NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
विशेष : शाहीन बाग़ की औरतों ने आंदोलन का ग्रामर बदल दिया है
अपनी मांग को लेकर दृढ़ निश्चय इन महिलाओं ने न तो आंदोलन को हिंसक होने दिया, न ही किसी तरह की अफरातफरी पैदा होने दी। साथ ही अपने आंदोलन को किसी को हथियाने भी नहीं दिया है।
अमित सिंह
20 Jan 2020
shaheen bagh

मोहल्ला शाहीन बाग़। वह मोहल्ला जो आज हिंदुस्तान में हर ज़बान पर है। हालांकि इसके बनने की कहानी दिल्ली के बाकी कई हिस्सों की तरह ऐतिहासिक नहीं है। 90 के दशक तक यहां हरे भरे खेत दिख जाते थे। बाटला हाउस, जाकिर नगर, अबुल फजल, गफ्फार मंजिल से नजदीकी के चलते इसके बाद यहां बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी ने बसना शुरू किया। लंबे समय तक सीवर और सड़कों के लिए इस मोहल्ले ने संघर्ष भी किया। आज इस मोहल्ले में घनी आबादी रहती है।

अब यहां एक तरफ ऊंचे-ऊंचे अपार्टमेंट नजर आते हैं तो दूसरे तरफ ऐसे भी मकान नजर आते हैं जो कुल 25 गज में बने हैं। जैसे मकान का साइज है वैसे ही रंग-बिरंगी यहां की आबादी है। यहां जामिया के प्रोफेसर, डॉक्टर, इंजीनियर और रईस कारोबारियों का बसेरा है तो दिहाड़ी मजदूर, पंक्चर बनाने वालों, कारपेंटर, गार्ड और घरेलू कामकाजी महिलाओं का दौलतखाना भी है।

वैसे जैसा पहली ही लाइन में कहा गया है कि इस मोहल्ले के बनने की कहानी ऐतिहासिक नहीं है तो इसके बारे में आपको क्यों बता रहा हूं यह जान लीजिए। दरअसल इस कहानी को बताने की पीछे मोहल्ला शाहीन बाग़ की औरतें हैं। हक और इंसाफ की लड़ाई लड़ने वाली इन महिलाओं ने अब इतिहास में अपना और इस मोहल्ले का नाम दर्ज करा दिया है।

IMG-20200120-WA0011.jpg

यहां के मध्यवर्गीय और निम्न मध्यवर्गीय परिवारों की रहने वाली महिलाओं ने संविधान की आत्मा को बचाने के लिए एक आंदोलन की शुरुआत की थी। दिन, हफ्ते और महीने बीतते रहे लेकिन ये महिलाएं डटी रहीं। और सिर्फ डटी ही नहीं रही बल्कि इस देश में चल रहे आंदोलनों का व्याकरण ही बदल दिया। मेरे ऐसा कहने का कारण क्या है आप इस लेख में आगे समझिए।

इन महिलाओं के पास हमारे कथित विद्वानों की तरह शायद ज्यादा किताबी ज्ञान नहीं है लेकिन उनके भीतर यह समझ जरूर है कि क्या अच्छा और क्या बुरा है। सबसे बड़ी बात है कि ये महिलाएं ऐसे मुद्दे को लेकर घर से बाहर निकली हैं जो महिला केंद्रित नहीं है। यानी शाहीन बाग़ की औरतों ने उस छवि को तोड़ दिया जो आम तौर पर महिला प्रदर्शनकारियों के लिए कही जाती है कि उनकी लड़ाई महिलाओं से जुड़ी बातों पर केंद्रित होगी। राजनेताओं समेत बहुत सारे आलोचक बहुत बार इसको लेकर टिप्पणियां करते रहे हैं लेकिन शाहीन बाग़ की औरतों ने ऐसे नेताओं की हवा निकाल दी है।

