NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
सऊदी महिला अधिकार कार्यकर्ता लुजैन ने परिवार से मिलने को लेकर भूख हड़ताल की
लुजैन और अन्य क़ैदियों को सऊदी के जेल अधिकारियों की ओर से बहुत क्रूर और सख्त प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। ये अधिकारी क़ैदियों के क़ानूनी और मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन करते हुए महीनों से उनको अपने परिवार के सदस्यों से संपर्क करने की अनुमति नहीं दे रहे हैं।
पीपल्स डिस्पैच
29 Oct 2020
SA

पिछले तीन वर्षों से सऊदी सरकार के अधिकारियों द्वारा क़ैद प्रमुख महिला अधिकार कार्यकर्ता लुजैन अल-हथलौल ने अपने परिवार लगातार मिलने की अनुमति न देने पर जेल अधिकारियों के फैसले के विरोध में अपना भूख हड़ताल फिर से शुरु किया है। ये ख़बर मिड्ल ईस्ट मॉनिटर ने बुधवार 28 अक्टूबर प्रकाशित किया है।

90 दिनों से अधिक समय तक टेलीफोन के माध्यम से उनके परिवार के सदस्यों से संपर्क करने से अल-हैर जेल के प्रशासद द्वारा रोकने के बाद सितंबर में हथलौल ने लगभग एक सप्ताह के लिए भूख हड़ताल किया था। सितंबर में इस हड़ताल के चलते उनका सेहत दिन प्रतिदिन बिगड़ रहा था जिसके बाद उनकी सेहत की चिंता को लेकर ये भूख हड़ताल समाप्त हुआ।

लुजैन के परिवार के सदस्यों के अनुसार जब उनके माता-पिता इस सप्ताह सोमवार को उनसे मिलने जेल गए थे तो उन्होंने उनको भूख हड़ताल फिर शुरु करने के बारे में उन्हें बताया था। लुजैन की बहन लीना ने एक ट्वीट में कहा, "कल मिलने के दौरान लुजैन ने माता-पिता से कहा कि वह दुर्व्यवहार से परेशान हो गई है और उन्हें अपने परिवार की आवाज़ सुनने से महरुम किया गया। उन्होंने उन्हें बताया कि वह कल शाम से भूख हड़ताल शुरू कर देंगी जब तक वे उन्हें नियमित रूप से बात करने की अनुमति नहीं देते।”

अति-रूढ़िवादी सऊदी सरकार ने कोरोनावायरस महामारी के बहाने का इस्तेमाल करते हुए, निरंतर मनुष्य से मनुष्य के संपर्क वाली बीमारी के फैलने के ख़तरे का हवाला देते हुए कथित तौर पर सबसे हाई प्रोफ़ाइल और अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान वाले क़ैदियों और उनके परिवारों के बीच मिलने जुलने पर सख्त पाबंदी लगाने का फैसला किया था। हालांकि, चूंकि अधिकांश आम जन के लिए सामान्य प्रतिबंधों में ढील दी गई है, अधिकारियों ने प्रारंभिक लॉकडाउन और प्रतिबंधों के शुरुआती कुछ महीनों में कारण बताया कि ऐसा लगता है कि यह तथ्य से मेल नहीं खाता है। लुजेन के अलावा, कई अन्य क़ैदियों को भी उनके परिवारों से दूर कर दिया गया है और अभी भी उनसे संपर्क करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

विशेष रूप से लुज़ैन के मामले में सऊदी सरकार द्वारा उनके और अन्य क़ैदियों के लिए किए गए व्यवहार को लेकर दुनिया भर में निंदा और आलोचना की गई है। उनके मामले ने विभिन्न गंभीर मामलों को सामने लाया है कि कैसे सऊदी अधिकारियों ने देश के कई पिछड़े, आदिम और पुरानी प्रथाओं के ख़िलाफ़ बोलने वाले और बोलने की आज़ादी और अन्य सामाजिक, राजनीतिक व नागरिक अधिकार और सुधार की मांग करने वाले देश के कई नागरिकों पर अत्याचार किया और उन्हें अपमानित किया है।

सऊदी अधिकारियों ने ड्राइविंग प्रतिबंध के ख़िलाफ़ और गारिजयनशिप सिस्टम के ख़िलाफ़ उनके कई अभियानों के लिए लुजैन और अन्य नारीवादियों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं पर कड़ी कार्रवाई करते हुए उनमें से कई को अनिश्चित काल के लिए जेल में डाल दिया। सऊदी सरकार ने इन एक्टिविस्टों, इनके वकीलों और परिवारों को इनकी गिरफ्तारी और हिरासत के कारणों की भी जानकारी नहीं दी या न ही ये बताया कि उस समय उनके खिलाफ क्या आरोप लगाए जा रहे थे।

