NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
पर्यावरण
भारत
राजनीति
देहरादून: सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के कारण ज़हरीली हवा में जीने को मजबूर ग्रामीण
कूड़ा निस्तारण के लिए उत्तराखंड राज्य का पहला सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट देहरादून के नजदीक, आसान नदी के किनारे शीशम बाड़ा में बनाया गया है, चार साल पहले बने इस कूड़ा निस्तारण प्लांट का मुख्य कार्य देहरादून महानगर में बढ़ती कूड़े की समस्या से निज़ात पाना है, लेकिन समय के साथ पर्याप्त मात्रा में कूड़े का निस्तारण नहीं होने के कारण आज इस प्लांट में कूड़े का एक विशालकाय पहाड़ बन चुका है।
सत्यम कुमार
16 Mar 2022
dehradun
देहरादून शीशमबाड़ा में बना कूड़े का पहाड़ (फोटो -राजेन्द्र गंगसरी)

शीशम बाड़ा में बने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के कारण इस क्षेत्र के ग्रामीण कचरे के पहाड़ से उत्सर्जित जहरीली गैसों के बदबूदार माहौल में अभिशप्त जीवन जीने को मजबूर हैं। आपको बता दें कि कूड़ा निस्तारण के लिए उत्तराखंड राज्य का पहला सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट देहरादून के नजदीक, आसान नदी के किनारे शीशम बाड़ा में बनाया गया है, चार साल पहले बने इस कूड़ा निस्तारण प्लांट का मुख्य कार्य देहरादून महानगर में बढ़ती कूड़े की समस्या से निज़ात पाना है, लेकिन समय के साथ पर्याप्त मात्रा में कूड़े का निस्तारण नहीं होने के कारण आज इस प्लांट में कूड़े का एक विशालकाय पहाड़ बन चुका है, कूड़े के इस पहाड़ से आने वाली तीव्र दुर्गन्ध और बारिश के बाद, इस पहाड़ से रिसने वाले पानी से होने वाली तमाम तरह की बीमारियों का डर क्षेत्र की जनता को सताने लगा है।

हालाँकि कूड़ा निस्तारण प्लांट से होने वाली समस्याओं को लेकर क्षेत्र की जनता के द्वारा प्रशासन को लगातार अवगत कराया गया, अपनी समस्याओं का कोई समाधान न होता देख जनता ने धरने प्रदर्शन भी किये लेकिन प्रशासन के द्वारा इस प्लांट से होने वाली समस्या के समाधान के स्थान पर लगातार जनता की आवाज़ को ही दवाया गया और समस्या आज भी ज्यों की त्यों बनी है।

वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट और उससे पैदा हुई समस्या 

उत्तराखंड राज्य गठन के बाद देहरादून को राज्य की अस्थाई राजधानी बनाया गया, अस्थाई राजधानी बनने के बाद से देहरादून शहर की जनसंख्या साल दर साल बढ़ती चली गई और साथ ही बढ़ी घर और व्यावसायिक संस्थानों से निकलने वाले कचरे के निस्तारण की समस्या, इस समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2018 में नगर निगम देहरादून सालिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना के अंतर्गत कम्पोस्ट प्लांट एवं सेनेट्री लैंडफिल साइट शीशम बाड़ा का उद्घाटन उस समय राज्य के मुख्यमंत्री रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत के द्वारा किया गया। शीशम बाड़ा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का कॉन्ट्रेक्ट आरएमकेवाय (रैमकी) प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी को दिया गया। इस प्लांट में प्रति दिन 300 टन कचरे का निस्तारण किया जा सकता है। उत्तराखंड प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड की वार्षिक रिपोर्ट 2020-21 से मिली जानकारी के अनुसार इस प्लांट में देहरादून नगर निगम के साथ साथ तीन अतरिक्त शहरी स्थानीय निकाय, मसूरी (18 टन प्रति दिन), विकास नगर (10 टन प्रतिदिन) और हर्बटपुर (3 टन प्रतिदिन) का कचरा भी आता है। अर्बन म्युनिसिपल सॉलिड बेस्ट मैनेजमेंट एक्शन प्लान फॉर उत्तराखंड से प्राप्त जानकारी के अनुसार देहरादून नगरनिगम में प्रति दिन लगभग 265 टन कचरा उत्सर्जित होता है इस प्रकार शीशम बाड़ा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में लगभग 296 टन कचरा प्रतिदिन निस्तारण के लिए आता है।

