NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
अब आप यहाँ से जा सकते हैं, यह मत पूछिए कि कहाँ जाएँ...
‘इतवार की कविता’ : जनकवि गोरख पाण्डेय ने 1982 में दिल्ली में हुए एशियन गेम्स (एशियाड) के बाद ‘स्वर्ग से बिदाई’ शीर्षक से एक लंबी कविता लिखी थी। जो आज भी बहुत प्रासंगिक है। इसे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के स्वागत में अहमदाबाद में झुग्गी बस्ती के बाहर बनाई गई ‘ऐतिहासिक दीवार’ से लेकर कोरोना संकट के बीच महानगरों से गांव-घर की ओर पैदल पलायन करने को मजबूर हुए मज़दूरों के संदर्भों में पढ़ा और समझा जा सकता है।)
न्यूज़क्लिक डेस्क
12 Apr 2020
इतवार की कविता
Image courtesy: PART

स्वर्ग से बिदाई

 

भाईयों और बहनों !

अब ये आलीशान इमारत

बन कर तैयार हो गयी है

अब आप यहाँ से जा सकते हैं

अपनी भरपूर ताक़त लगाकर

आपने ज़मीन काटी

गहरी नींव डाली,

मिट्टी के नीचे दब भी गए

आपके कई साथी

मगर आपने हिम्मत से काम लिया

पत्थर और इरादे से,

संकल्प और लोहे से,

बालू, कल्पना और सीमेंट से,

ईंट दर ईंट आपने

अटूट बुलंदी की दीवार खड़ी की

 

छत ऐसी कि हाथ बढ़ाकर,

आसमान छुआ जा सके,

बादलों से बात की जा सके

खिड़कियाँ क्षितिज की थाह लेने वाली,

आँखों जैसी,

दरवाज़े, शानदार स्वागत !

 

अपने घुटनों और बाजुओं और

बरौनियों के बल पर

सैकड़ों साल टिकी रहने वाली

यह जीती-जागती ईमारत तैयार की

 

अब आपने हरा भरा लान

फूलों का बाग़ीचा

झरना और ताल भी बना दिया है

कमरे कमरे में गलीचा

और क़दम क़दम पर

रंग-बिरंगी रौशनी फैला दी है

 

गर्मी में ठंडक और ठंड में

गुनगुनी गर्मी का इंतज़ाम कर दिया है

 

संगीत और नृत्य के

साज़ सामान

सही जगह पर रख दिए हैं

 

अलगनियां प्यालियाँ

गिलास और बोतलें

सज़ा दी हैं

 

कम शब्दों में कहें तो

सुख सुविधा और आज़ादी का

एक सुरक्षित इलाका

एक झिलमिलाता स्वर्ग

रच दिया है

 

इस मेहनत

और इस लगन के लिए

आपका बहुत धन्यवाद

 

अब आप यहाँ से जा सकते हैं

यह मत पूछिए कि कहाँ जाएँ

जहाँ चाहे वहां जाएँ

फिलहाल उधर अँधेरे में

कटी ज़मीन पर

जो झोपड़े डाल रखें हैं

उन्हें भी खाली कर दें

फिर जहाँ चाहे वहां जाएँ.

आप आज़ाद हैं,

हमारी ज़िम्मेदारी ख़तम हुई

अब एक मिनट के लिए भी

आपका यहाँ ठहरना ठीक नहीं

महामहिम आने वाले हैं

विदेशी मेहमानों के साथ

आने वाली हैं अप्सराएँ

और अफ़सरान

पश्चिमी धुनों पर शुरू होने वाला है

उन्मादक नृत्य

जाम झलकने वाला है

भला यहाँ आपकी

क्या ज़रुरत हो सकती है

 

और वह आपको देखकर क्या सोचेंगे

गंदे कपडे,

धूल से सने शरीर

ठीक से बोलने और हाथ हिलाने

और सर झुकाने का भी शऊर नहीं

 

उनकी रुचि और उम्मीद को

कितना धक्का लगेगा

और हमारी कितनी तौहीन होगी

 

मान लिया कि इमारत की 

ये शानदार बुलंदी हासिल करने में

आपने हड्डियाँ लगा दीं

खून पसीना एक कर दिया

लेकिन इसके एवज में

मज़दूरी दी जा चुकी है

 

अब आपको क्या चाहिए?

आप यहाँ ताल नहीं रहे हैं

आपके चेहरे के भाव भी बदल रहे हैं

शायद अपनी इस विशाल

और खूबसूरत रचना से

आपको मोह हो गया है

इसे छोड़कर जाने में दुःख हो रहा है

ऐसा हो सकता है

मगर इसका मतलब यह तो नहीं

कि आप जो कुछ भी अपने हाथ से

बनायेंगे,

वह सब आपका हो जायेगा

इस तरह तो ये सारी दुनिया

आपकी होती

फिर हम मालिक लोग कहाँ जाते

 

याद रखिये

मालिक मालिक होता है

मज़दूर मज़दूर

आपको काम करना है

हमे उसका फल भोगना है

आपको स्वर्ग बनाना है

हमे उसमें विहार करना है

अगर ऐसा सोचते हैं

कि आपको अपने काम का

पूरा फल मिलना चाहिए

तो हो सकता है

कि पिछले जन्म के आपके काम

अभावों के नरक में

ले जा रहे हों

विश्वास कीजिये

धर्म के सिवा कोई रास्ता नहीं

अब आप यहाँ से जा सकते हैं

 

क्या आप यहाँ से जाना ही

नहीं चाहते ?

