NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
गुरुग्राम में बेरोजगारी, कम कमाई और बढ़ती महंगाई के बीच पिसते मजदूरों का बयान
मजदूर वर्ग सरकार की योजनाओं का नाम तक नहीं बता पा रहा है, योजनाओं का लाभ मिलना तो दूर की बात है।
सतीश भारतीय
11 Jan 2022
workers

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटा गुरुग्राम भारत में प्रति व्यक्ति आय के मामले में चंडीगढ़ और मुंबई के बाद तीसरा स्थान रखता है। विगत 25 सालों में गुरुग्राम ने बहुत तेजी से प्रगति की है और मौजूदा दौर में गुरुग्राम बहुराष्ट्रीय कंपनियों और आईटी सेक्टर का गढ़ माना जाता हैं। लेकिन अपने आप को दुनिया के नक्शे में स्थापित कर चुके गुरुग्राम में गरीब मजदूर वर्ग भी रहता है। अगर गुरुग्राम या गुरुग्राम जैसे किसी भी शहर से वहां के मजदूर वर्ग को निकाल दिया जाए तो उस शहर की जीवनधारा रुक जाएगी। 

मजदूर वर्ग का ज्यादातर हिस्सा उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान जैसे अन्य राज्यों से काम की तलाश में गुरुग्राम आता है। इस कोरोना संकट के दौर में जिस तरह बेरोजगारी और महंगाई में इज़ाफ़ा होता जा रहा है उससे हमारे मजदूर वर्ग पर कितना असर पड़ रहा है? इसका जायज़ा लेने जब हम गुरुग्राम पहुंचे तब वहां सबसे पहले झाड़सा गांव की सब्जी मंडी सेक्टर 32 के समीप हमारी मुलाकात बलवीर, राकेश, विनोद, प्रेमपाल वेद प्रकाश सहित अन्य मजदूरों से हुई जो बिहार, यूपी और राजस्थान के थे और रोजगार न मिलने से परेशान बैठे थे। 

जब हमने उनसे सवाल किया कि इस कोरोना महामारी के दौर में आपकी दैनिक आय कितनी है और महीने में कितना कमा लेते हैं? तब उनमें से राकेश और विनोद ने जवाब देते हुए कहा एक हफ्ते से हम लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है। बड़ी मुश्किल से दिन में कभी 60 रुपए कभी 100 कभी 200 रुपए का रोजगार मिलता है, जिससे महीने में 3 से 5 हजार रुपए की कमाई होती हैं, जिसमें घर का खर्चा चलाना बहुत कठिन है।

आगे हमने उनसे सवाल पूछा कि इतनी कम आय में अपने बच्चों को कैसे पढ़ाते हैं? तब वहां मौजूद प्रेमपाल और बलवीर कहते हैं स्कूल की फीस तो इतनी महंगी है कि हम अपने बच्चे का स्कूल में एडमिशन भी नहीं करा सकते।

फिर आगें हमने प्रश्न किये कि आप गरीब क्यों हैं? और पीएम इंदिरा गांधी के समय से नारा चला था 'गरीबी हटाओ' लेकिन अभी तक गरीबी खत्म क्यों नहीं हुई? मोदी सरकार गरीबी हटाने के क्या प्रयास कर रही है? 

तब वहां उपस्थित राजाराम उत्तर देते हुए कहते हैं कि गरीबी की सबसे प्रमुख वजह भ्रष्टाचार है सरकार द्वारा जो गरीबों की सहायता की जाती है उसका 50 प्रतिशत ही हम तक पहुंचता है। जैसे हमारे गांव में सरकारी राशन मिलता हैं, उसमें से आधा राशन गांव का प्रधान बेच देता है। 

फिर जब हम झाड़सा गांव से निकलकर आगे की ओर बढ़े तब सेक्टर 42 में नासिब, सीपू, संजय, रामू, मोहम्मद बसीम सहित यूपी, बिहार और मध्यप्रदेश के लगभग 20 प्रवासी मजदूरों से उनका हाल जाना और पूछा आपका रोज़गार कैसा चल रहा है? तब सभी का जवाब यही आया कि हम बेरोजगार बैठे हैं।  

