NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
फिल्में
भारत
राजनीति
सरदार उधम: एक अंतरराष्ट्रीय क्रांतिकारी की महागाथा
निर्देशक ने निश्चित ही एक ऐतिहासिक किरदार के जीवन के अनछुए पहलुओं को दर्शाने  के लिए गहरा शोध किया है। फिल्म यह भली प्रकार से दिखाती है कि उधम सिंह, सिर्फ बदले की भावना से प्रेरित एक जोशीले नौजवान नहीं अपितु राजनीति की ठोस समझ रखने वाले कर्मठ कार्यकर्ता थे।
हर्षवर्धन, अंकुर गोस्वामी
25 Oct 2021
Sardar Udham

विरले हैं वो लोग जो निजी सुख और सुविधा को त्याग कर, देश हित में अपना सर्वस्व न्योछावर कर गए। भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन में, सरदार उधम सिंह ऐसा ही एक नाम है। हालाँकि इतिहास ने उन्हें याद रखा, परंतु आम जन मानस में उनकी संपूर्ण गाथा की उपस्तिथि का अभाव है। निर्देशक शूजित सरकार ने इस दूरी को पाटने का एक सराहनीय प्रयास किया है। अमेज़न प्राइम पर प्रदर्शित उनकी फिल्म ‘सरदार उधम ' एक लंबे समय बाद पर्दे पर किसी क्रांतिकारी के जीवन को उजागर करती है। चर्चित अभिनेता विकी कौशल इसमें मुख्य किरदार में नज़र आते हैं। यह फिल्म शहीद सरदार उधम सिंह के प्रवासी मज़दूरी के दिनों के साथ ही, उनके  अंतरराष्ट्रीय क्रांतिकारी बनने के सफर को गैर-सरल रैखिक माध्यम से उजागर करती है। फिल्म कई बार समय में पीछे जा कर, घटनाओं की पृष्भूमि भी रेखांकित करती है।

विकी कौशल, टूटी-फूटी अंग्रेजी के साथ हिंदी और पंजाबी बोलने वाले दृढ निश्चयी उधम सिंह के रूप में काफी दमदार नज़र आते हैं। बनिता संधू एक मूक पंजाबी लड़की के छोटे रोले में ठीक जमती हैं। जलियांवाला बाग़ जैसी निर्मम घटना को अंजाम देने वाले क्रूर एवं बेरहम जनरल रेगीनाल्ड डायर, और लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ ड्वायर के किरदार में क्रमशः एंड्रू हॉल व शॉन स्कॉट ने अच्छी अदाकारी का परिचय दिया है। टॉम हड्सन अभिनीत विंस्टन चर्चिल के साथ यह तिकड़ी बेहतरीन संवाद और अभिव्यक्ति के माध्यम से ब्रिटिश साम्राज्यवाद के निर्दयी और दम्भी रूप को सामने लाती है। ब्रिटिश हुकूमत ने भरसक प्रयास किया कि सिंह को दुनिया एक क्रांतिकारी के रूप में न जान पाए, बल्कि उन्हें मात्र एक हत्यारा घोषित कर दिया जाये। अपनी आखिरी इच्छा स्वरूप,  उधम सिंह जांच अधिकारी से यह कहते हुए नज़र आते हैं कि वह दुनिया को बस इतना बता दें कि वे एक क्रांतिकारी थे।

फिल्म ब्रिटिश सरकार के इस दमनकारी रूप के साथ उसके दोहरे मानदंडों को भी बखूबी चित्रित करती है। जहाँ एक तरफ ब्रिटिश सरकार दुनिया को सभ्य बनाने का दम भरती है,  वहीं दूसरी ओर उधम सिंह को लंबी अमानवीय यातना भी देती है।

यहाँ यह कहना अतिश्योक्ति न होगी कि फिल्म की सिनेमाटोग्राफी और संगीत अव्वल दर्ज़े का जान पड़ता है, जो कई मौकों पर हृदय द्रवित कर जाता है। शुरुआत के एक दृश्य में जहाँ सिंह, कठोर बर्फीले वातावरण को अकेले पार कर रहे होते हैं, वहां ज़रूर सांकेतिक रूप से प्रतिकूल राजनैतिक माहौल में उनके कठिन एकल प्रयास को दर्शाया गया है। जिस त्रासदी को शब्दों में बयां करना नामुमकिन हो, उसे शायद बस दृश्यों के माध्यम से ही प्रदर्शित किया जा सकता है।