इसके अलावा क्या हमें भारत में हुए ऐसे किसी आंदोलन की याद है जिसमें महिलाओं की नेतृत्वकारी छवि प्रमुखता से उभरी हो? इसके जवाब में आप चिपको आंदोलन, नर्मदा आंदोलन जैसे एक दो नाम ही गिना पाएंगे। लेकिन शाहीन बाग़ ने जिस तरह देशभर की महिलाओं को प्रेरित किया है वह अपने आप में उल्लेखनीय है। आज दिल्ली में खुरेजी, तुर्कमान गेट, मुस्तफाबाद, वजीराबाद, भजनपुरा, सीलमपुर समेत लगभग 13 जगहों पर प्रदर्शन हो रहा है तो दूसरी तरफ कोलकाता, हैदराबाद, इलाहाबाद, लखनऊ, कानपुर, पटना समेत देश के तमाम शहरों में शाहीन बाग़ बन चुके हैं।


IMG-20200120-WA0010.jpg

अब सवाल यह है कि ये औरतें कौन हैं? क्या इनकी पहचान इनके 'कपड़ों' से की जा सकती है! क्या किसी विश्वविद्यालय से, जिसे 'वे' नापसंद करते हैं! या कोई एनजीओ या किसी और संगठन की, जिसके फंड या मंशा पर आप सवाल उठा सकें। नहीं! बिल्कुल नहीं।

ये औरतें आम घरों की हैं। कोई पढ़ाई कर रही है, कोई घरेलू काम करती है, कोई टीचर है, कोई अपनी दुकान पर बैठता है, किसी का पति पंक्चर की दुकान चलाता है, किसी के पति का बिजनेस है। ये भारत की उस आम समाज की महिलाएं हैं जिनकी बहुतायत इस देश में है। इसे हम आप ऐसे भी कह सकते हैं कि यह हमारे भारत की आम महिलाएं हैं।

इन महिलाओं को कपड़े, रंग, जाति, उम्र और धर्म के बंधन में भी आप नहीं बांध सकते हैं। इसमें पांच साल की बच्ची से लेकर 80 साल की दादी प्रदर्शन कर रही हैं। महिलाएं अपने बच्चों के साथ प्रदर्शन कर रही हैं। महीने भर से ज्यादा समय से चल रहे प्रदर्शन के दौरान इन महिलाओं ने धर्मनिरपेक्षता का जो सबक पढ़ाया है वह इस दौर में काबिले तारीफ है। प्रदर्शन के दौरान गांधी, आंबेडकर, अबुल कलाम से लेकर भगत सिंह, अशफाक उल्ला की तस्वीरें नज़र आ रही हैं।

IMG-20200120-WA0013.jpg
इन महिलाओं ने मकर संक्राति का त्योहार मनाया तो ढोल-नगाड़ों की धुन पर थिरकते हुए लोहड़ी का जश्न भी मनाया। पीड़ित कश्मीरी पंडितों को भी जगह दी तो देश भर में सीएए आंदोलन के दौरान पुलिसिया उत्पीड़न के शिकार लोगों को भी मंच पर मौका दिया। मतलब बिना लाग लपेट और साफ सीधे तरीके से हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई की एकता का पैगाम दिया गया। महीने भर में फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, हबीब जालिब जैसे क्रांतिकारी शायरों की नज़्में गायी गईं तो बहुत सारे युवा कवियों को मौका दिया गया।

औरतों के इस आंदोलन में क्रिएटीविटी भी अपने चरम पर है। लोहे का बना इंडिया गेट हो या डिटेंशन सेंटर या फिर सड़कों पर बनाई गई कलाकृतियां आपको चारों तरफ ऐसा नज़ारा दिखेगा जो आपको देश की एकता-अखंडता के पक्ष में और नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में पैगाम दे रहा है।

जब नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में होने वाले प्रदर्शन एक या दो दिन के भीतर खत्म हो रहे थे तब भी ये महिलाएं डटी रहीं। इन्होंने सौ साल में सबसे हाड़ कपां देने वाली सर्दी झेली तो अब हर दिन इतनी ठंडी में होने वाली बारिश झेल रही हैं लेकिन इसके बावजूद इनका आंदोलन कमजोर नहीं पड़ा।

