NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
वो राजा हैं रियासत के, नफ़ा नुकसान देखेंगे/ नियम क़ानून तो उनके बड़े दीवान देखेंगे
आगरा के रहने वाले और भारतीय खाद्य निगम से उप महाप्रबंधक पद से सेवानिवृत्त हुए अशोक रावत हमारे दौर के एक ऐसे गंभीर और विश्वसनीय शायर हैं जिनका क़लम न केवल दौरे हाज़िर का बयान करता है, बल्कि एक ज़रूरी हस्तक्षेप करते हुए सशक्त प्रतिरोध रचता है। उनकी हर पल पर निगाह है, हर घड़ी पर नज़र। जिसे वो ग़ज़ल के ज़रिये देखते-परखते और बयान करते हैं। ‘इतवार की कविता’ में पढ़ते हैं उनकी ऐसी ही दो नई ग़ज़लें।
न्यूज़क्लिक डेस्क
18 Oct 2020
poem
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार : गूगल

ग़ज़ल

 

वो राजा हैं रियासत के, नफ़ा नुकसान देखेंगे,

नियम क़ानून तो उनके बड़े दीवान देखेंगे.

 

तुम इतना बोलते क्यों हो, तुम्हारी हैसियत क्या है,

प्रजा के लोग भी राजा में क्या ईमान देखेंगे.

 

ज़रा दो लाइनें लिख लीं, तो हिम्मत बढ़ गई इतनी,

वज़ीरों में भी अब इंसानियत,  इंसान देखेंगे.

 

सियासत काट देगी आदमी को आदमी से ही,

कभी सोचा नहीं था ऐसा हिंदुस्तान देखेंगे.

 

यही बर्ताव नदियों से अगर करते  रहेंगे हम,

तो पानी की जगह निश्चित है रेगिस्तान देखेंगे.

 

चलो अच्छा है कोई सोचने को आसरा तो है,

जिन्हें ये आज भी लगता है सब भगवान देखेंगे.

 

मुनासिब तो यही है मुश्किलों से सीख लें लड़ना 

कहीं फंस जाएँगे यदि रास्ता आसान देखेंगे.

 

समझ लेंगे कि दुनिया में कहीं ईमान बाक़ी है,

किसी बच्चे के होठों पर अगर मुस्कान देखेंगे.

 

2.

 

कभी सोचा कहाँ से और ये कैसे निकलते हैं,

जो नफ़रत की सियाही से लिखे परचे निकलते हैं.

 

जो सच्चे हैं उन्हें झूठा बना देती है ये दुनिया,

जो झूठे हैं अदालत से भी वो सच्चे निकलते हैं.

 

ये आलम है कि अब कोई नमस्ते भी नहीं करता,

गली से जब मोहल्ले के बड़े बूढ़े निकलते हैं.

 

ये चूहेदानियाँ आखिर यहाँ किस काम आएँगी,

जहाँ बिल्ली दबा के दांतों में चूहे निकलते हैं.

 

वो काला हो कि पीला हो, हरा हो या कि नीला हो,

सियासी टोपियों के रंग सब कच्चे निकलते हैं.

 

सड़क सब एक जैसी हैं, सदर हो या सिविल लाइन,

जहाँ भी पाँव रखता हूँ वहाँ गड्ढे निकलते हैं.

 

ग़ज़ल की ख़ामियों पर हम ज़रा सा बोल क्या बैठे,

जो अच्छे दोस्त थे वो आजकल बचके निकलते हैं.

 

तअज्जुब है कि जिस डाली पे खिलते हैं महज़ दो फूल,

उसी डाली पे कितने देखिये काँटे निकलते है.

 

विदेशों में चले जाते हैं, क्यों अक्सर, ये सोचा है,

हमारे देश के बच्चे जो पढ़ लिख के निकलते हैं.

 

बड़े मायूस हो कर लौटते हैं शाम को अक्सर,

बड़ी उम्मीद लेकर रोज़ हम घर से निकलते हैं.

