NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
शाहीन बाग़ और जनता कर्फ़्यू : आज महिलाओं की जगह धरने पर हैं उनकी चप्पलें, ताकि सनद रहे...
शाहीन बाग़ में शनिवार रात से सिर्फ़ पाँच औरतें बैठी हैं, 31 मार्च तक यही स्थिति रहेगी। हां, आज जनता कर्फ़्यू के बीच विरोध का एक और नया तरीका अपनाया गया है कि अन्य महिलाएं धरना स्थल पर अपनी चप्पलें छोड़ गईं हैं, ताकि हाज़िरी रहे। अपडेट ये भी है कि आज सुबह अराजक तत्वों की तरफ़ से करीब साढ़े नौ बजे धरना स्थल पर पेट्रोल बम फेंका गया है।
सईद अयूब
22 Mar 2020
shaheen bagh
Image courtesy: Twitter

कल, शनिवार रात को मैं कुछ देर के लिए धरना स्थल पर गया था। एक तो वहाँ की स्थिति देखना चाहता था और दूसरे वहाँ बात करना चाहता था कि किसी तरह यह धरना अभी स्थगित किया जाए। धरना स्थल की ज़िम्मेदारी संभाल रहे लोगों में से जिनको जानता हूँ उनमें से दो लोगों से मुलाक़ात हुई। मुझ सहित बहुत से लोग हैं जो चाहते हैं कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए धरना अभी स्थगित किया जाए लेकिन वहाँ की महिलाओं का कहना है कि सरकार का आदेश है कि लोग अपने घरों में रहें और अनावश्यक आवाजाही ना करें।

चूंकि सीएए, एनआरसी और एनपीआर विरोधी इस संघर्ष में धरना स्थल ही उनका घर हो चुका है वे वहाँ से तब तक नहीं हटेंगी जब तक कि सरकार लिखित में यह आश्वासन नहीं देती कि वह एनआरसी नहीं करवाएगी और एनपीआर पुराने क़ानून के अनुसार होगा साथ ही सीएए जैसा संविधान विरोधी और धार्मिक भेदभाव पर आधारित क़ानून वापस नहीं लेती। उनका कहना है कि सब कुछ बहुत आसान है। सरकार लिखित में आश्वासन दे और वे एक मिनट के अंदर धरना स्थल ख़ाली कर देंगी।

कोरोना के मौजूदा संकट को वे बेहतर ढंग से समझ रही हैं और वहाँ पिछले कई दिनों से वे तमाम उपाय किये जा रहे हैं जो इस महामारी से बचने के लिए किए जाने चाहिए।

90867757_10157582930558564_7042684851387891712_n.jpg

1) वहाँ पिछले एक सप्ताह से ज़मीन पर बैठने के बजाय लगभग तीस की संख्या में लकड़ी के तख़्त (चौकियाँ) डाल दिये गए हैं। दो तख्तों के बीच कम से कम डेढ़ मीटर की दूरी है। एक तख़्त पर सिर्फ़ एक महिला को बैठने की इजाज़त है। कल रात से चूंकि सिर्फ़ पाँच महिलाएँ प्रतीकात्मक प्रतिरोध के रूप में वहाँ रह रही हैं सबके बीच की दूरी और ज़्यादा बढ़ गयी है।

2) सभी तख़्त सहित पूरे प्रदर्शन स्थल को नियमित अंतराल पर प्रापर्ली सैनेटाइज किया जा रहा है।

3) वहाँ एक मेडिकल टीम हर वक़्त मौजूद है जो लगातार इस वायरस के ख़िलाफ़ सभी को ना केवल जागरुक कर रही है बल्कि स्थिति पर भी नज़र रख रही है।

90691908_10157582930343564_9058930881690861568_n.jpg

4) केवल उन्हीं महिलाओं और वालियंटर्स को वहाँ रहने की इजाज़त है जो पूरी तरह स्वस्थ हैं यानी जिनको बुख़ार, खाँसी, ज़ुकाम आदि बीमारियाँ नहीं हैं।

5) प्रदर्शन स्थल पर बच्चों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित कर दिया गया है।

