NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
क्या हुआ छिन गई अगर रोज़ी, वोट डाला था इस बिना पर क्या!
“अक़्ल की बात और भक्तों से/ अक़्ल पे पड़ गए हैं पत्थर क्या!”, हिन्दी के प्रसिद्ध आलोचक, शिक्षक और संस्कृतिकर्मी आशुतोष कुमार ने अपनी रचना में बहुत ही शानदार ढंग से व्यंग्यात्मक लहज़े में समय-समाज का चित्र खींचा है। ‘इतवार की कविता’ में पढ़ते हैं उनकी ताज़ा ग़ज़ल।
न्यूज़क्लिक डेस्क
12 Jul 2020
Sunday Poem
प्रतीकात्मक तस्वीर

ग़ज़ल

 

लग गई सेंध फिर मिरे घर क्या?

रख दूं इल्जाम नेहरुओं पर क्या!

 

अक़्ल की बात और भक्तों से,

अक़्ल पे पड़ गए हैं पत्थर क्या!

 

घर का सब कुछ चुरा के बेच दिया,

इनसे बढ़के था मीर जाफ़र क्या!

 

क्या हुआ छिन गई अगर रोज़ी,

वोट डाला था इस बिना पर क्या!

 

अब वहीं बैठ के भजन कीजे,

अन्न देगा न राम रघुबर क्या!

 

जगमगाता विकास उतरा है,

तुमने देखा न फूल दफ़्तर क्या!

 

मर गया देश जी गया जीयो,

देश है दोस्ती से ऊपर क्या!

 

भक्त क्यों भूल अपनी मानेगा,

जान भगवान से है बढ़कर क्या!

 

चीन का नाम क्यूं नहीं लेते,

कोई मधुमेह का है चक्कर क्या!

 

छंद रच के जो झूठ फैला दे,

उसको मानेगा कोई शायर क्या!

 

-    आशुतोष कुमार

इसे भी पढ़े : ‘इतवार की कविता’: मेरी चाहना के शब्द बीज...

इसे भी पढ़े : मुफ़्त में राहत नहीं देगी हवा चालाक है...

इसे भी पढ़े : तुम ज़िंदा हो पापा... : फ़ादर्स डे विशेष

इसे भी पढ़े : वचन देते हैं, हम विजयी होंगे या मौत का सामना करेंगे

इसे भी पढ़े :  चलो ख़ुद से मुठभेड़ करते हैं...

Sunday Poem
poem
Hindi poem
ghazal
कविता
हिन्दी कविता

Related Stories

वे डरते हैं...तमाम गोला-बारूद पुलिस-फ़ौज और बुलडोज़र के बावजूद!

इतवार की कविता: भीमा कोरेगाँव

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी

इतवार की कविता: वक़्त है फ़ैसलाकुन होने का 

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

...हर एक दिल में है इस ईद की ख़ुशी

जुलूस, लाउडस्पीकर और बुलडोज़र: एक कवि का बयान

फ़ासीवादी व्यवस्था से टक्कर लेतीं  अजय सिंह की कविताएं

सर जोड़ के बैठो कोई तदबीर निकालो

लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!


बाकी खबरें

  • पुरुकुल गांव और मसूरी रोपवे के टर्मिनल के नज़दीक नरोता नदी।
    वर्षा सिंह
    हरियाली और विकास के बीच मसूरी रोपवे
    25 Aug 2021
    “...एक दिन मैंने देखा कि नरोता नदी के ऊपर जेसीबी चल रही है। नदी की धार के बीच में जो पेड़-पौधे मिट्टी को पकड़कर रखते थे, उन्हें उजाड़ दिया गया और वहां सड़क बनानी शुरू कर दी। वो सड़क जंगल के बीच से…
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    अफ़ग़ान नागरिकों के समर्थन में आए लोग, पंजाब में किसानों का धरना जारी और अन्य ख़बरें
    24 Aug 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी अफ़ग़ान नागरिकों के समर्थन में आये लोग, किसानों का धरना जारी और अन्य ख़बरों पर।
  • पश्चिम बंगाल के शिक्षा विभाग मुख्यालय के बाहर शिक्षिकाओं ने खाया ज़हर
    भाषा
    पश्चिम बंगाल के शिक्षा विभाग मुख्यालय के बाहर शिक्षिकाओं ने खाया ज़हर
    24 Aug 2021
    अनुबंधित स्कूली शिक्षकों के मंच ‘ शिक्षक ओक्यो मंच’ से संबद्ध ये सभी प्रदर्शनकारी अध्यापिकाएं नौकरी पक्की करने और उनके तबादलों को रद्द करने की मांग कर रही थीं, क्योंकि इस तबादले के कारण उनमें से कुछ…
  • अफ़ग़ानिस्तान अपडेट: क्या है भारत का रुख, क्या कर रहा है अमेरिका, क्या सोच रहा है चीन
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/एपी/भाषा
    अफ़ग़ानिस्तान अपडेट: क्या है भारत का रुख, क्या कर रहा है अमेरिका, क्या सोच रहा है चीन
    24 Aug 2021
    उम्मीद है कि अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति पड़ोसियों के लिए चुनौती नहीं बनेगी : भारत ने यूएनएचआरसी में कहा
  • ‘जटिलताओं’ के बगैर ‘सामान्य हालात’ संभव नहीं: बंगाल की हिल पॉलिटिक्स और एक स्थायी राजनीतिक समाधान 
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    ‘जटिलताओं’ के बगैर ‘सामान्य हालात’ संभव नहीं: बंगाल की हिल पॉलिटिक्स और एक स्थायी राजनीतिक समाधान 
    24 Aug 2021
    जहाँ तमाम पार्टियाँ जमीन के पट्टे, रोजगार सृजन और दार्जिलिंग के खोये हुए गौरव को बहाल करने की बात कर रही हैं, वहीं एक अनुभवी राजनीतिज्ञ का कहना है कि ‘हम लोग इस बीच एक लंबे अंतराल के बाद लोकतंत्र में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License