NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
अंतरराष्ट्रीय
इतवार की कविता: अपने जगे एहसास को पत्थर नहीं बना सकतीं अफ़ग़ान औरतें
अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की दहशत के बीच महिलाएं अपने अधिकारों के लिए बेख़ौफ़ आवाज़ बुलंद कर रही हैं। इसी को कविता के माध्यम से दर्ज किया है वरिष्ठ कवि और संस्कृतिकर्मी शोभा सिंह ने। आइए इतवार की कविता में पढ़ते हैं उनकी यह नयी कविता- अफ़ग़ान औरतें।
न्यूज़क्लिक डेस्क
05 Sep 2021
इतवार की कविता: अपने जगे एहसास को पत्थर नहीं बना सकतीं अफ़ग़ान औरतें

अफ़ग़ान औरतें

 

अफ़ग़ानिस्तान की औरतें

 अपने जगे एहसास को

पत्थर नहीं बना सकतीं 

अपने होने को फिर से नगण्य 

नहीं बना सकतीं

बाहरी दुनिया से ग़ायब होना

मंज़ूर नहीं

 

तालीम के चमकते आफ़ताब के नीचे

खुली हवा में

आज़ाद परिन्दे की उड़ान

अपने लिए शब्दों की शालीनता

उन्हें चाहिए ही

उसे फिर से खोना नहीं

जिसके लिए लम्बे से भी लम्बा

इंतज़ार किया था

अनवरत जद्दोजहद की

दशकों की आज़ादी

उसे छीन लेने की साज़िशाना

जंग भरी चालें

चलती रहीं

 

जब हासिल आज़ादी का

सुकून-बख़्श साया

कुछ हद तक

छाने लगा था

उनके आकाश में

वे ज़हरीली स्त्री विरोधी ताकतें

हर सिम्त कालिख भरने लगीं

हमारी भावनाओं की

बेरहमी से चीरफाड़

घर की अँधेरी गुफा सी

जहालत की सीलन भरी क़ैद

 

हां, घोषणाएं बेहतरी की करते

मंसूबे ख़ूनी, कट्टर मज़हबी

निश्चय ही  तलछट से सतह पर

भुखमरी की यन्त्रणा

 

असंख्य घाव लिए

औरतें बाहर आ रही हैं

आतंक के साये से बेख़ौफ़

हथियार-बंद सिपाहियों के सामने

बख़्तर-बंद गाड़ियों के आगे

आवाज़ का उजाला फैलातीं

उनके निर्भीक नन्हे दिलों में

तेजी से धड़कता

दुस्साहस

मिट जाने का ख़ौफ़ नहीं

अवाक, बन्दूकों से डराने के

निशाने भी चूक गए

पुरज़ोर आवाज़ें

जायज़ मांगों की गूंज से

लगा बारूद गीले हुए

तबाही का बर्बर विध्वंसक समय

ठहरा सा

एक रूपक सा उभरता

 डर के ठहरे जल में भी

हलचल मचातीं

वे आज़ाद पक्षियों सी

निर्दन्द तैर रहीं

एलान कर रहीं

जंग हमेशा ही हमारी धरती को

बंजर कर देती है

इसलिए भी प्रतिरोध का संघर्ष

दिलों की सियासत की बानगी

अवाम ख़ुद बनाएगी

मुल्क की तस्वीर हम भी तराशेंगी

ज़ुल्म की इंतहा में भी

ख़्वाब मरते नहीं

अमन का कंटीला रास्ता

बसंत के आज़ाद

 दरवाज़े खोल देता है।

 

-    शोभा सिंह

Sunday Poem
Hindi poem
Afghanistan
Afghan women
Women Rights
TALIBAN

Related Stories

इतवार की कविता: भीमा कोरेगाँव

इतवार की कविता: वक़्त है फ़ैसलाकुन होने का 

...हर एक दिल में है इस ईद की ख़ुशी

जुलूस, लाउडस्पीकर और बुलडोज़र: एक कवि का बयान

सर जोड़ के बैठो कोई तदबीर निकालो

लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!

इतवार की कविता: जश्न-ए-नौरोज़ भी है…जश्न-ए-बहाराँ भी है

इतवार की कविता: के मारल हमरा गांधी के गोली हो

इतवार की कविता: सभी से पूछता हूं मैं… मुहब्बत काम आएगी कि झगड़े काम आएंगे

इतवार की कविता : 'आसमान में धान जमेगा!'


बाकी खबरें

  • Mothers and Fathers March
    पीपल्स डिस्पैच
    तख़्तापलट का विरोध करने वाले सूडानी युवाओं के साथ मज़बूती से खड़ा है "मदर्स एंड फ़ादर्स मार्च"
    28 Feb 2022
    पूरे सूडान से बुज़ुर्ग लोगों ने सैन्य शासन का विरोध करने वाले युवाओं के समर्थन में सड़कों पर जुलूस निकाले। इस बीच प्रतिरोधक समितियां जल्द ही देश में एक संयुक्त राजनीतिक दृष्टिकोण का ऐलान करने वाली हैं।
  • गौरव गुलमोहर
    यूपी चुनाव: क्या भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं सिटिंग विधायक?
    28 Feb 2022
    'यदि भाजपा यूपी में कम अंतर से चुनाव हारती है तो उसमें एक प्रमुख कारण काम न करने वाले सिटिंग विधायकों का टिकट न काटना होगा।'
  • manipur
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मणिपुर में पहले चरण का चुनाव, 5 ज़िलों की 38 सीटों के लिए 67 फ़ीसदी से ज़्यादा मतदान
    28 Feb 2022
    मणिपुर विधानसभा के लिए आज पहले चरण का मतदान संपन्न हो गया। मतदान का समय केवल शाम 4 बजे तक ही था। अपराह्न तीन बजे तक औसतन 67.53 फ़ीसदी मतदान हुआ। अंतिम आंकड़ों का इंतज़ार है।
  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : फिर ज़ोर पकड़ने लगी है ‘स्थानीयता नीति’ बनाने की मांग : भाजपा ने किया विरोध
    28 Feb 2022
    हेमंत सोरेन सरकार को राज्य में होने वाली सरकारी नियुक्तियों के लिए घोषित विसंगतिपूर्ण नियोजन नीति को छात्रों-युवाओं के विरोध के बाद वापस लेना पड़ा है। लेकिन मामला यहीं थम नहीं रहा है।
  • Sergey Lavrov
    भाषा
    यूक्रेन की सेना के हथियार डालने के बाद रूस ‘किसी भी क्षण’ बातचीत के लिए तैयार: लावरोव
    28 Feb 2022
    लावरोव ने यह भी कहा कि रूस के सैन्य अभियान का उद्देश्य यूक्रेन का ‘‘विसैन्यीकरण और नाजी विचारधारा से’’ मुक्त कराना है और कोई भी उस पर कब्जा नहीं करने वाला है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License