NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सरकार की नीयत और नीतियों पर कई सवाल खड़े करता है वायरस विज्ञानी जमील का इस्तीफ़ा
न्यूज़क्लिक को दिए एक इंटरव्यू में शाहिद जमील का कहना था कि कोविड-19 को नियंत्रित करने की वैज्ञानिक नीति मिश्रित संदेशों, ख़राब संचार, अफ़वाहों और पारदर्शिता की कमी के चलते कमज़ोर हो गई।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 May 2021
शाहिद जमील

नयी दिल्ली: जाने-माने वायरस विज्ञानी (वॉयरोलॉजिस्ट) शाहिद जमील ने कोरोना वायरस की जीनोम श्रृंखला का पता लगाने वाली केंद्र सरकार की समिति आईएनएसएसीओजी के प्रमुख के पद से इस्तीफा सरकार की नीयत और नीतियों पर कई सवाल खड़े करता है। जमील का यह कहना कि वैज्ञानिकों को ‘‘साक्ष्य आधारित नीति निर्णय के प्रति अड़ियल रवैये’’ का सामना करना पड़ रहा है, बेहद महत्वपूर्ण और चिंताजनक भी है।

जमील का यह भी कहना कि “800 से अधिक भारतीय वैज्ञानिकों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपील की थी उन्हें आंकड़े उपलब्ध करवाए जाएं ताकि वे आगे अध्ययन कर सकें, अनुमान लगा सकें और इस वायरस के प्रकोप को रोकने के प्रयास कर सकें”, सरकार के रवैये को उजागर करता है कि वह इस महामारी को लेकर कितनी गंभीर है।

आपको बता दें कि गत शुक्रवार को आईएनएससीओजी की बैठक हुई थी। इसमें मौजूद चार अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने बताया कि उसी बैठक में जमील ने इस्तीफे की घोषणा कर दी थी।

फोन कॉल और संदेशों का जमील की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया।

एक वैज्ञानिक ने बताया कि जमील ने इस्तीफा देने के पीछे कोई कारण नहीं बताया है। बैठक में शामिल वैज्ञानिक ने बताया, ‘‘शुक्रवार की बैठक में उन्होंने कहा कि वह आईएनएससीओजी के प्रमुख पद से इस्तीफा दे रहे हैं।’’

बैठक में शामिल एक अन्य वैज्ञानिक ने कहा, ‘‘हो सकता है कि वह सरकार के रवैये से निराश हों (महामारी से निपटने के तरीके को लेकर)।’’

तीसरे वैज्ञानिक ने कहा कि पद छोड़ने का कारण स्पष्ट नहीं है और कहा कि जमील के हटने से समूह के कामकाज पर कोई ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा।

चौथे वैज्ञानिक ने कहा, ‘‘इस निर्णय की उम्मीद नहीं थी।’’ उन्होंने कहा कि शुक्रवार को जमील की घोषणा से पहले उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं थी।

पिछले हफ्ते शाहिद जमील ने ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बारे में एक लेख लिखा था।

उक्त लेख में उन्होंने लिखा था, ‘‘भारत में मेरे साथी वैज्ञानिकों के बीच इन उपायों को लेकर खास समर्थन है। लेकिन साक्ष्य आधारित नीति निर्माण के प्रति उन्हें अड़ियल रवैये का सामना करना पड़ रहा है। 30 अप्रैल को 800 से अधिक भारतीय वैज्ञानिकों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपील की थी उन्हें आंकड़े उपलब्ध करवाए जाएं ताकि वे आगे अध्ययन कर सकें, अनुमान लगा सकें और इस वायरस के प्रकोप को रोकने के प्रयास कर सकें।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारत में वैश्विक महामारी काबू से बाहर हो चुकी है, ऐसे में आंकड़ों पर आधारित नीति निर्णय भी खत्म जैसा ही है। इसकी मानवों से संबंधित जो कीमत हमें चुकानी पड़ रही है, उससे होने वाली चोट स्थायी निशान छोड़ जाएगी।’’

‘दी इंडियन सार्स-सीओवी2 कॉनसोर्टियम ऑन जीनोमिक्स (आईएनएसएसीओजी)’ दस राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं का समूह है जिसकी स्थापना स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बीते वर्ष 25 दिसंबर को की थी। इस समिति का काम है कोरोना वायरस की जीनोम श्रंखला तैयार करना और जीनोम के स्वरूपों तथा महामारी के बीच संबंध तलाशना।

