NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की भयंकर कमी
इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड के मानकों के तहत ग्रामीण आदिवासी इलाकों में 4088 विषेशज्ञ होने चाहिए जिसमें 3560 (87%) स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी है, 70 हज़ार स्वास्थ्य कर्मचारी होने चाहिए जिसमें लगभग 22 हजार (32%) स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी है, डॉक्टरों की संख्या 4211 होनी चाहिए जिसमें 442 (10%) स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी है।
पुलकित कुमार शर्मा
25 Feb 2020
rural-hospita

प्रगति और विकास को बुनियादी सुविधाओं की स्थिति के जरिए ही मापा जा सकता है और देश की प्रगति को दूर- दराज और आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति के ज़रिये। इसलिए जब हम आदिवासी इलाकों की स्थिति को देखते हैं तो पता चलता है कि इन क्षेत्रों में शिक्षा, रोज़गार, बिजली, पानी की सुविधाएँ के साथ स्वास्थ्य की सुविधा भी बदतर हालत में हैं।  

आदिवासी क्षेत्रों में इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड के मानकों के अनुसार 3,000 लोगो पर एक सब सेंटर होना चाहिए। 20,000 लोगो पर एक प्राइमरी सेंटर और 80,000 लोगो पर एक कम्युनिटी हेल्थ सेंटर का प्रावधान है।
Picture1.jpg 
भारत के संविधान के तहत आदिवासियों को अनुसूचित जनजातियों के तौर पर मान्यता दी गई है। 2011 की जनगणना के तहत ग्रामीण आदिवासीयों की आबादी 94 मिलियन थी। हाल ही में हेल्थ मंत्रालय के तहत ग्रामीण आदिवासियों की अनुमानित आबादी 97 मिलियन है।  

इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैण्डर्ड के मानक के आधार पर कुल ग्रामीण आदिवासियों पर 32433 सब सेंटर होने चाहिए। जिसमें से तकरीबन 7054 (22%) सब सेंटर की कमी है। इसी प्रकार कुल ग्रामीण आदिवासियों की आबादी पर 4853 प्राइमरी हेल्थ सेंटर की जरूरत है, जिनमें लगभग 1204 (25%) प्राइमरी हेल्थ सेंटर की कमी है।

कुल ग्रामीण आदिवासियों की आबादी पर 1202 कम्युनिटी हेल्थ सेंटर होने चाहिए। जिनमें 326 (27%) कम्युनिटी हेल्थ सेंटर की कमी है।
Picture2_0.png

आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य कर्मचारियों की स्थिति

आदिवासी क्षेत्रों में डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मचारियों की भारी कमी है, जिसके कारण इन इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की बुरी हालत बनी हुई है। इन इलाकों के सब सेंटर, प्राइमरी हेल्थ सेंटर और कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में स्वास्थ्य कर्मचारियों की संख्या निम्नवत है।

- कुल 70 हज़ार स्वास्थ्य कर्मचारी होने चाहिए जिसमें लगभग 22 हजार (32%) स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी है।

- कुल डॉक्टरों की संख्या 4211 होनी चाहिए, जिसमें 442 (10%) स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी है।

- कुल 5233 फार्मासिस्ट होने चाहिए जिसमें 1104 (21%) स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी है।

- कुल 5233 लैब टैक्निशियन होने चाहिये जिसमें 2088 (40%) स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी है।  

- कुल 11365 नर्स स्टाफ होने चाहिये जिसमें 2038 (18%) स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी है।
 
- कुल 3335 आयूष चिकित्साक होने चाहिए जिसमें 981 (28%)स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी है।
 
- कुल 1290 दन्त शल्य चिकित्सक होने चाहिए जिसमें 850 (66%) स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी है।

- कुल 4088 विषेशज्ञ होने चाहिए जिसमें 3560 (87%) स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी है।

- कुल 2044 जी डी ऍम ओ होने चाहिये जिसमें 119 (6%) स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी है।

- कुल 1022 रेडियोग्राफ होने चाहिए जिसमें 619 (61%) स्वास्थ्य कर्मचारियों की कमी है।
       
 Picture 3.png

जन स्वास्थ्य आंदोलन के अग्रणी कार्यकर्ता  डॉ. सुंदररमन से खास बातचीत में उन्होंने बताया कि डॉक्टर बनने में बहुत ज्यादा पैसा लगता है। डॉक्टर बनने के बाद लोगो का ध्यान पैसा कमाने की ओर जाता है और आदिवासी इलाकों में पैसे की कमाई के साधन नहीं होते हैं। इसलिए ज्यादातर आदिवासी इलाकों में डॉक्टर के पद रिक्त होते है।

दूसरा कारण  शहरी लोगो का आदिवासी इलाकों और लोगो के प्रति लगाव नहीं होता है, जिसके कारण ज्यादातर डॉक्टर इन इलाकों में जाने से कतराते हैं इसलिए भी इन इलाकों में डॉक्टरों के पद रिक्त होते हैं।

