NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
कटाक्ष: इंडिया वालो शर्म करो, मोदी जी का सम्मान करो!
कहां तो भूटान तक मोदी जी के आगे शीष नवा रहा है। और कहां तुम हो जो भारत के नागरिक होकर भी बेचारे मोदी जी को शहर-शहर भटका रहे हो और वह भी अपने दो-कौड़ी के वोट के लिए।
राजेंद्र शर्मा
18 Dec 2021
modi
बनारस में मोदी (फाइल) 

यूपी वालो और सिर्फ यूपी वालो ही क्यों उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर वालो भी बल्कि अक्खा इंडिया वालो, कुछ तो शर्म करो। कहां तो भूटान तक मोदी जी के आगे शीष नवा रहा है। देश छोटा सा सही, पर मोदी जी के चरणों में अपना सबसे बड़ा सम्मान बिछा रहा है और वह भी नागरिक सम्मान। और कहां तुम हो जो भारत के नागरिक होकर भी बेचारे मोदी जी को शहर-शहर भटका रहे हो और वह भी अपने दो-कौड़ी के वोट के लिए।

और भटका रहे हो में रत्तीभर अतिशयोक्ति नहीं है। बंदा हवाई जहाज से ही आए-जाए, तब भी भटकना कुछ और नहीं हो जाता है। बंदे को दिसंबर की सर्दी में पूरी ड्रेस में गंगा में डुबकी लगानी पड़ रही है। बंदे को नये बने मंदिर के गलियारे में कैटवॉक कर के दिखानी पड़ रही है। बंदे को कारीगरों वगैरह पर फूलों की पंखुडिय़ां बरसानी पड़ रहीं हैं, उनके बीच दरी पर बैठकर दिखाना पड़ रहा है। मंदिर तक में टेलीप्रॉम्पटर से पढ़-पढक़र बातें बनानी पड़ रही हैं। बंदे को रात में नाव में सैर कर के दिखानी पड़ रही है। रात को सोते शहर की खोज-खबर लेनी पड़ रही है, वह भी बिना वेष बदले। और आरती तक करते हुए बंदे को इसी पर पूरा ध्यान लगाना पड़ रहा है कि कोई भी क्षण कैमरे से मिस नहीं हो जाए, कोई एंगल गलत नहीं हो जाए और कोई दूसरा फ्रेम में दाखिल न हो जाए।

और यही सब शहर-शहर, राज्य-राज्य। उद्घाटन दर उद्घाटन; घोषणा दर घोषणा; भाषण दर भाषण। और फिर भी पटखनी लगने का डर। अरे मोदी जी के नये इंडिया के नागरिक होने का कुछ तो कर्ज चुकाओ। भूटान वालों की तरह सर्वोच्च नागरिक सम्मान न सही, कम से कम प्रभु चरणों में अपने वोट तो बिछाओ! कम से कम पके हुए बालों का तो सम्मान करो, इस उम्र में यूं शहर-शहर तो मत दौड़ाओ!

और हां! भूटान वालों के मोदी जी को सम्मानित करने को कोई हल्के में नहीं ले। देश बेशक छोटा है, पर पहले ही बता दिया, सम्मान सबसे बड़ा है। वह भी नागरिक सम्मान। और भूटान का सम्मान तो ताजातरीन कड़ी है, सम्मानों की लंबी शृंखला में।

सम्मान और भी हैं, भूटान के सम्मान के सिवा। पुरस्कार और भी हैं, कोटलर पुरस्कार के सिवा। यह कोई फेक न्यूज नहीं है; सारी दुनिया में मोदी जी का डंका पहले से ही बज रहा था। साऊदी अरब से लेकर यूएई और अफगानिस्तान तक , किस-किस देश ने मोदी को सम्मानित नहीं किया है। और विश्व शांति से लेकर, पर्यावरण और ऊर्जा तक, किस-किस के लिए उन्हें पुरस्कृत नहीं किया गया है। और, भूटान आखिरी भी नहीं है। हां! इतना जरूर है कि भूटान के एलान के बाद, दुनिया में मोदी जी का डंका और जोर-जोर से बज रहा है, जैसे नाटक का पर्दा उठने या गिरने से पहले बजता है, जोर-जोर से। पता नहीं क्यों परदेसियों के सम्मान और पुरस्कार देने के पीछे से नागरिक लगा देने का चलन है, वर्ना मोदी जी भी फौजी जनरलों की तरह सारे सम्मान और मेडल अपनी छाती पर सजाते, तो दुनिया में छप्पन इंची शोभा का ऐसा डंका बजता कि पूछो ही मत।

हमें तो लगता है कि इन साढ़े साल सालों में मोदी जी को, दिखाने-बताने लायक सारे के सारे सम्मान और पुरस्कार तो मिल चुके  हैं। बस, उनके भीतर छुपे कलाकार को ही विश्व स्तर पर पहचाना जाना और सम्मानित किया जाना बाकी है। वैसे कई जानकारों का तो ख्याल है कि उनके भीतर का कलाकार भी, अब और छुपा कहां है? इस बार बनारस में सैकड़ों कैमरे लगाने के बाद कुछ भी छुपा नहीं रहा है। कलाकार, कला, कलाकारी, सब खुलकर सामने आए हैं और हर संभव-असंभव कोण से कैमरों में दर्ज भी हो गए हैं।