शूजित सरकार ने जलियांवाला बाग़ की दर्दनाक एवं हृदयविदारक घटना को दर्शाने में पूरा न्याय किया है। फिल्म में यह लम्बा अनुक्रम दर्शकों को अंदर तक झकझोर जाता है। एक-एक दृश्य में इस दुःखद घटना के हर पहलू को चित्रित करने का उच्चतम प्रयास किया गया है।

निर्देशक ने निश्चित ही एक ऐतिहासिक किरदार के जीवन के अनछुए पहलुओं को दर्शाने  के लिए गहरा शोध किया है। फिल्म यह भली प्रकार से दिखाती है कि उधम सिंह, सिर्फ बदले की भावना से प्रेरित एक जोशीले नौजवान नहीं अपितु राजनीति की ठोस समझ रखने वाले कर्मठ कार्यकर्ता थे। वे समाजवादी विचारों से प्रेरित व्यक्ति थे जो श्रमिक वर्ग के अधिकारों को ले कर सचेत था। उन्होंने भारत की स्वाधीनता हेतु मदद जुटाने के लिए विभिन्न देशों का दौरा भी किया, इस दौरान वे उदय सिंह, शेर सिंह और फ्रैंक ब्राज़ील आदि छद्म नामों से जाने जाते रहे।

हालाँकि फिल्म में कुछ ऐसे दृश्य भी हैं जो ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित नहीं किये जा सकते। फिल्म शहीद भगत सिंह से उधम सिंह की मित्रता 1927 में दर्शाती है, जबकि दोनों की मुलाकात मियांवाली जेल में 1930 में हुई। फिल्म उधम सिंह के गदर पार्टी के साथ संबंधों को दर्शाती नज़र नहीं आती, जबकि 1919 के बाद से उनके सक्रिय राजनैतिक कार्यकर्ता बनने में गदर पार्टी का अहम योगदान है। फिल्म में 1919-1927 के उधम सिंह के जीवन के आठ साल की कहानी भी लुप्त है, यह वो दौर था जब वो अमेरिका में गदर पार्टी के एक महत्त्वपूर्ण कार्यकर्ता के तौर पर उभरे। वहां रहते हुए उन्होंने गदर साहित्य के अध्ययन किया। उनको पार्टी में नए सदस्य भर्ती करने और चंदा इकठ्ठा करने की ज़िम्मेदारी दी गई, जिसको उन्होंने बखूबी निभाया। उधम सिंह, ग़दर आंदोलन की  उस धारा से जुड़े थे जो कम्युनिस्ट इंटरनेशनल से व्यावहारिक-वैचारिक रिश्ते रखता था और भारत में सशस्त्र जनक्रांति करने की ओर प्रयासरत था। चूंकि अमेरिका में वे एक गैरकानूनी अप्रवासी थे और साथ ही साथ गदरी क्रांतिकारी,  इसलिए वे हमेशा ही पुलिस के निशाने पर रहते थे| इससे बचने के लिए उनको कई बार नौकरियां, रहने का स्थान और अपना नाम बदलना पड़ा। उधम सिंह 1919 से पहले ब्रिटिश आर्मी में मज़दूर के रूप में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत से बाहर भी सेवारत रह चुके थे। फिल्म इन पहलुओं को शायद समयाभाव के चलते नहीं दर्शा पाई।

