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आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
देशव्यापी हड़ताल का दूसरा दिन, जगह-जगह धरना-प्रदर्शन
सुबह से ही मज़दूर नेताओं और यूनियनों ने औद्योगिक क्षेत्र में जाकर मज़दूरों से काम का बहिष्कार करने की अपील की और उसके बाद मज़दूरों ने एकत्रित होकर औद्योगिक क्षेत्रों में रैली भी की। 
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
29 Mar 2022
strike

आज यानी मंगलवार को देशव्यापी आम हड़ताल का दूसरा दिन है। केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने दो दिन की अखिल भारतीय हड़ताल का आह्वान किया था। आज भी कल की तरह ही मज़दूर अपने औद्दोगिक क्षेत्रों में गेटबंदी कर जुलूस निकाला जा रहा है। जबकि सरकारी और सर्विस सेक्टर के कर्मचारी ने कल अपने-अपने कार्यालय पर प्रदर्शन किया।

दूसरे दिन भी सभी कर्मचारियों ने अपने जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया। जबकि दिल्ली में संसद  के पास जंतर-मंतर पर  बैंक, एलआईसी, पोस्टल, जल बोर्ड के कर्मचारी और स्कीम वर्कर और बाकी अन्य कर्मचारी और नागरिक समाज के लोग  शामिल होंगे। यहीं पर सभी ट्रेड यूनियन के केंद्रीय नेतृत्व के नेता शामिल होंगे।

सुबह से ही मज़दूर नेताओं और यूनियनों ने औद्योगिक क्षेत्र में जाकर मज़दूरों से काम का बहिष्कार करने की अपील की और उसके बाद मज़दूरों ने एकत्रित होकर औद्योगिक क्षेत्रों में रैली भी की। 

देशभर में  सड़क परिवहन निगम की बसें सड़कों से नदारत रहीं, टैक्सी, ऑटो-रिक्शा और निजी बसें भी राज्यभर में नजर नहीं आईं।

10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों- इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी के मंच ने कर्मचारियों से ईपीएफओ की ब्याज दर में कमी, पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, केरोसिन और सीएनजी की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी, चार श्रम संहिताएं और राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन का विरोध करने का आह्वान किया है।

परिवहन, रेलवे, बिजली, बैंकिंग और बीमा, कोयला, इस्पात, तेल, दूरसंचार, डाक और आयकर में करोड़ों श्रमिकों ने, विशेष रूप से केरल, त्रिपुरा, तमिलनाडु, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और असम में- दो दिवसीय देशव्यापी आम हड़ताल में भाग लिया। 

सीटू की राष्ट्रीय सचिव एआर सिंधु ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, "अधिकांश राज्यों में औद्योगिक क्षेत्र बंद रहे। दिल्ली के सभी प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में हड़ताल प्रभावी रही।”

इस  हड़ताल में असंगठित क्षेत्र और  निर्माण मज़दूरों ने भी भाग लिया। लगातार सरकार असंगठित क्षेत्र के मजदूरों पर हमला कर रही है। 

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