NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
व्यंग्य
भारत
राजनीति
कटाक्ष: महंगाई, बेकारी भुलाओ, मस्जिद से मंदिर निकलवाओ! 
अठारह घंटे से बढ़ाकर अब से दिन में बीस-बीस घंटा लगाएंगेे, तब कहीं जाकर 2025 में मोदी जी नये इंडिया का उद्ïघाटन कर पाएंगे। तब तक महंगाई, बेकारी वगैरह का शोर मचाकर, जो इस साधना में बाधा डालते पाए जाएंगे, राष्ट्र/धर्म द्रोही करार देकर पाकिस्तान नहीं भी भेजे जा सकेंगे तो, जेल जरूर भेजे जाएंगे।  
राजेंद्र शर्मा
21 May 2022
satire
'प्रतीकात्मक फ़ोटो' साभार: सोशल मीडिया

इन सेकुलरवालों का बस चले तो ये तो कभी नया इंडिया बनने ही नहीं देंगे। अकेले मोदी जी आखिरकार किस-किस के विरोध की काट कर के, अपना नया इंडिया बनाएंगे? बताइए, नया इंडिया बनाने के लिए मोदी जी कुछ भी नया करें या दूसरों से कराएं या फिर दूसरों को करने ही दें,  ये पट्ठे और कुछ नहीं भी मिलता है तो ध्यान बंटाने की कोशिश का ही शोर मचा देते हैं। चीखने-चिल्लाने लगते हैं कि असली मुद्दों से पब्लिक का ध्यान बंटाने की कोशिश हो रही है। आम लोगों के जीने-मरने के मुद्दों से ध्यान भटकाया जा रहा है। महंगाई, बेरोजगारी जैसे पब्लिक के पेट के सवालों से ध्यान  बंटाने की कोशिश हो रही है, वगैरह, वगैरह। बेचारी सरकार कुछ भी करे या नहीं भी करे, इन्हें यही राग आलापना है। 

योगी जी चुनाव को 80 बनाम 20 का चुनाव बनाएं, तब भी ध्यान बंटाने की कोशिश। कर्नाटक वाले बोम्मई भाई पहले हिजाब-हिजाब, फिर हलाल-वलाल कराएं, तब भी ध्यान बंटाने की कोशिश। राज ठाकरे साहब को मुखौटा बनाकर, फडनवीस साहब लाउस्पीकर से अजान के जवाब में, लाउडस्पीकर पर हनूमान चालीसा पढ़वाएं, तब भी वही ध्यान बंटाने की कोशिश। कोई ताजमहल के नीचे मंदिर खोजने जाए, तब भी ध्यान बंटाने की कोशिश। कोई कुतुब मीनार में विष्णु स्तंंभ से लेकर जैन मंदिर तक खोजकर दिखाए, तब भी ध्यान बंटाने की कोशिश। कोई दिल्ली की जामा मस्जिद को खुदवाने की मांग उठाए, तब भी वही ध्यान बंटाने की कोशिश। और तो और इनकी मानी जाए तो कश्मीर फाइल्स भी न सच है, न फिल्म, वह भी ध्यान बंटाने की ही कोशिश है। और अब जब अयोध्या के बाद, न सिर्फ अदालतों में काशी और मथुरा की बारी आ चुकी है बल्कि काशी में तो मस्जिद के हौज में चार सौ साल से गायब शिवलिंग भी बरामद कराया चुका है, तब भी इनके हिसाब से यह सब असली मुद्दों से पब्लिक का ध्यान बंटाने की ही कोशिश है! वह तो शुक्र है कि मोदी जी  की फौज इनकी बात को ज्यादा सीरियसली नहीं लेती है और इनके या किसी और के कुछ भी कहने से, नया इंडिया बनाने  के अपने मिशन में कोई ढील नहीं आने देती है। वर्ना सब अगर इन्हेें ध्यान बंटाने वाला ही मानने लगे तो, नया इंडिया कौन बनाएगा?

