NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पीएम केयर्स फंड की बौछार : झारखंड में प्रति व्यक्ति दो रुपये का उपहार!
कोरोना माहमारी और लॉकडाउन बंदी से उत्पन्न संकटों से घिरी राज्य सरकारों को केंद्र द्वारा दी जा रही सहायता के तहत पीएम केयर्स फंड से झारखंड प्रदेश को महज 8.67 करोड़ की राशि भेजी गयी।
अनिल अंशुमन
11 Jun 2020
jharkhand

लॉकडाउन से त्रस्त बिहार की गरीब जनता के बीच देश के गृहमंत्री द्वारा 72 करोड़ एलईडी लगाकर, “जहां न पहुंचे राशन-वहाँ पहुंचे भाषण” के तहत बिहार विधानसभा चुनाव के भव्य आगाज़ को तंगहाल ग़रीबों का मज़ाक उड़ाने वाला कहा जा रहा है। यह प्रकरण अभी ठंडा भी नहीं पड़ा है कि पड़ोसी राज्य झारखंड को केंद्र द्वारा पीएम केयर्स फंड से दिए गए पर चंद करोड़ रुपये की रस्मी सहायता मामले में पुनः यही आरोप लगाया जा रहा है।

कोरोना माहमारी और लॉकडाउन बंदी से उत्पन्न संकटों से घिरी राज्य सरकारों को केंद्र द्वारा दी जा रही सहायता के तहत पीएम केयर्स फंड से झारखंड प्रदेश को महज 8.67 करोड़ की राशि भेजी गयी। प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इस पर ट्वीट कर इसे राज्य की ग़रीब जनता का मज़ाक बताते हुए कहा है कि 3.74 करोड़ की आबादी वाले झारखंड को इस विकट आपदा काल में भी इतनी छोटी सी राशि देकर अपनी जिम्मेवारी से पल्ला झाड़ लेना है। क्योंकि पीएम केयर्स फंड से दी गयी इस राशि के हिसाब से प्रदेश के सभी नागरिकों को प्रति व्यक्ति मात्र 2 रुपये ही मिल सकेंगे।

भाकपा माले ने केंद्र सरकार के इस रवैये के खिलाफ तत्काल राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शित कर जगह जगह सरकार का पुतला दहन किया। विशेषकर बगोदर समेत पूरे गिरिडीह जिले के सभी प्रखंडों में ‘पीएम् केयर्स फंड का हिसाब दो, झारखंड को भीख नहीं स्वीकार – हमें दो हमारा अधिकार’ इत्यादि नारे के साथ प्रतिवाद किया गया।

pratiwad 1.jpg

भाकपा माले पोलित ब्यूरो सदस्य मनोज भक्त तथा विधायक विनोद सिंह द्वारा वक्तव्य जारी कर कहा गया है कि – विकट संकट की घड़ी में आपदाग्रस्त जनता और भूख – गरीबी – तंगहाली झेलते प्रवासी मजदूरों के साथ इससे ज़्यादा घिनौना मज़ाक और नहीं हो सकता। केवल गिरिडीह ज़िले में ही एक एक प्रवासी मजदूरों को मात्र 1000 रुपये भी दिए जाएँ तो यह राशि 15 करोड़ से भी अधिक हो जायेगी।

ख़बरों के अनुसार झारखंड को पीएम् केयर्स से मात्र 8.37 करोड़ दिए जाने पर सत्ताधारी दल झामुमो व कांग्रेस ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अभी तक केंद्र से एक कोरोना संकट से निपटने के सहायतार्थ एक अदद वेंटीलेटर तक नहीं मिला है। पिछली भाजपा शासन से मिले खाली खज़ाना को लेकर हाल में बनी हेमंत सोरेन की सरकार अपने सीमित संसाधनों के बल पर महामारी चुनौती से अकेले ही जूझ रही है। भीख की तरह दी गयी सहयोग राशि को देखकर कहा जा रहा है कि कोरोना संकट के काल में भी भाजपा अपनी ओछी राजनीति कर रही है।

ख़बर यह भी है कि प्रदेश के सभी भाजपा सांसद–विधायक और नेतागण अपनी केंद्र सरकार के एक साल के कार्यों की उपलब्धियों और कोरोना महामरी से लड़ने में उसकी प्रभावकारी भूमिका को लेकर जारी संकल्प पत्र प्रदेश के 35 लाख घरों तक पहुंचाएंगे। जिसमें धारा 370 को हटाने, राम मंदिर बनाने और तीन तलाक़ बिल पास करने जैसे राष्ट्रीय हित के कार्यों का विशेष महत्व लोगों को बतलाया जाएगा।

केंद्र की सत्ता में बैठी पार्टी द्वारा बिहार तथा बंगाल चुनाव के मद्देनजर वहाँ की जनता व प्रवासी मजदूरों के लिए अनेकों योजनाओं व पैसे दिए जाने के दावों- घोषणाओं के बीच भी गैर भाजपा सरकारों के साथ किया जा रहा भेदभाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