 शीशम बाड़ा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के अंदर का नजारा (फोटो-जीतेन्द्र गुप्ता)

शीशम बाड़ा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट आसान नदी के किनारे पर बनाया गया है, जिसके एक ओर हिमगिरि जी यूनिवर्सिटी तो दूसरी ओर इंसानी बस्तियां है। हिमगिरि जी यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों का कहना है कि इस प्लांट के कारण, क्लास रूम के दरवाजे बंद करने के बाद भी बदबू आती है, यदि उन्हें पहले पता होता कि इस बदबू में पढ़ाई करनी पड़ेगी तो किसी भी हालत में यहां एडमिशन न लेते। वहीं दूसरी ओर बस्तियों में रहने वाली महिलाओं का कहना है कि कूड़ा घर से लगातार आने वाली बदबू के कारण वे घर का काम करते-करते अक्सर भूल जाती हैं कि वे क्या कर रही हैं। किसी काम में मन नहीं लगता है, बच्चे बार-बार बीमार पड़ रहे हैं, आये दिन कूड़े के ढेर से चील-कौवे मांस के टुकड़े उठा लाते हैं जो उनके घरो मे और छतों पर गिरा देते है| इन सभी समस्याओ के साथ साथ प्लांट से लगातार रिसता जहरीला पानी, लगभग 300 मीटर दूर आसान नदी में मिलजाता है जो नदी में रहने वाले जीवों के लिए भी हानिकारक है।

इंसानी स्वास्थ्य के साथ-साथ आसपास के खेतों पर भी बुरा असर

शीशम बाड़ा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट से लगभग 4 किमी दूर सिगनी वाला गांव के रहने वाले प्रवीन पाल बताते हैं कि हमारे द्वारा प्लांट की दिवार से लगते हुए छ: वीघा का खेत किराए पर लिया हुआ है, जिसमें हमारे द्वारा इस वर्ष धान की फसल लगाई थी, जो प्लांट से निकलने वाले जहरीले पानी के कारण पूरी तरह ख़राब हो गयी है, इस फसल से मुनाफ़ा तो दूर की बात है, जो लागत हमने लगाई थी वह भी नहीं मिल पाई है और इसके लिए कोई मुआवज़ा भी सरकार की ओर से हम को नहीं मिला। प्रवीन पाल आगे बताते हैं कि हमारा परिवार मुख्य रूप से खेती किसानी पर ही निर्भर रहता है, यदि आने वाले समय में भी ऐसा ही होता रहा तो यह हमारे परिवार के पालन पोषण के लिए भी एक बड़ी समस्या होगी।

शीशमबाड़ा प्लांट से रिसने वाले ज़हरीले पानी के कारण नष्ट धान की फ़सल (फोटो- जीतेन्द्र गुप्ता) 

पछवा दून संयुक्त समिति के सचिव राजेन्द्र गंगसरी का कहना है कि शीशम बाड़ा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में आने वाले कचरे का निस्तारण पूर्ण रूप से नहीं किया जा रहा है, जिससे इस प्लांट में कूड़े का ढेर लगातार बढ़ता जा रहा है और इससे निकलने वाली जहरीली गैस और पानी क्षेत्र की आवो हवा को दूषित कर रहे हैं जिस कारण इस प्लांट के आसपास के गांवो में तमाम तरह की बीमारियां अपने पैर पसार रही है।

आज हालात यह है कि क्षेत्र में रहने वाले लोगो का साँस लेना भी मुश्किल हो चुका है, जरा सोचकर देखिए कि आप खाना खाने के लिए बैठे और तेज़ दुर्गन्ध आने लगे तो कैसा लगता होगा? राजेन्द्र गंगसरी आगे बताते हैं कि सन 2018 से पहले यह कचरा संहस्त्रधारा के पास में इकट्ठा किया जाता था, इस क्षेत्र में रहने वाले अधिक शिक्षित व आर्थिक रूप से संपन्न लोगो ने कचरे के ढेर को अपने क्षेत्र से हटाने के लिये सड़क से लेकर न्यायालय तक की लंबी लड़ाई लड़ी और अन्ततः वे लोग अपने क्षेत्र से कचरे के इस ढेर को हटाने में सफल हो गये और अब कचरे का यह ढेर पछवादून के गरीब ग्रामीणों के हिस्से आ गया। प्लांट निर्माण शुरू होने के साथ ही हम लोगो ने इसका विरोध शुरू कर दिया था, लेकिन प्रशासन के द्वारा वार-वार पुलिस बल का प्रयोग कर हमारी आवाज को दबाया गया। हालाँकि हमारे द्वारा शिकायत करने पर कूड़े के ढेर से आने वाली बदबू को रोकने के लिए कुछ उपाय जरूर किये गये, लेकिन सभी नाकाम साबित हुए है, इसलिए सरकार से हमारी मांग है कि जल्द से जल्द इस समस्या का स्थायी समाधान हो और जब तक इस समस्या का समाधान नहीं होता हम अपनी लड़ाई सड़क और न्यायालय दोनों में जारी रखेंगे।

