NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
ओये किसान, तू तो बड़ा चीटिंगबाज़ निकला!
कटाक्ष: बेचारे मोदी जी को साल भर, जी हां पूरे साल भर, इसके सब्ज़बाग़ दिखाए कि बस, तीन कानूनों की वापसी की ही बात है। तीन कानून बस। इधर कानून वापस हुए और उधर बार्डर खाली, लेकिन...
राजेंद्र शर्मा
27 Nov 2021
kisan andolan

देखा, देखा, किसान कैसा चीटिंगबाज निकला। और चीटिंग भी किस के साथ? विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता के साथ चीटिंग। बेचारे मोदी जी को साल भर, जी हां पूरे साल भर, इसके सब्जबाग दिखाए कि बस, तीन कानूनों की वापसी की ही बात है। तीन कानून बस। इधर कानून वापस हुए और उधर बार्डर खाली। अरे, कानून वापस होने तक भी इंतजार कौन करेगा? नाहक दिल्ली की सर्दी में कोई तंबुओं में क्यों मरेगा? बस मोदी जी एक बार कानून वापस लेने का एलान कर दें, सारा झगड़ा ही खत्म हो जाएगा।

मोदी जी ने शंका भी जतायी कि और मांगें भी थीं, उनका क्या? जो अन्नदाता दिल्ली की सर्दी, गर्मी और बारिश झेलकर, बार्डरों पर डटे रहे हैं, सिर्फ कानून वापस लेने से कैसे उठ जाएंगे? पहली मांग पूरी हो भी गयी, तो क्या दूसरी मांगों के लिए जोर नहीं लगाएंगे? पर इन किसानों ने फेक न्यूज फैला-फैलाकर कानून वापसी का इतना शोर मचा दिया कि मोदी जी जैसा यशस्वी पीएम भी इनके झांसे में आ गया। न किसी से कोई बात की, न किसी से कोई वादा लिया, त्योहार की सुबह दन्न से टीवी पर एलान कर दिया- “कृषि कानून वापस!”

वैसे इसमें मोदी जी की भी गलती नहीं है। वह किसानों से प्यार ही इतना ज्यादा करते हैं, इतना ज्यादा करते हैं कि किसान के लिए अन्नदाता छोडक़र दूसरा कोई शब्द उन्होंने अपनी जुबान पर आने ही नहीं दिया। उनके नजदीकी सहयोगियों तक ने खालिस्तानी, आतंकवादी, मवाली, एंटीनेशनल, पाकिस्तानी-चीनी एजेंट, निकम्मे, मुफ्तखोर, धनपति, विदेशी पैसों से, विदेशी टूलकिट से संचालित, वगैरह-वगैरह, क्या-क्या नहीं कहा! पर मजाल है मोदी जी ने कभी उनके लिए अन्नदाता के सिवा कोई दूसरा शब्द जुबान पर आने दिया हो।

बेशक, बहुत थोड़े से कहा, बहके हुए कहा, अपना भला खुद न समझ पाने वाले कहा, पर मजाल है जो कभी अन्नदाता से हल्का कोई शब्द अपनी जुबान पर आने दिया हो। सच तो यह है कि किसानों का बार्डर पर एक-एक दिन बैठना, उनकी नींद पर भारी पड़ रहा था। सो किसानों को दिल्ली के बार्डरों से वापस भेजने की सदिच्छा ने बेचारे का सावधानी का फिल्टर हटवा दिया और मोदी जी को सहजविश्वासी बना दिया। 

इस हाथ दें के साथ, उस हाथ लें का ख्याल तो, मोदी जी के मन में आया ही नहीं। अन्नदाता के लिए उनका प्यार एकदम्मे इकतरफा जो था। कानून की वापसी दी भी तो कोई मामूली सी शर्त तक नहीं लगायी। वापसी पर दु:ख भी जताया, तो किसी को दोष नहीं दिया। विरोध में आंदोलन करने वालों को तो बिल्कुल ही नहीं। उल्टे सारा दोष अपने ऊपर, अपनी तपस्या में कोई कमी रह जाने पर ही ले लिया। शिवजी बनकर सारा गरल खुद ही पी लिया। पर अन्नदाता कहलाने वालों से उन्हें क्या मिला? सिर्फ धोखा।

