NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
जूनियर टेनी: होनहार बिरवान के होत चीकने पात
कटाक्ष: अब कोई कुछ भी कहता रहे, बेटे ने पिता की इच्छा तो पूरी कर दी। पिता ने दो मिनट में ठीक करने की इच्छा जतायी थी, सो पुत्र ने उससे भी कम टैम में पूरी कर दी। मजाल है जो थार को बंदों के ऊपर से निकलने में दो मिनट भी लगे हों तो!
राजेंद्र शर्मा
09 Oct 2021
ashish mishra
अपने वकील और समर्थकों के साथ पुलिस के सामने पेशी के लिए जाता आशीष मिश्रा। स्क्रीन शॉट 

हम तो पहले ही कहते थे, मोदी जी का विरोध वही लोग करते हैं जो भारतीय संस्कृति के खिलाफ हैं। नहीं, नहीं, हम यह नहीं कह रहे हैं कि मोदी जी का विरोध करने वाले रामलला के विरोधी नहीं हैं। वे राम, कृष्ण, शिव आदि, आदि सब के विरोधी हैं। धर्मविरोधी हैं सो तो हैं ही, एंटीनेशनल यानी भारतविरोधी भी हैं। सब हैं; पर सबसे पहले, भारतीय संस्कृति विरोधी हैं। लखीमपुर खीरी की घटना इसका एक और सबूत है कि भारतीय संस्कृति विरोधी ही, मोदी विरोधी हैं। इनको भारतीय संस्कृति से जरा सा भी लगाव होता तो बेचारे आशीष मिश्र टेनी के पीछे यूं हाथ धोकर नहीं पड़े होते। पहले पुलिस एफआईआर में नाम नहीं लिख रही थी, तो शोर कर रहे थे कि एफआइआर में नाम लिखो। एफआईआर में नाम लिख गया, तो इसका शोर कि पूछताछ तक क्यों नहीं की। पूछताछ के लिए सम्मन जारी किए, तो इसका हंगामा कि गिरफ्तार क्यों नहीं कर रहे? हमसे लिखा लीजिए कि खुदा-न-खास्ता योगी की पुलिस ने बेचारे को गिरफ्तार कर भी लिया, तो ये मुकद्दमा तो छोड़ो, फांसी की सजा की मांग करते मिलेंगे! पर सजा, किसलिए? क्या सिर्फ इसलिए कि आशीष मिश्रा के पिता, अजय मिश्र टेनी सीनियर को उनकी योग्यताओं को देखकर मोदी जी ने अपने मंत्रिमंडल में जगह दी है? मोदी जी के विरोध में ये लोग इतने अंधे हो जाएंगे कि एक बेटे को, उसकी पितृभक्ति के लिए सजा दिलाने पर तुल जाएंगे! कम से कम इसका ही ख्याल कर लेते थे कि यह श्रवण कुमार की पूजा करने वाला देश है।

अगर उस जमाने में श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता की इच्छा पूरी करने के लिए, उन्हें बहंगी में बैठाकर और खुद एक तरह से वाहन बनकर, उन्हें तीर्थ-तीर्थ घुमा सकता था, तो क्या इस जमाने में जबकि महेंद्रा की थार भी आ चुकी है, जूनियर टेनी, काले झंडे दिखाने वाले किसानों को ठीक करने की, सीनियर टेनी की जरा सी इच्छा पूरी करने में भी हिचक सकता था? अब कोई कुछ भी कहता रहे, बेटे ने पिता की इच्छा तो पूरी कर दी। पिता ने दो मिनट में ठीक करने की इच्छा जतायी थी, सो पुत्र ने उससे भी कम टैम में पूरी कर दी। मजाल है जो थार को बंदों के ऊपर से निकलने में दो मिनट भी लगे हों तो! और पिता ने तो सिर्फ लखीमपुर खीरी छुड़वाने की इच्छा प्रकट की थी, बेटे ने पूरे आठ से तो दुनिया ही छुड़वा दी; दूसरे कई का चलना-फिरना, उठना-बैठना छूट जाएगा, सो ऊपर से। खैर! असली मुद्दा यह नहीं है कि किस का क्या छूट गया? मुद्दा यह है कि एक बेटे ने अपने पिता की इच्छा, उसकी जितनी इच्छा थी उससे भी बढक़र पूरी की है। इस कलियुग में ऐसे सपूत मिलते ही कहां हैं? अब हमें तय करना है कि हम ऐसी पितृभक्ति का सम्मान करेंगे या उसकी सजा देंगे? आप तय कर लीजिए कि भारतीय संस्कृति की रक्षा करेंगे या उसका तिरस्कार करेंगे! हमें पक्का भरोसा है कि मोदी जी-योगी जी अपनी डबल इंजन की सरकार के होते हुए, नये श्रवणकुमार के साथ अन्याय नहीं होने देंगे?

