NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिन महंगे ही अच्छे!
कटाक्ष : दाम चढ़े हुए ही अच्छे हैं। पर पब्लिक भी तो इस पॉजिटिविटी अनलिमिटेड को पहचाने। 
राजेंद्र शर्मा
19 Jun 2021
cartoon

लगता है कि विरोधी तो विरोधी, भक्त भी भागवत जी की बात को पूरी तरह समझ नहीं पाए। बेशक, भागवत जी ने जब पॉजिटिविटी अनलिमिटेड का सूत्र दिया था, तब कोविड महामारी ने कुछ ज्यादा ही तबाही मचा रखी थी। कोई आक्सीजन की कमी से दम तोड़ रहा था, तो दवा की कमी से और कोई वेंटीलेटर की कमी से। कोई अस्पतालों के गलियारों में, तो कोई फुटपाथों पर। हद तो यह थी कि जो मरने वालों की गिनती में नहीं थे, वो मरने के बाद भी कभी नदियों में तैरकर तो कभी तट पर रेत में लेटे-लेटे, अपने छूट जाने की याद दिला रहे थे और सरकारी गिनती को अंगूठा दिखा रहे थे। और विदेशी तो विदेशी, देसी टीवी-अखबार-इंटरनैट भी, वही सब दिखा रहे थे। यानी देश में टू मच डैमोक्रेसी तो पहले से ही थी, अब टू मच नैगेटिविटी भी हो रखी थी। तभी भागवत जी ने मरने वालों की मुक्ति के सेलिब्रेशन की लाइन दी थी और यूं ही, टू मच नैगेटिविटी को, अनलिमिटेड पॉजिटिविटी से हराने की डिमांड की थी। 

लेकिन, इसका मतलब यह थोड़े ही है कि पॉजिटिविटी का उनका धर्मोपदेश सिर्फ कोविड महामारी की नेगेटिविटी के लिए था। नागपुर के धर्मोपदेशों की उम्र इतनी कम थोड़े ही होती है। जब तक मोदी जी का राज है, कम से कम तब तक के लिए तो पॉजिटिविटी की डिमांड रहनी ही रहनी है। फिर भागवत जी ने पॉजिटिविटी अनलिमिटेड की सीख दी थी, यानी हर चीज में, जी हां पब्लिक में नेगेटिविटी पैदा करने वाली हर चीज में, पॉजिटिविटी देखने और दिखाने की सीख। पता नहीं क्यों फिर भी भक्तगण, ईंधन में जलाने से लेकर, रसोई में पकाने तक के, तेल के दाम के ताबड़तोड़ बढऩे से बौखलाए हुए हैं। 

तेलों के और जरूरत की दूसरी चीजों के दाम की रिकार्ड ऊंचाई में, वे भी सिर्फ महंगाई देख रहे हैं! कम से कम भक्तों को तो रिकार्ड बनना देखना चाहिए और न सिर्फ खुद देखना चाहिए बल्कि बाकी पब्लिक को दिखाना भी चाहिए।

खैर! बाकी की तो हम नहीं कहते, पर मोदी जी के मंत्रिमंडल ने भागवत जी को पूरी तरह निराश नहीं किया है। खासतौर पर तेल वाले मंत्रियों ने। खाने के तेल वाले मंत्री जी ने तो खाने के तेल के दो सौ रुपए से ऊपर निकल जाने की शिकायत करने वालों को बाकायदा चुनौती दे दी। दो सौ रुपए से ऊपर का शुद्ध तेल खाकर सौ बरस जीना है या सौ-सवा सौ का  मिलावटी तेल खाकर मरना! ये हुई न पॉजिटिविटी वाली बात। 

खाने के तेल का दाम सरकार इसीलिए बढऩे दे रही है बल्कि कहना चाहिए कि बढ़वा रही है, आखिर मोदी जी की मर्जी के बिना तो न्यू इंडिया में पत्ता भी नहीं खडक़ता है, जिससे पब्लिक को खाने को शुद्ध तेल मिले। पब्लिक शुद्ध तेल खाएगी, तभी तो न्यू इंडिया की कुपोषण की रैंकिंग  नीचे और पोषण की रैंकिंग  ऊपर जाएगी। सत्तर साल में जो नहीं हुआ, अब होगा बल्कि हो भी रहा है। 

खाने के तेल शुद्ध के दो सौ रुपया पार करने से बाकायदा शुरूआत हो गयी है। अब तक राज करने वालों का ध्यान सिर्फ दाम पर रहा, शुद्धता पर नहीं। नतीजा यह हुआ कि दाम तो रुका रहा, पर मिलावट बढ़ती गयी। पर अब और नहीं। 

मोदी जी ने एक तीर से सारे निशानों को साध लिया। व्यापारी भाइयों से साफ कह दिया कि दाम को छोड़ दो, मिलावट को बांध दो। दाम छूटने से व्यापारी भाई भी खुश और मिलावट के बंधने से पब्लिक भी खुश। 

और तो और स्वास्थ्य बीमा वाले भी खुश। महंगा मानकर लोग तेल थोड़ा कम ही खाएंगे, तब भी इलाज के खर्चे के दावे तो नीचे ही जाएंगे। 