सावधानी हटी और दुर्घटना घटी। न माया मिली न राम। कृषि कानून भी हाथ से गए यानी अडानियों-अंबानियों के दस-बीस फीसद चुनावी बांडों की माया तो हाथ से फिसली ही फिसली समझो। और जब तक देश में चुनाव चल रहा है, तब तक तो वोट ही राम है और श्याम भी, लेकिन वोट हाथ आने का तो कोई जिक्र तक नहीं है। जब दिल्ली के बार्डर तक खाली नहीं हुए, तब ऑपरेशन यूपी, ऑपरेशन उत्तराखंड, ऑपरेशन पंजाब वगैरह के वापस लिए जाने का तो, सवाल ही कहां उठता है!

उल्टे चीटरबाज किसान अब तो सुर बदलकर ऐसे बात कर रहे हैं, जैसे तीन कानूनों की वापसी तो रूंगे में ही हो। जैसे शुरू से उनकी असली मांग तो एमएसपी की कानूनी गारंटी की रही हो; उनकी असली मांग तो अब भी ज्यों की त्यों खड़ी ही हो। जब तक एमएसपी का कानून नहीं, तब तक घर वापसी नहीं! खैर! अन्नदाताओं से इकतरफा मोहब्बत अपनी जगह, मोदी जी अब दोबारा किसानों के झांसे में हर्गिज नहीं आएंगे। नये कानून हटाने की तरह, किसी के कहने से एमएसपी का कानून हर्गिज नहीं बनाएंगे। इकतरफा मोहब्बत के चक्कर में ही सही दोबारा जगहंसाई क्यों कराएंगे? आखिरकार, मोदी जी की इस इकतरफा मोहब्बत से ठेस लगने से जिन हजारों भक्तों के दिल टूटे हैं, उनसे मोदी जी को क्या-क्या नहीं सुनना पड़ा है और वह भी सात साल में पहली बार।

इसके ताने और दिए जा रहे हैं कि और जो कुछ भी किया है, उसे भी वापस ले लो? सीएए-एनआरसी, धारा-370, जीएसटी, एअरइंडिया समेत सार्वजनिक कंपनियों की बिक्री, सवर्ण आरक्षण, चार लेबर कोड, अडानी जी का अंबानी को पीछे छोड़कर एशिया में पहला नंबर, तेल पर बढ़े हुए कर, हरेक मंत्रालय में नागपुरी निगरानी यूनिट, रेलवे का निजीकरण, हबीबगंज से लेकर मुगल सराय, फैजाबाद तक, रेलवे स्टेशनों के नये नाम, अहमदाबाद का मोदी स्टेडियम, रफाल, पेगासस, गोरक्षा, लव जेहाद, भीमा कोरेगांव केस, वगैरह सब कुछ! यूएपीए, एनएसए, सेडीशन के मामलों और उनमें गिरफ्तारियों की खेती भी। और कारपोरेट यारों से बिना कहे इशारों में जो बहुत टैम तक सुनना पड़ेगा, उसका तो हम अंदाजा भी नहीं लगा सकते हैं। अडानी जी को महामारी को अवसर बनाकर एशिया में नंबर वन बनवा जरूर दिया है, पर इससे उनका खेती वाला मलाल खत्म होने वाला नहीं है। सो मोदी जी कम से कम दोबारा वही गलती नहीं करेंगे और एमएसपी कानून पर कंप्रोमाइज कत्तई नहीं करेंगे। बैठे रहें किसान बार्डरों और दो साल, मोदी जी का अपना चुनाव तो उससे भी आगे है।

और किसानों की इस चीटिंग को मोदी जी भूल भी जाएं, पर अपनी ‘‘माफी’’ की बेइज्जती कभी नहीं भूल पाएंगे। बताइए, ऐसा भी कोई करता है क्या कि किसानों का ख्याल कर के मोदी ने किसी भी गलती के लिए कभी माफी नहीं मांगने का अपना बीस साल का अपना रिकार्ड खुद अपनी जुबान से तोड़ दिया और किसान फिर भी माफी देना तो दूर, इसी पर हुज्जत कर रहे हैं, उनसे तो कोई माफी मांगी ही नहीं गयी! माफी तो देश उर्फ अडानी-अंबानी से मांगी है और वह भी इसके लिए कि थोड़े से किसानों को यह नहीं समझा सके कि हाथी के पांव में सब का पांव, उनका फायदा यानी राष्ट्र का फायदा! मोदी जी की माफी का ऐसा अपमान, नहीं सहेगा न्यू इंडिया! इस अन्याय के लिए मोदी जी इन किसानों को कभी माफ नहीं करेंगे। वोट के लिए अगर कभी मुंह से माफ करना भी पड़ा, तब भी दिल से तो माफ कभी नहीं करेंगे।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और लोकलहर के संपादक हैं।)