फिर हमने पूछा कि आप लोगों को रोज़गार कब से नहीं मिल रहा और क्यों नहीं मिल रहा है?तब इसका जवाब देते हुए सीपू कहते हैं हमें बीते 6 माह से भटकना पड़ रहा है लेकिन अभी तक रोज़गार नहीं मिल‌ रहा है। इसके बाद संजय कहते हैं कि मैं पिछले 2 सप्ताह से काम की तलाश कर रहा हूं लेकिन काम नहीं मिला। वह आगे कहते हैं बेलदारी, सफाई, मालीगिरी सहित अन्य काम ज्यादातर कोविड महामारी के कारण ठप्प पड़े हैं। 

फिर आगे हमने प्रश्र किया कि रोजगार की तंगी के हाल में आप अपने परिवार का खर्च कैसे चलाते हैं? और इस वक्त महंगाई से आपके खान-पान पर क्या असर हो‌ रहा है? 

तब वहां उपस्थित राम बहादुर कहते हैं कि इस महंगाई के वक्त में हमें अपने परिवार का खर्च आस-पास के लोगों से उधार पैसे लेकर चलाना पड़ रहा है। यदि हमें आधा किलो फल खरीदना है तब इसके बारे में बार-बार सोचना पड़ता है।

आगे रामू महंगाई के संबंध में कहते हैं कि महंगाई का असर इस कदर है कि कोरोना के पहले जब फॉर्च्यून तेल 130 रुपए लीटर था, तब हम थोड़ा सा खुला तेल 10 रुपए का दुकान से ले आते थे लेकिन इस समय फॉर्च्यून तेल 200 रुपए से ज्यादा का मिल रहा है ऐसे में हमें दो बार सब्जी बनाने के लिए थोड़ा सा खुला तेल 20 रुपए का मिलता है। 

फिर वहीं मौजूद आग से हाथ सेंकते बहादुर (बिहार के हैं) कहते हैं कि मंहगाई के असर ने शराब के पऊऐ की क़ीमत दोगनी से ज्यादा कर दी है, यहां पहले शराब का पऊआ 30 रुपए का मिलता था लेकिन अब 70 रुपए का मिल रहा है। 

तब हमने बहादुर से पूछा कि क्या आप शराब पीते हैं? तब उन्होंने हां में जवाब दिया। फिर हमने सवाल किया कि आप शराब क्यों पीते हो आपके बिहार में तो शराबबंदी है? क्या शराब जैसे नशे से भी गरीबी बढ़ रही है? तब इसका जवाब देते हुए बहादुर कहते हैं कि मजदूरी की वजह से हमें शरीर में थकान और दर्द होता है जिसे दूर करने लिए हम जैसे लोग शराब पीते हैं। 

फिर आगे वह कहते हैं कि बिहार में नाम के लिए शराब बंदी है। खुले‌ में शराब नहीं दिखती लेकिन अंदर शराब की बिक्री जारी है। इसके पश्चात बहादुर कहते कि मेरे जैसे शराब से ग्रसित कई मजदूर दैनिक मजदूरी के आधे से ज्यादा पैसे की शराब पी जाते हैं क्योंकि नशा हमारी आदत भी बन चुका है जिससे हम गरीबी से उबर नहीं पा रहे हैं।

फिर आगे हमने सवाल किया कि आप जितनी मजदूरी करते क्या उतना वेतन आपको मिल जाता है? तब वहां मौजूद संजू इसका उत्तर देते हुए कहते हैं कि काम करने के बाद भी मालिक हमारा पैसा हज़म कर जाते हैं, मेरी 6 हजार रुपए की दिहाड़ी मालिक अभी तक देने को तैयार नहीं हैं, जब काम का पैसा मांगते हैं तब वह गुंडागर्दी पर उतर आते हैं। 

इसके बाद हमने उनसे पूछा क्या आपने इस मामले में पुलिस केस किया है? तब संजू कहते हैं हम पुलिस के पास गये थे लेकिन 3 महीने में अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। पुलिस कहती हैं हम मामले को देख रहे हैं पर करती कुछ भी नहीं।