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और अन्य संगठनों के साथ-साथ यूरोप, यूके के अंतर्राष्ट्रीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल नियमित रूप से इस अपमानजनक व्यवहार की निंदा करते रहे हैं जो सऊदी अधिकारी लोगों पर कर रहे हैं। सरकार देश में ग़लत तरीक़े से क़ैद कर रही है।

Saudi Arab
saudi women's right
loujain
loujain hunger strike

Related Stories

यमन में एक बच्चा होना बुरे सपने जैसा है

फ़ारस की खाड़ी में बाइडेन की नीति

यमन के लोगों ने सऊदी के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया, युद्ध के लिए अमेरिका को दोषी ठहराया

इज़रायल के ख़िलाफ़ फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध आंदोलन की मदद करने पर सऊदी अदालत ने 69 लोगों को सज़ा सुनाई

दक्षिण अफ़्रीकी अदालत ने सऊदी अरब और यूएई को हथियारों के निर्यात के परमिट की न्यायिक समीक्षा का आदेश दिया

जॉर्डन में तख़्तापलट की कोशिशों ने छोड़े सबूत

सऊदी के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने यमन में होदेदाह बंदरगाह पर चार फ्यूल शिप को खड़ा करने की अनुमति दी

बहरीन में अरब विद्रोह की 10वीं वर्षगांठ के मौके पर विरोध-प्रदर्शन 

सऊदी महिला अधिकार कार्यकर्ता लुजैन अल-हथलौल को गुरुवार को जेल से रिहा किया जाएगा

सऊदी अरब को हथियारों की बिक्री को निलंबित करने के लिए ब्रिटेन पर दबाव बढ़ा


बाकी खबरें

  • bihar
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार में नवजात शिशुओं के लिए ख़तरनाक हुआ मां का दूध, शोध में पाया गया आर्सेनिक
    27 Feb 2022
    “बिहार के जिन 6 जिलों में मां के दूध में आर्सेनिक की मात्रा काफ़ी अधिक पाई गई है वहां की महिलाओं को इसके लिए अपने दूध की जांच कराना बहुत ज़रूरी है ताकि उनके बच्चे स्वस्थ और सुरक्षित रह सकें।”
  • inter faith
    काशिफ काकवी
    अंतर-धार्मिक विवाह: एक उच्च न्यायालय, दो एक जैसे मामले, लेकिन फ़ैसले अलग-अलग!
    27 Feb 2022
    एक मामले में जहाँ मध्य प्रदेश की अदालत पूरी तरह से एक अंतर-धार्मिक जोड़े के बचाव में आ गई, लेकिन इसी प्रकार के दूसरे मामले में, पूरा केस लड़की की भलाई पर एक पखवाड़े की रिपोर्ट के वास्ते लंबित है।
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में कौन आगे, कौन पीछे और यूक्रेन पर रूसी हमले का सच
    26 Feb 2022
    यूपी में मतदान के पांचवे चरण से ऐन पहले बडा सवाल है: चुनावी जंग में कौन आगे है और कौन पीछे? क्या होगा नतीजा? #HafteKiBaat के नये एपिसोड में यूक्रेन पर रूसी हमले का सच बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार…
  • delhi violence
    मुकुंद झा
    दिल्ली दंगों के दो साल: इंसाफ़ के लिए भटकते पीड़ित, तारीख़ पर मिलती तारीख़
    26 Feb 2022
    जिनके घर के कमाने वाले इस दंगे में मारे गए वो आज भी अपने लिए इंसाफ ढूंढ रहे हैं। इसी के लिए आज यानी 26 फरवरी 2022 को दंगा पीड़ितों, नागरिक समाज के लोगों, सीपीआई(एम) की दिल्ली कमेटी के आह्वान पर बहुत…
  • ukraine
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन अपडेट: कीव में सड़कों पर घमासान,लोगों से शरण लेने की अपील
    26 Feb 2022
    रूसी सैनिकों ने शनिवार तड़के यूक्रेन की राजधानी कीव में प्रवेश किया और सड़कों पर घमासान शुरू हो गया है, जबकि स्थानीय अधिकारियों ने लोगों से छुप जाने की अपील की है। इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License