NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि कानूनों के अमल पर लगाई रोक, कमेटी का गठन
किसानों की तरफ़ से मिली पहली प्रतिक्रिया में उन्होंने कानूनों को वापस लिए जाने की अपनी मांग दोहराई। किसानों का कहना है कि कानूनों को होल्ड पर रखने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
12 Jan 2021
सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने तीनों विवादास्पद कृषि कानूनों के अमल पर अगले आदेश तक के लिये मंगलवार को रोक लगा दी। साथ ही न्यायालय ने इन कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले किसानों और सरकार के बीच व्याप्त गतिरोध दूर करने के लिये एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर दी।

हालांकि किसानों की तरफ़ से मिली पहली प्रतिक्रिया में उन्होंने कानूनों को वापस लिए जाने की अपनी मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि कानूनों को होल्ड पर रखने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसका एकमात्र समाधान तीनों क़ानूनों को रिपील यानी वापस ही करना है। मध्यस्थता के लिए कोर्ट की ओर से कमेटी बनाए जाने को लेकर भी किसानों में कोई उत्साह नहीं दिखाई दिया।

आज, मंगलवार को प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने अपनी सुनवाई को आगे बढ़ाते हुए सभी पक्षों को सुनने के बाद इन कानूनों के अमल पर अगले आदेश तक के लिये रोक लगा दी।

पीठ ने कहा कि वह इस बारे में आदेश पारित करेगी।

न्यायालय द्वारा गठित की जाने वाले कमेटी इन कानूनों को लेकर किसानों की शंकाओं और शिकायतों पर विचार करेगी।

कोर्ट ने इस कमेटी में कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी, प्रमोद कुमार जोशी, भारतीय किसान यूनियन के भूपेंद्र सिंह मान और शेतकारी संगठन के अनिल घानवत को शामिल किया है।

इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने विरोध कर रहे किसानों से भी सहयोग करने का अनुरोध किया और स्पष्ट किया कि कोई भी ताकत उसे गतिरोध दूर करने के लिये इस तरह की समिति गठित करने से नहीं रोक सकती है।

उसने किसानों के प्रदर्शन पर कहा, हम जनता के जीवन और सम्पत्ति की रक्षा को लेकर चिंतित हैं।

न्यायालय ने साथ ही किसान संगठनों से सहयोग मांगते हुए कहा कि कृषि कानूनों पर ‘‘ जो लोग सही में समाधान चाहते हैं, वे समिति के पास जाएंगे’’।

उसने किसान संगठनों से कहा, ‘‘यह राजनीति नहीं है। राजनीति और न्यायतंत्र में फर्क है और आपको सहयोग करना ही होगा।’’

प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे, न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन की पीठ ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुये यहां तक संकेत दिया था कि अगर सरकार इन कानूनों का अमल स्थगित नहीं करती है तो वह उन पर रोक लगा सकती है।

इस बीच, केन्द्र ने न्यायालय को सूचित किया कि दिल्ली सीमा पर आन्दोलनरत किसानों के बीच खालिस्तानी तत्वों ने पैठ बना ली है। केन्द्र ने न्यायालय में दायर एक अर्जी में दावा किया है कि इस आन्दोलन में खालिस्तानी तत्व आ गये हैं।

कोर्ट में सरकार की ओर से कही गई इस बात को लेकर भी किसानों में रोष है। किसानों का कहना है कि सरकार समाधान चाहती ही नहीं है। वो केवल किसान आंदोलन को बदनाम कर उसे कुचलना चाहती है। किसानों ने दोहराया कि कानून वापसी तक उनका आंदोलन इसी तरह जारी रहेगा। और वे 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर मार्च भी करेंगे।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

farmers protest
farmers protest update
AIKS
Farm Bills
BJP
Modi government
Supreme Court
Narendra modi

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल


बाकी खबरें

  • Forest
    विजय विनीत
    EXCLUSIVE: सोती रही योगी सरकार, वन माफिया चर गए चंदौली, सोनभद्र और मिर्ज़ापुर के जंगल
    19 Jan 2022
    चंदौली, सोनभद्र और मिर्ज़ापुर के जंगलों में अब शेर, बाघ, मोर और काले हिरणों का शोर नहीं सुनाई देता। अब यहां कुछ सुनाई देता है तो धूल उड़ाते भारी वाहनों का भोपू और नदियों का सीना चीरकर बालू निकालती…
  • Cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: पर्यटन की हालत पर क्यों मुस्कुराई अर्थव्यवस्था!
    19 Jan 2022
    ऐसा क्या हुआ कि पर्यटन की हालत देख अर्थव्यवस्था की हंसी छूट गई!
  • Taliban
    एम के भद्रकुमार
    पाकिस्तान-तालिबान संबंधों में खटास
    19 Jan 2022
    अमेरिका इस्लामाबाद के साथ तालिबान के संबंध में उत्पन्न तनाव का फायदा उठाने की तैयारी कर रहा है।
  • JNU protest
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जेएनयू में छात्रा से छेड़छाड़, छात्र संगठनों ने निकाला विरोध मार्च
    19 Jan 2022
    जेएनयू परिसर में पीएचडी कर रही एक छात्रा के साथ सोमवार रात कथित तौर पर छेड़खानी की गई। मामला सामने आने के बाद मंगलवार को छात्रों और शिक्षकों ने परिसर में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने का आरोप…
  • census
    अनिल जैन
    जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य को क्यों टाल रही है सरकार?
    19 Jan 2022
    सवाल है कि कोरोना महामारी के चलते सरकार का कोई काम नहीं रूका है, तो फिर जनगणना जैसे बेहद महत्वपूर्ण कार्य को हल्के में लेते हुए क्यों टाला जा रहा है?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License