इन समस्या से निपटने के लिए  स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए आदिवासीयों के बच्चों को शिक्षा देने की जरूरत हैं साथ ही शिक्षा और डॉक्टरों के पदों पर आरक्षण दिया जाना चाहिए।  

साथ ही सरकार को स्वास्थ्य के क्षेत्र में खर्च को बढ़ने की जरूरत है और ज्यादा हेल्थ सेंटर बनाने की जरूरत है, जिससे सभी आसानी से स्वास्थ्य सुविधाएँ मिल सके। साथ ही सुन्दरमन का कहना है कि सब सेंटर के मानकों में बदलाव होना चाहिए। मानकों के तहत सब सेंटर में केवल एक महिला और पुरुष हेल्थ कर्मचारी की व्यवस्था की बात कही गयी है।  इसमें बदलाव करते हुए सब सेंटर में 3 से 4 स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ एक डॉक्टर की भी व्यवस्था करनी चाहिए।

rural areas
Rural hospital
health care facilities
health department
Public Health Care
health facilities for tribal
Tribal Healthcare
tribal communities

Related Stories

कोविड-19 महामारी स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में दुनिया का नज़रिया नहीं बदल पाई

बिहार में फिर लौटा चमकी बुखार, मुज़फ़्फ़रपुर में अब तक दो बच्चों की मौत

मध्यप्रदेश: सागर से रोज हजारों मरीज इलाज के लिए दूसरे शहर जाने को है मजबूर! 

शर्मनाक : दिव्यांग मरीज़ को एंबुलेंस न मिलने पर ठेले पर पहुंचाया गया अस्पताल, फिर उसी ठेले पर शव घर लाए परिजन

यूपी चुनाव : माताओं-बच्चों के स्वास्थ्य की हर तरह से अनदेखी

यूपी चुनाव: बीमार पड़ा है जालौन ज़िले का स्वास्थ्य विभाग

उत्तराखंड: मानसिक सेहत गंभीर मामला लेकिन इलाज के लिए जाएं कहां?

EXCLUSIVE: सोनभद्र के सिंदूर मकरा में क़हर ढा रहा बुखार, मलेरिया से अब तक 40 आदिवासियों की मौत

EXCLUSIVE :  यूपी में जानलेवा बुखार का वैरिएंट ही नहीं समझ पा रहे डॉक्टर, तीन दिन में हो रहे मल्टी आर्गन फेल्योर!

पहाड़ों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी, कैसे तीसरी लहर का मुकाबला करेगा उत्तराखंड?


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी: अयोध्या में चरमराई क़ानून व्यवस्था, कहीं मासूम से बलात्कार तो कहीं युवक की पीट-पीट कर हत्या
    19 Mar 2022
    कुछ दिनों में यूपी की सत्ता पर बीजेपी की योगी सरकार दूसरी बार काबिज़ होगी। ऐसे में बीते कार्यकाल में 'बेहतर कानून व्यवस्था' के नाम पर सबसे ज्यादा नाकामी का आरोप झेल चुकी बीजेपी के लिए इसे लेकर एक बार…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    ट्रेड यूनियनों की 28-29 मार्च को देशव्यापी हड़ताल, पंजाब, यूपी, बिहार-झारखंड में प्रचार-प्रसार 
    19 Mar 2022
    दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिए सभी ट्रेड यूनियन जुट गए हैं। देश भर में इन संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठकों का सिलसिला जारी है।
  • रवि कौशल
    पंजाब: शपथ के बाद की वे चुनौतियाँ जिनसे लड़ना नए मुख्यमंत्री के लिए मुश्किल भी और ज़रूरी भी
    19 Mar 2022
    आप के नए मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने बढ़ते क़र्ज़ से लेकर राजस्व-रिसाव को रोकने, रेत खनन माफ़िया पर लगाम कसने और मादक पदार्थो के ख़तरे से निबटने जैसी कई विकट चुनौतियां हैं।
  • संदीपन तालुकदार
    अल्ज़ाइमर बीमारी : कॉग्निटिव डिक्लाइन लाइफ़ एक्सपेक्टेंसी का प्रमुख संकेतक है
    19 Mar 2022
    आम तौर पर अल्ज़ाइमर बीमारी के मरीज़ों की लाइफ़ एक्सपेक्टेंसी 3-12 सालों तक रहती है।
  • पीपल्स डिस्पैच
    स्लोवेनिया : स्वास्थ्य कर्मचारी वेतन वृद्धि और समान अधिकारों के लिए कर रहे संघर्ष
    19 Mar 2022
    16 फ़रवरी को स्लोवेनिया के क़रीब 50,000 स्वास्थ्य कर्मचारी काम करने की ख़राब स्थिति, कम वेतन, पुराने नियम और समझौते के उल्लंघन के ख़िलाफ़ हड़ताल पर चले गए थे।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License