इस विषय पर विशेषज्ञों की राय 

सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी (एसडीसी) फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल कहते हैं कि आज देहरादून शहर में घरो और व्यावसायिक संस्थानों से निकलने वाला कचरा एक बड़ी समस्या बन चुका है, जिसका उचित निस्तारण बहुत ही आवश्यक है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट प्रशासन के द्वारा एक अच्छी पहल है, परन्तु यदि शहर के सारे कचरे को एक साथ इकठ्ठा करने के स्थान पर प्रत्येक वार्ड में ही इस कचरे का उचित निस्तारण हो तो यह और भी बेहतर विकल्प साबित होगा, ऐसा करने से कम से कम कचरा इस प्लांट में जायेगा और समय पर निस्तारित होगा जिससे इस क्षेत्र की जनता को बदबू से होने वाली समस्या से छुटकारा मिल पायेगा।

शीशम बाड़ा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के अंदर का नजारा (फोटो- जीतेन्द्र गुप्ता)

दून साइंस फोरम के संयोजक विजय भट्ट बताते हैं कि शीशम बाड़ा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में बना कचरे का यह विशालकाय पहाड़ देहरादून में रहने वाले उन संपन्न लोगों के घरों से निकले कचरे से बना है, जिनको शायद मालूम भी नहीं होगा कि हमारे घरों से निकलने वाले कचरे ने पछवा दून के लोगो का जीना भी मुश्किल कर दिया है। 

प्रशासन लगातार विज्ञापनों के द्वारा जनता को घर पर ही गीले और सूखे कचरे को पृथक करने को लेकर जागरूक करता रहा है, जिससे आसानी से गीले कचरे से खाद और सूखे कचरे को रिसायकल किया जा सके, लेकिन शहर में रह रहे लोगो के लिए यह उतना आसान भी नहीं होगा। इसलिए प्रशासन को छोटे छोटे सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट वार्ड स्तर पर ही लगाने चाहिए ताकि समय पर बिना किसी दूसरे को नुकसान पहुँचाये, कचरे की इस समस्या से छुटकारा मिल सके।

उपलब्ध आंकड़ों को देखें तो शीशमबाड़ा में बने इस प्लांट की कूड़ा निस्तारण क्षमता इस प्लांट में आने वाले कूड़े की मात्रा से अधिक है लेकिन फिर भी इस प्लांट में कूड़े का ढ़ेर लगातार बढ़ता जा रहा है ऐसा क्यों? अपने इस सवाल का जवाब जानने के लिए सम्बन्धित विभाग से संपर्क करने की कोशिश की गयी लेकिन कोई संपर्क नहीं हो पाया। परन्तु समाचार पत्रों से मिली जानकारी के अनुसार फरवरी माह में मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खन्ना की अगुवाई में एक टीम सेलाकुई के शीशमबाड़ा में स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का औचक निरीक्षण करने पहुंची थी। इस दौरान प्लांट में दो बड़ी मशीनें बंद हालत में मिलीं। जबकि कई बड़े सफाई वाहन खराब स्थिति में प्लांट परिसर में खड़े मिले। वहीं यहां हजारों टन कूड़े के निस्तारण से निकलने वाला आरडीएफ एकत्रित हो गया है। जिसकी मात्रा दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। प्लांट में जो खाद तैयार की जा रही है। उसका कोई खरीदार ही नहीं मिल पा रहा, ऐसे में जिस उद्देश्य से प्लांट बनाया गया था, वह पूरा ही नहीं हो पा रहा। प्रशासन के द्वारा कंपनी को व्यवस्था दुरुस्त करने के साथ अपना पक्ष रखने को एक सप्ताह का समय दिया है। यदि व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई तो कंपनी के खिलाफ निगम सख्त कार्रवाई करेगा।

अंततः इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए हमारे द्वारा एक मेल सम्बंधित विभाग को कर दिया गया है, जानकारी मिलने पर आप को अवगत करा दिया जायेगा| 

(लेखक देहरादून स्थित एक स्वतंत्र पत्रकार हैं) 

ये भी पढ़ें: उत्तराखंड: बारिश से भारी संख्या में सड़कों और पुलों का बहना किसका संकेत?

