NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
व्यंग्य
भारत
राजनीति
कटाक्ष: नये इंडिया का नया गणतंत्र ‘दिवस’!
नेताजी का किया-धरा चाहे सब मिट्टी में मिलाएंगे, पर नेताजी की 25 फुट ऊंची मूर्ति तो मोदी जी ही लगाएंगे और वह भी परेड के रास्ते पर। इस गणतंत्र दिवस की तस्वीरें एक नयी कहानी सुनाएंगी-नये इंडिया के नये रिपब्लिक डे की नयी परेड देखते, नये नेताजी! विरोधी अब भी पुरानी अमर जवान ज्योति पर ही अटके हुए हैं।
राजेंद्र शर्मा
22 Jan 2022
cartoon

विपक्ष वालों की भी हद्द है। अब तक तो सरकारी उद्यमों के मामले में ही सरकार के कदमों के खिलाफ झूठा-सच्चा प्रचार करते थे। सरकार अपने ही उद्यमों में जरा सा हाथ भी लगाए तो बेच दिया, निजीकरण कर दिया का शोर मचा देते थे। सरकार विनिवेश करे तो भी निजीकरण का शोर, सरकार निजी निवेश लाए तो भी निजीकरण का शोर, सरकार मोनिटाइजेशन करे तब भी निजीकरण शोर। और तो और, सरकार अपने ही बैंकों वगैरह का आपस में मर्जर यानी विलय करे, तब भी निजीकरण! पर इस बार तो पट्ठों  ने राष्ट्र के गौरव के साथ भी वैसा ही घपला कर दिया। खबर तो थी अमर जवान ज्योति के मर्जर उर्फ विलय की और  पट्ठों  ने बुझा दिया, बुझा दिया का झूठा शोर मचा दिया।

अब बेचारी सरकार सफाइयां देती फिर रही है कि अमर जवान ज्योति को न बुझाया गया है, न हटाया गया है, उसे तो जरा सी दूर के सैनिक स्मारक की ज्योति में मर्ज किया गया है यानी मिलाया गया है, जैसे गंगा, सागर में मिलती है।

जो लोग इसकी दलीलें दे रहे हैं कि राष्ट्रीय सैन्य स्मारक से अलग, अमर जवान ज्योति को भी जलते रहने देना चाहिए था, वे दरअस्ल खुले बाजार वाले आर्थिक सुधारों के ही विरोधी हैं।

अमर जवान ज्योति के मर्जर का विरोध कर के वे, सरकारी उद्यमों के मर्जर का ही विरोध कर रहे हैं। वजह साफ है। अगर सरकार का अमर जवान ज्योति का बगल में सैनिक स्मारक में विलय करना सही है, तो सरकारी बैंकों का विलय गलत कैसे हो सकता है? एक विलय सही, तो दूसरा गलत कैसे? वैसे मोदी जी की सरकार ने भी तो ठीक इसीलिए तो विलय किया है। अमर जवान ज्योति का विलय होगा, तो सरकारी बैंकों के विलय का बल्कि सीधी बिक्री का भी रास्ता खुल जाएगा। सरकार सैन्य गौरव की निशानी का विलय कर सकती है, तो अपने बैंकों-वैंकों का विलय क्यों नहीं कर सकती है? बैंकों की  राष्ट्रीय मिल्कियत का गौरव क्या, राष्ट्र के सैन्य गौरव से बढक़र है? सत्तर साल ऐसा हुआ तो हुआ, पर अब और नहीं होगा; आज सैन्य गौरव का अगर मर्जर होगा, तो कल राष्ट्रीय मिल्कियत की, मर्जर से भी आगे बढक़र, बाकायदा बिक्री होगी!

और अमर जवान ज्योति के जलने-बुझने में राष्ट्रीय गौरव का जलना-बुझना देखने वालों को, मोदी जी की बात नहीं भूलनी चाहिए। गुजरात में एक सर्किट हाउस का ऑनलाइन उद्घाटन करते हुए, मोदी जी ने इस मामले को सेना के शहीदों के सम्मान और राष्ट्रीय गौरव से जोडऩे वालों को, मुंहतोड़ जवाब दिया है। बात भी सही है। उनसे पहले वालों ने, एक परिवार के नाम पर जो बनाया सो बनाया, दूसरा कुछ भी बनवाया ही कहां था? बनवाए होंगे बांध-वांध, कारखाने-वारखाने, अस्पताल-कालेज, प्रयोगशाला-संस्थान, वगैरह, पर क्या कोई राष्ट्रीय सैनिक स्मारक भी बनवाया था? मोदी जी ने बनवाया है और वह भी ऐन परेड के रास्ते पर। उन्हें कोई सेना के शहीदों के सम्मान करना नहीं सिखाए।

अमर जवान ज्योति को तो पिछले साल ही गणतंत्र दिवस की परेड से बाहर कर दिया गया था। इस साल तो उसका सम्मान बहाल किया जाएगा और सैनिक स्मारक की ज्योति के हिस्से के तौर पर, अमर जवान ज्योति पर भी शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देकर, परेड का कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। प्लीज अब कोई यह मत कहिएगा कि अमर जवान ज्योति भी तो शहीद सैनिकों का ही स्मारक था। वह तो सैनिकों के नाम पर, इंदिरा गांधी का ही स्मारक था। वर्ना 1971 के सैनिकों के लिए ही स्मारक क्यों? उसके पहले और बाद के शहीद सैनिकों का स्मारक क्यों नहीं? मोदी जी ही हैं जिन्होंने पहले और आगे के सभी शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक स्मारक बनवाया है। और अब 1971 के सैनिकों के स्मारक को भी उसमें मिलाया जा रहा है और बैंकों की तरह विलय के जरिए, एक मुकम्मल और मजबूत सैनिक स्मारक बनाया जा रहा है। इस राष्ट्रीय काम में बाधा डालने की कोशिश क्यों की जा रही है?