इसी 7 जून को राजधानी रांची पहुंचे केन्द्रीय विकास मंत्रालय के सचिव ने राज्य सरकार के अफसरों की बैठक में साफ साफ कह दिया कि उनकी सरकार मनरेगा को रोज़गार का मुख्य साधन नहीं मानती है इसलिए फिलहाल झारखंड में न तो मनरेगा की मजदूरी दर बढ़ेगी और न ही 100 दिन रोज़गार का प्रावधान बदलेगा। 

राज्य में भोजन के अधिकार अभियान से जुड़े सोशल एक्टिविस्ट धीरज कुमार के अनुसार केंद्र सरकार का यह फैसला कोरोना महामारी और लॉकडाउन बंदी से उत्पन्न महाआफत की चक्की में पिस रहे लाखों ग्रामीण गरीबों व प्रवासी मजदूरों को भूख से मौत की जानलेवा अंधी सुरंग में धकेल देना है। साथ ही मेहनत मशक्कत करके जीने खाने वाली एक विशाल आबादी के लोगों व उनके परिवार के जीवन से खिलवाड़ किया जाना है।

7 जून को ही पिछली भाजपा सरकार के शासन में मुख्यमंत्री रहे रघुवर दास द्वारा बयान जारी कर यह कहना कि - रोज़गार के लिए वर्तमान झारखंड सरकार पूर्ववर्ती सरकार की ही नीति लागू करे – को लेकर भी कई प्रतिक्रियाएं चल रहीं हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि पहले अपने प्रधानसेवक जी को दुरुस्त कीजिये जो आपदा को अवसर में बदलने का नारा देकर इस आड़ में बड़े धनपतियों के तो अरबों के कर्जे माफ़ कर रहें हैं और वेतन व मजदूरी कटौती, टैक्स वृद्धि कर आम लोगों और गरीबों – मजदूरों पर हर दिन नयी नयी आपदा थोप रहें हैं। देश की जनता के पैसों से चल रहे रेलवे – कोयला व बिजली इत्यादि सार्वजनिक क्षेत्रों को निजी हाथों में बेच रहे हैं। नए सिरे से झारखंड प्रदेश को निजी कंपनियों की खुली लूट का चारागाह बनाने पर तुले हुए हैं। जिससे नए सिरे से मजदूरों के पलायन का दंश इस प्रदेश को ही झेलना पड़ेगा।

पीएम केयर्स फंड को लेकर अभी तक तो विभिन्न दायरों से छिटपुट तौर पर ही सवाल उठाये जा रहे थे, लेकिन इस फंड से केंद्र सरकार द्वारा की जा रही सहायता खानापूर्ति से मामला धीरे धीरे तूल पकड़ता जा रहा है। अब सार्वजनिक रूप से इस फंड के हिसाब किताब-जांच और पारदर्शिता की मांग सतह पर आने लगी है। देखना है –‘न खाउंगा और न खाने दूंगा’ का ज़मीनी सच किस रूप में सामने आता है।

Jharkhand
BJP
PM CARES fund
Narendra modi
Amit Shah
bihar election
poverty
Coronavirus
CPIML

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट


बाकी खबरें

  • up elections
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनाव: कांग्रेस ने इन महिलाओं को दिया है टिकट, जानिए क्यों अलग है इनके संघर्ष की कहानी
    13 Jan 2022
    प्रियंका गांधी ने डिजिटल संवाददाता सम्मेलन के माध्यम अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है जिसमें विशेष रूप से 50 महिला उम्मीदवारों के नामों का उल्लेख किया गया है।
  • health
    सुहित के सेन
    पश्चिम बंगाल : तीसरी लहर के बीच राजनीति की वजह से नज़रअंदाज़ हो रही स्वास्थ्य व्यवस्था
    13 Jan 2022
    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक तरफ़ नाइट कर्फ़्यू लगाती हैं, मगर साथ ही गंगा सागर मेला को भी अनुमति दे देती हैं; ऐसे में कोविड से बचने के लिए उचित प्रबंधन होते नहीं दिख रहे हैं।
  • Guantanamo Bay
    ओलिवर सल्लेट
    ग्वांतानामो की विवादित जेल को हुए 20 साल
    13 Jan 2022
    क्यूबा में इस कुख्यात बंदी शिविर को 20 साल हो गए हैं। पिछले कई वर्षों से इसे बंद किये जाने की कई योजनाओं को ख़ारिज किया जाता रहा है। बंदियों के जीवन में पिछले दो दशकों में शायद ही कुछ बदलाव देखने को…
  • Berang goodrick
    संदीपन तालुकदार
    असम : बड़े-बड़े चाय बागानों वाले “बेहाली” में ज़रूरी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी
    13 Jan 2022
    बेहाली के पास ज़िला अस्पताल की सुविधा तक नहीं है। बेहाली असम के कमज़ोर स्वास्थ्य तंत्र की गवाही देता है। यहां की कमज़ोर स्वास्थ्य सुविधाओं, खासतौर पर कोविड महामारी के दौर में एक सार्वजनिक स्वास्थ्य…
  • CEL
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    सरकार ने CEL को बेचने की कोशिशों पर लगाया ब्रेक, लेकिन कर्मचारियों का संघर्ष जारी
    13 Jan 2022
    यूनियन ने अपना प्रदर्शन जारी रखते हुए कहा है ‘जब तक कंपनी के विनिवेश का निर्णय "वापस नहीं ले लिया जाता है, उनका धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।’ 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License