 

तुम्हारी बाँह थामी और हम चलते चले आये,

नहीं मालूम था हमको कहाँ रस्ते निकलते हैं.

-         अशोक रावत

आगरा

इसे भी पढ़ें : अवधी में ग़ज़ल: ...मंदिर मस्जिद पेट हमार न भरिहैं साहेब

इसे भी पढ़ें : हर सभ्यता के मुहाने पर एक औरत की जली हुई लाश और...

इसे भी पढ़ें : हमें ये शौक़ है देखें सितम की इंतिहा क्या है

इसे भी पढ़ें : लिखो तो डरो कि उसके कई मतलब लग सकते हैं...

इसे भी पढ़ें :  भूल-ग़लती आज बैठी है ज़िरहबख्तर पहनकर

Sunday Poem
Hindi poem
poem
ghazal
कविता
हिन्दी कविता
इतवार की कविता

Related Stories

वे डरते हैं...तमाम गोला-बारूद पुलिस-फ़ौज और बुलडोज़र के बावजूद!

इतवार की कविता: भीमा कोरेगाँव

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी

इतवार की कविता: वक़्त है फ़ैसलाकुन होने का 

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

...हर एक दिल में है इस ईद की ख़ुशी

जुलूस, लाउडस्पीकर और बुलडोज़र: एक कवि का बयान

फ़ासीवादी व्यवस्था से टक्कर लेतीं  अजय सिंह की कविताएं

सर जोड़ के बैठो कोई तदबीर निकालो

लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!


बाकी खबरें

  • kandyadan
    रवि शंकर दुबे
    ''मैं दान की चीज़ नहीं आपकी बेटी हूं'’ कहकर IAS ने नकारी कन्यादान की रस्म
    18 Dec 2021
    समाज में समानता और सुधार के लिए एक IAS तपस्या ने अपनी शादी में कन्यादान की रस्म नहीं निभाकर एक सोशल मैसेज देने की कोशिश की है।
  • SP and PSP alliance
    असद रिज़वी
    यूपी चुनाव 2022 : सपा और प्रसपा गठबंधन के मायने
    18 Dec 2021
    आज के हालत में अखिलेश और शिवपाल दोनों के पास साथ आने के सिवा कोई विकल्प नहीं था। जिसके के लिए दो रस्ते थे, या तो शिवपाल की पार्टी का सपा में विलय हो जाये या दोनों का चुनाव पूर्व गठबंधन हो, ताकि कम से…
  • KR-Ramesh
    सोनिया यादव
    कर्नाटक: रेप जैसे गंभीर मामले को लेकर भद्दे मज़ाक के लिए क्या छह मिनट का माफ़ीनामा काफ़ी है?
    18 Dec 2021
    महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करने वाले ये नेता आए दिन अपनी अपनी फूहड़ बातों से महिलाओं की अस्मिता, मान-सम्मान को ठेस पहुंचा रहे हैं और दुख इस बात का है कि सब चुप-चाप तमाशा देख रहे हैं, हंस रहे हैं।
  • gig workers
    बी. सिवरामन
    गिग वर्कर्स के क़ानूनी सशक्तिकरण का वक़्त आ गया है
    18 Dec 2021
    गिग वर्कर ओला (OLA) या उबर (Uber) जैसी एग्रीगेटर फर्मों के लिए काम करने वाले टैक्सी ड्राइवर हैं। ज़ोमैटो (Zomato) या स्विगी (Swiggy) जैसी फूड होम डिलीवरी चेन के डिलीवरी वर्कर हैं।
  • army
    भाषा
    बुमला : हिमाचल के ऊंचे इलाकों में भारत-चीन आमने-सामने
    18 Dec 2021
    भारत और चीन के बीच बर्फ से ढकी सीमा, दो विशाल एशियाई पड़ोसियों के बीच बेहद कम प्रचलित सीमाओं में से एक, बुमला दर्रा सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License