NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सुप्रीम कोर्ट से मालिकों को फिर राहत, श्रमिकों को पूरा वेतन न देने पर 12 जून तक कार्रवाई पर रोक
पीठ ने कहा, “इसे लेकर हमारी आपत्तियां हैं। इस अवधि के लिये कोई समाधान खोजने के लिये कुछ चर्चा की जानी चाहिए। लॉकडाउन की अवधि के लिये पारिश्रमिक के भुगतान और उद्योगों को संरक्षण प्रदान करने के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है।’’
भाषा
04 Jun 2020
सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान सरकार के 29 मार्च के आदेश के बावजूद अपने कर्मचारियों को पूर्ण पारिश्रमिक नहीं देने वाले नियोक्ताओं के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर लगी अंतरिम रोक की अवधि बृहस्पतिवार को 12 जून तक के लिये बढ़ा दी।

गृह मंत्रालय ने एक सर्कुलर जारी कर सभी कंपनियों और नियोक्ताओं को निर्देश दिया था कि वे अपने यहां कार्यरत सभी श्रमिकों और कर्मचारियों को बगैर किसी कटौती के लॉकडाउन की अवधि में पूरे पारिश्रमिक का भुगतान करें।

श्रम एवं रोजगार सचिव ने भी सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा था जिसमें नियोक्ताओं को यह सलाह देने के लिये कहा गया था कि कोविड-19 महामारी के मद्देनज़र वे अपने कर्मचारियों को नहीं हटायें ओर न ही उनका पारिश्रमिक कम करें।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस मामले की सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय के सर्कुलर पर चिंता व्यक्त की और कहा कि इसमें सौ फीसदी पारिश्रमिक का भुगतान करने का आदेश दिया गया है और ऐसा नहीं होने पर उन पर मुकदमा चलाने का निर्देश है।

पीठ ने कहा, ’’इसे लेकर हमारी आपत्तियां हैं। इस अवधि के लिये कोई समाधान खोजने के लिये कुछ चर्चा की जानी चाहिए। लॉकडाउन की अवधि के लिये पारिश्रमिक के भुगतान और उद्योगों को संरक्षण प्रदान करने के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है।’’

पीठ ने इस मामले को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई पूरी करते हुये कहा, ‘‘शासन को छोटी इकाइयों के मालिकों को कुछ रास्ता देना होगा। प्रत्येक औद्योगिक इकाई और इसमें कार्यरत श्रमिकों की स्थिति के मद्देनजर इस बारे में बातचीत की आवश्यकता है।’’

पीठ ने कहा कि श्रमिकों को बगैर किसी भुगतान के उनके हाल पर छोड़ना चिंता का विषय है लेकिन ऐसी भी स्थिति हो सकती है जिसमें औद्योगिक इकाई के पास पारिश्रमिक देने के लिये धन ही नहीं हो। इसलिए इसमें संतुलन बनाने की आवश्यकता है।

केन्द्र की ओर से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि लॉकडाउन के बाद से कामगारों का पलायन हो रहा है और इसीलिए सरकार ने अधिसूचना जारी की ताकि श्रमिकों को पारिश्रमिक का भुगतान करके कार्यस्थल पर ही उनके रुके रहने को सुनिश्चित करने में मदद की जा सके।

गृह मंत्रालय के 29 मार्च के सर्कुलर को सही ठहराते हुये वेणुगोपाल ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन कानून के प्रावधानों का भी हवाला दिया।

इस पर पीठ ने जानना चाहा कि औद्योगिक विवाद कानून के कतिपय प्रावधानों को लागू नहीं किये जाने के तथ्य के मद्देनजर क्या केन्द्र के पास कर्मचारियों को शत-प्रतिशत भुगतान नहीं करने वाली इकाइयों पर मुकदमा चलाने का अधिकार है।

पीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति में नियोक्ताओं और श्रमिकों के बीच बातचीत से इन 54 दिनों के वेतन के भुगतान का समाधान खोजने की आवश्यकता है।

फिक्सस पैक्स नाम की एक फर्म ने कहा कि उसकी कंपनी का काम घटकर दस प्रतिशत रह गया है और उसके लिये पूरा पारिश्रमिक देना असंभव है।

एक वकील का कहना था कि सरकार देश में सभी श्रमिकों को न्यूनतम पारिश्रमिक का भुगतान करने के लिये ईएसआई कोष का इस्तेमाल कर सकती थी।

इस पर वेणुगोपाल ने कहा कि ईएसआई कोष से धन कर्ज के रूप में लिया जा सकता है लेकिन इससे श्रमिकों को भुगतान नहीं किया जा सकता।