6) वहाँ चल रहे पुस्तकालय, बच्चों के स्कूल आदि को बंद कर दिया गया है।

7) माइक और स्टेज का प्रयोग बंद कर दिया गया है।

8) जो भी प्रदर्शनकारी महिलाएं और वालियंटर्स वहाँ हैं सबके पास पर्याप्त मात्रा में सेनेटाइजर्स और मास्क हैं जिनका प्रयोग वे बख़ूबी कर रहे हैं।

90031571_10157582989113564_582847351492706304_o.jpg

9) लोगों से अपील की गई है और बार-बार की जा रही है कि वहाँ बेवजह आवाजाही न करें।

10) आज के जनता कर्फ़्यू जो असल में सरकार द्वारा लगाया गया कर्फ़्यू है, वे उसका पूर्ण समर्थन कर रही हैं और आज न तो वे वहाँ से कहीं जाएंगी और न ही दूसरे लोग धरना स्थल पर जाएंगे।

11) सीएए, एनआरसी, एनपीआर के ख़िलाफ़ उनका यह विरोध प्रदर्शन अब केवल प्रतीकात्मक विरोध के रूप में सिर्फ़ पाँच महिलाओं द्वारा तब तक ज़ारी रहेगा जब तक कि कोरोना के प्रकोप से देश मुक्त नहीं हो जाता या सरकार उन्हें इन काले क़ानूनों को वापस लेने की लिखित आश्वासन नहीं दे देती।

मैं उनकी इन तैयारियों और जज़्बे को सलाम करता हूँ लेकिन फिर भी, बार-बार यह अपील करूँगा कि सबसे बेहतर यह होगा कि अभी यह धरना और देश भर में चल रहे तमाम धरने स्थगित किये जायें। अभी कई सारे ख़तरे हैं जिनके बारे में मैं अपनी पिछली पोस्ट में लिख चुका हूँ।

FB_IMG_1584863349534.jpg

लेकिन कल से मैं कुछ लोगों की पोस्ट देख रहा हूँ। अच्छे-भले लेखक लोग हैं लेकिन जिस भाषा में वे शाहीन बाग़ की इन महिलाओं को कोस रहे हैं वह अत्यंत निंदनीय है और मैं उनकी भाषा और उनकी सोच की भर्त्सना करता हूँ। उदहारण के लिए एक कथाकार महोदय ने लिखा है कि शाहीन बाग़ की सभी औरतों को फ़ौरन जेल में ठूँस दिया जाए। महोदय, आपके इस तर्क से देश की आधी से भी ज़्यादा आबादी को जेल में ठूँस देना चाहिए। शाहीन बाग़ की ये औरतें तो फिर भी हालात को समझते हुए तमाम सुरक्षात्मक उपाय आज से नहीं, पिछले एक सप्ताह से बल्कि उससे पहले से कर रही हैं लेकिन पूरे देश में आधी से भी ज़्यादा आबादी है जो लगातार हर तरह के दिशा निर्देशों की अवहेलना करती आई है।

कल और परसों ट्रेनों और बसों में भर-भर कर दिल्ली-मुम्बई और दूसरे महानगरों से भाग कर जो भीड़ अपने-अपने गाँव गयी है, उन्हें क्यों ना जेल में ठूँस दिया जाए? परसों तक चल रही संसद के सभी सदस्यों को मय प्रधानमंत्री क्यों न जेल में ठूँस दिया जाए? अभी परसों तक महामहिम राष्ट्रपति महोदय द्वारा लगातार बैठकें, भोज और लोगों के साथ फोटो खिंचवाने के लिए क्यों ना जेल में डाल दिया जाए? उस पूरे होटल स्टॉफ को क्यों ना जेल में डाला जाए जहाँ कनिका कपूर पाँच सौ लोगों के साथ पार्टी कर रही थीं? वसुंधरा राजे सिंधिया, उनके बेटे सांसद दुष्यंत, दुष्यंत के ससुराल के तमाम लोग, उत्तर प्रदेश के स्वास्थ मंत्री और उनके परिवार के सदस्यों सहित उन सभी लोगों को क्यों न जेल में ठूँस दिया जाए जो उस पार्टी में शामिल हुए थे? उन सभी लेखकों, कलाकारों, कवियों, शायरों को क्यों न जेल में ठूँस दिया जाए जो कल तक इधर-उधर घूम रहे थे, कविता-कहानी-ग़ज़लों की महफ़िलों में वाहवाही लूट रहे थे?

