NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कोविड-19 : मोदी के ‘आगरा मॉडल’ का खोखलापन दिख रहा है
मंगलवार को, उत्तर प्रदेश के पर्यटक शहर आगरा में जहाँ शानदार ताजमहल है और एक हॉटस्पॉट भी है, में कोविड-19 के 15 नए मामले सामने आए हैं।
अब्दुल अलीम जाफ़री
29 Apr 2020
Translated by महेश कुमार
agra taj

लखनऊ: ख़बरों के अनुसार उत्तर प्रदेश के कई जिलों में फैले कोरोनोवायरस में कथित तौर पर कुछ सुधार हो रहा है, लेकिन पर्यटक हॉटस्पॉट, आगरा में केसों की संख्या में वृद्धि हो रही है। मंगलवार को, ताजमहल के इस शहर में कम से कम 15 कोविड-19 के नए मामले सामने आए हैं, इसे मिलाकर जिले में इस तरह के कुल मामले 401 हो गए हैं जो पूरे राज्य में सबसे अधिक तो है ही साथ ही देश में भी यह 11 वें स्थान पर आ गया है।

स्थिति की गंभीरता का पता आगरा के मेयर नवीन जैन द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को लिखे पत्र से चल जाता है, ज़िला प्रशासन की चेतावनी के मुताबिक आगरा में स्थिति खतरनाक है और अगर इस पर वक़्त रहते ठीक से काबू नहीं पाया गया तो यह शहर भारत का "वुहान" बन सकता है। वुहान वह चीनी शहर है जहां सबसे पहले वायरस के संक्रमण की ख़बर मिली थी, और वह संक्रमण का एक बड़ा केंद्र बन गया था।

21 अप्रैल को लिखे इस पत्र में, आदित्यनाथ से 'आगरा को बचाने’ का अनुरोध किया गया है। जैन ने अपने पत्र में लिखा, "मैं यह पत्र बहुत ही दुखी मन से लिख रहा हूं क्योंकि मेरा आगरा बहुत अधिक समस्याओं के दौर से गुजर रहा है। आगरा को बचाने के लिए साहसिक निर्णय लेने की जरूरत है, यहाँ स्थिति बहुत ही गंभीर हो गई है। इसलिए, में हाथ जोड़कर विनती करता हूँ कि कृपया मेरे आगरा को बचा लें।” यह पत्र कहित तौर पर लीक हो गया था।

स्थिति नियंत्रण के बाहर 

संयोग की बात है कि महीने की शुरूआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस के प्रसार को आगरा के "क्लस्टर में सफल रोकथाम" के लिए "आगरा मॉडल" की सराहना की थी और अन्य राज्यों से इसका पालन करने की अपील की थी। लेकिन जो लोग हॉटस्पॉट्स (रेड ज़ोन) में रह रहे हैं उनके मुताबिक यहाँ का जीवन बहुत ही कठिन हो गया है क्योंकि वहाँ किराने का सामान, सब्जियां, फल या अन्य दैनिक घरेलू सामान बेचने वाली दुकानें नहीं खुल रही हैं। 10 अप्रैल को सील किए गए जगदीशपुरा क्षेत्र के निवासी नमित सोदिया ने न्यूजक्लिक को फोन पर बताया कि हॉटस्पॉट क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को दरवाजे पर सब्जी, दूध या अन्य किसी भी तरह की आवश्यक आपूर्ति नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा, "लोग किसी तरह चुपके से पास की इन गलियों से समान खरीदते हैं, जो कि रेड़ ज़ोन का हिस्सा नहीं है, और वहाँ से अपनी आवश्यकता के अनुसार  खरीद कर सकते हैं। उन्हौने सवाल दागा कि आखिर यह कब तक जारी रहेगा?"

आगरा स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता, नरेश पारस ने दावा किया है कि: "आगरा में स्थिति नियंत्रण के बाहर चली गई है क्योंकि सभी क्लीनिकों और निजी अस्पतालों में सामान्य रोगियों का इलाज नहीं किया जा रहा है और यदि कोई मरीज किसी सरकारी अस्पताल में जाता है, तो उसे पहले कोरोना की जाँच कराने के लिए कहा जाता है। इस वजह से, अस्पताल की लापरवाही के चलते कई लोग अपनी जान से हाथ धो चुके हैं।"

शहर के बिगड़ते हालात पर चर्चा करने के लिए मंगलवार को किसान नेता श्याम सिंह चाहर, समाजसेवी प्रदीप शर्मा और लाखन सिंह त्यागी, ज़िलाधिकारी (डीएम), आगरा से मिलने गए और वापसी पर उन्हौने न्यूज़क्लिक को बताया, कि “ज़िला प्रशासन लोगों का डेटा छिपा रहा है लोग तो हर दिन मर रहे हैं। मुझे पूरा यकीन है कि अगर सही ढंग से जांच की जाती है तो आगरा में करीब 10,000 से अधिक लोग संक्रमित पाए जाएंगे। हर दिन लगभग 10-20 लोग मर रहे हैं, लेकिन न तो मौत के पीछे का विवरण और कारण बताए जा रहे हैं और न ही उनका पोस्टमार्टम किया जा रहा है।"

