NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
व्यंग्य : इमेज बड़ी चीज़ है!
"लगता है विश्व गुरु का ढोल मोदी जी ने कुछ ज़्यादा ज़ोर से ही पीट दिया। बेचारा ढोल ही फट गया और उसमें से अब बिना पीटे ही मदद की गुहार निकल रही है। अब तेरा क्या होगा री विश्व गुरु की इमेज!"
राजेंद्र शर्मा
02 May 2021
modi

सुप्रीम कोर्ट, तुम भी! मोदी जी के न्यू इंडिया के सुप्रीम कोर्ट से कम से कम ऐसी उम्मीद नहीं थी। कह रहे हैं कि सोशल मीडिया पर अस्पताल में बैड, आक्सीजन, रेमडेसिविर वगैरह की गुहार लगाने वालों पर, कोई सरकार कोई मामला/मुकद्दमा नहीं चलाएगी। और बात सिर्फ़ यह कहने तक ही रहती तो फिर भी गनीमत थी। सबसे बड़ी अदालत है, राष्ट्रपति की कुर्सी नहीं कि हमेशा म्यूट बटन ही दबा रहे। उसका कभी-कभार सरकार को सलाह देना तो बनता ही है। पर अदालत ने तो हुक्म दे दिया कि अगर किसी सरकार ने ऐसी किसी गुहार के ख़िलाफ़ कार्रवाई की, तो उसे अदालत की अवमानना का दोषी माना जाएगा। बंदर घुड़की ही सही, पर अदालत ने हुक्म तो दिया ही है।

कोरोना के मारे मोदी जी को कैसे-कैसे दिन देखने पड़ रहे हैं? न्यू इंडिया में भी उनके सिवा किसी और ने हुक्म चलाने की न सही, पर हुक्म देने की तो कोशिश की ही है। फिर भी तुषार मेहता चुनौती देना तो दूर, इस पर ज़ोरदार आपत्ति तक नहीं कर पाए। कहाँ तो उनकी सरकार अदालत का इतना सम्मान कर रही है कि उसे हुक्म तक सुनाने दे रही है। और कहां देश तो देश; विदेश तक में दुश्मनों ने ऐसी इमेज बना दी है कि न्यू इंडिया में न न्यायपालिका, न चुनाव आयोग, न संसद, मोदी जी के सिवा और किसी के मुंह में ज़ुबान ही नहीं रहने दी गयी है।

इमेज से याद आया, योगी जी भी चाहे कहें न कहें, बोबड़े साहब के जाते ही सुप्रीम कोर्ट से ग़लती हो गयी है। सुप्रीम कोर्ट से यह उम्मीद नहीं थी कि वह मीडिया में हर जगह आ रही आक्सीजन, दवाओं, बैड वगैरह-वगैरह की कमी की अफ़वाहों में बह जाएगा और सरकार जो सब ठीक-ठीक होने का वैकल्पिक सच दिखा रही है, उसे हल्के में ले जाएगा। वर्ना जब योगी जी, खट्टर जी, शिवराज जी, रूपानी जी आदि जी लोगों से लेकर हर्षवर्द्धन तक बार-बार कह रहे हैं कि न बैड की, न आइसीयू/ वेंटीलेटर, न आक्सीजन, न रेमडेसिविर, किसी भी चीज की कहीं कोई कमी नहीं है, तब क्या अदालत की भी जिम्मेदारी नहीं बनती थी कि इसी समानांतर सचाई पर विश्वास करे कि कहीं कोई कमी नहीं है। जब सरकार आंखें बंद कर सकती है, तो अदालत को ही आंखें फाड़-फाडक़र चारों तरफ देखने की क्या जरूरत थी। और अगर कोई कमी ही नहीं है, तो मदद की गुहार चाहे कितनी ही भावुक क्यों न हो, जैनुइन कैसे मानी जा सकती है। 

ये मदद की गुहारें नहीं हैं, ये तो मोदी जी से लेकर योगी जी आदि सभी जी लोगों तक, सरकारों को बदनाम करने की, नये इंडिया की इमेज खराब करने की साजिश की कडिय़ां हैं। पब्लिक का जीना-मरना तो लगा ही रहता है, पर इमेज बड़ी चीज है। सुप्रीम कोर्ट को मदद की गुहार ही सुननी थी तो, सरकार की इमेज बचाने की गुहार सुननी चाहिए थी। रही बात अस्पतालों के गलियारों, दरवाजों पर, एंबुलेंसों में, फुटपाथों पर, आक्सीजन सिलेंडर की लाइन में, घरों पर, आक्सीजन के इंतज़ार में, एक-एक सांस के लिए तड़प-तड़प कर जान देने वालों की तो, सरकार सब कुछ पहुंचाने के बावजूद, हर किसी से उसका इस्तेमाल तो नहीं करा सकती है। सारी सुविधाएं होते हुए भी कोई तड़प-तड़पकर अपनी जान देना चाहे तो सरकार क्या कर सकती है? अब तो आत्महत्या को अपराध मानने वाला क़ानून भी नहीं रहा। आख़िर, मुल्क में डैमोक्रेसी जो है। आत्महत्या क़ानून का डर तो रहा नहीं, इसलिए भी मोदी जी के न्यू इंडिया को बदनाम करने के लिए लोग मरने से पहले तड़प कर दिखा रहे हैं। और तो और मुर्दाघाटों/ कब्रिस्तानों में लाइनें लगाकर, तस्वीरें भी खिंचा रहे हैं। छप्पन इंच वालों की सरकार, एंटीनेशनलों के ऐसे षडयंत्रों को होते कैसे देखती रहे? पर सुप्रीम कोर्ट को कैसे समझाएं! कोरोना की सुनामी में न्यू इंडिया की इमेज को अकेले मोदी जी कैसे बचाएं! 

