NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कटाक्ष : भक्तों के बीच “थैंक्यू मोदी जी!” का नया शिड्यूल घोषित
देख लीजिए, कोविड-19 की तरह, किसान आंदोलन की आपदा में से भी मोदी जी ने अवसर निकाल ही लिया। राजधानी में थैंक्यू मोदी जी सभाओं का शिड्यूल आ गया है। बाकी राज्यों में भी आज-कल में यह सिलसिला शुरू हो जाएगा। अब मोदी जी को पूरे देश का थैंक्यू लेने से कोई नहीं रोक सकता है।
राजेंद्र शर्मा
20 Nov 2021
Modi
डिजाइनर फोटो। केवल प्रतीकात्मक प्रयोग के लिए।

भई मान गए, मोदी जी को। आपदा कैसी भी हो, अपने मोदी जी उसमें से अवसर खींचकर निकाल ही लाते हैं। किसान आंदोलन को ही ले लो। शुरू-शुरू में जरूर सिरदर्द लगता था। पर किसान सारी मुश्किलें पार करके भी जब दिल्ली के बॉर्डरों पर जम गए और बेचारी सरकार की पहले दिल्ली पहुंचने से रोकने की और फिर बार्डरों से उखाडऩे की सारी कोशिशों के बाद भी, बार्डरों पर जमे रहे, तो बात सिरदर्द से आगे निकल गयी। फिर जैसे-जैसे सिर के ऊपर से एक के बाद एक मौसम निकलते गए और किसानों के हौसले बढ़ते गए, मामला खासी परेशानी का हो लिया।

और जब  पट्ठे किसान मोदी जी की पार्टी के लोगों को रोकने-टोकने लगे और चुनाव में सरकार वालों को हराने की पुकारें करने लगे, तो मामला संकट का हो गया। मोदी-2 में पहली बार, इक्का-दुक्का भक्तों ने इसकी शिकायतें तक करनी शुरू कर दीं कि महाराज कुछ करते क्यों नहीं? तब तक चुनावों का एक और चक्र आ गया और किसानों ने ऑपरेशन यूपी और ऑपरेशन उत्तराखंड का एलान कर दिया। इससे बढक़र आपदा क्या होती?

पर देख लीजिए, कोविड-19 की तरह, किसान आंदोलन की आपदा में से भी मोदी जी ने अवसर निकाल ही लिया। कोविड-19 की आपदा में मोदी जी, बाकी कई चीजों के अलावा, मुफ्त टीके के लिए थैंक्यू मोदी जी के पोस्टर लगवाने से लेकर पोस्टकार्ड लिखवाने तक का अवसर निकाल लाए थे, तो किसान आंदोलन की आपदा में भी मोदी जी, राष्ट्र के नाम एक और संबोधन का ही नहीं,  राष्ट्र से एक और थैंक्यू हासिल करने का भी अवसर खींचकर निकाल लाए हैं। थैंक्यू मोदी जी--नये कृषि कानून वापस लेने के लिए! राजधानी में थैंक्यू मोदी जी सभाओं का शिड्यूल आ गया है। बाकी राज्यों में भी आज-कल में यह सिलसिला शुरू हो जाएगा। अब मोदी जी को पूरे देश का थैंक्यू लेने से कोई नहीं रोक सकता है।

अब प्लीज, इस तरह की बातें कर के थैंक्यू के इस अवसर का मजा किरकिरा करने की कोशिश कोई नहीं करे कि ये थैंक्यू तो मोदी जी के भगवा भक्त-भक्तिन ही कर रहे हैं। इसमें किसानों का थैंक यू तो हमें सुनाई ही नहीं पड़ रहा है। हम नहीं मानते। किसान मुंह से भले न कहें, पर दिल से तो थैंक्यू मोदी जी कह ही रहे होंगे। सर्दी-गर्मी-बारिश का पूरा चक्र झेलने के बाद, अगली सर्दी की शुरूआत में ही, उनके अपने गांव-खेत लौटने के रास्ता खुल रहा है, क्या किसान तब भी मन में भी थैंक्यू मोदी जी नहीं कह रहे होंगे? इस देश का किसान, इतना नाशुक्रा हर्गिज नहीं हो सकता है! फिर भी मान लीजिए कि किसान मन में भी मोदी जी का थैंक्यू नहीं कर रहा हो, तब भी कृतज्ञ राष्ट्र तो मोदी जी का थैंक्यू कर ही सकता है। किसान अगर एंटीनेशनों के बहकावे में आ गए हैं, वे राष्ट्रभक्ति के पथ से विपथ हो रहे हैं, तो ये उनकी प्राब्लम है। मोदी जी ने तो अपनी तपस्या में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। अनेक संघी भाई-बहनों ने गलत थोड़े ही कहा था कि ये तो छद्म किसान हैं। जैनुइन किसान होते तो कृषि कानून बनाने के लिए न सही, कम से कम कानून वापस लेने के लिए तो थैंक्यू मोदी जी करते! किसान और कृषि कानून का इतना शोर और मोदी जी के लिए थैंक्यू एक भी नहीं, न कानून बनाने के  लिए और न वापस लेने के लिए! ये तो बस  मोदी जी का थैंक्यू नहीं करने की कसम खाए बैठे हैं, इन्हें जैनुइन किसान कौन कहेगा! ऐसे एंटीनेशनलों की वजह से तो   राष्ट्र  मोदी जी का थैंक्यू करने का अपना कर्तव्य पूरा करने से चूकने वाला नहीं है। किसान साथ आएं न आएं, राष्ट्र  तो मुक्त कंठ से फिर से थैंक्यू मोदी जी गाएगा!