लेखक हैं तो थोड़ा संवेदनशील और तमीज़दार बनिये।

अपडेट ये है कि आज सुबह अराजक तत्वों की तरफ़ से करीब साढ़े नौ बजे धरना स्थल पर पेट्रोल बम फेंका गया। लेकिन लोग डरे नहीं हैं। हां, आज विरोध का एक और नया तरीका अपनाया गया है कि महिलाएं आज धरना स्थल पर अपनी चप्पलें छोड़ गईं हैं, ताकि हाज़िरी भी रहे और बचाव भी।

Janta curfew
Covid and Janta Curfew
Shaheen Bagh
Shaheen Bagh Protests
CAA
NRC
NPR
Coronavirus
novel coronavirus

Related Stories

शाहीन बाग से खरगोन : मुस्लिम महिलाओं का शांतिपूर्ण संघर्ष !

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

देश बड़े छात्र-युवा उभार और राष्ट्रीय आंदोलन की ओर बढ़ रहा है

सड़क पर अस्पताल: बिहार में शुरू हुआ अनोखा जन अभियान, स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जनता ने किया चक्का जाम

दिल्ली पुलिस की 2020 दंगों की जांच: बद से बदतर होती भ्रांतियां

निमहांस के बर्ख़ास्त किये गए कर्मचारी जुलाई से हैं हड़ताल पर

यादें हमारा पीछा नहीं छोड़तीं... छोड़ना भी नहीं चाहिए

सीएए : एक और केंद्रीय अधिसूचना द्वारा संविधान का फिर से उल्लंघन

समान नागरिकता की मांग पर देवांगना कलिता, नताशा नरवाल को गिरफ्तार किया गया: पिंजरा तोड़

ग़ैर मुस्लिम शरणार्थियों को पांच राज्यों में नागरिकता


बाकी खबरें

  • chunav chakra
    न्यूज़क्लिक टीम
    चुनाव चक्र: किसान और राजनीति, क्या दिल्ली की तरह फ़तह होगा यूपी का मोर्चा!
    12 Dec 2021
    एक साल से भी ज़्यादा समय बाद किसान दिल्ली का मोर्चा जीत कर घर लौट रहे हैं। और जिनका यूपी, पंजाब में घर है उनके सामने आने वाला चुनाव है...जिसमें उन्हें अपने हक़ में एक नई सरकार चुननी है। यूपी का किसान…
  • CBSE
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: प्रश्न पूछो, पर ज़रा ढंग से तो पूछो
    12 Dec 2021
    अभी ऐसे ही, बारहवीं कक्षा की परीक्षा में एक प्रश्न पूछ लिया गया कि किस सरकार के तहत सन् दो हजार दो में गुजरात में अप्रत्याशित स्तर पर मुस्लिम विरोधी हिंसा हुई थी। सरकार को अखर गया, माथा ठनक गया। इतना…
  • PM modi
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: अमृत महोत्सव, सांसदों को फटकार का नाटक और अन्य
    12 Dec 2021
    एक तरफ प्रधानमंत्री सांसदों को सदन में उपस्थिति रहने को कहते हैं दूसरी ओर उनकी पार्टी चुनाव वाले राज्यों के अपने करीब सौ सांसदों को निर्देश देती है कि वह सारे काम छोड़ कर अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों…
  • varanasi
    विजय विनीत
    ग्राउंड रिपोर्ट: बनारस में जिन गंगा घाटों पर गिरते हैं शहर भर के नाले, वहीं से होगी मोदी की इंट्री और एक्जिट
    12 Dec 2021
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 दिसंबर को बनारस के जिन घाटों से गंगा में इंट्री और एक्जिट करेंगे, उनमें एक है खिड़किया घाट और दूसरा रविदास घाट। एक पर शाही नाले का बदबूदार पानी गंगा को गंदा कर रहा है,…
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : 'ईश्वर को किसान होना चाहिये...
    12 Dec 2021
    भारतीय लोकतंत्र के सबसे बड़े जनआंदोलन में किसानों ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है और अब किसान धीरे धीरे घर की तरफ़ जा रहे हैं। पढ़िये विहाग वैभव की किसानों पर यह नज़्म...
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License