बस कोई एक बार ये वाली ‘बिग गन ऑफ बनारस’ ऑस्कर वालों तक पहुंचा दे। बैस्ट एक्टर का एवार्ड तो कहीं गया नहीं है। कमाल का अभिनय, अद्भुत कैमरा सजगता, विविधवर्णी भावाभिव्यक्तियां और सब कुछ एकदम सहज-स्वाभाविक; एक ही अभिनेता में इस सब का योग कहां मिलेगा? वैसे ऐसे अभिनय और भव्य दृश्यावली के असाधारण योग के लिए, विदेशी भाषा की बेहतरीन फिल्म का पुरुस्कार मिल जाए तो भी अचरज नहीं होगा। होने को तो सिनेमेटोग्राफी से लेकर संगीत तक के पुरुस्कारों की भी अपनी दावेदारी बनती है। और वेशभूषा के लिए भी। फिर भी मोदी जी का अभिनय का ऑस्कर तो कहीं गया ही नहीं है। इससे उन लोगों को भी जवाब मिल जाएगा, जो इसकी अफवाहें फैलाते हैं कि मोदी जी के अभिनय की सबसे प्रभावशाली मुद्रा एक ही है--कैमरे पर दो आंसू टपकाने की। ‘बिग गन ऑफ बनारस’ में बाकी सब है, मोक्ष दायिनी से शव-वाहिनी हुर्ई गंगा के लिए दो आंसुओं के सिवा!
खैर, विदेशियों से ऑस्कर मिले न मिले, बनारस के बाद भी अगर यूपी वालों ने वोट नहीं दिए, तो उनसे ज्यादा नाशुक्रा कोई नहीं होगा। मोदी जी तो दुनिया भर में भारत का डंका बजवा रहे हैं और यूपी वाले पांवों में बिछने की जगह पांव के नीचे से कालीन ही खींच लें, इससे ज्यादा एंटीनेशनलता क्या होगी?

और यह तो बिल्कुल ही विश्वास करने वाली बात नहीं है कि पड़ौसी भूटान तो मोदी-भक्ति दिखाए और यूपी, लाल टोपी दिखाकर मोदी-योगी जोड़ी को भडक़ाए। योगी के लिए न सही, मोदी  के लिए भी न सही, पर भूटान के सर्वोच्च सम्मान के लिए तो, यूपी वालों को वोटों से मोदी जी का सम्मान करना हो चाहिए। वैसे प्यार से नहीं तो मार से, सम्मान तो मोदी जी करा ही लेंगे। आइटी वाले मैदान में आ ही चुके हैं। ईडी, एनआइए, एनसीबी, सब दरवाजे पर खड़े हैं। यूपी वालो तय कर लो, प्यार से सम्मान करोगे, या मोदी जी ही मार के सम्मान ले लें!  

(व्यंग्य स्तंभ ‘कटाक्ष’ लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोकलहर के संपादक हैं।)

sarcasm
Satire
Political satire
Narendra modi
Modi government
BJP

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने कथित शिवलिंग के क्षेत्र को सुरक्षित रखने को कहा, नई याचिकाओं से गहराया विवाद

हिजाब बनाम परचम: मजाज़ साहब के नाम खुली चिट्ठी

उर्दू पत्रकारिता : 200 सालों का सफ़र और चुनौतियां

तिरछी नज़र: सरकार-जी, बम केवल साइकिल में ही नहीं लगता

विज्ञापन की महिमा: अगर विज्ञापन न होते तो हमें विकास दिखाई ही न देता

तिरछी नज़र: बजट इस साल का; बात पच्चीस साल की

…सब कुछ ठीक-ठाक है

तिरछी नज़र: ‘ज़िंदा लौट आए’ मतलब लौट के...

राय-शुमारी: आरएसएस के निशाने पर भारत की समूची गैर-वैदिक विरासत!, बौद्ध और सिख समुदाय पर भी हमला

बना रहे रस: वे बनारस से उसकी आत्मा छीनना चाहते हैं


बाकी खबरें

  • Uttarakhand
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड: वन अधिकारियों के तबादले, कार्बेट प्रकरण और प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट
    03 Dec 2021
    “.....ये कम से कम 150 करोड़ रुपये का घोटाला है। जब ये सारे जांच और तथ्य ऑन रिकॉर्ड हैं। तो आरोपी व्यक्ति पर कोई एक्शन नहीं लिया गया। ये दुर्भाग्य की बात है। राजीव भरतरी ने प्रमुख रहते हुए मामले की…
  • Agriculture
    अजय कुमार
    MSP की लीगल गारंटी मिलने से पर्यावरण को नुक़सान नहीं बल्कि फ़ायदा पहुंचेगा !
    03 Dec 2021
    क्यों यह तर्क झूठ के प्रचार की तरह है कि MSP की लीगल गारंटी मिलने से पर्यावरण को नुक़सान पहुंचेगा?
  • poverty
    सोनिया यादव
    यूपी: आख़िर ''ग़रीबी' बड़ा चुनावी मुद्दा क्यों नहीं है? 
    03 Dec 2021
    उत्तर प्रदेश में 37.78 फ़ीसदी आबादी ग़रीब है। इसके अलावा प्रदेश की 60 फ़ीसदी से ज़्यादा आबादी के पास बेसिक सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद ग़रीबी सूचकांक की चर्चा जाति, जिन्ना, हिंदू, मुसलमान…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    केजरीवाल का 'धार्मिक-टर्न' : आज से चलेगी अयोध्या की ट्रेन
    03 Dec 2021
    मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत शुक्रवार शाम को पहली ट्रेन दिल्ली से अयोध्या के लिए रवाना होगी।
  • Bhopal
    काशिफ काकवी
    भोपाल गैस त्रासदी के 37 साल : ब्रिटेन के LGBT+ एक्टिविस्ट ने डाउ से अन्याय का ख़ात्मा करने की अपील की
    03 Dec 2021
    पीटर टेचेल ने डाउ केमिकल के प्रमुख जिम फ़िटरलिंग से यूनियन कार्बाइड को भारतीय कोर्ट में पेश करने की अपील की।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License