NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
स्मृति शेष: नहीं रहे वो टीएन शेषन, जिनसे खौफ खाते थे राजनेता
केरल के पलक्कड जिले में जन्मे टीएन शेषन ने बेहद सख्ती के साथ राजनीतिक दलों पर चुनावी आचार संहिता लागू की थी। भारत की चुनावी प्रणाली में व्यापक सुधार लाने वाले पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त शेषन का रविवार को निधन हो गया।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
11 Nov 2019
cartoon click

चेन्नई: कानून का सख्ती से पालन करने वाले, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन ने 1990 से 1996 के बीच छह साल के अपने ऐतिहासिक कार्यकाल के दौरान देश में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित कराने के लिए बड़ी ही निर्भीकता से सुस्त अधिकारियों एवं ढिलाई बरतने वाले राजनीतिक दलों के खिलाफ कार्रवाई की।

केरल के पलक्कड जिले के तिरुनेल्लई में 15 दिसंबर,1932 को जन्मे तिरुनेल्लई नारायण अय्यर शेषन ने बेहद सख्ती के साथ राजनीतिक दलों पर चुनावी आचार संहिता लागू की थी। उनके प्रभार संभालने तक, राजनीतिक दलों का लोगों को मतदान केंद्रों तक ले जाना बेहद “आम” माना जाता था। मुख्य चुनाव आयुक्त शेषन के कार्यकाल के दौरान ही आचार संहिता के उल्लंघन को गैरकानूनी बनाया गया और अब नेताओं का लोगों के साथ मतदान केंद्र पर जाना असंभव हो गया।

इसके अलावा उन्होंने फर्जी मतदान को भी बहुत हद तक रोकने में कामयाबी हासिल की। शेषन ने 1990 में 10वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में प्रभार संभाला था और तब तक इस तरह के सुधारों के बारे में किसी ने सुना भी नहीं था।

चुनाव तंत्र को पाक-साफ बनाने के अपने उत्साही मिशन में, उन्हें अन्नाद्रमुक की सुप्रीमो दिवंगत जे जयललिता समेत कई नेताओं का आक्रोश झेलना पड़ा। जयललिता ने शेषन को ‘अहंकारी' कहा था।

अपनी निर्भीकता और सार्वजनिक एवं सरकारी सेवा में उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्होंने 1996 में रैमन मैगसायसाय सम्मान समेत अनेक पुरस्कार अपने नाम किए।

मैगसायसाय पुरस्कार के साथ मिले प्रशस्ति पत्र में कहा गया था, 'सरकारी सेवा के लिए 1996 का रैमन मैगसायसाय पुरस्कार देने के लिए टी एन शेषन को चुनने के लिए निर्णायक मंडल विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र, भारत में चुनावों में व्यवस्था, निष्पक्षता एवं सत्यनिष्ठा लाने के उनके साहसिक कार्यों को स्वीकार करता है।'

अन्य पहलुओं के साथ ही इस प्रशस्ति पत्र में याद किया गया कि शेषन ने मतपेटियों की चोरी रोकने और स्थानीय गुंडों से निपटने के लिए केंद्रीय पुलिस बलों को भेजा था।

इसमें कहा गया, 'मत खरीदे जाने से रोकने के लिए उन्होंने कड़े कदम उठाए। उन्होंने शाही प्रचार अभियानों एवं शोर-शराबे वाली रैलियों को प्रतिबंधित करने के साथ ही उम्मीदवारों के लिए उनके नारों से पुती दीवारों एवं इमारतों को साफ करने को जरूरी बनाया।'

'उन्होंने चुनाव खर्च की सीमा लागू कराई और प्रत्याशियों को उनके खर्च का पूरा लेखा-जोखा बताए जाने को जरूरी बनाया जिसकी जांच स्वतंत्र सरकारी निरीक्षक करते। उन्होंने उन नेताओं का पर्दाफाश किया जो चुनाव में सरकारी संसाधनों का गैरकानूनी इस्तेमाल करते थे और सरकारी कर्मचारियों के लिए चुनाव पूर्व मिलने वाले लाभ पर रोक लगाई। उन्होंने चुनाव के दौरान शराब की बिक्री को प्रतिबंधित किया और बिना लाइसेंस वाले हथियारों की जब्ती की। उन्होंने धर्म के आधार पर चुनाव प्रचार पर रोक लगाई।'

शेषन बुढ़ापे संबंधी स्वास्थ्य स्थितियों के चलते भले ही पिछले कुछ वर्षों से अपने घर तक ही सीमित रहे लेकिन उनमें अपने सफर, जान-पहचान के लोगों और जनसेवा में बिताए गए विख्यात वर्षों के बारे में लिखने का जुनून था।

शेषन की बेटी श्रीविद्या ने बताया, “बहरहाल, उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हुई।” उन्होंने बताया कि उनकी इच्छानुसार अध्यात्म के प्रचार-प्रसार के लिए पिछले साल अगस्त में एक ट्रस्ट का गठन किया गया।

1955 बैच के अधिकारी रहे शेषन ने भले ही सरकार में रक्षा सचिव और कैबिनेट सचिव जैसे कई अहम पद संभाले हों लेकिन घर-घर में उनका नाम उनके मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद ही प्रचलित हुआ।