ऐसे ही एक पक्षकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इन्दिरा जयसिंह ने कहा कि गृह मंत्रालय का निर्देश निरस्त नहीं किया जाना चाहिए और श्रमिकों को लॉकडाउन की अवधि का पूरा पारिश्रमिक दिया जाना चाहिए।

न्यायालय ने सुनवाई के अंतिम क्षणों में सभी पक्षों को अपने दावों के समर्थन में लिखित में तथ्य पेश करने का निर्देश दिया और अटार्नी जनरल से कहा कि वह तीन दिन के भीतर मंत्रालय की अधिसूचना की वैधता पर एक संक्षिप्त नोट पेश करें।

इस बीच, केन्द्र ने भी न्यायालय के निर्देशानुसार एक हलफनामा दाखिल किया है। इस हलफनामे में 29 मार्च के निर्देशों को सही ठहराते हुये कहा गया है कि अपने कर्मचारियों और श्रमिकों को पूरा भुगतान करने में असमर्थ निजी प्रतिष्ठानों को अपनी ऑडिट की गयी बैंलेंस शीट और खाते न्यायालय में पेश करने का आदेश दिया जाना चाहिए।

गृह मंत्रालय ने शीर्ष अदालत में दाखिल हलफनामे में कहा है कि 29 मार्च का निर्देश लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों और श्रमिकों, विशेषकर संविदा और दिहाड़ी कामगारों, की वित्तीय परेशानियों को कम करने के इरादे से एक अस्थाई उपाय था। इन निर्देशों को 18 मई से वापस ले लिया गया है।

न्यायालय के निर्देश पर गृह मंत्रालय ने यह हलफनामा दाखिल किया है। इसमें कहा गया है कि 29 मार्च के निर्देश आपदा प्रबंधन कानून के प्रावधानों, योजना और उद्देश्यों के अनुरूप था और यह किसी भी तरह से संविधानेतर नहीं है।

Supreme Court
workers wage
Corona Period
Lockdown
Workers and Boss

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • Asha Usha workers
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मध्य प्रदेश : आशा ऊषा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन से पहले पुलिस ने किया यूनियन नेताओं को गिरफ़्तार
    07 Mar 2022
    मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने शिवराज सरकार की बढ़ती 'तानाशाही' की निंदा करते हुए कहा, "शिवराज सरकार मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनितिक दल के कार्यालय में ही पुलिस को बिना आदेश ही नहीं घुसा रही है,…
  • Syrian refugees
    सोनाली कोल्हटकर
    क्यों हम सभी शरणार्थियों को यूक्रेनी शरणार्थियों की तरह नहीं मानते?
    07 Mar 2022
    अफ़ग़ानिस्तान, इराक़, सीरिया, सोमालिया, यमन और दूसरी जगह के शरणार्थियों के साथ यूरोप में नस्लीय भेदभाव और दुर्व्यवहार किया जाता रहा है। यूक्रेन का शरणार्थी संकट पश्चिम का दोहरा रवैया प्रदर्शित कर रहा…
  • air pollution
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हवा में ज़हर घोल रहे लखनऊ के दस हॉटस्पॉट, रोकने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तैयार किया एक्शन प्लान
    07 Mar 2022
    वायु गुणवत्ता सूचकांक की बात करें तो उत्तर प्रदेश के ज्यादातर शहर अब भी प्रदूषण के मामले में शीर्ष स्थान पर हैं। इन शहरों में लखनऊ, कानपुर और गाजियाबाद जैसे बड़े शहर प्रमुख हैं।
  • Chaudhary Charan Singh University
    महेश कुमार
    मेरठ: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के भर्ती विज्ञापन में आरक्षण का नहीं कोई ज़िक्र, राज्यपाल ने किया जवाब तलब
    07 Mar 2022
    मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में सेल्फ फाइनेंस कोर्स के लिए सहायक शिक्षक और सहआचार्य के 72 पदों पर भर्ती के लिए एक विज्ञापन निकाला था। लेकिन विज्ञापित की गई इन भर्तियों में दलितों, पिछड़ों और…
  • shimla
    टिकेंदर सिंह पंवार
    गैर-स्टार्टर स्मार्ट सिटी में शहरों में शिमला कोई अपवाद नहीं है
    07 Mar 2022
    स्मार्ट सिटी परियोजनाएं एक बड़ी विफलता हैं, और यहां तक कि अब सरकार भी इसे महसूस करने लगी है। इसीलिए कभी खूब जोर-शोर से शुरू की गई इस योजना का नए केंद्रीय बजट में शायद ही कोई उल्लेख किया गया है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License