UTTARAKHAND
Dehradun
Solid Waste Management Plant
Solid Waste
Solid Waste Management
Air Pollution

Related Stories

बिहार की राजधानी पटना देश में सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहर

इको-एन्ज़ाइटी: व्यासी बांध की झील में डूबे लोहारी गांव के लोगों की निराशा और तनाव कौन दूर करेगा

दिल्ली से देहरादून जल्दी पहुंचने के लिए सैकड़ों वर्ष पुराने साल समेत हज़ारों वृक्षों के काटने का विरोध

साल 2021 में दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी थी : रिपोर्ट

विश्व जल दिवस : ग्राउंड वाटर की अनदेखी करती दुनिया और भारत

हवा में ज़हर घोल रहे लखनऊ के दस हॉटस्पॉट, रोकने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तैयार किया एक्शन प्लान

उत्तराखंड के नेताओं ने कैसे अपने राज्य की नाज़ुक पारिस्थितिकी को चोट पहुंचाई

उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क में वन गुर्जर महिलाओं के 'अधिकार' और उनकी नुमाइंदगी की जांच-पड़ताल

हर नागरिक को स्वच्छ हवा का अधिकार सुनिश्चित करे सरकार

दिल्ली ही नहीं गुरुग्राम में भी बढ़ते प्रदूषण से सांसों पर संकट


बाकी खबरें

  • सत्यम् तिवारी
    वाद-विवाद; विनोद कुमार शुक्ल : "मुझे अब तक मालूम नहीं हुआ था, कि मैं ठगा जा रहा हूँ"
    16 Mar 2022
    लेखक-प्रकाशक की अनबन, किताबों में प्रूफ़ की ग़लतियाँ, प्रकाशकों की मनमानी; ये बातें हिंदी साहित्य के लिए नई नहीं हैं। मगर पिछले 10 दिनों में जो घटनाएं सामने आई हैं
  • pramod samvant
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेकः प्रमोद सावंत के बयान की पड़ताल,क्या कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार कांग्रेस ने किये?
    16 Mar 2022
    भाजपा के नेता महत्वपूर्ण तथ्यों को इधर-उधर कर दे रहे हैं। इंटरनेट पर इस समय इस बारे में काफी ग़लत प्रचार मौजूद है। एक तथ्य को लेकर काफी विवाद है कि उस समय यानी 1990 केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी।…
  • election result
    नीलू व्यास
    विधानसभा चुनाव परिणाम: लोकतंत्र को गूंगा-बहरा बनाने की प्रक्रिया
    16 Mar 2022
    जब कोई मतदाता सरकार से प्राप्त होने लाभों के लिए खुद को ‘ऋणी’ महसूस करता है और बेरोजगारी, स्वास्थ्य कुप्रबंधन इत्यादि को लेकर जवाबदेही की मांग करने में विफल रहता है, तो इसे कहीं से भी लोकतंत्र के लिए…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    फ़ेसबुक पर 23 अज्ञात विज्ञापनदाताओं ने बीजेपी को प्रोत्साहित करने के लिए जमा किये 5 करोड़ रुपये
    16 Mar 2022
    किसी भी राजनीतिक पार्टी को प्रश्रय ना देने और उससे जुड़ी पोस्ट को खुद से प्रोत्सान न देने के अपने नियम का फ़ेसबुक ने धड़ल्ले से उल्लंघन किया है। फ़ेसबुक ने कुछ अज्ञात और अप्रत्यक्ष ढंग
  • Delimitation
    अनीस ज़रगर
    जम्मू-कश्मीर: परिसीमन आयोग ने प्रस्तावों को तैयार किया, 21 मार्च तक ऐतराज़ दर्ज करने का समय
    16 Mar 2022
    आयोग लोगों के साथ बैठकें करने के लिए ​28​​ और ​29​​ मार्च को केंद्र शासित प्रदेश का दौरा करेगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License