फिर इसके बाद हमने बुनियादी जरूरतों से जूझ रहे इन 20 बेरोजगार मजदूरों से पूछा कि आप सरकार की कौन-कौन सी योजनाओं के बारे में जानते हैं। आपको इनका कितना लाभ मिल रहा है? तब उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हमें सरकार की किसी भी योजना का कोई लाभ नहीं मिल रहा। वहीं हैरतअंगेज बात यह रही कि 20 मजदूरों में से महज एक मजदूर संजय ने सरकार की केवल 1 योजना सुकन्या योजना का नाम बताया लेकिन उसके बारें में कुछ नहीं बता पाए।

फिर इसके उपरांत हमने गुरुराम के सदर बाजार की ओर रुख़ किया तब हाईवे के पास खुले में निवासरत एक गरीब परिवार दिखा। जहां पर एक महिला चूल्हे के आकार जैसी रखीं 3 ईंटों के बीच में आग जलाकर रोटियां सेंक रही थी। जब हम पास पहुंचे तब देखा कि वहां महिलाओं और पुरुषों को मिलाकर कुल 7 जन थे, उनकी स्थिति जानते हुए हमने पूछा कि आप कहां से है और यहां खुले में क्यों रह रहे? तब वहां मौजूद पार्वती ने बताया कि हम राजस्थान से हैं। यहां गुरुग्राम में हम कबाड़ा बीनते हैं, जिससे 100-200 रुपए मिल जाते हैं, जिसमें बड़ी मुश्किल से खाना खा पाते हैं। पैसे की कमीं की वजह से हम किराए से रूम भी नहीं ले पा रहे। 

फिर हमने सवाल किया कि क्या राजस्थान में आपको आवास योजना का लाभ मिला? तब वहां मौजूद पार्वती के पति रज्जन कहते है कि हमने इस योजना के बारे में सुना नहीं। आगें हमने पूछा कि आपकी गरीबी के लिए सरकार को क्या करना चाहिए? तब वहीं पर मौजूद नंदो कहती हैं कि सरकार हमें अच्छा रोजगार मुहैया करवा दे तब हम खुद अपनी गरीबी दूर कर लेंगे। 

फिर जब हम सेक्टर 31 की ओर गये तब वहां जमीला, लक्ष्मी, चंदा, सोना सहित करीब 15 महिलाओं से मिले जो मध्यप्रदेश उत्तरप्रदेश, बिहार से रोज़गार की चाह में गुरुग्राम आयीं थी। जब उन महिलाओं से हमने पूछा कि आप सभी का रोज़गार कैसा चल‌ रहा है? तब भी सबका यही जवाब आया कि हम बेरोजगार बैठे हैं।

इन महिलाओं में से चंदा कहती हैं कि हम 6 महीने से बेरोजगार बैठे हैं, हमारे पति को कभी कभार दिहाड़ी मिल जाती है। तब हमारे तीन बच्चों का मुश्किल से भरण- पोषण हो पाता है लेकिन हम रोज़गार की तंगी के कारण 3 माह से रूम का किराया नहीं दे पा रहे हैं।

जब आगे हमने सवाल किया कि महंगाई का आपके जीवन पर कितना असर हो रहा है और महंगाई क्यों बढ़ रही है?
तब वहां मौजूद जमीला कहती हैं कि इस वक्त मंहगाई की वजह से हम कोई खाने-पीने की चीज ठीक मात्रा में नहीं खरीद पाते हैं, हमें इस समय दाल-रोटी खाकर जीना पड़ रहा है। 

आगे सोना बताती हैं कि जब  सरकार ने पिछली दफ़ा कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन लगाया था तब से खाद्यान्न और कृषि के क्षेत्र में किसानों को अधिक नुकसान हो रहा है जिससे महंगाई अब तक बढ़ती जा रही है।

फिर हमने अगला सवाल पूछा कि आपको सरकार की योजनाओं का कितना लाभ मिल रहा है और सरकार की कौन-कौन सी योजनाएं के बारे में आपने सुना है?

