NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
व्यंग्य
भारत
राजनीति
बैठे ठाले:  मौत के मुंह से निकल तो गए लेकिन 'मोदी भगवान' की जय ना बोलकर एंटिनेशनल काम कर गए
खैर! मोदी जी ने अपनी जय नहीं बोलने वालों को भी माफ कर दिया, यह मोदी जी का बड़प्पन है। पर मोदी जी का दिल बड़ा होने का मतलब यह थोड़े ही है कि इन बच्चों का छोटा दिल दिखाना ठीक हो जाएगा। वैसे भी बच्चे-बच्चे कहकर टीवी वालों ने इन्हें ज्यादा ही बच्चा बना दिया है। 
राजेंद्र शर्मा
05 Mar 2022
Ukraine return

अब तो मोदी जी के विरोधियों को भी मानना पड़ेगा कि मोदी जी की छाती ही छप्पन इंच की नहीं है। एक्स्ट्रा लार्ज छाती में, दिल भी एक्स्ट्रा लार्ज न सही, ठीक-ठाक बड़ा जरूर है। देखा नहीं कैसे मोदी जी ने यूक्रेन से वापस आए बच्चों की हिमाकत को झट से माफ कर दिया। और हिमाकत भी कैसी? एकदम एंटीनेशनल टाइप। जब तक यूक्रेन में फंसे पड़े थे तब तो कोई बचालो, कोई तो निकालो की गुहार लगा रहे थे।

इंटरनेट पर मैसेज लिख-लिखकर खतरा है, हम मर जाएंगे का शोर मचा रहे थे। इधर देश में उनके घर वाले हाय हमारे बच्चे, हाय हमारे बच्चे की रट लगा रहे थे। पर जब मोदी जी ने रूस वालों और यूक्रेन वालों को जरा सा घूर कर बरज दिया, अपने चार मंत्रियों को चार अलग-अलग देशों के लिए रवाना कर दिया और प्राइवेट विमान सेवाओं से लेकर वायु सेना तक के विमानों को भेजकर इन बच्चों को वापस मंगवा लिया, तो इन नाशुक्रों ने क्या किया? एक छोटा सा थैंक यू मोदी जी तक नहीं! भारत माता की जय तक तो कर दी, पर मंत्री लोग ‘मोदी जी की’ कर के ही रह गए, बच्चों ने एक बार ‘जय’ तक नहीं कहा।

पर मोदी जी ने फिर भी माफ कर दिया। न नाराजगी दिखाई, न फटकार लगायी। इनकी तो कोई गलती तक नहीं बतायी। और थैंक यू नहीं करने वालों को ही क्यों, मोदी जी ने तो उनको भी माफ कर दिया, जिन्होंने इसकी शिकायतें भी की थीं कि सरकार कुछ कर क्यों नहीं रही है? मोदी जी ने उन्हें भुला दिया क्या, वगैरह, वगैरह। मोदी जी ने न किसी अंतरराष्ट्रीय षडयंत्र की आशंका जतायी, न किसी विपक्षी टूलकिट की। न अर्बन नक्सल का खतरा दिखाया न टुकड़े-टुकड़े गैंग का। बस माफ कर दिया।

और सिर्फ माफ ही क्यों, मोदी जी ने तो यह भी कह दिया कि बच्चों को परेशानियां उठानी पड़ी होंगी, उनकी नाराजगी समझी जा सकती है। यहां तक कि खुद मुझ मोदी जी से शिकायत भी। कोई बात नहीं, गुस्सा जब शांत हो जाएगा, तो खुद ही समझ जाएंगे कि इस मोदी ने कितना बड़ा काम किया है! बस इतना कहने की कसर रह गयी कि बच्चे तो बच्चे हैं, शरारत बच्चे नहीं करेंगे तो क्या हम बुजुर्ग करेंगे!

खैर! मोदी जी ने अपनी जय नहीं बोलने वालों को भी माफ कर दिया, यह मोदी जी का बड़प्पन है। पर मोदी जी का दिल बड़ा होने का मतलब यह थोड़े ही है कि इन बच्चों का छोटा दिल दिखाना ठीक हो जाएगा। वैसे भी बच्चे-बच्चे कहकर टीवी वालों ने इन्हें ज्यादा ही बच्चा बना दिया है। अच्छे-खासे कॉलेजों में पढऩे वाले जवान लड़के और लड़कियां है। हो सकता है कई साल से देश से बाहर हों, सो ये सत्तर साल बाद आए नये इंडिया को ठीक से पहचानते नहीं हों। हो सकता है कि ये मोदी जी को भी ज्यादा जानते नहीं हों। पर कम से कम भारतीय संस्कृति को तो जानते होंगे या उसे भी बिल्कुल ही भूल गए? देश का नमक खाने के बाद, मोदी जी की जय कहना कैसे भूल गए! आखिर, नमक हलाली भी तो कोई चीज होती है!