यहीं रहना चाहते हैं,

इस आलीशान इमारत में

इन गलीचों पर पांव रखना चाहते हैं

ओह ! ये तो लालच की हद है

सरासर अन्याय है

कानून और व्यवस्था पर

सीधा हमला है

दूसरों की मिलकियत पर

कब्ज़ा करने

और दुनिया को उलट-पुलट देने का

सबसे बुनियादी अपराध है

हम ऐसा हरगिज नहीं होने देंगे

 

देखिये ये भाईचारे का मसला नहीं हैं

इंसानियत का भी नहीं

यह तो लड़ाई का

जीने या मरने का मसला है

हालाँकि हम ख़ून ख़राबा नहीं चाहते

हम अमन चैन

सुख-सुविधा पसंद करते हैं

लेकिन आप मजबूर करेंगे

तो हमे कानून का सहारा लेने पड़ेगा

पुलिस और ज़रुरत पड़ी तो

फ़ौज बुलानी होगी

हम कुचल देंगे

अपने हाथों गड़े

इस स्वर्ग में रहने की

आपकी इच्छा भी कुचल देंगे

 

वरना जाइए

टूटते जोड़ों, उजाड़ आँखों की

आँधियों, अंधेरों और सिसकियों की

मृत्यु गुलामी

और अभावों की अपनी

बे-दरोदीवार दुनिया में

चुपचाप

वापस

चले जाइए !


- गोरख पाण्डेय

 

इसे भी पढ़े : सितम के मारे हैं फिर भी सितमगर पर भरोसा है...

इसे भी पढ़े : ...जैसे आए थे वैसे ही जा रहे हम

Sunday Poem
Coronavirus
COVID-19
Lockdown
migration
Workers Migration
poverty
Hunger Crisis
Poor People's

Related Stories

इतवार की कविता: भीमा कोरेगाँव

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी

इतवार की कविता: वक़्त है फ़ैसलाकुन होने का 

जनवादी साहित्य-संस्कृति सम्मेलन: वंचित तबकों की मुक्ति के लिए एक सांस्कृतिक हस्तक्षेप

सर जोड़ के बैठो कोई तदबीर निकालो

लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!

इतवार की कविता: जश्न-ए-नौरोज़ भी है…जश्न-ए-बहाराँ भी है

इतवार की कविता: के मारल हमरा गांधी के गोली हो

…सब कुछ ठीक-ठाक है

इतवार की कविता: सभी से पूछता हूं मैं… मुहब्बत काम आएगी कि झगड़े काम आएंगे


बाकी खबरें

  • price hike
    न्यूज़क्लिक टीम
    महंगाई और पेट्रोल के दाम पर घिरी मोदी सरकार
    23 Mar 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस इंक में आज वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा चर्चा कर रहे हैं, देश में बढ़ती हुई रिकॉर्ड तोड़ महंगाई की। उसके साथ ही वे भाजपा सरकार से सवाल पूछ रहे हैं कि मोदी सरकार महंगाई…
  • petroleum
    न्यूज़क्लिक टीम
    सरकार चाहे तो पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस के दाम न बढ़े
    23 Mar 2022
    137 दिनों के बाद पेट्रोल-डीज़ल के दाम 80 पैसे प्रति लीटर बढ़ गए हैं। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में भी 50 रुपए का इज़ाफा हुआ है। यानी पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतें बढ़ गयी हैं। लेकिन सरकार चाहें…
  • bhagat singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    भगत सिंह ने क्यों कहा— मैं नास्तिक हूं?
    23 Mar 2022
    आज जब एक बार फिर धर्म और ईश्वर के नाम पर सत्ता और शोषण की राजनीति बेहद तेज़ हो गई है। ऐसे में शहीदे-आज़म Bhagat Singh का यह लेख "मैं नास्तिक क्यों हूं" पढ़ना बेहद ज़रूरी हो गया है।
  • Jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन सत्याग्रह जारी, संकल्प दिवस में शामिल हुए राकेश टिकैत
    23 Mar 2022
    विगत तीन दशकों से सरकार द्वारा घोषित नेतरहाट फ़ील्ड फायरिंग रेंज परियोजना को रद्द करने की मांग को लेकर प्रत्येक वर्ष 22 एवं 23 मार्च को आयोजित होने वाले ‘विरोध एवं संकल्प दिवस’ कार्यक्रम में इस बार…
  • akhilesh yadav
    रवि शंकर दुबे
    सियासत: अखिलेश ने क्यों तय किया सांसद की जगह विधायक रहना!
    23 Mar 2022
    चुनाव नतीजों के बाद से ही चली आ रही नेता प्रतिपक्ष के नाम की कश्मकश लगभग खत्म हो चुकी है। अखिलेश यादव ने लोकसभा से इस्तीफा देकर भाजपा के सामने चुनौती पेश की है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License