NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
गांधी तूने ये क्या किया : ‘वीर’ को कायर कर दिया
“गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका में बैठे-बैठे ही ताड़ लिया था कि उनके राष्ट्रपिता के आसन के लिए अगर किसी से खतरा हो सकता था, तो वीर सावरकर से ही हो सकता था। अगले ने सावरकर की वीरता में ही खोट डलवा दिया और नये इंडिया में भी  राष्ट्रपिता  का अपना आसन सुरक्षित करवा लिया।”
राजेंद्र शर्मा
16 Oct 2021
Savarkar and Gandhi
फोटो साभार : स्वराज

क्या हुआ कि गांधी जी अभी भी  राष्ट्रपिता हैं। जो सत्तर साल में नहीं हुआ, वही सब कर-कर के मोदी जी नया इंडिया बना रहे हैं, फिर भी पुराने भारत के उधारी के  राष्ट्रपिता से ही काम चला रहे हैं। और सिर्फ काम ही नहीं चला रहे हैं, बाकायदा राष्ट्रपिता मानकर दिखा रहे हैं। वर्ना कम से कम दो-दो दिन तो नहीं घेरे रहने देते। बाकी सब के लिए एक-एक दिन है, वह भी मुश्किल से। सरदार पटेल तक का एक ही दिन। पर गांधी जी अब भी दो-दो दिन घेरे हुए हैं, जन्म दिन भी और मरण दिन भी। यानी साल में दो-दो बार, मोदी जी तक सुबह-सुबह याद करते हैं और ट्वीट वगैरह होते से हैं ऊपर से। और हां, नोटों पर भी अभी तक तस्वीर बनकर जमे बैठे हैं। नोटों के साथ तस्वीर भी गायब हो जाने की उम्मीदें भी झूठी निकली हैं। इंडिया है कि नया होकर भी डिजिटल होकर देने को राजी नहीं है। 

खैर! किस्सा कोताह यह कि मोदी जी के नये इंडिया ने भी गांधी जी को वह सब दिया है, जो कृतज्ञ राष्ट्र किसी राष्ट्रपिता कहलाने वाले को दे सकता है, एक उसकी बड़-बड़ पर ध्यान देने के सिवा। पर क्या गांधी जी ने नये इंडिया का राष्ट्रपिता कहलाने लायक कुछ किया है? उल्टे उन्होंने तो वीर सावरकर के साथ ऐसा किया है कि मोदी जी संकोच के मारे चाहे कहें नहीं, पर दिल से तो बापू को कभी माफ नहीं कर पाएंगे!

बताइए, गांधी जी को सावरकर से माफीनामा लिखवाने की क्या जरूरत थी? बेचारे की वीरता पर खामखां झगड़ा खड़ा कर दिया। वह तो हिंदुत्ववादी परिवार है, जो डटकर खड़ा है, अगले की वीरता का बचाव करने में। झूठ से तो हो झूठ से, शासन के डंडे से हो तो डंडे से और गाली से हो तो गाली से, अपने बीर को ‘वीर’ साबित करने पर अडिग है। और तो और गृहमंत्री ने तो एलान कर दिया है कि जैसे 130 करोड़ देशवासियों ने मोदी को राजा चुना है, वैसे ही 130 करोड़ ने सावरकर को वीर डिक्लेअर कर दिया है। इसके बाद जो सावरकर की वीरता पर सवाल उठाएगा, एंटीनेशनल माना जाएगा और सेडीशन केस में सीधे जेल जाएगा। इसके बाद ही वीरता पर विवाद कुछ ठंडा पड़ा है, पर इसके बाद भी बंद नहीं हुआ है, सिर्फ कुछ ठंडा पड़ा है। वर्ना गांधी जी का बस चलता तो, हिंदुत्व परिवार के राष्ट्रवाद के पास देश की सत्ता आने के बाद भी, सिर झुकाने को और फूल चढ़ाने को खास अपनी एक तस्वीर तक नहीं होती। बेचारों को हमेशा उधारी की तस्वीरों से ही काम चलाना पड़ता और म्यूट कर के पूजा करनी पड़ती। मुंह खोलने का मौका पाते ही न जाने कौन सी मूर्ति क्या बोल दे?

हमें पता है कि गांधी जी के पैरोकार, सावरकर की वीरता पर झगड़ा कराने में गांधी का कोई हाथ होने से ही साफ इंकार करेंगे। कई लोग तो तथ्यों का तूमार खड़ा कर के उसके पीछे गांधी की शरारत को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। कह रहे हैं कि सावरकर 1911 में अंडमान जेल गए, उसके छ: महीने में ही पहला माफीनामा भेज दिया, दूसरा दो साल बाद, 1913 में, पर गांधी तो उसके भी दो साल बाद दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस आए थे। फिर गांधी ने कहां से सावरकर को माफी मांगकर जान छुड़ाने की सलाह दे दी? गांधी चाहते भी तो, कैसे सावरकर को कोई सलाह दे सकते थे? वैसे गांधी सावरकर को ऐसी सलाह देते भी क्यों? खुद ग्यारह बार जेल गए और उन्होंने तो कभी माफीनामा नहीं दिया, फिर सावरकर से माफीनामा क्यों लिखवाते? और वह भी एकाध नहीं, पूरे छ:-छ: माफीनामे। भटका हुआ बच्चा बनकर, पितातुल्य अंगरेजी राज से माफीनामे। हुजूर, माई-बाप जो कहें सो करने और सिर्फ वही करने के माफीनामे! लेकिन, ये सब बेकार तथ्यों के तूमार हैं, जो एंटीनेशनल लोग सच को छुपाने के लिए खड़े करते आए हैं। वर्ना व्हाट्सएप के जमाने में अब किसी से छुपा नहीं है कि गांधी जी जैसा काइयां वकील, अपने मुवक्किलों को कहां-कहां से और कैसे-कैसे सलाह दे सकता था। नये तथ्य, जो देश के रक्षामंत्री के पास पहुंचे हैं और राष्ट्र की सुरक्षा के हित में जिन्हें गोपनीय बनाए रखना जरूरी है, शर्तिया यह दिखाते हैं कि गांधी जी की सलाह के बाद ही सावरकर ने माफीनामे लिखे थे। देश के रक्षामंत्री के वचन से बढक़र, दूसरा कोई साक्ष्य क्या होगा! वैसे भी तार से लेकर टेलीफोन तक तो उस जमाने में आ ही चुके थे।