ये भी पढ़ें: कटाक्ष : भक्तों के बीच “थैंक्यू मोदी जी!” का नया शिड्यूल घोषित

Satire
Political satire
kisan andolan
farmers protest
Farm Laws Repealed
Narendra modi
SKM
MSP

Related Stories

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

छोटे-मझोले किसानों पर लू की मार, प्रति क्विंटल गेंहू के लिए यूनियनों ने मांगा 500 रुपये बोनस

अगर फ़्लाइट, कैब और ट्रेन का किराया डायनामिक हो सकता है, तो फिर खेती की एमएसपी डायनामिक क्यों नहीं हो सकती?

ज़रूरी है दलित आदिवासी मज़दूरों के हालात पर भी ग़ौर करना

मई दिवस: मज़दूर—किसान एकता का संदेश

ब्लैक राइस की खेती से तबाह चंदौली के किसानों के ज़ख़्म पर बार-बार क्यों नमक छिड़क रहे मोदी?

किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़

ग्राउंड रिपोर्टः डीज़ल-पेट्रोल की महंगी डोज से मुश्किल में पूर्वांचल के किसानों की ज़िंदगी

MSP पर लड़ने के सिवा किसानों के पास रास्ता ही क्या है?

सार्वजनिक संपदा को बचाने के लिए पूर्वांचल में दूसरे दिन भी सड़क पर उतरे श्रमिक और बैंक-बीमा कर्मचारी


बाकी खबरें

  •  लखीमपुर हिंसाः SIT रिपोर्ट सही, कब तक दागी मंत्री को बचाएगी सरकार- अशोक
    न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
    लखीमपुर हिंसाः SIT रिपोर्ट सही, कब तक दागी मंत्री को बचाएगी सरकार- अशोक
    15 Dec 2021
    लखीमपुर हिंसा मामले में SIT की रिपोर्ट ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को मुख्य साज़िशकर्ता बताया है. ऑल इंडिया किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक धवले ने…
  • Varun singh
    भाषा
    वायु सेना हेलीकॉप्टर दुर्घटना: घायल ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह का निधन
    15 Dec 2021
    8 दिसंबर को हुए इस हादसे में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और 11 अन्य सैन्य कर्मियों की जान चली गई थी। हादसे में गंभीर रूप से घायल वरुण सिंह का उपचार जारी था।
  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लखीमपुर खीरी कांड: गृह राज्य मंत्री टेनी दिल्ली तलब
    15 Dec 2021
    दिल्ली से लेकर यूपी तक, लोकसभा से लेकर विधानसभा तक आज इस मामले की गूंज रही और टेनी के बर्ख़ास्तगी/इस्तीफ़े की मांग की जाती रही। इसी दौरान मंत्री जी द्वारा मीडिया से बदसुलूकी का वीडियो भी वायरल हो गया…
  • gujarat
    आदित्य गुजराती
    गुजरात में आख़िर लाभ-साझाकरण वाली धनराशि कहां जा रही है?
    15 Dec 2021
    गुजरात जैव-विविधता बोर्ड के क्रूर शासन ने भारत की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के साथ-साथ जैविक विविधता अधिनियम, एवं 2014 के एबीएस नियम-कानूनों के पूरे उद्देश्य को ही विफल कर दिया है।
  • सोनिया यादव
    गुजरात: सरकारी आंकड़ों से कहीं ज़्यादा है कोरोना से मरने वालों की संख्या!
    15 Dec 2021
    सुप्रीम कोर्ट में गुजरात सरकार अपने ही हलफनामे से झूठी साबित हुई है। अब सरकार ने खुद आधिकारिक तौर पर इस बात को स्वीकार कर लिया है कि राज्य में कोरोना से मरने वालों की जितनी गिनती की गई थी, असली…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License