हम तो कहते हैं कि ये सेकुलर-सेकुलर करने वाले ही हैं, जो असली मुद्दों की तरफ से पब्लिक का ध्यान बंटाने की कोशिश कर रहे हैं। असल में तो महंगाई को, बेरोजगारी को, भूख को, बीमारी को असली मुद्दे बताना ही पब्लिक का ध्यान बंटाने की, उसे गुमराह करने की कोशिश है। नहीं, हम यह नहीं कह रहे हैं कि भूख, बेकारी वगैरह कोई मुद्दे ही नहीं हैं। मुद्दे हैं, इससे मोदी जी ने कब इंकार किया है। लेकिन, क्या ये असली मुद्दे हैं? मोदी जी के विरोध में हमें इतना अंधा भी नहीं हो जाना चाहिए कि हम यही भूल जाएं कि आखिरकार ये सब रोटी के, पेट के ही मुद्दे हैं, इस भौतिक जगत के मुद्दे हैं। और हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति में और किसी बात पर हो या न हो, इस पर पूर्ण एकता है कि पेट के, रोटी के मुद्दे, असली मुद्दे नहीं होते हैं। जब शरीर तक माया है, मिथ्या है, तो पेट, रोटी आदि के मुद्दे सत्य कैसे हो सकते हैं? लेकिन, ये दुष्टï सेकुलरवाले, जो मिथ्या है, उसी को सत्य बताते हैं और उसकी तरफ ही देखने का शोर मचाकर, सत्य यानी आत्मा के, आत्मा की रोटी के, आत्मा के पेट के मुद्दों की तरफ से, ध्यान बंटाते हैं। जब तक मिथ्या शरीर की भूख को भूलकर, सत्य आत्मा की भूख मिटाने की ओर नहीं बढ़ेगा इंडिया, तब तक पुराने के खोल को तोडक़र, बाहर कैसे आएगा नया इंडिया!

मोदी जी ने तो पहले ही दिन से कह दिया था कि जो सत्तर साल हुआ उसे बदलेंगे; जो सत्तर साल में नहीं हुआ, उसे ही कर के दिखाएंगे और एकदम नया इंडिया बनाएंगे। वही बना रहे हैं। पुराने भारत में भूख, गरीबी, बेकारी चाहे मिटी नहीं हो, पर उनकी चिंता खूब हो ली। अब मोदी जी आत्मा की भूख की चिंता पर ध्यान लगा रहे हैं। बेरोजगारी रिकार्ड बना रही है, पर नये इंडिया के लिए हम मस्जिद-मस्जिद के नीचे मंदिर की खोज करा रहे हैं। अयोध्या के बाद काशी, मथुरा होते हुए, ताजमहल, कुतुब मीनार, जामा मस्जिद आदि, आदि सब का नंबर लगवा रहे हैं। रसोई गैस का सिलेंडर हजार रु0 से ऊपर चल गया है, पर हम मस्जिदों से लाउडस्पीकर और स्कूल-कालेजों में पढऩे वाली लड़कियों के हिजाब उतरवा रहे हैं। लोग गरीबी की रेखा के नीचे धंसते जा रहे हैं और हम मंदिरों को भव्य बना रहे हैं और अडानी-अंबानी को कंधे पर बैठाकर, अमीरी की सबसे ऊंची रेखा पार करा रहे हैं। गंगा मुक्तिदायिनी से शववाहिनी बन गयी, पर हम मरने वालों के मरने को ही झुठला रहे हैं। प्रैस की स्वतंत्रता में भारत को रसातल तक पहुंचाने के बाद, अब पढ़े-लिखों की स्वतंत्रता का नंबर लगा रहे हैं और दिल्ली से लखनऊ तक, प्रोफेसरों, लेखकों, फिल्मकारों, व्यंग्यकारों वगैरह को जेल का डर दिखाकर सिखा रहे हैं कि मुंह खोलो, तो खूब आगा-पीछा देख के बोलो! ये ही तो नये इंडिया की निशानियां हैं।

