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भारत
राजनीति
लॉकडाउन के दौरान शिक्षकों, छात्रों और एक्टिविस्ट की गिरफ्तारी को लेकर छात्रों का ट्विटर पर विरोध
एसएफआई ने कहा कि अगर सरकार एवं पुलिस वास्तविक गुनहगारों पर कार्रवाई नहीं करती है तो एसएफआई द्वारा भविष्य में लॉकडाउन की स्थिति को देखते हुए खुले में शारीरिक दूरी बनाकर प्रदर्शन और आंदोलन किया जाएगा।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
28 May 2020
DU

दिल्ली और देश के हज़ारो छात्रों ने हाल ही में की गई गिरफ्तारियों के विरोध में सोशल मीडिया पर विरोध प्रदर्शन किया। दरअसल सीएए, एनआरसी, एनपीआर के विरोध में प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ताओं, शिक्षकों व छात्रों को विभिन्न धाराओं के अंतर्गत गिरफ्तार किया जा रहा है या हिरासत में लिया जा रहा है। कई कार्यकर्ताओं को UAPA के तहत गिरफ़्तार किया गया है। 23 मई को पिंजरा तोड़ की दो सदस्यों पर भी UAPA लगाया गया। इसके विरोध में एसएफआई, अइसा, दिशा,पछास, एआईएसफ सहित कई अन्य छात्र संगठन और छात्रसंघों ने सोशल मीडिया पर प्रदर्शन किया। छात्रों ने #ReleaseAllPoliticalPrisoners और #StopArrestingStudents हैशटैग के तहत अपनी बातों को रखा और ट्वीट किए। इन्होंने आरोप लगया कि लॉकडाउन की आड़ में विभिन्न एक्टिविस्ट, शिक्षकों, छात्रों को दिल्ली में हुए दंगो की संलिप्तता के साथ जोड़कर मुकदमें दर्ज किए जा रहे है।

जेएनयू छात्रसंघ के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर कहा गया कि "ऐसा लगता है कि सरकार ने कोरोनोवायरस के बीच लोकतंत्र को दांव पर लगाने का मन बना लिया है। वह महामारी से निपटने के बजाय छात्रों को कैद करने में लगा है।"

जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष और एसफआई की नेता आइशी घोष ने ट्वीट किया और कहा कि यह मुश्किल समय है और इस समय हम सभी को एक साथ मिलाकर लड़ाना होगा।  

एसएफआई के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सुमित कटारिया ने लिखा, " प्रतिरोध गुनाह नहीं बल्कि चुप्पी गुनाह है! दिल्ली पुलिस छात्रों को जिस तरह फर्जी केस में गिरफ़्तार कर रही है इसपर चुप रहना अपराध है।"

पिंजरा तोड़ ने भी ट्वीट करते हुए लिखा कि सरकार लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन को कुचल रही है। इसलिए सीएए के खिलाफ हुए प्रदर्शन में शामिल लोगो को गिरफ़्तार कर रही है। उन्होंने पिंजरा तोड़ के दोनों कार्यकर्ताओ की तत्काल रिहाई की मांग की है।

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जामिया के एक छात्र अहमद बशर ने लिखा कि "लॉकडाउन अधिकारों पर लॉकडाउन नहीं कर सकता है "

इसी तरह छात्र संगठन आइसा ने भी ट्वीट कर दिल्ली पुलिस पर गंभीर सवाल खड़े किये और कहा कि "सच बताना दिल्ली पुलिस! कपिल मिश्रा, प्रवेश वर्मा, अनुराग ठाकुर, रागिनी तिवारी जैसे दंगाइयों को न गिरफ्तार करने के लिए गृहमंत्रालय से कोई आदेश मिला है क्या? या प्रमोशन का लालच देकर छात्रों को डराने/चुप कराने का कोई ठेका मिला है?"

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने दिल्ली पुलिस से सरकार का विरोध करने वालों का अपराधीकरण बंद करने! सफूरा, मीरान, शिफा-उर-रहमान, आसिफ़, शरजील, नताशा, देवांगना व अन्य छात्रों कार्यकर्ताओं पर लगे फर्जी मुकदमे वापस लेने की मांग की!

छात्र संगठन एसएफआई ने एक बयान जारी कर कहा कि सीएए, एनआरसी, एनपीआर के दौरान सक्रिय कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और छात्रों को तुरंत रिहा किया जाए क्योंकि एसएफआई इन मुकदमों को राजनीति द्वारा प्रोत्साहित मानता है। आगे उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक व संविधान सम्मत है। प्रदर्शनकारीयों द्वारा अलग-अलग स्थानों पर संविधान के दायरे में रहकर प्रदर्शन किए गए थे।

वहीं कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा समेत अन्य भाजपा नेताओं के भड़काऊ भाषणों के बाद दिल्ली में दंगे हुए। इससे पहले सभी प्रदर्शनकारी शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे थे। इनके भड़काऊ भाषणों के सभी सबूत मौजूद है। लेकिन केंद्र के तहत आने वाली दिल्ली पुलिस ने जिनपर कार्रवाई करनी चाहिए थी उन पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की।

एसएफआई ने यह भी कहा कि अगर सरकार एवं पुलिस वास्तविक गुनहगारों पर कार्रवाई नहीं करती है तो एसएफआई द्वारा भविष्य में लॉकडाउन की स्थिति को देखते हुए खुले में शारीरिक दूरी बनाकर प्रदर्शन और आंदोलन किया जाएगा।  

Student Protests
Delhi University
Jamia Milia Islamia
JNU
SFI
UAPA
#StopArrestingStudents
#ReleaseAllPoliticalPrisoners
JNU Students Union
twitter
AISA
JNUSU

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