NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
…तब भूख एक उलझन थी, अब एक बीमारी घोषित हो चुकी है
दिल्ली विश्वविद्यालय के इंद्रप्रस्थ कॉलेज के शिक्षक सौम्य मालवीय ने कोरोना संकट के दौरान ‘पैदा हुईं’ और ‘पैदा की गईं’ आपात स्थितियों का बहुत सीटक मानवीय विश्लेषण किया है।
न्यूज़क्लिक डेस्क
29 Mar 2020
lockdown
Image courtesy: Social Media

CAA-NPR-NRC विरोधी आंदोलन को लेकर ‘कोई तो काग़ज़ होगा’ जैसी मार्मिक और संवेदनशील कविता लिखने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय के इंद्रप्रस्थ कॉलेज के शिक्षक सौम्य मालवीय ने कोरोना संकट के दौरान ‘पैदा हुईं’ और ‘पैदा की गईं’ आपात स्थितियों का बहुत सीटक मानवीय विश्लेषण किया है। आइए पढ़ते हैं इतवार की कविता में पढ़ते हैं उनकी दूसरी कविता- ‘वे आपात स्थितियाँ थीं’

वे आपात स्थितियाँ थीं

आपात स्थितियों को देखते हुए
कड़े कदम उठाए गये और
यह आदेश हुआ कि लोग घर पर ही रहें
आपात स्थितियों को समझते हुए
लोगों ने पूरे अनुशासन से
कड़े आदेशों का पालन किया
और घर पे ही रहे
यही नहीं, महीनों घर पर रहने के लिए
ज़रूरी सामान भी जुटा लाये
ज़रूरी था
समय की माँग थी
घर में भरने की जगह थी,

 

आपात स्थितियों को देखते हुए
यह आवश्यक पाया गया कि
तय किया जाये,
किनको बचाया जा सकता है
और किनसे मुँह फेरा जा सकता है

 

घर पे रह रहे लोगों को
प्रशासन की यह मजबूरी
सहज ही समझ आ गई
मुँह फेरना
उनके वर्ग की चारित्रिक विशेषता थी,
आराम की हदों के बाहर
दुनिया महज़ खबर थी
और वे खबरों के उपभोक्ता थे
उनके विषय नहीं,

 

आपात स्थितियों
को देखते हुए
यह आदेश हुआ की लोग
अपने घरों से ही काम करें
मौके की नज़ाकत को समझते हुए
जो घरों से काम कर सकते थे
उन्होंने घरों से ही काम किया,
शिक्षकों ने
पाठों के वीडियो बनाये
दफ़्तरी काम ईमेल पे हुआ
सौदे स्काइप पे पटे
संविदाओं पे इक़रार
व्हाट्सएप पे हुए,
हाँ किन्हीं वजहों से
इंटरव्यू नहीं हुए कहीं
नियुक्तियां नहीं हुईं

 

आपात स्थितियों ने
यह समझ कायम की कि
जीवन का सातत्य
भले ही भंग हो जाये
पूँजी और उसे पोसने वाले श्रम का
सातत्य बना रहना चाहिए
यह पूँजी के एकांतवास का दौर था
सुधीजन आत्ममंथन की सलाह दे रहे थे
और बड़ी-बड़ी पहुँच वाले लोग
टाइम पास के लिये
छोटी-छोटी खुशियों में
जीवन का अर्थ ढूंढ रहे थे

 

आपातकाल की उस कड़ाई में
कुछ ऐसे जन्तुओं का भी पता चला
जो मनुष्यता की
ठसाठस भरी श्रेणी में
घुसे हुए थे
और सड़कें नापते हुए
मुल्क़ की सेहत को खतरे में डाल रहे थे
ऐसे लोगों को बेघर कहा जाता था
उनकी पीठ पर बच्चे
और दिलों में धूल हुआ करती थी
वह आपात स्थितियाँ थीं
कई सालों पहले,
शुक्र है अब वे सामान्य हो चुकी हैं
कड़े कदम सहज नियमों में
बदल चुके हैं
सामाजिक दूरी सामाजिकता की शर्त बन गई है
और काम अब कभी नहीं रुकता
वैसे भी सामान्यता तो एक प्याज़ जैसी होती है
जो छिलका-छिलका आपात स्थितियों से बनी हुई होती है
अचरज कैसा?