IMG-20200120-WA0014.jpg
सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं द्वारा 500 रुपये लेकर आंदोलन पर बैठने के आरोप लगने समेत तमाम तरह के आरोप प्रत्यारोप झेलती इन महिलाओं ने आंदोलन का सलीका पूरे देश को सिखा दिया। अपनी मांग को लेकर दृढ़ निश्चय इन महिलाओं ने न तो आंदोलन को हिंसक होने दिया, न ही किसी तरह की अफरा तफरी पैदा होने दी। साथ ही अपने आंदोलन को किसी को हथियाने भी नहीं दिया है।

IMG-20200120-WA0009.jpg
यानी इतने कम वक्त में इन महिलाओं ने साफ संदेश दे दिया है कि उन्हें पुरुषों और परंपरागत नियमों और लकीरों पर नहीं चलना है। वह अपनी लकीर खुद बना रही हैं और यह लकीर एक नया इतिहास बना रहा है।

Shaheen Bagh
Protest in Shaheen bagh
NRC-CAA-NPR
Citizenship Amendment Act
National Register of Citizens
Women protest
Women Leadership
women power
Narendra modi
Amit Shah
BJP

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

शाहीन बाग से खरगोन : मुस्लिम महिलाओं का शांतिपूर्ण संघर्ष !

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल


बाकी खबरें

  • fact check
    किंजल
    UP का वीडियो दिल्ली के सरकारी स्कूल में मदरसा चलाने के दावे के साथ वायरल
    30 Nov 2021
    वीडियो को गौर से देखने पर ऑल्ट न्यूज़ ने स्कूल के बोर्ड पर ‘प्राथमिक विद्यालय मिर्ज़ापुर’ लिखा हुआ पाया. प्राथमिक विद्यालय मिर्ज़ापुर, गाज़ियाबाद के विजयनगर इलाके में है. यानी, ये घटना उत्तर प्रदेश की है…
  • tripura
    संदीप चक्रवर्ती, शांतनु सरकार
    त्रिपुरा नगर निकाय चुनावों में ‘धांधली’ के चलते विपक्ष का निराशाजनक प्रदर्शन 
    30 Nov 2021
    यह पहली बार नहीं है जब राज्य को चुनाव पूर्व हिंसा और चुनाव के दिन ‘धांधली’ देखने को मिल रही है, ऐसा ही कुछ दो साल पहले पंचायत चुनावों के दौरान भी देखने में आया था।
  •  Pentagon
    सोनाली कोल्हटकर
    पेंटागन का भारी-भरकम बजट मीडिया की सुर्खियां क्यों नहीं बनता?
    30 Nov 2021
    पेंटागन का भारी-भरकम बजट आम अमेरिकियों के कल्याण के लिए मिलने वाले सरकारी लाभों से चुराया जा रहा है। लेकिन कॉरपोरेट मीडिया या नीति-निर्माता इसे मानने के लिए तैयार नहीं हैं, इस मुद्दे पर उनसे बहस की…
  • Rajya Sabha
    भाषा
    राज्यसभा की ऐतिहासिक सबसे बड़ी कार्रवाई में 12 सांसद निलंबित
    30 Nov 2021
    राज्यसभा के 12 सांसदों को वर्तमान शीत सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया है। यह उच्च सदन के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले 2020 में आठ सांसदों को निलंबित किया गया था,…
  • media
    अभिषेक पाठक
    कृषि कानून वापसी पर संसद की मुहर, लेकिन गोदी मीडिया का अनाप-शनाप प्रलाप जारी!
    30 Nov 2021
    आज के दौर में मोदी सरकार शोले फ़िल्म में अमिताभ बच्चन के उस सिक्के जैसी हो गई है जिसके दोनों ओर 'मास्टरस्ट्रोक' लिखा है। गोदी मीडिया के उन एंकरों पर तरस भी आता है जिन्होंने सालभर इस कानून और सरकार का…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License