बस किसान अपना देख लें। पिछली सरकारों ने बहुत कर लिया, किसानों का तुष्टीकरण अब और नहीं। सात महीने बार्डर पर बैठे हो गए और सात महीने बैठे रहें, तब भी नहीं। ज्यादा तिलहन उगाएंगे, तो उनकी पैदावार के दाम तो नीचे ही जाएंगे।

ऐसे में ईंधन में जलाने वाले तेल के मंत्री पीछे क्यों रहते? उन्होंने पेेट्रोल को सेंचुरी पार कराने को सरकार का देशभक्तिपूर्ण कर्तव्य साबित कर दिया, वह भी सिर्फ भारत माता के जयकारे से नहीं, बल्कि इकॉनमी के सॉलिड तर्क के सहारे से। समझाए, देश कोरोना के संकट से जूझ रहा है। संकट के चक्कर में सरकार की कमाई घट गयी है और खर्चा रोकते-रोकते भी, कुछ न कुछ तो बढ़ ही गया है। ऐसे में देशभक्त सरकार क्या करे? खर्चा कहां से करे? अरब-खरबपतियों से वसूली कर नहीं सकते। नाराज हो गए, तो सब समेट के बाहर चले जाएंगे या स्विस बैंकों में और पैसा जमा करा आएंगे। चुनाव के लिए चंदे के टैम पर किचकिच करेंगे से ऊपर से। बाकी सब की इन्कम ही घट गयी है, तो इन्कम टैक्स की वसूली कैसे बढ़ जाएगी। फिर बचा कौन? 

मुश्किल के वक्त में तो पब्लिक ही देश के काम आएगी। पब्लिक सौ रुपए से पार का पेट्रोल-डीजल और बाकी सब पहले से महंगा खरीदेगी और इतने चुपचाप सरकार का खजाना भरती जाएगी कि खजाना भरने के बाद भी, टैक्स के दायरे से बाहर कहलाएगी। और अगर, सैकड़ा पार के पैट्रोल-डीजल के लिए देश की गाड़ी खींचने की देशभक्ति की पॉजिटिविटी भी काफी नहीं हो, तो इसमें इतना और जोड़ लिया जाए विश्व के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री का महल हो या उसके खास हवाई जहाज हों या न्यू इंडिया का डैमोक्रेसी का नया स्मारक हो, सब कुछ तेल की सैकड़ा पार की कमाई ही बनवाएगी। और जो कहीं, दाम के चक्कर में जलाने के तेल की कुछ बचत हो गयी, तो सेंतमेंत में पर्यावरण की रक्षा और हो जाएगी।

दाम चढ़े हुए ही अच्छे हैं। पर पब्लिक भी तो इस पॉजिटिविटी अनलिमिटेड को पहचाने। 

इस व्यंग्य आलेख के लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोकलहर के संपादक हैं। 

sarcasm
Inflation
Rising inflation
Petrol & diesel price
Modi government
Narendra modi
BJP
RSS
Mohan Bhagwat

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट


बाकी खबरें

  • Mothers and Fathers March
    पीपल्स डिस्पैच
    तख़्तापलट का विरोध करने वाले सूडानी युवाओं के साथ मज़बूती से खड़ा है "मदर्स एंड फ़ादर्स मार्च"
    28 Feb 2022
    पूरे सूडान से बुज़ुर्ग लोगों ने सैन्य शासन का विरोध करने वाले युवाओं के समर्थन में सड़कों पर जुलूस निकाले। इस बीच प्रतिरोधक समितियां जल्द ही देश में एक संयुक्त राजनीतिक दृष्टिकोण का ऐलान करने वाली हैं।
  • गौरव गुलमोहर
    यूपी चुनाव: क्या भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं सिटिंग विधायक?
    28 Feb 2022
    'यदि भाजपा यूपी में कम अंतर से चुनाव हारती है तो उसमें एक प्रमुख कारण काम न करने वाले सिटिंग विधायकों का टिकट न काटना होगा।'
  • manipur
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मणिपुर में पहले चरण का चुनाव, 5 ज़िलों की 38 सीटों के लिए 67 फ़ीसदी से ज़्यादा मतदान
    28 Feb 2022
    मणिपुर विधानसभा के लिए आज पहले चरण का मतदान संपन्न हो गया। मतदान का समय केवल शाम 4 बजे तक ही था। अपराह्न तीन बजे तक औसतन 67.53 फ़ीसदी मतदान हुआ। अंतिम आंकड़ों का इंतज़ार है।
  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : फिर ज़ोर पकड़ने लगी है ‘स्थानीयता नीति’ बनाने की मांग : भाजपा ने किया विरोध
    28 Feb 2022
    हेमंत सोरेन सरकार को राज्य में होने वाली सरकारी नियुक्तियों के लिए घोषित विसंगतिपूर्ण नियोजन नीति को छात्रों-युवाओं के विरोध के बाद वापस लेना पड़ा है। लेकिन मामला यहीं थम नहीं रहा है।
  • Sergey Lavrov
    भाषा
    यूक्रेन की सेना के हथियार डालने के बाद रूस ‘किसी भी क्षण’ बातचीत के लिए तैयार: लावरोव
    28 Feb 2022
    लावरोव ने यह भी कहा कि रूस के सैन्य अभियान का उद्देश्य यूक्रेन का ‘‘विसैन्यीकरण और नाजी विचारधारा से’’ मुक्त कराना है और कोई भी उस पर कब्जा नहीं करने वाला है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License