कोरोनोवायरस हॉटस्पॉट क्षेत्रों में लोगों को आवश्यक वस्तुओं को मुहैया कराए जाने के बारे में पूछे जाने पर, चाहर ने आरोप लगाया कि सरकार भोजन पर एक भी रुपया खर्च नहीं कर रही है, बल्कि सामाजिक कार्यकर्ता और गैर सरकारी संगठन जरूरतमंदों को खाना खिला रहे है। उन्होंने दावा किया कि अगर, "सामाजिक कार्यकर्ता और एनजीओ गरीबों की मदद के लिए अपने घरों से बाहर कदम नहीं रखते तो झुग्गी बस्तियों में रहने वाले कई लोग अब तक मौत का शिकार हो जाते। 

एक वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ और आगरा के इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के पूर्व अध्यक्ष शरद गुप्ता ने न्यूजक्लिक को बताया कि, "आगरा में प्रशासन हैरान है क्योंकि उन्हें कोई आइडिया ही नहीं है कि उन्हे आखिर करना क्या है। 100 से ज्यादा कोविड-19 के पॉजिटिव केस अकेले पारस अस्पताल में हैं और इसे एक क्वारंटाईन केन्द् के साथ-साथ उचित जांच की क्षमताओं में तब्दील करने के बजाय, ज़िला प्रशासन ने अस्पताल के अंदर उपस्थित रोगियों, चिकित्सा कर्मचारियों के बारे में कुछ सोचे बिना अस्पताल को बंद कर दिया है।"

उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल की लापरवाही के कारण अन्य जगहों पर भी कोरोना वायरस फैल गया है। सामाजिक दूरी के उल्लंघन की ओर इशारा करते हुए, गुप्ता ने सवाल किया कि जब प्रधानमंत्री ने सामाजिक दूरी की वकालत की थी, तो ज़िला प्रशासन ने पारस अस्पताल को क्यों बंद कर दिया, जहां 300 से अधिक लोग फंसे हुए थे?

उन्होंने कहा, "अस्पताल को बंद करने के बजाय, ज़िला प्रशासन को प्रत्येक व्यक्ति की जांच सुनिश्चित करनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने एक 'पिक एंड चूज' दृष्टिकोण अपनाया, जिसके कारण जिले में वायरस फैल गया।"

डॉक्टर ने यह भी आरोप लगाया कि ज़िला प्रशासन ने ऐसा इसलिए किया होगा क्योंकि वे नहीं चाहते कि कोविड-19 के पॉज़िटिव केसों की संख्या बढ़ती नज़र आए, क्योंकि इससे निवासियों में दहशत पैदा होगी। "ज़िला प्रशासन को केरल से सीखलेनी चाहिए कि वे कैसे आईसीएमआर और डब्लूएचओ दिशानिर्देशों का पालन कर रहे हैं और स्थिति को नियंत्रित करने में सक्षम हैं। यहां वे दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, यदि यह आगरा मॉडल है जिसे केंद्र देश भर में लागू करना चाहता है तो कल्पना करें कि देश की हालत क्या होगी।" 

इस बीच, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ऑफ आगरा के एक पूर्व अध्यक्ष ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि ज़िला प्रशासन “आंकड़ों को छिपाने” के लिए पॉज़िटिव केसों को पड़ोसी फिरोजाबाद जिले में स्थानांतरित कर रहा है।

 

क्वारंटाईन केंद्रों की दुर्दशा 

इस बीच, उत्तर प्रदेश में क्वारंटाईन केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी से इसोलेशन में रह रहे लोगों की मुश्किलें बढ़ रही है। बड़ी संख्या में लोग, जो आगरा में विभिन्न ठिकानों में कोविड -19 संक्रमण के संदेह के घेरे में हैं, ने अपर्याप्त भोजन और स्वच्छता सहित दयनीय सुविधाओं के मामले में भयानक  सूचना दी है। इन ठिकानों में हफ्तों से अधिक का समय बिताने के बावजूद उनमें से अधिकतम लोगों की अभी तक कोविड-19 जांच नहीं की गई है।

उत्तर प्रदेश के आगरा में एक क्वारंटाईन सुविधा से दो चौंकाने वाले वीडियो समाने आए हैं, जो सोशल मीडिया पर 26 अप्रैल से ‘आगरा मॉडल’ की धज्जियां उड़ाने का काम कर रहे हैं, ये वीडियो आगरा में एक कोरोनावायरस क्वारंटाईन केंद्र के भीतर के दृश्य को दिखाता है कि कैसे लोगों की बिस्कुट और पानी “फेंका’ जाता है, इस खुलासे के लिए यूपी सरकार ने जांच के आदेश दे दिए है।

