमानों के पक्ष में डटा रहना चाहिए!

ख़बरों के आगे-पीछे: गुजरात में मोदी के चुनावी प्रचार से लेकर यूपी में मायावती-भाजपा की दोस्ती पर..

कश्मीर फाइल्स: आपके आंसू सेलेक्टिव हैं संघी महाराज, कभी बहते हैं, और अक्सर नहीं बहते

उत्तर प्रदेशः हम क्यों नहीं देख पा रहे हैं जनमत के अपहरण को!

जनादेश-2022: रोटी बनाम स्वाधीनता या रोटी और स्वाधीनता

त्वरित टिप्पणी: जनता के मुद्दों पर राजनीति करना और जीतना होता जा रहा है मुश्किल


बाकी खबरें

  •  Punjab security lapse
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाब में पीएम की "सुरक्षा चूक" पर पूरी पड़ताल!
    06 Jan 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे में आज अभिसार शर्मा चर्चा कर रहे प्रधानमंत्री के पंजाब दौरे की। साथ ही वे नज़र डाल रहे हैं कि किस तरह मीडिया द्वारा किसानों को टारगेट किया जा रहा है
  • fact check
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेक : संबित ने जर्जर स्कूलों को सपा सरकार का बताया, स्कूल योगी सरकार के निकले
    06 Jan 2022
    एक बार फिर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्विटर पर फ़ेक न्यूज़ के ज़रिये विपक्ष पर निशाना साधने की कोशिश की है।
  • jnu
    रवि कौशल
    जेएनयू हिंसा के दो साल : नाराज़ पीड़ितों को अब भी है न्याय का इंतज़ार 
    06 Jan 2022
    ऐसा लगता है कि दिल्ली पुलिस की जांच भटक चुकी है। अब तक दोषियों की पहचान तक नहीं की जा सकी है।
  • punjab security
    शंभूनाथ शुक्ल
    'सुरक्षा चूक' की आड़ में राजनीतिक स्टंट?
    06 Jan 2022
    प्रधानमंत्री को एयरपोर्ट में पंजाब के अधिकारियों को दिए बयान से बचना चाहिए था। और जो कुछ करना था, वह सीधे गृह मंत्रालय के आला अधिकारी करते तो भविष्य में ऐसी किसी भी चूक से प्रशासन सतर्क रहते। तथा…
  • election
    सौरभ शर्मा
    यूपी: युवाओं को रोजगार मुहैय्या कराने के राज्य सरकार के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते हैं!
    06 Jan 2022
    लगभग 43 उम्मीदवारो को उत्तर प्रदेश में पिछले साल विभिन्न चिकित्सा विभागों द्वारा विभिन्न कोरोना लहरों के दौरान में रोजगार पर रखा गया था। बाद में इन्हें काम से मुक्त कर दिया गया। उन्होंने इस कदम के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License