NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
खोरी गांव पर उच्चतम न्यायालय: जिनके घर तोड़े गए, उनके पुनर्वास के लिए जल्द कदम उठाए हरियाणा सरकार"
याचिकाकर्ता सरीना सरकार ने बताया कि उसे किसी प्रकार की कोई भी पुनर्वास संबंधी सहायता नगर निगम की ओर से प्रदत्त नहीं की जा रही है। उल्टा नगर निगम बेदखल परिवारों को खोरी गांव की जमीन से जबरन भगाना चाहती है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 Aug 2021
 उच्चतम न्यायालय

खोरी गांव मामले में उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा कि जिनके घर तोड़े गए हैं, उनके पुनर्वास के लिए हरियाणा सरकार जल्द से जल्द कदम उठाकर प्रभावित लोगों को राहत देने का काम करे। इसे अंजाम देने के लिए उच्चतम न्यायालय ने अस्थाई शेल्टरों में नोडल अफसर तैनात करने के आदेश दिए हैं और फरीदाबाद निगम कमिश्नर से पुनर्वास पर स्टेटस रिपोर्ट की मांग की है।

इस मामले की अगली सुनवाई अब  25 अगस्त को होगी।

7 जून 2021 को माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश पर जस्टिस ए एम खानविलकर की पीठ ने नगर निगम फरीदाबाद को आदेश जारी किया की नगर निगम छः हफ्ते के भीतर खोरी गांव में वन विभाग की जमीन पर बसे हुए परिवारों को बेदखल किया जाए। इसको लेकर नगर निगम ने 10,000 से भी ज्यादा परिवारों के लगभग एक लाख लोगों को बेदखल कर दिया। इसी संबंध में आज उच्चतम न्यायालय में सुनवाई चल रही थी जिसके दौरान मंगलवार को जस्टिस ए एम खानविलकर पीठ ने फिर कहा कि यदि कोई भी स्ट्रक्चर वन विभाग की जमीन पर काबिज है तो उसको तुरन्त बेदखल किया जाए।

मजदूर आवास संघर्ष समिति खोरी गांव जो की खोरी गांव के पुनर्वास के मुद्दे पर काफी लंबे समय से कार्य कर रहा है। मजदूर आवास संघर्ष समिति खोरी गांव के सदस्य निर्मल गोराना ने बताया की 31 जुलाई तक नगर निगम फरीदाबाद को खोरी गांव के आवास एवं पुनर्वास की पॉलिसी को नोटीफाई करना था किंतु आज नगर निगम फरीदाबाद ने उच्चतम न्यायालय में चल रहे मामले की सुनवाई के दौरान बताया कि उन्होंने पुनर्वास की पॉलिसी बना कर राज्य सरकार को अप्रूवल के लिए भेज दी है और अभी राज्य सरकार को इस पॉलिसी को अप्रूव करने के लिए कुछ समय की आवश्यकता है। इसलिए अगली दिनांक 25 अगस्त सुनवाई के लिए रखी गई है। 

नगर निगम ने उच्चतम न्यायालय में एक एफिडेविट प्रस्तुत किया जिसमें बताया गया कि राधा स्वामी सत्संग भवन में खोरी गांव से बेदखल हुए परिवारों को पुनर्वास दिया जा रहा है किंतु सत्य कुछ अलग है। 100000 बेदखल लोगों में से 2 से ज्यादा लोगों ने राधा स्वामी सत्संग भवन में आश्रय नहीं लिया और भोजन को तड़पते हुए 100000 लोगों में से प्रतिदिन 100 से 400 लोगों के मुंह तक ही सरकार भोजन मुहैया करवा पाई है, बाकी आज भी भोजन को तरस रहे हैं।

मजदूर आवास संघर्ष समिति खोरी गांव के सदस्य मोहम्मद सलीम ने बताया कि पुनर्वास के नाम पर जब तक खोरी गांव से बेदखल हुए परिवारों को घर नहीं मिल जाता है, तब तक नगर निगम को अस्थाई रूप से सभी लोगों को ट्रांजिट कैंप में आश्रय देने की आवश्यकता है, किंतु नगर निगम जबरदस्ती लोगों को राधा स्वामी सत्संग भवन में धकेलना चाहती है। जबकि लोग राधा स्वामी सत्संग भवन में नहीं जाना चाहते। 

साथ ही पुनर्वास के लिए प्रस्तुत आवेदन पत्र के संबंध में मोहम्मद सलीम का कहना है कि बेदखल हुए परिवारों ने नगर निगम के समक्ष पुनर्वास हेतु आवेदन पत्र प्रस्तुत किए किंतु नगर निगम ने बड़ी चालाकी के साथ आवेदन पत्र तो ले लिया किंतु उसकी एवज में आवेदनकर्ता को कोई रसीद नहीं दी ताकि न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी को नगर निगम सार्थक कर सके।

उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिकाकर्ता सरीना सरकार ने बताया कि उसे किसी प्रकार की कोई भी पुनर्वास संबंधी सहायता नगर निगम की ओर से प्रदत्त नहीं की जा रही है। उल्टा नगर निगम बेदखल परिवारों को खोरी गांव की जमीन से जबरन भगाना चाहती है जबकि समस्त बेदखल परिवार अस्थाई रूप से भी आश्रम की मांग कर रहे हैं किंतु नगर निगम बेदखल परिवारों की मांग को अनसुना एवं अनदेखा कर रही है जोकि निंदनीय है।

मजदूर आवास संघर्ष समिति के सदस्य निर्मल गोराना ने बताया कि लगभग 10,000 से ज्यादा घरों को नगर निगम द्वारा बेदखल किया जा चुका है, किंतु आवेदन ऊंट के मुंह में जीरे के समान भी नहीं हुए क्योंकि बेदखल परिवारों की राधा स्वामी सत्संग भवन तक पहुंच नहीं बन पाई है। यह काम नगर निगम को करना चाहिए था जबकि इसे मजदूर परिवारों पर थोपकर उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। ऐसी स्थिति में मजदूर आवास संघर्ष समिति खोरी गांव अपनी ओर से खोरी गांव के बेदखल हुए परिवारों के दस्तावेज नगर निगम कार्यालय तक पहुंचा कर पुनर्वास की मांग करेगी। 

जहां एक ओर खोरी से बेदखल हुए मजदूर परिवार पुनर्वास की आस लगाए बैठे हैं और काफी लंबे समय से माफियाओं के अत्याचार से त्रासद थे, वहीं पर फिर से कई समूह पुनर्वास के नाम पर लोगों को गुमराह कर पैसा बटोरने का धंधा चला रहे हैं। 25 अगस्त को होने वाली सुनवाई के दौरान नगर निगम कमिश्नर एवं मजदूर आवास संघर्ष समिति खोरी गांव की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट पुनर्वास की पोल खोल देगी। मजदूर आवाज संघर्ष समिति खोरी गांव ने यह भी मांग की है कि पुनर्वास हेतु नोडल ऑफिसर तैनात किए जाएं।

Khori village
Haryana
Haryana Government
Supreme Court
Manohar Lal khattar

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!
    27 Mar 2022
    पुनर्प्रकाशन : यही तो दिन थे, जब दो बरस पहले 2020 में पूरे देश पर अनियोजित लॉकडाउन थोप दिया गया था। ‘इतवार की कविता’ में पढ़ते हैं लॉकडाउन की कहानी कहती कवि-पत्रकार मुकुल सरल की कविता- ‘लॉकडाउन—2020’।
  • डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    लीजिए विकास फिर से शुरू हो गया है, अब ख़ुश!
    27 Mar 2022
    ये एक सौ तीस-चालीस दिन बहुत ही बेचैनी में गुजरे। पहले तो अच्छा लगा कि पेट्रोल डीज़ल की कीमत बढ़ नहीं रही हैं। पर फिर हुई बेचैनी शुरू। लगा जैसे कि हम अनाथ ही हो गये हैं। जैसे कि देश में सरकार ही नहीं…
  • सुबोध वर्मा
    28-29 मार्च को आम हड़ताल क्यों करने जा रहा है पूरा भारत ?
    27 Mar 2022
    मज़दूर और किसान आर्थिक संकट से राहत के साथ-साथ मोदी सरकार की आर्थिक नीति में संपूर्ण बदलाव की भी मांग कर रहे हैं।
  • अजय कुमार
    महंगाई मार गई...: चावल, आटा, दाल, सरसों के तेल से लेकर सर्फ़ साबुन सब महंगा
    27 Mar 2022
    सरकारी महंगाई के आंकड़ों के साथ किराना दुकान के महंगाई आकड़ें देखिये तो पता चलेगा कि महंगाई की मार से आम जनता कितनी बेहाल होगी ?
  • जॉन पी. रुएहल
    क्या यूक्रेन मामले में CSTO की एंट्री कराएगा रूस? क्या हैं संभावनाएँ?
    27 Mar 2022
    अपने सैन्य गठबंधन, सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (सीएसटीओ) के जरिये संभावित हस्तक्षेप से रूस को एक राजनयिक जीत प्राप्त हो सकती है और अपने अभियान को आगे बढ़ाने के लिए उसके पास एक स्वीकार्य मार्ग प्रशस्त…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License