और जब ख़ुद अपने देश के अंदर, न्यू इंडिया की इमेज ख़राब करने के ऐसे षडयंत्रों को रोकने से सरकारों को रोका जा रहा है, तो देश के बाहर ऐसे भारतविरोधी षडयंत्रों को रोकने का तो सवाल ही कहां उठता है।

दुनिया भर में जिसका जो मन हो रहा है छाप रहा है। जिसका जो जी कर रहा है दिखा रहा है--कोई जलती चिताओं की तस्वीरें तो, कोई श्मशान में अर्थियों की लाइनें। आस्ट्रेलिया के एक अखबार ने तो इसे मोदी जी की प्रलय ही बता दिया। बेचारे भारतीय हाई कमीशन ने टोका भी कि क्या करते हो तो पट्ठों ने अगले दिन और सख्त हैडलाइन लगा दी। बेचारा विदेश विभाग भी मन मारकर बैठ गया है। नतीजा यह है कि कहां तो दुनिया भर में मोदी जी के न्यू इंडिया की कामयाबियों का डंका बजना था और कहां मुसीबत में मदद की मुनादी हो रही है। इंग्लेंड-अमरीका की बात तो फिर भी समझ में आती है, चीन-जापान की बात भी मान ली, पर यहां तो अफगानिस्तान और पाकिस्तान तक, और बाकी छोड़ दो तो भूटान तक मदद का हाथ बढ़ा रहे हैं और विदेश मंत्रालय को धन्यवाद देना पड़ रहा है।

जब देश के सुप्रीम कोर्ट को नहीं समझा सकते कि मरने वाले झूठ बोल रहे हैं, तो दूसरों को कैसे समझाएं कि तस्वीरें झूठ बोल रही हैं। अगर तस्वीरें सच बोल रही हैं तो उन्हें कैसे समझाएं कि हमें फिर भी किसी की मदद की ज़रूरत नहीं है। सारी अकड़ छोड़कर मदद लेनी पड़ रही है। लगता है विश्व गुरु का ढोल मोदी जी ने कुछ ज़्यादा ज़ोर से ही पीट दिया। बेचारा ढोल ही फट गया और उसमें से अब बिना पीटे ही मदद की गुहार निकल रही है। अब तेरा क्या होगा री विश्व गुरु की इमेज!

Satire
sarcasm
Narendra modi
Vishvaguru
Coronavirus
COVID-19

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • शर्मनाक: अब धमकी की भाषा पर उतर आई है बीजेपी!
    मुकुल सरल
    शर्मनाक: कार्टून नहीं, किसानों को बीजेपी की खुली धमकी!
    30 Jul 2021
    यह कार्टून देखिए। यह बीजेपी उत्तर प्रदेश के ऑफिशयल ट्विटर हैंडल पर 29 जुलाई को प्रसारित किया गया और अभी तक बरकरार है। इसे देखकर कोई भी कह सकता है कि यह सीधे-सीधे किसान नेता राकेश टिकैत को धमकी है।
  • बैंक निजीकरण से धन्नासेठों को फायदा
    न्यूज़क्लिक टीम
    बैंक निजीकरण से धन्नासेठों को फायदा
    30 Jul 2021
    52 साल पहले बड़े निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था। अब इन्ही बैंकों को वापस प्राइवेट सेक्टर को बेचने की तैयारी की जा रही है। इससे सिर्फ बड़े कॉर्पोरेट घरानों और धन्नासेठों को फायदा होगा
  • इज़रायली सैनिकों ने क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में एक अन्य फ़िलिस्तीनी युवक की हत्या की
    पीपल्स डिस्पैच
    इज़रायली सैनिकों ने क़ब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में एक अन्य फ़िलिस्तीनी युवक की हत्या की
    30 Jul 2021
    20 वर्षीय शौकत अवाद को उस समय गोली मारी गई जब इज़रायली सैनिकों ने 12 वर्षीय मोहम्मद अल-अलामी के अंतिम संस्कार में भाग लेने वाले लोगों पर गोलियां चलाई थीं। अलामी को इन सैनिकों ने एक दिन पहले गोली मार…
  • रियो टिंटोस द्वारा बड़े पैमाने पर खनन निविदा के ख़िलाफ़ सर्बिया में विरोध प्रदर्शन तेज़
    पीपल्स डिस्पैच
    रियो टिंटोस द्वारा बड़े पैमाने पर खनन निविदा के ख़िलाफ़ सर्बिया में विरोध प्रदर्शन तेज़
    30 Jul 2021
    पर्यावरण समूहों, प्रगतिशील राजनीतिक समूहों और स्थानीय लोगों के समूह ने पूरे सर्बिया से लिथियम समृद्ध जादराइट अयस्क के बड़े पैमाने पर खनन के लिए खनन दिग्गज रियो टिंटो की योजनाओं के ख़िलाफ़ विरोध तेज़…
  • आमागढ़ क़िला: आदिवासी मीणा समुदाय और हिंदूवादी संगठन आमने-सामने
    अवधेश
    आमागढ़ क़िला: आदिवासी मीणा समुदाय और हिंदूवादी संगठन आमने-सामने
    30 Jul 2021
    आमागढ़ जिसे आंबागढ़ भी कहा जाता है का क़िला मीणा समुदाय की अस्मिता से जुड़ा है लेकिन आज इसके साथ भगवे झंडे का विवाद भी जुड़ गया है, जिसे लेकर एक दूसरे को चुनौती दी जा रही है। इससे सामाजिक सौहार्द…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License