1971 के युद्ध के शहीदों के स्मारक की ओट में, सभी सैनिक शहीदों के स्मारक को छुपाने की कोशिश क्यों की जा रही है? नये भारत के, नये गणतंत्र दिवस की, नयी परेड, नये शहीद सैनिक स्मारक से शुरू करने के रास्ते में, पुरानी अमर जवान ज्योति को अड़ाने की कोशिश क्यों की जा रही है?

और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की कुर्बानी को कैसे भूल गए? मोदी जी ने इंडिया गेट पर जार्ज पंचम वाली खाली छतरी, सुभाष बाबू को एलॉट करने का एलान किया है। और यह पहले वालों का आश्वासन नहीं है कि पूरा होने का मामला बरसों लटका रह जाए। मोदी जी का एलॉटमेंट है, इधर ट्विटर पर एनाउंसमेंट और उधर जमीन पर कब्जा। गणतंत्र दिवस की परेड से पहले-पहले सुभाष बाबू होलोग्राम बनकर बैठ भी चुके होंगे। मोदी जी के लिए उद्घाटन का एक मौका और!

नेताजी का किया-धरा चाहे सब मिट्टी में मिलाएंगे, पर नेताजी की 25 फुट ऊंची मूर्ति तो मोदी जी ही लगाएंगे और वह भी परेड के रास्ते पर। इस गणतंत्र दिवस की तस्वीरें एक नयी कहानी सुनाएंगी-नये इंडिया के नये रिपब्लिक डे की नयी परेड देखते, नये नेताजी! विरोधी अब भी पुरानी अमर जवान ज्योति पर ही अटके हुए हैं और मोदी जी ने नये भारत में सब नया कर दिया है, नेताजी के सान्निध्य में रिपब्लिक डे परेड तक।
और आखिर में एक जरूरी बात और। नया रिपब्लिक अधिकार-मुक्त होगा। अधिकारों के चक्कर में 75 साल बर्बाद हो गए, अब और नहीं। कम से कम 25 साल अधिकारों की बात करने पर प्रतिबंध रहेगा। अधिकार मांगे सो एंटीनेशनल और अधिकार की बात करे, सो टुकड़े-टुकड़े गैंग। मोदी जी के मन की बात के अलावा अब सिर्फ कर्तव्यों की बात होगी।

(इस व्यंग्य आलेख के लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोकलहर के संपादक हैं।)

sarcasm
Satire
Political satire
republic day
Amar Jawan Jyoti

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

तिरछी नज़र: 2047 की बात है

कटाक्ष: महंगाई, बेकारी भुलाओ, मस्जिद से मंदिर निकलवाओ! 

ताजमहल किसे चाहिए— ऐ नफ़रत तू ज़िंदाबाद!

तिरछी नज़र: ...ओह माई गॉड!

कटाक्ष: एक निशान, अलग-अलग विधान, फिर भी नया इंडिया महान!

तिरछी नज़र: हम सहनशील तो हैं, पर इतने भी नहीं


बाकी खबरें

  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूक्रेन संकट, भारतीय छात्र और मानवीय सहायता
    01 Mar 2022
    यूक्रेन में संकट बढ़ता जा रहा है। यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने मंगलवार को छात्रों सहित सभी भारतीयों को उपलब्ध ट्रेन या किसी अन्य माध्यम से आज तत्काल कीव छोड़ने का सुझाव दिया है।
  • Satellites
    संदीपन तालुकदार
    चीन के री-डिज़ाइंड Long March-8 ने एक बार में 22 सेटेलाइट को ऑर्बिट में भेजा
    01 Mar 2022
    Long March-8 रॉकेट चीन की लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी की अकादमी में बना दूसरा रॉकेट है।
  • Earth's climate system
    उपेंद्र स्वामी
    दुनिया भर की: अब न चेते तो कोई मोहलत नहीं मिलेगी
    01 Mar 2022
    आईपीसीसी ने अपनी रिपोर्ट में साफ़ कहा है कि जलवायु परिवर्तन से आर्थिक दरार गहरी होगी, असमानता में इजाफ़ा होगा और ग़रीबी बढ़ेगी। खाने-पीने की चीजों के दाम बेतहाशा बढ़ेंगे और श्रम व व्यापार का बाजार…
  • nehru modi
    डॉ. राजू पाण्डेय
    प्रधानमंत्रियों के चुनावी भाषण: नेहरू से लेकर मोदी तक, किस स्तर पर आई भारतीय राजनीति 
    01 Mar 2022
    चुनाव प्रचार के 'न्यू लो' को पाताल की गहराइयों तक पहुंचता देखकर व्यथित था। अचानक जिज्ञासा हुई कि जाना जाए स्वतंत्रता बाद के हमारे पहले आम चुनावों में प्रचार का स्तर कैसा था और तबके प्रधानमंत्री अपनी…
  • रवि शंकर दुबे
    पूर्वांचल की जंग: यहां बाहुबलियों के इर्द-गिर्द ही घूमती है सत्ता!
    01 Mar 2022
    यूपी में सत्ता किसी के पास भी हो लेकिन तूती तो बाहुबलियों की ही बोलती है, और पूर्वांचल के ज्यादातर क्षेत्रों में उनका और उनके रिश्तेदारों का ही दबदबा रहता है। फिर चाहे वो जेल में हों या फिर जेल के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License