किसी तरह की गड़बड़ी को बर्दाश्त न करने का उनका रवैया उनकी विशिष्ट पहचान थी और वह संपूर्ण चुनावी प्रक्रिया को नियमावली के मुताबिक क्रियान्वित करने के लिए सभी स्तरों पर जांच एवं संतुलन सुनिश्चित करते थे।

निष्पक्ष चुनाव के लिए चुनाव पर्यवेक्षक तैनात करने से लेकर उस वक्त कुख्यात रहे “बूथ कैप्चरिंग” के खात्मे के लिए चुनाव कार्यक्रम को क्रमबद्ध तरीके से निर्धारित कर उन्होंने कई पहलों की शुरुआत की जिससे विभिन्न राजनीतिक दलों का गुस्सा भी उन्हें झेलना पड़ा।

चुनाव प्रक्रिया हिंसा से दूषित न हो यह देखने के लिए उन्होंने 1991 में पंजाब में चुनाव रद्द कराने जैसा साहसिक कदम भी उठाया।

चेन्नई के मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से शिक्षित शेषन के बारे में कांग्रेस नेता थरूर ने कहा है कि वह एक, “सख्त बॉस थे जिन्होंने चुनाव आयोग की स्वायत्तता और अधिकार को इस तरह स्थापित किया जैसा पहले कोई सीईसी नहीं कर पाया। हमारे लोकतंत्र का एक स्तंभ।”

सरकार ने 1993 में चुनाव आयोग को तीन सदस्यीय निकाय बनाया और दो और आयुक्तों की नियुक्ति की। सरकार के इस कदम को उस वक्त शेषन पर अंकुश लगाने के प्रयास के तौर पर देखा गया।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

cartoon click
T. N. Seshan
Former chief election commissioner
election commission
TN seshan election reform
TN seshan passed away in chennai

Related Stories

कार्टून क्लिक: उनकी ‘शाखा’, उनके ‘पौधे’

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?

कार्टून क्लिक: मैंने कोई (ऐसा) काम नहीं किया जिससे...

‘तेलंगाना की जनता बदलाव चाहती है’… हिंसा नहीं

राम मंदिर के बाद, मथुरा-काशी पहुँचा राष्ट्रवादी सिलेबस 

“मित्रों! बच्चों से मेरा बचपन का नाता है, क्योंकि बचपन में मैं भी बच्चा था”

कार्टून क्लिक: पर उपदेस कुसल बहुतेरे...

कार्टून क्लिक: चीन हां जी….चीन ना जी

कार्टून क्लिक: किसानों की दुर्दशा बताने को क्या अब भी फ़िल्म की ज़रूरत है!

आम आदमी जाए तो कहाँ जाए!


बाकी खबरें

  • Barauni Refinery Blast
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बरौनी रिफायनरी ब्लास्ट: माले और ऐक्टू की जांच टीम का दौरा, प्रबंधन पर उठाए गंभीर सवाल
    20 Sep 2021
    भाकपा (माले) और मज़दूर संगठन ऐक्टू की जांच टीम ने घटनास्थल का दौरा किया और अपनी एक जाँच रिपोर्ट दी, जिसमें उन्होंने कहा कि 16 सितंबर को बरौनी रिफाइनरी में हुआ ब्लास्ट प्रबन्धन की आपराधिक लापरवाही का…
  • New Homes, School Buildings, Roads and Football Academies Built Under Kerala Govt’s 100-Day Programme
    अज़हर मोईदीन
    केरल सरकार के 100-दिवसीय कार्यक्रम के तहत नए घर, विद्यालय भवन, सड़कें एवं फुटबॉल अकादमियां की गईं निर्मित  
    20 Sep 2021
    100-दिवसीय कार्यक्रम में शामिल परियोजनाओं के कार्यान्वयन पर नजर रखने के लिए बनाये गए राजकीय नियंत्रण-मंडल की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के विभिन्न विभागों के तहत…
  • Afghanistan
    एम. के. भद्रकुमार
    शांघाई सहयोग संगठन अमेरिका की अगुवाई वाले क्वाड के अधीन काम नहीं करेगा
    20 Sep 2021
    एससीओ यानी शांघाई सहयोग संगठन, अमेरिका की अगुवाई वाले चार देशों के गठबंधन क्वाड के अधीन काम नहीं करेगा।
  • Indigenous People of Brazil Fight for Their Future
    निक एस्टेस
    अपने भविष्य के लिए लड़ते ब्राज़ील के मूल निवासी
    20 Sep 2021
    हाल ही में इतिहास की सबसे बड़ी मूल निवासियों की लामबंदी ने सत्ता प्रतिष्ठानों के आस-पास की उस शुचिता की धारणा को को तोड़कर रख दिया है जिसने सदियों से इन मूल निवासियों को सत्ता से बाहर रखा है या उनके…
  • Government employees in Jammu and Kashmir
    सबरंग इंडिया
    जम्मू-कश्मीर में सरकारी कर्मचारियों से पूर्ण निष्ठा अनिवार्य, आवधिक चरित्र और पूर्ववृत्त सत्यापन भी जरूरी
    20 Sep 2021
    16 सितंबर को जारी सरकारी आदेश में कहा गया है कि अगर किसी कर्मचारी के खिलाफ किसी भी तरह की प्रतिकूल रिपोर्ट की पुष्टि होती है तो उसे बर्खास्त किया जा सकता है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License