और भारतीय संस्कृति में श्रवणकुमार का दर्जा बहुत ऊंचा रखे जाने का मतलब यह हर्गिज नहीं है कि भारतीय संस्कृति सिर्फ पुत्रों की पितृभक्ति को ही महत्व देती है। पितृभक्ति को एक्स्ट्रा महत्व इसलिए दिया गया है कि यह सीखने वाली चीज है। वर्ना हमारी संस्कृति में पुत्र-प्रेम तो इतना कूट-कूटकर भरा हुआ है कि किसी को सीखने-सिखाने की जरूरत ही नहीं होती है। पुत्र प्रेम खुद ही पैदा हो जाता है, यहां तक कि उसके लिए पुत्र पैदा होने तक की अनिवार्यता नहीं होती है। छोटे-मोटे पात्रों की तो गिनती ही क्या करना, जब महाभारत हो तो, रामायण हो तो, हमारे तो सारे ही ग्रंथों के पीछे पुत्र-प्रेम की कथाएं हैं। फर्क इतना ही है कि रामायण के केंद्र में माता के पुत्र-प्रेम की कहानी है, जिसके सामने पिता का पुत्र प्रेम भी हल्का पड़ जाता है। फिर भला टेनी सीनियर पुत्र प्रेम के मामले में निराश क्यों करने लगे और वह भी तब जबकि पुत्र ने उनकी ही इच्छा पूरी की है। सो उनके पुत्र प्रेम का ही प्रताप है कि ‘ठोक दो’ फेम के योगी जी की पुलिस को भी, जूनियर टेनी से पहली मुलाकात करने में ही पूरे छ: दिन लग गए! सोचने की बात है कि योगी जी की पुलिस अगर पुत्रप्रेम की भारतीय संस्कृति का सम्मान नहीं करेगी तो क्या पाकिस्तान की संस्कृति का सम्मान करेगी!

जब बात भारतीय संस्कृति के सम्मान की आ गयी, तब मोदी जी और शाह जी भी कहां पीछे रहने वाले हैं। बिना एक शब्द बोले भी साफ कर दिया--पुत्र प्रेम कोई गुनाह नहीं है। सीनियर टेनी का इस्तीफा नहीं लेंगे, न एफआईआर में नाम आने के लिए और न पुत्र पर आरोपों की जांच की निष्पक्षता के लिए। न पिता को पुत्र प्रेम के लिए दंडित करेंगे और न पुत्र को पितृभक्ति के लिए दंडित होने देंगे। आखिरकार, भारतीय संस्कृति की रक्षा की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी तो उन्हीं पर है। वैसे भी भारतीय संस्कृति में राजा के लिए पिता का आदर्श रखा गया है। मोदी जी ब्रह्मचारी हुए तो क्या हुआ, अपने दरबारियों की पिता की तरह रक्षा करने से पीछे हटने वाले नहीं हैं। अगर जूनियर मंत्री होकर सीनियर टेनी, जूनियर टेनी को बचाने के लिए सब दांव पर लगा सकते हैं, तो क्या प्रधानमंत्री होकर मोदी जी, अपने जूनियर मंत्री को बचाने के लिए, थोड़ी सी बदनामी भी मोल नहीं ले सकते हैं! रही किसानों की बात तो वे तो बगावत पर आमादा हैं और बागी प्रजा की राजा से रक्षा करने की जरूरत होती है, न कि उसे राजा से रक्षा करने की उम्मीद करनी चाहिए।

तो क्या अगले विधानसभा चुनाव में टेनी जूनियर की टिकट पक्की समझें? आखिर, योग्य पिता के योग्य पुत्र हैं। होनहार पुत्रों के कंधों पर चढ़ेगा इंडिया, तभी तो थार पर सवार होकर आगे बढ़ेगा इंडिया!                                                                                    

(‘कटाक्ष’ व्यंग्य स्तंभ के लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोकलहर के संपादक हैं।)

sarcasm
Lakhimpur massacre
Lakhimpur Kheri
Ashish Mishra
BJP
Modi government

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक स्पोर्ट्स
    भारतीय फ़ुटबॉल टीम बनाम आईएसएल : कोच इगोर स्टीमेक को है नेशनल कैम्प में खिलाड़ियों की मौजूदगी की चिंता
    20 Oct 2021
    हो सकता है कि भारतीय फ़ुटबॉल टीम एएफ़सी एशियन कप क्वालीफ़ायर का मैच अगले साल फ़रवरी में खेलेगी, इसी दौरान इंडियन सुपर लीग भी चल रहे होगी- ऐसे में इगोर स्टीमेक को उम्मीद है कि घरेलू प्रतियोगिता के हितधारक…
  • सबाह गुरमत
    ना शौचालय, ना सुरक्षा: स्वतंत्र क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं से कंपनियों के कोरे वायदे
    20 Oct 2021
    भारत में गिग इकोनॉमी (छोटी अर्थव्यवस्था) में काम करने वाले कामगारों को आने वाली दिक्कतों पर कुछ समय से काम किया जा रहा है, लेकिन महिला कर्मचारियों पर उतना ध्यान नहीं दिया गया है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    सुप्रीम कोर्ट में लखीमपुर हत्याकांड की सुनवाई, कोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार
    20 Oct 2021
    सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना ने कहा कि हम कल रात एक बजे तक स्टेटस रिपोर्ट का इंतजार करते रहे लेकिन हमें रिपोर्ट अभी मिली है। उन्होंने अपने पुराने आदेश का जिक्र करते हुए कहा कि हमने पिछली…
  • Chamoli
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड: बारिश ने तोड़े पिछले सारे रिकॉर्ड, जगह-जगह भूस्खलन से मुश्किल हालात, आई 2013 आपदा की याद
    20 Oct 2021
    बारिश-बाढ़-भूस्खलन से घिरे उत्तराखंड में जो हो रहा है, यही जलवायु परिवर्तन है, आपदा के बाद हम सिर्फ प्रतिक्रिया में कदम उठाते हैं। लेकिन हमें शार्ट टर्म, मिडिल टर्म और लॉन्ग टर्म के लिहाज से तैयारी…
  • लखीमपुर कांड: मंत्री पर एक्शन क्यों नहीं मोदी जी ?
    न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
    लखीमपुर कांड: मंत्री पर एक्शन क्यों नहीं मोदी जी ?
    20 Oct 2021
    बोल के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा कैबिनेट मंत्री अजय मिश्रा की बर्खास्तगी पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठा रहे हैं.
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License