आगरा टूरिज़्म एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन के अध्यक्ष संदीप अरोड़ा, जो शहर में भोजन और राशन किट का वितरण कर रहे हैं, ने न्यूज़क्लिक को बताया, "यहां इस बात की कोई व्यवस्था नहीं है कि क्वारंटाईन केंद्रों को कैसे संचालित किया जाना चाहिए क्योंकि उनके पास कर्मचारी नहीं हैं। सरकार को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से खरीद पर फिर से काम करने की आवश्यकता है"-जबकि सरकार खुद जी यह काम कर अरही है। वे कानून और व्यवस्था का प्रबंधन भी करना चाहते हैं, हॉटस्पॉट क्षेत्रों पर नजर भी रखना चाहते हैं और भोजन भी वितरित करना चाहते हैं। हमारे पास भोजन तैयार करने के लिए पर्याप्त राशन किट है लेकिन प्रशासन हमें वितरित करने की अनुमति नहीं दे रहा है।”

अरोड़ा ने आरोप लगाते हुए कहा कि आगरा में अधिकांश क्वारंटाईन केंद्रों में वॉशरूम जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। उन्होंने कहा, "जब सब कुछ जैसे रुक सा गया है और मजदूर वापस अपने घरों के लिए रवाना हो गए, तो डीएम ने मुझसे क्वारंटाईन केंद्रों को स्थापित करने के लिए 500 कमरों की व्यवस्था करने को कहा। लेकिन, अब उनके पास व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण और मास्क भी नहीं हैं, तो क्वारंटाईन ठिकानों का क्या उपयोग है?"

न्यूजक्लिक ने पिछले हफ़्ते एक स्टोरी की थी जिसमें बताया गया था कि कैसे केसों में बढ़ोतरी के लिए आगरा के एक निजी अस्पताल को दोषी ठहराया जा रहा है।

 

agra
Agra Hotspot
Quarantine centres
Uttar pradesh
Paras Hospital
COVID-19

Related Stories

आजमगढ़ उप-चुनाव: भाजपा के निरहुआ के सामने होंगे धर्मेंद्र यादव

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

यूपी : आज़मगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा की साख़ बचेगी या बीजेपी सेंध मारेगी?

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही मस्जिद ईदगाह प्रकरण में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल


बाकी खबरें

  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: खूंटी के आदिवासी गांवों में ‘ड्रोन सर्वे’ को लेकर विरोध, प्रशासन के रवैये से तनाव
    31 Dec 2021
    एआईपीएफ़ की फ़ैक्ट फाइंडिंग टीम ने झारखंड ग्रामीण विकास मंत्री को वस्तुस्थिति की रिपोर्ट सौंपी।
  • Shaheen Bagh : Loktantra Ki Nai Karavat
    राज वाल्मीकि
    ‘शाहीन बाग़; लोकतंत्र की नई करवट’: एक नई इबारत लिखती किताब
    31 Dec 2021
    दिल्ली में पत्रकार भाषा सिंह की नई किताब ‘शाहीन बाग़ : लोकतंत्र की नई करवट’ का विमोचन और चर्चा। वक्ताओं ने कहा, "यह किताब एक ज़िन्दा दस्तावेज़ है, जो शाहीन बाग़ को हमेशा ज़िन्दा रखेगी।"
  • Drone warfare
    पीपल्स डिस्पैच
    ड्रोन युद्ध : हर बार युद्ध अपराधों से बचकर निकल जाता है अमेरिका, दुनिया को तय करनी होगी जवाबदेही
    31 Dec 2021
    द न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा हाल में अफ़ग़ानिस्तान और पश्चिमी एशिया में 2014 के बाद से अमरीकी हवाई हमलों में मारे गए हजारों लोगों पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई। यह रिपोर्ट रेखांकित करती है कि अब…
  • kisan
    विजय विनीत
    यूपीः धान ख़रीद को लेकर किसानों से घमासान के बाद हड़ताल पर गए क्रय केंद्र प्रभारी
    31 Dec 2021
    चंदौली इलाक़े में धान ही इकोनॉमी का केंद्रबिंदु भी है। सरप्लस उपज के बावजूद इस पूरे इलाक़े में सरकार वैसी ख़रीद नहीं कर पा रही और न ही किसानों को एमएसपी का लाभ मिल पा रहा है।
  • tabrej
    ज़ाकिर अली त्यागी
    झारखंड : मॉब लिंचिंग क़ानून के बारे में क्या सोचते हैं पीड़ितों के परिवार?
    31 Dec 2021
    झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने मॉब लिंचिंग पर लगाम कसने के लिए  'भीड़ हिंसा एवं भीड़ लिंचिंग निवारण विधेयक'क़ानून 21 दिसंबर को सदन से पास करवा लिया है। इस नए क़ानून से मॉब लिंचिंग के पीड़ित व्यक्तियों…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License