मोदी जी को अच्छी तरह पता है कि उनका रास्ता एकदम सही है, पर नया इंडिया अभी दूर है। अभी डैमोक्रेसी का सत्तर साल पुराना सम्मोहन तोड़ना है, हिम्मतवर नेता से पब्लिक को और सीधे जोडऩा है। अभी सेकुलरिज्म केंचुल खोल छोड़ना है, घर-घर को मंदिर से जोड़ना है। अभी मोहब्बत के स्वांग बंद कराने हैं, हजारों साल पुरानी दुश्मनियों और बदलों का पिटारा खोलना है। संविधान को समेटना है, धर्म-राज्य को फैलाना। अभी भी बहुत कुछ है जो देसी-विदेशी दोस्तों को बेचकर ठिकाने लगाना है।  कुल मिलाकर पुराना भारत मिटाना है, पुराने पाकिस्तान की तर्ज का नया इंडिया बनाना है। पर इसके लिए अभी भी कितना सारा काम पड़ा है। अठारह घंटे से बढ़ाकर अब से दिन में बीस-बीस घंटा लगाएंगेे, तब कहीं जाकर 2025 में मोदी जी नये इंडिया का उद्ïघाटन कर पाएंगे। तब तक महंगाई, बेकारी वगैरह का शोर मचाकर, जो इस साधना में बाधा डालते पाए जाएंगे, राष्ट्र धर्म-द्रोही करार देकर पाकिस्तान नहीं भी भेजे जा सकेंगे तो, जेल जरूर भेजे जाएंगे। 

(इस व्यंग्य आलेख के लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोक लहर के संपादक हैं।)

sarcasm
Satire
Political satire
Modi
BJP
gyanvapi
taj mahal
Masjid
Mandir
new india

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

तिरछी नज़र: 2047 की बात है

ताजमहल किसे चाहिए— ऐ नफ़रत तू ज़िंदाबाद!

तिरछी नज़र: ...ओह माई गॉड!

कटाक्ष: एक निशान, अलग-अलग विधान, फिर भी नया इंडिया महान!

तिरछी नज़र: हम सहनशील तो हैं, पर इतने भी नहीं

कटाक्ष : बुलडोज़र के डंके में बज रहा है भारत का डंका


बाकी खबरें

  • Rurkee church attack
    वर्षा सिंह
    क्या चुनावी साल में आंदोलनों से डरकर नागरिक अधिकारों का हनन कर रही है उत्तराखंड सरकार?
    07 Oct 2021
    “इस समय ऊर्जा विभाग के कर्मचारियों या उपनल कर्मियों के विरोध समेत जितने भी आंदोलन राज्य के भीतर खड़े हो रहे हैं, राज्य सरकार उन आंदोलनों का सामना करने की स्थिति में नहीं है। इन्हीं आंदोलनो को खत्म…
  • kisan
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लखीमपुर के बाद अंबाला में भी भाजपा नेता पर लगे किसानों को गाड़ी से कुचलने का आरोप
    07 Oct 2021
    किसानों ने आरोप लगाया है कि अंबाला के नारायणगढ़ में वरोध कर रहे उनके काफिले पर भी गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की गई। गाड़ी चढ़ाने का आरोप भाजपा सांसद नायब सैनी पर लग रहा है।
  • Sub Judice
    पारस नाथ सिंह
    अगर मामला कोर्ट में है, तब क्या उसके विरोध का अधिकार खत्म हो जाता है? 
    07 Oct 2021
    भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 4 अक्टूबर को कहा कि वो यह बात तय करेगी कि विरोध का अधिकार एक पूर्ण अधिकार है या नहीं और इससे पहले का कोई पक्ष, जो पहले से ही क़ानूनी उपाय का आह्वान कर चुका है, अब भी उस मामले…
  • Chhattisgarh
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    छत्तीसगढ़: सांप्रदायिक सौहार्द्र के लिए चर्चित कवर्धा में अचानक हिंसा कैसे भड़क गई?
    07 Oct 2021
    दो समूहों के बीच विवाद के बाद शुरू हुई हिंसक घटनाओं के चलते रविवार, 3 अक्टूबर की शाम से कवर्धा में कर्फ्यू लगा है और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। इसके अलावा ज़िले की सीमाओं को भी सील कर दिया गया…
  • Stan Swamy
    पार्थ एमएन
    स्टेन स्वामी की मौत एक संस्थानिक हत्या थी’: सह-कैदियों ने उद्धव ठाकरे को अपने पत्र में लिखा था
    07 Oct 2021
    पत्र में तलोजा जेल के अधीक्षक कौस्तुभ कुर्लेकर को स्वामी की मौत का जिम्मेदार ठहराया गया है और उन पर जान-बूझकर स्वामी के स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति को अशक्त बनाने का आरोप लगाया गया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License