‘पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं’ के भाव को फिल्म में एक संवाद के ज़रिये बखूबी दिखाया गया है। किर्स्टीन एवर्टन द्वारा अभिनीत आयिलीन पाल्मर, उधम सिंह से कहती है कि वे दुनिया भर के लोगों के हक़ की लड़ाई में क्यों शामिल नहीं हो जाते। जिसके जवाब में वे कहते हैं कि, पाल्मर के लिए ये समझना ज़रूरी है कि वे गैर बराबरी का सामना नहीं कर रही। उन्हें उनके देश में पूरे अधिकार प्राप्त हैं जिनसे  भारतीय नागरिक पूरी तरह वंचित हैं। अतः सिंह की लड़ाई पहले आत्मसम्मान और समानता पाने की है, जो हर व्यक्ति का जन्म सिद्ध अधिकार है। फिल्म अति भावनात्मक ढंग से उधम सिंह की अभिव्यक्ति की आज़ादी पाने की ललक ललक दर्शाती है। एक दृश्य में वे इस विषय पर एक लम्बा संवाद बोलते हुए अपने मनोभाव व्यक्त करते हैं।  उनके ग़ुलाम होने की बेबसी एवं स्वतंत्रता पाने के उनके उद्देश्य की दृढ़निश्चियता को विकी कौशल ने पर्दे पर बखूबी निभाया है।

फिल्म के आखिर दृश्य में उधम सिंह पवित्र जल में डुबकी लगा कर शरीर पर लगे दाग धुलते हैं, ठीक उसी प्रकार प्राणोत्सर्ग कर के उन्होंने अपने ऊपर लगे गुलामी के दाग को धो लिया। वह फिल्म में कई बार यह ज़िक्र करते हैं कि पराधीन देश में वो स्वेच्छा से नहीं जी सकते। फिल्म इस बिंदु को भली-भांति दर्शाती है कि उनके उद्देश्य की पूर्ति ही उन्हें अंततः स्वतंत्र कर देती है।

(लेखक हर्षवर्धन और अंकुर गोस्वामी स्कूल ऑफ सोशल साइंस, जेएनयू के शोधार्थी हैं।)

Sardar Udham
Sardar Udham Movie
Vicky Kaushal
Sardar Udham Singh Review

Related Stories


बाकी खबरें

  • kisan
    विजय विनीत
    ग्राउंड  रिपोर्टः रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के गृह क्षेत्र के किसान यूरिया के लिए आधी रात से ही लगा रहे लाइन, योगी सरकार की इमेज तार-तार
    17 Jan 2022
    EXCIUSIVE: उत्तर प्रदेश के चंदौली में डीएपी के बाद अब यूरिया के लिए हाहाकार मचा हुआ है। 266.5 रुपये वाली यूरिया 400 से 500 में भी नहीं मिल रही है। यह हाल उस जिले का है, जिसे धान के कटोरे का रुतबा…
  • Lucknow university
    असद शेख़
    कैंपस से: यूपी के छात्रों के क्या हैं मुद्दे, किसे देंगे अपना वोट?
    17 Jan 2022
    स्वतंत्र युवा पत्रकार असद शेख़ ने न्यूज़क्लिक के लिए उत्तर प्रदेश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं से उनके मुद्दों और विधानसभा चुनाव के बारे में बात की।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में लगातार चौथे दिन ढाई लाख से ज़्यादा नए मामले
    17 Jan 2022
    स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा आज सोमवार, 17 जनवरी को जारी आंकड़ों के अनुसार देश में लगातार चौथे दिन भी कोरोना के ढाई लाख से ज़्यादा यानी 2,58,089 नए मामले सामने आए हैं।
  • akhilesh and yogi
    सुबोध वर्मा
    क्या यूपी सरकार से भाजपा के बाहर होने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है?
    17 Jan 2022
    सत्तारूढ़ भाजपा गठबंधन, जिसके खाते में 403 में से 326 सीटें आई थीं, वह आगामी चुनाव हार सकता है – जोकि पूरी तरह से संभव है यदि सपा गठबंधन के पक्ष में 4-5 प्रतिशत वोटों की बढ़ोतरी का रुझान होता है।
  • punjab
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाब : मुख्यमंत्री चेहरों की घोषणा इतनी मुश्किल क्यों ?
    16 Jan 2022
    पंजाब की जनता क्या चाहती है? इस 2022 विधान सभा चुनावों में एक तरफ आम आदमी पार्टी की तेज़ पकड़ है और दूसरी तरफ़ बीजेपी और कांग्रेस अपने दांव अलग खेल रही है। देखिये वरिष्ठ पत्रकार नीलू व्यास का पंजाब…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License