रक्षा मंत्री को प्राप्त हुए नये साक्ष्यों के बाद, अब यह बहस ही बेमानी हो गयी है कि क्या गांधी ने सावरकर से माफीनामे लिखवाए थे? बहस अगर होनी है तो अब इस पर होनी चाहिए कि गांधी जी ने सावरकर को माफी मांगने की सलाह क्यों दी! पहली नजर में किसी को लग सकता है कि अंडमान जेल की तकलीफों से बचाने के लिए और राष्ट्रीय आंदोलन में सावरकर की ऊर्जा लगाने के लिए, गांधी जी ने माफी मांगकर जेल से छूटने की सलाह दी होगी। लेकिन, इस पर कोई गांधी जी को ऊपर-ऊपर से जानने वाला ही विश्वास कर सकता है। आखिर, यह किसी को नहीं भूलना चाहिए कि गांधी जी बनिया थे। और दूर की सोचना और दूर की मार करना, बनिए के खून में होता है। कौन सोच सकता था कि अंगरेजी राज पर यहां-वहां बम-पिस्तौल चलाने से गहरी चोट, अहिंसक सत्याग्रह से होगी? गांधी जी ने सोचा और कर के दिखा दिया। तभी तो  राष्ट्रपिता बने बैठे हैं। गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका में बैठे-बैठे ही ताड़ लिया था कि उनके  राष्ट्रपिता  के आसन के लिए अगर किसी से खतरा हो सकता था, तो वीर सावरकर से ही हो सकता था। अगले ने सावरकर की वीरता में ही खोट डलवा दिया और नये इंडिया में भी  राष्ट्रपिता  का अपना आसन सुरक्षित करवा लिया।

रही-बची कसर सावरकर के उतावले चेले, नाथूराम ने पूरी कर दी गांधी पर तीन गोलियां दाग कर। हे राम कर के गांधी राष्ट्रपिता बन बैठे और सावरकर, बूढ़े-फकीर को मरवाने वाले कायर। नये इंडिया के संभावित राष्ट्रपिता की हत्या की इस साजिश के लिए अगर मोदी जी, गांधी जी को दिल से माफ नहीं कर पा रहे हैं, तो क्या गलत है! वैसे भी, 2 अक्टूबर को सुबह-सुबह राजघाट पर गए तो थे। दिल से माफ क्या जबर्दस्ती कराएंगे!

sarcasm
Mahatama Gandhi
Savarkar
BJP
RSS
Nationalism

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • बिहार : सातवें चरण की बहाली शुरू करने की मांग करते हुए अभ्यर्थियों ने सिर मुंडन करवाया
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार : सातवें चरण की बहाली शुरू करने की मांग करते हुए अभ्यर्थियों ने सिर मुंडन करवाया
    11 May 2022
    धरना स्थल पर राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए अभ्यर्थियों ने सातवें चरण की बहाली शुरू करने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने हवन किए और सिर मुंडवा कर विरोध जताया।
  • PROTEST
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र
    11 May 2022
    अजय सिंह की कविता अपने तौर पर एक चेतावनी है। साफ़ चेतावनी। जिसे बुलंद आवाज़ में पढ़ा और समझा जाना चाहिए।
  • climate
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    लगातार गर्म होते ग्रह में, हथियारों पर पैसा ख़र्च किया जा रहा है: 18वाँ न्यूज़लेटर  (2022)
    11 May 2022
    हथियारों के लिए ख़र्च किए जाने वाले पैसे की कोई सीमा नहीं है, लेकिन दुनिया के सामने उपस्थित जलवायु आपदा को टालने के लिए ख़ैरात भी नहीं है।
  • रवि शंकर दुबे, मुकुंद झा
    दिल्ली: ''बुलडोज़र राजनीति'' के ख़िलाफ़ सड़क पर उतरे वाम दल और नागरिक समाज
    11 May 2022
    अतिक्रमण के नाम पर ग़रीबों के घऱ पर चलाए जा रहे बुलडोज़र के खिलाफ वामदलों के साथ तमाम संगठनों ने दिल्ली के उपराज्यपाल आवास के बाहर ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया।
  • jgp
    शारिब अहमद खान
    बेलगाम बुलडोज़र: इस तरह के विध्वंस पर अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय क़ानून क्या कहता है?
    11 May 2022
    सरकार द्वारा चलाई जा रही विध्वंस नीति ने न केवल अंतरराष्ट्रीय कानूनों को दरकिनार किया बल्कि राष्ट्रीय कानूनों का भी उपहास उड़ाया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License