NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
इतवार की कविता: अक्टूबर के आरंभ की बरसती साँझ
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हिंदी के सह प्राध्यापक और छत्तीसगढ़ के भिलाई नगर में जन्मे कवि बसंत त्रिपाठी ने ‘अक्टूबर के आरंभ की बरसती साँझ’ शीर्षक से क्या ख़ूब कविता कही है। वे कहते हैं- बरसो हे मेघ/जल्दी बरसकर खाली करो/ शरद के लिए आसमानी सिंहासन। ‘इतवार की कविता’ में पढ़ते हैं उनकी यही कविता जिसमें उन्हें किसानों की भी फिक्र हो रही है कि धान को अभी पकना है, सुनहरा होना है।
न्यूज़क्लिक डेस्क
03 Oct 2021
Poem
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार : गूगल

अक्टूबर के आरंभ की बरसती साँझ

 

यह अक्टूबर के आरंभ की

बरसती साँझ है

 

स्थगित मेघों ने डाल दिया है

आसमान में डेरा

पहले गरजे भयंकर

चिंग्घाड़ उठे हों

हाथियों के झुंड जैसे क्षितिज में

लंबे सफेद दाँतों-सी कड़कदार बिजली

काली विशाल देह

धूमिल अँधेरे का विस्तार

 

ऋतु-चक्र में परिवर्तन की इस बेला में

सावन के आवारा मेघ

भटकते हुए आए हैं

पृथ्वी का पता पूछते

 

बरसो हे मेघ

जल्दी बरसकर खाली करो

शरद के लिए आसमानी सिंहासन

कि शरद अब आता होगा

आती होगी उसकी ओस टपकाती देह

भरी-भरी हरी पृथ्वी

अब ठंडी चाँदनी से नहाएगी

 

धान को अभी पकना है

सुनहरा होना है

किसानों के बैरी न बनो मेघ

 

बरसो, बरसकर खाली करो गगन

हे अक्टूबर के अनाहूत मेघ!

 

- बसंत त्रिपाठी

कविता कोश से साभार

Sunday Poem
Hindi poem
poem
rain

Related Stories

वे डरते हैं...तमाम गोला-बारूद पुलिस-फ़ौज और बुलडोज़र के बावजूद!

इतवार की कविता: भीमा कोरेगाँव

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी

इतवार की कविता: वक़्त है फ़ैसलाकुन होने का 

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

...हर एक दिल में है इस ईद की ख़ुशी

जुलूस, लाउडस्पीकर और बुलडोज़र: एक कवि का बयान

फ़ासीवादी व्यवस्था से टक्कर लेतीं  अजय सिंह की कविताएं

सर जोड़ के बैठो कोई तदबीर निकालो

लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!


बाकी खबरें

  • Lakhimpur Kheri: Tension is rising between the government and farmers, more anger over the lack of arrest of the accused
    असद रिज़वी
    लखीमपुर खीरी: सरकार और किसानों के बीच बढ़ रहा है तनाव, आरोपियों की गिरफ़्तारी न होने से ज़्यादा गुस्सा
    06 Oct 2021
    किसानों का कहना है की सरकार उनको धोखा दे रही है-घटना के तीसरे दिन भी मुख्य अभियुक्त गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा की गिरफ़्तारी नहीं हुई है। इसके अलावा मृतको की “पोस्ट्मॉर्टम” में…
  • imf
    प्रभात पटनायक
    IMF की SDR की नयी खेप, तीसरी दुनिया के लिए कितनी फायदेमंद है?
    06 Oct 2021
    अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अगस्त के महीने से 650 अरब डालर के स्पेशल ड्राइंग राइट्स या एसडीआर की ताजा खेप जारी करने का एलान किया है। इस राशि का आइएमएफ के सदस्य देशों के बीच, आइएमएफ के उन
  • किसान
    रवि कौशल
    ‘हमें पानी दो, वरना हम यहां से नहीं हटेंगे’: राजस्थान के आंदोलनरत किसान
    06 Oct 2021
    किसानों का कहना है कि गहलोत सरकार द्वारा पानी की आपूर्ति का कुप्रबंधन दिनों-दिन उन लोगों के लिए लगातार बदतर होता जा रहा है जो अक्टूबर के मध्य में सरसों और चने की बुआई करने की उम्मीद कर रहे हैं।
  • संदीपन तालुकदार
    जलवायु परिवर्तन से 1 दशक से कम समय में नष्ट हो गए दुनिया के 14% कोरल रीफ़ : अध्ययन
    06 Oct 2021
    कोरल रीफ़(प्रवाल भित्तियाँ) केवल महासागरों की सुंदरता का विषय नहीं हैं, वे एक महत्वपूर्ण समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र भी हैं। ये पारिस्थितिक तंत्र
  • अब्दुल अलीम जाफ़री
    लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड: "मुआवज़ा हमारे मरे बच्चों को वापस नहीं लाएगा"
    06 Oct 2021
    तिकोनिया से एक ग्राउंड रिपोर्ट, जहां गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा और उनके बेटे के ख़िलाफ़ गुस्सा अभी भी उबल रहा है, शोक में डूबे परिवारों का कहना है कि मुआवज़े से भी उनके मृतक वापस नहीं आ जाएंगे।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License