वैसे इन बच्चों की भी ज्यादा गलती नहीं है। मोदी जी जब चुनाव सभा दर चुनाव सभा, यूपी वाली बूढ़ी अम्मा का किस्सा सुना रहे थे और यूपी वालों को नमकहलाली का रिफ्रैशर कोर्स करा रहे थे, तब ये बेचारे कभी अंडरग्राउंड स्टेशनों में तो कभी बम शैल्टरों में, अपनी जान बचाने की जुगत लगा रहे थे और बचाकर निकाले जाने तक जिंदा रहने का जुगाड़ बैठा रहे थे। जान के लाले पड़े हों तो संस्कृति-वंस्कृति कहां याद रहती है? उल्टे मामला आपद्धर्म का हो लेता है।

वैसे भी परदेस में कहां पता लगता है कि कौन किस का नमक खा रहा है, जो नमक का हक अदा करने जाएगा। भक्त सच कहते हैं, संस्कृति-वंस्कृति सब इमीग्रेशन में ही छूट जाती है, जब बंदा परदेश जाता है। इसीलिए तो किसी जमाने में हमारे यहां तो परदेश जाने वाले को जाति-बाहर ही कर देते थे। देश जाए न जाए, बंदे की जाति जरूर चली जाती थी।

खैर! यूपी का चुनाव भले ही हो चला हो, पर यूपी वाली बूढ़ी अम्मा के किस्से का वक्त अब भी नहीं गया है। विदेश से मजबूरी में लौटे बच्चे तो बूढ़ी अम्मा की कहानी से, नमकहलाली सीख ही सकते हैं। बूढ़ी अम्मा ने मोदी जी की तस्वीर देखकर ऑन रिकार्ड कहा था : ‘बिन्नै अन्न दऔ है। बिनको नमक खाओ है। वोट तो मोदी कोई दैनो पड़ैगो!’ जब बूढ़ी अम्मा राशन और नमक के लिए, मोदी जी को वोट जैसी कीमती चीज दे सकती है, तो ये किशोर या नौजवान मोदी जी का एक जयकारा नहीं दे सकते हैं? सात-आठ साल में एक न एक बार, मोदी जी का नमक तो इन्होंने भी खाया होगा?

भारतीय धर्म और संस्कृति के दुश्मन हैं, जो इस तरह की बातें करते हैं कि नमकहलाली की मांग बूढ़ी अम्मा से ही क्यों की जाती है? मोदी जी-योगी जी ने कौन सा पिछली बार पब्लिक का वोट लेकर नमकहलाली की थी? ये पब्लिक को धर्मविमुख करने वाली बातें हैं। वर्ना सभी जानते हैं कि नमकहलाली की शर्त सिर्फ नमक खाने वालों पर लागू होती है। नमक खिलाने वाले पर ऐसा कोई बंधन लागू नहीं होता है। शोले का कालिया और गब्बर वाला डॉयलाग तो याद होगा। कालिया जान बचाने के लिए नमक की ही दुहाई देता है--सरदार मैंने आप का नमक खाया है। जवाब मिलता है--अब गोली भी खा। सारे कर्तव्य नमक खाने वाले के होते हैं। जरूरत पड़े तो गोली खाने का भी। नमक खिलाने वाले, पब्लिक को नमक खिलाने के बाद सब जिम्मेदारियों से स्वतंत्र हो जाते हैं। खैर! जो यूक्रेन से बिना गोली खाए वापस आ गए हैं, कम से कम मोदी जी की जय तो बोल ही सकते हैं। घर वापसी की यात्रा में कुछ न कुछ नमकीन तो खाया होगा। वह भी नहीं तो मुहावरे वाला ही सही, नमक तो हलाल करना ही पड़ेगा।   

(इस व्यंग्य आलेख के लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोकलहर के संपादक हैं।)

sarcasm
Satire
Political satire
Ukraine crisis
Ukraine Return Student
Modi government
BJP
Modi Slogan

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

तिरछी नज़र: 2047 की बात है

कटाक्ष: महंगाई, बेकारी भुलाओ, मस्जिद से मंदिर निकलवाओ! 

ताजमहल किसे चाहिए— ऐ नफ़रत तू ज़िंदाबाद!

तिरछी नज़र: ...ओह माई गॉड!

कटाक्ष: एक निशान, अलग-अलग विधान, फिर भी नया इंडिया महान!

तिरछी नज़र: हम सहनशील तो हैं, पर इतने भी नहीं


बाकी खबरें

  • bharat ek mauj
    न्यूज़क्लिक टीम
    भारत एक मौज: क्यों नहीं हैं भारत के लोग Happy?
    28 Mar 2022
    'भारत एक मौज' के आज के एपिसोड में संजय Happiness Report पर चर्चा करेंगे के आखिर क्यों भारत का नंबर खुश रहने वाले देशों में आखिरी 10 देशों में आता है। उसके साथ ही वह फिल्म 'The Kashmir Files ' पर भी…
  • विजय विनीत
    पूर्वांचल में ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच सड़कों पर उतरे मज़दूर
    28 Mar 2022
    मोदी सरकार लगातार मेहनतकश तबके पर हमला कर रही है। ईपीएफ की ब्याज दरों में कटौती इसका ताजा उदाहरण है। इस कटौती से असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सर्वाधिक नुकसान होगा। इससे पहले सरकार ने 44 श्रम कानूनों…
  • एपी
    रूस-यूक्रेन अपडेट:जेलेंस्की के तेवर नरम, बातचीत में ‘विलंब किए बिना’ शांति की बात
    28 Mar 2022
    रूस लंबे समय से मांग कर रहा है कि यूक्रेन पश्चिम के नाटो गठबंधन में शामिल होने की उम्मीद छोड़ दे क्योंकि मॉस्को इसे अपने लिए खतरा मानता है।
  • मुकुंद झा
    देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में दिखा व्यापक असर
    28 Mar 2022
    सुबह से ही मज़दूर नेताओं और यूनियनों ने औद्योगिक क्षेत्र में जाकर मज़दूरों से काम का बहिष्कार करने की अपील की और उसके बाद मज़दूरों ने एकत्रित होकर औद्योगिक क्षेत्रों में रैली भी की। 
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    माले का 11वां राज्य सम्मेलन संपन्न, महिलाओं-नौजवानों और अल्पसंख्यकों को तरजीह
    28 Mar 2022
    "इस सम्मेलन में महिला प्रतिनिधियों ने जिस बेबाक तरीक़े से अपनी बातें रखीं, वह सम्मेलन के लिए अच्छा संकेत है।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License