हालांकि, देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बाद समिति की आलोचना की जाने लगी।

इस महीने की शुरुआत में जमील ने रॉयटर्स से कहा था, ‘‘मुझे चिंता इस बात की है कि नीति निर्माण के लिए वैज्ञानिक पहलू पर विचार नहीं किया जा रहा। मैं भलीभांति जानता हूं कि मेरा अधिकार क्षेत्र कहां तक है। एक वैज्ञानिक होने के नाते हम साक्ष्य दे सकते हैं लेकिन नीति निर्माण का काम सरकार का है।’’

कांग्रेस ने जमील के इस्तीफे को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि इस सरकार में पेशेवर व्यक्तियों के लिए कोई स्थान नहीं है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने ट्वीट किया, ‘‘डॉक्टर शाहिद जमील का इस्तीफा निश्चित तौर पर दुखद है। ऐसे पेशेवर लोगों के लिए मोदी सरकार में कोई जगह नहीं है, जो बिना पक्ष या भय के बोल सकते हों।’’

कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल के जरिए सवाल किया, ‘‘इस सरकार की लापरवाही से भारत को कितनी पीड़ा झेलनी पड़ेगी।’’

पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने सवाल किया कि जमील ने इस्तीफा दिया या फिर उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया?

आपको बता दें कि न्यूज़क्लिक को दिए एक इंटरव्यू में  शाहिद जमील का कहना था कि कोविड-19 को नियंत्रित करने की वैज्ञानिक नीति मिश्रित संदेशों, ख़राब संचार, अफ़वाहों और पारदर्शिता की कमी के चलते कमज़ोर हो गई। उन्होंने यह भी कहा था कि क्यों राजनीतिक और धार्मिक जमावड़ों को तुरंत रोका जाना चाहिए। उनका कहना था कि कोरोना के चलते जब रेस्त्रां तक बंद कर दिए गए, तो राजनीतिक रैलियों को भी रोका जाना चाहिए था।

इस इंटरव्यू को आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं-

कोरोना के चलते जब रेस्त्रां तक बंद कर दिए गए, तो राजनीतिक रैलियों को भी रोका जाना चाहिए: डॉ शाहिद जमील 

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

Shahid Jameel
COVID-19
Covid Panel
Narendra modi
Modi government
Government criticism

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 


बाकी खबरें

  • poverty
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    जनादेश-2022: रोटी बनाम स्वाधीनता या रोटी और स्वाधीनता
    11 Mar 2022
    राष्ट्रवाद और विकास के आख्यान के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं ने रोटी और स्वाधीनता के विमर्श को रोटी बनाम स्वाधीनता बना दिया है।
  • farmer
    सुरेश गरीमेल्ला
    सरकारी इंकार से पैदा हुआ है उर्वरक संकट 
    11 Mar 2022
    मौजूदा संकट की जड़ें पिछले दो दशकों के दौरान अपनाई गई गलत नीतियों में हैं, जिन्होंने सरकारी कंपनियों के नेतृत्व में उर्वरकों के घरेलू उत्पादन पर ध्यान नहीं दिया और आयात व निजी क्षेत्र द्वारा उत्पादन…
  • सोनिया यादव
    पंजाब : कांग्रेस की हार और ‘आप’ की जीत के मायने
    11 Mar 2022
    कांग्रेस को जो नुक़सान हुआ, उसका लगभग सीधा लाभ 'आप' को मिला। मौजूदा वक़्त में पंजाब के लोगों में नाराज़गी थी और इस कारण लोगों ने बदलाव को ही विकल्प मानते हुए आम आदमी पार्टी पर भरोसा किया है।
  • विजय विनीत
    यूपी चुनाव : पूर्वांचल में हर दांव रहा नाकाम, न गठबंधन-न गोलबंदी आया काम !
    11 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में विपक्ष के पास मुद्दों की भरमार रहने के बावजूद समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव मोदी-योगी का जादू बेअसर नहीं कर सके। बार-बार टिकटों की अदला-बदली और लचर रणनीति ने स
  • LOOSERES
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: कई दिग्गजों को देखना पड़ा हार का मुंह, डिप्टी सीएम तक नहीं बचा सके अपनी सीट
    11 Mar 2022
    उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भाजपा की वापसी हो गई है, हालांकि इस प्रचंड जीत के बावजूद कई दिग्गज नेता अपनी सीट नहीं बचा पाए हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License