तब इसका जवाब देते हुए वहां उपस्थित सभी महिलाएं कहती हैं कि हमें सरकार की योजनाओं का कोई लाभ नहीं मिल रहा है और स्थिति यह है कि लगभग 15 महिलाओं में से कोई भी महिला सरकार की एक भी योजना का नाम नहीं बता सकी।

आगे हमने पूछा कि यदि कोरोना के बढ़ने से सरकार पूर्ण लॉकडाउन लगाती है तब आपकी  गुजर-बसर कैसे चलेगी? 
तब वहां मौजूद देववति कहती हैं यदि टोटल लॉकडाउन लगा तब सरकार को हमारे खाने की व्यवस्था करनी होगी नहीं तो हम जैसे गरीब लोग कोरोना से पहले भूख से मर जायेंगे।

आगे ज्यादातर महिलाओं ने यह भी कहा कि यदि सरकार टोटल लॉकडाउन लगाती है तब हम सभी फिर से अपने गांव की ओर पलायन कर जायेंगे।

विचारणीय है कि सरकार ऐसे गरीब वर्ग के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाती? क्या ऐसा गरीब वर्ग वाकई वोट बैंक के लिए है? क्यों गरीब वर्ग के लिए सरकारी योजनाओं का उपयुक्त लाभ नहीं मिल पाता? या फिर सरकार की योजनाएं सूचना पत्रों और अखबारों के पन्नों तक सीमित है?

आज देश में जिस तरह कोरोना के इस दौर में काम, धंधे ठप्प होने से महंगाई और बेरोजगारी बढ़ती जा रही है उससे देश के तमाम मजदूर वर्ग पर बुनियादी जरूरतों का संकट मंडरा रहा है। 

(सतीश भारतीय स्वतंत्र पत्रकार है)

Gurugram
Gurugram Workers
Inflation
Food Inflation
Rising inflation
unemployment
Workers and Labors

Related Stories

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

क्या जानबूझकर महंगाई पर चर्चा से आम आदमी से जुड़े मुद्दे बाहर रखे जाते हैं?

मोदी@8: भाजपा की 'कल्याण' और 'सेवा' की बात

गतिरोध से जूझ रही अर्थव्यवस्था: आपूर्ति में सुधार और मांग को बनाये रखने की ज़रूरत

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

ज्ञानव्यापी- क़ुतुब में उलझा भारत कब राह पर आएगा ?


बाकी खबरें

  • market
    प्रभात पटनायक
    अमेरिकी मुद्रास्फीति: भारत के लिए और अधिक आर्थिक संकट
    20 Dec 2021
    भारत की वित्त मंत्री ने, भारत में आर्थिक बहाली के ढपोरशंखी दावे करते हुए, बड़ी बेपरवाही से अमरीका में मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी की सच्चाई को अनदेखा ही कर दिया, जबकि उन्हें पता होना चाहिए था कि अमरीका…
  • unemployment
    डॉ. अमिताभ शुक्ल
    रोजगार, स्वास्थ्य, जीवन स्तर, राष्ट्रीय आय और आर्थिक विकास का सह-संबंध
    20 Dec 2021
    अर्थशास्त्र के बुनियादी सिद्धांतों में यह स्पष्ट रूप से प्रतिपादित है कि शिक्षा और स्वास्थ्य में किया गया निवेश आर्थिक विकास के लिए सकारात्मक परिणाम उत्पन्न करता है। लेकिन, भारत में उच्च शिक्षा और…
  • Afghanistan
    एम. के. भद्रकुमार
    अफ़ग़ानिस्तान की घटनाओं पर विचार
    20 Dec 2021
    राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की अध्यक्षता में 10 नवम्बर 2021 को अफगानिस्तान पर आयोजित क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद के बाद दिल्ली घोषणा पर तालिबान की प्रतिक्रिया बिल्कुल सही समय पर आई है। तालिबान…
  • Gujarat Polls
    दमयन्ती धर
    गुजरात चुनाव: कांग्रेस की निगाहें जहां ओबीसी, आदिवासी वोट बैंक पर टिकी हैं, वहीं भाजपा पटेलों और आदिवासियों को लुभाने में जुटी 
    20 Dec 2021
    गुजरात की चुनावी राजनीति में एआईएमआईएम और आप के आगमन ने कांग्रेस और भाजपा दोनों को ही अपने-अपने पारंपरिक वोट बैंक से परे जाकर भी देखने के लिए मजबूर कर दिया है।
  • mountain
    टिकेंदर सिंह पंवार
    पर्वतों में सिर्फ़ पर्यटन ही नहीं, पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण भी ज़रूरी है
    20 Dec 2021
    दुनियाभर में पहाड़ बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ़ पर्यावरण का ही अहम केंद्र मान लेना, उनकी तरफ़ देखने का सही तरीक़ा नहीं है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License