इस पवित्र आत्मा और शुद्ध अंत:करण के थैंक्यू मोदी जी को, यूपी वगैरह के चुनाव से जोडक़र, उसकी पवित्रता को कम करने की कोशिश कोई नहीं करे। यह मामला तो इतना पवित्र है कि, उसे तो संघ की सांस्कृतिक-राजनीति तक नहीं छू पायी है, फिर चुनाव आदि की चिंताओं के छूने का तो सवाल ही कहां उठता है। यह तो जनतंत्र के उस सर्वोच्च स्तर का मामला है: जिसमें, थोड़े से किसानों यानी अल्पमत का दिल दु:खे, बहुमत के ऐसे निर्णय को लागू करने से भी मोदी जी ने साफ इंकार कर दिया है। विरोध करने वाले किसान बहुमत में होना तो दूर, बहुत बड़ी संख्या में भी नहीं थे।  तब भी मोदी जी ने उन्हें समझाने-मनाने के लिए क्या-क्या तप नहीं किया। नयी से नयी पगड़ियां पहन कर, भाषण दिए। आंदोलनजीवियों से बचकर रहने के संदेश दिए। मंत्रियों-सांसदों ने बड़े-बड़े दावे किए। अखबारों-टीवी पर हजारों करोड़ रुपये के विज्ञापन दिए। वफादार विद्वानों ने वक्तव्य दिए। भक्तों ने खालिस्तानी, आतंकवादी, बड़े किसान, धनी किसान, विदेशी टूलकिट से संचालित राष्ट्र विरोधी किसान, आदि-आदि खोज-खोज कर दिए। पर तब भी जब ये मुट्ठीभर किसान नहीं माने, तो मोदी जी ने सबको साथ लेकर चलने में विफलता के लिए, खुले मन से राष्ट्र से क्षमा मांग ली और कानूनों को वापस ले लिया। ऐसे कानूनों का क्या फायदा, जिनसे किसी का भी दिल दु:खे, शब्दश: किसी का भी!

और ये वीरदास कौन है, जिसे लेकर इस तरह की फेक न्यूज फैलाने की कोशिशें की जा रही हैं कि उसकी कॉमेडी से डरकर मोदी जी ने नये कृषि कानून वापस ले लिए हैं! इन कानूनों के वापस होने के लिए, थैंक्यू मोदी जी के जवाब में थैंक्यू वीरदास का ट्रेंड चलाने की भी कोशिश की जा रही है। मोदी जी के विरोधी और कितना गिरेंगे! मोदी जी को शर्मिंदा करने के लिए, विदेश में भारत का मजाक उड़ाए जाने पर भी कब तक तालियां बजाएंगे? खैर! विदेशी एंगल की वजह से जेल में बंद नहीं भी कर सकें तो क्या हुआ, छप्पन इंच की छाती वाले मोदी जी, किसी मसखरे की कैनेडी सेंटर की मसखरी से डरेंगे! ऐसे मसखरों के लिए भी एक ही जवाब काफी है--थैंक्यू, मोदी जी!  

(इस व्यंग्य आलेख के लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोकलहर के संपादक हैं।)  

sarcasm
Narendra modi
Satire
Political satire
modi bhakt
BJP
kisan andolan

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति


बाकी खबरें

  • हेमंत सोरेन
    अनिल अंशुमन
    झारखंड में ‘ऑपरेशन कमल’ के ख़िलाफ़ उठी आवाज़ें
    30 Jul 2021
    भाजपा पर झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार को अपदस्त करने की साज़िश का आरोप लगा है। राज्य सरकार ने इस मामले में एसआईटी जांच बैठा दी है।
  • कितना व्यावहारिक है पश्चिम बंगाल का विभाजन और एक अलग राज्य उत्तर बंगाल का निर्माण
    डॉ सुखबिलास बर्मा
    कितना व्यावहारिक है पश्चिम बंगाल का विभाजन और एक अलग राज्य उत्तर बंगाल का निर्माण
    30 Jul 2021
    हाल के विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में पूरी तरह से नाकाम होने के बाद भाजपा की ओर से हालिया प्रस्तावित बंगाल का विभाजन ममता बनर्जी के लिए समस्यायें पैदा करने के मक़सद से रचा गया एक गेम प्लान हो…
  • चेन्नई में 7 जुलाई को ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन। तस्वीर साभार: CITU, तमिलनाडु
    श्रुति एमडी
    "ना ओला ना ऊबर, सरकार अपने हाथ में ले नियंत्रण- तमिलनाडु के ऑटो चालकों की मांग
    30 Jul 2021
    महामारी के दौरान यात्रियों की संख्या में कमी, ईंधन की क़ीमतों में इज़ाफ़े और 2013 से मीटर की दरों में बदलाव ना होने से ऑटो चालक बहुत कठिन स्थिति में फंस गए हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट
    भाषा
    पेगासस जासूसी मामले की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट सहमत
    30 Jul 2021
    सुप्रीम कोर्ट पेगासस जासूसी मामले की किसी वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग वाली वरिष्ठ पत्रकार एन. राम की याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई करने के लिए राज़ी हो गया…
  • महामारी ने शहरी भारत के जीवन को किया बेहाल  
    टिकेंदर सिंह पंवार
    महामारी ने शहरी भारत के जीवन को किया बेहाल  
    30 Jul 2021
    पूरे भारत में, शहरी योजाना को भूमि, पानी और आवास का मुद्रीकरण करने के इरादे से लागू किया जा रहा है, जिसमें ग़रीब और मज़दूर वर्ग का ज़िक्र नहीं है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License