 

वे आपात स्थितियाँ थीं
यह सामान्य काल है
तब भूख एक उलझन थी
अब एक बीमारी घोषित हो चुकी है
बेघर अब नहीं हैं
जिनके पास घर हैं, वे हैं
बस वे ही हैं।

- सौम्य मालवीय

इसे भी पढ़े : ...जैसे आए थे वैसे ही जा रहे हम

इसे भी पढ़े : हमें ये शौक़ है देखें सितम की इंतिहा क्या है...

Sunday Poem
Coronavirus
Corona Crisis
India Lockdown
Corona virus epidemic
modi sarkar
migrants
Migrant workers
Hunger Crisis
poverty

Related Stories

इतवार की कविता: भीमा कोरेगाँव

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी

इतवार की कविता: वक़्त है फ़ैसलाकुन होने का 

जनवादी साहित्य-संस्कृति सम्मेलन: वंचित तबकों की मुक्ति के लिए एक सांस्कृतिक हस्तक्षेप

सर जोड़ के बैठो कोई तदबीर निकालो

लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!

इतवार की कविता: जश्न-ए-नौरोज़ भी है…जश्न-ए-बहाराँ भी है

इतवार की कविता: के मारल हमरा गांधी के गोली हो

…सब कुछ ठीक-ठाक है

इतवार की कविता: सभी से पूछता हूं मैं… मुहब्बत काम आएगी कि झगड़े काम आएंगे


बाकी खबरें

  • Ukraine Russia
    पार्थ एस घोष
    यूक्रेन युद्ध: क्या हमारी सामूहिक चेतना लकवाग्रस्त हो चुकी है?
    14 Mar 2022
    राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न उस पवित्र गाय के समान हो गया है जिसमें हर सही-गलत को जायज ठहरा दिया जाता है। बड़ी शक्तियों के पास के छोटे राष्ट्रों को अवश्य ही इस बात को ध्यान में रखना होगा, क्योंकि बड़े…
  • Para Badminton International Competition
    भाषा
    मानसी और भगत चमके, भारत ने स्पेनिश पैरा बैडमिंटन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 21 पदक जीते
    14 Mar 2022
    भारत ने हाल में स्पेनिश पैरा बैडमिंटन अंतरराष्ट्रीय (लेवल दो) प्रतियोगिता में 11 स्वर्ण, सात रजत और 16 कांस्य से कुल 34 पदक जीते थे।
  • भाषा
    बाफ्टा 2022: ‘द पावर ऑफ द डॉग’ बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म
    14 Mar 2022
    मंच पर सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार देने आए ‘द बैटमैन’ के अभिनेता एंडी सर्किस ने विजेता की घोषणा करने से पहले अफगानिस्तान और यूक्रेन के शरणार्थियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार के लिए सरकार पर निशाना…
  • उपेंद्र स्वामी
    दुनिया भर की: दक्षिण अमेरिका में वाम के भविष्य की दिशा भी तय करेंगे बोरिक
    14 Mar 2022
    बोरिक का सत्ता संभालना सितंबर 1973 की सैन्य बगावत के बाद से—यानी पिछले तकरीबन 48-49 सालों में—चिली की राजनीतिक धारा में आया सबसे बड़ा बदलाव है।
  • indian railway
    बी. सिवरामन
    भारतीय रेल के निजीकरण का तमाशा
    14 Mar 2022
    यह लेख रेलवे के निजीकरण की दिवालिया नीति और उनकी हठधर्मिता के बारे में है, हालांकि यह अपने पहले प्रयास में ही फ्लॉप-शो बन गया था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License