NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
शाहीन बाग़ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपनाया बीच का रास्ता,अंतरिम आदेश से इंकार
कोर्ट ने ये तो कहा कि शाहीन बाग़ में प्रदर्शनकारी सड़क अवरुद्ध कर दूसरों के लिए असुविधा पैदा नहीं कर सकते, लेकिन साथ ही ये भी कहा कि लोग विरोध करने के हकदार हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
10 Feb 2020
shaheen bagh
Image courtesy: India Today

दिल्ली: शाहीन बाग़ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीच का रास्ता अपनाया है। कोर्ट ने ये तो कहा कि नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे लोग सार्वजनिक मार्ग अवरुद्ध कर दूसरों के लिए असुविधा पैदा नहीं कर सकते, लेकिन इसके साथ ही कोर्ट ने लोगों के विरोध के अधिकार को भी सुरक्षित रखा और तुरंत ही कोई आदेश देने से भी इंकार कर दिया। अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी। 

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ की पीठ ने शाहीनबाग से इन प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए दायर याचिकाओं पर संक्षिप्त सुनवाई के बाद केन्द्र, दिल्ली सरकार और पुलिस को नोटस जारी किए। 

पीठ ने कहा, ‘‘एक कानून है और इसके खिलाफ लोग हैं। मामला न्यायालय में लंबित है। इसके बावजूद कुछ लोग विरोध कर रहे हैं। वे विरोध करने के हकदार हैं।’’

कोर्ट ने कहा, ‘‘आप सार्वजनिक सड़कों को अवरुद्ध नहीं कर सकते। इस तरह के क्षेत्र में अनिश्चितकाल के लिए विरोध प्रदर्शन नहीं हो सकता। यदि आप विरोध करना चाहते हैं, तो ऐसा एक निर्धारित स्थान पर होना चाहिए।’’

शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि शाहीनबाग में लंबे समय से विरोध प्रदर्शन चल रहा है लेकिन यह दूसरे लोगों के लिए असुविधा पैदा नहीं कर सकता।

पीठ ने कहा कि वह दूसरे पक्ष को सुने बगैर इस मामले में कोई निर्देश नहीं देगी। पीठ ने इसके साथ ही इस मामले को 17 फरवरी के लिए सूचीबद्ध कर दिया। 

इससे पहले, सुनवाई शुरू होते ही इस मामले में याचिकाकर्ताओं में से एक अधिवक्ता अमित साहनी ने कहा कि यह प्रकरण विरोध के अधिकार की सीमा के बारे में है।
पीठ ने जानना चाहा, ‘‘क्या सरकार की ओर से कोई मौजूद है। हम इसमें नोटिस जारी करेंगे।’’

मामले में एक अन्य याचिकाकर्ता एवं भाजपा के पूर्व विधायक नंद किशोर गर्ग के अधिवक्ता शशांक देव सुधि ने पीठ से इस मामले में अंतरिम निर्देश देने का अनुरोध किया। पीठ ने कहा, ‘‘ऐसा एकपक्षीय नहीं हो सकता।’’

अधिवक्ता महमूद प्राचा ने पीठ से कहा कि वह भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद की ओर से इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहते हैं।
पीठ ने कहा, ‘‘ आप जो उचित समझें, करें।’’

सुनवाई के अंतिम क्षणों में जब सुधि ने इस मामले में कुछ निर्देश देने की मांग पर जोर देते हुए कहा कि सार्वजनिक सड़कों पर अवरोध की वजह से जनता को असुविधा हो रही है तो पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘यदि आपने 50 से ज्यादा दिन इंतजार किया है तो कुछ दिन और इंतजार कर लीजिए।’’

कोर्ट ने शिशु की मौत पर केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में शाहीनबाग में चल रहे विरोध में शामिल होने के बाद घर लौटे माता-पिता के शिशु की मृत्यु के मामले का सोमवार को संज्ञान लिया।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने चार महीने के बच्चे की मृत्यु के मामले का स्वत: संज्ञान लिए जाने पर कुछ वकीलों द्वारा आपत्ति किए जाने पर कड़ा रुख अपनाया।

पीठ ने इस मामले में पेश महिला अधिवक्ताओं से सवाल किया, ‘‘क्या चार माह का बच्चा इस तरह के विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा ले सकता है?’’
सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि चार महीने के बच्चे जैसे अवयस्कों को विरोध प्रदर्शन स्थल पर ले जाना उचित नहीं था।

शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार विजेता जेन गुणरत्न सदावर्ते द्वारा लिखे गए पत्र के आधार इस घटना का स्वत: संज्ञान लिया। सदावर्ते ने इस पत्र में कहा था कि किसी भी प्रकार के विरोध प्रदर्शन और आन्दोलनों में अवयस्कों के हिस्सा लेने को प्रतिबंधित किया जाए।

शीर्ष अदालत ने इस मामले में केन्द्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है। 

पीठ ने इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले बच्चों को उनके स्कूलों में ‘पाकिस्तानी’ और ‘राष्ट्र विरोधी’ बताए जाने के बारे में दो महिला अधिवक्ताओं के बयान पर भी दु:ख व्यक्त किया। 

अदालत ने कहा, ‘‘हम नहीं चाहते कि लोग समस्याओं को और बढ़ाने के लिए इस मंच का इस्तेमाल करें।’’ 

पीठ ने इस बात पर अप्रसन्नता व्यक्त की कि वकील उसके द्वारा स्वत: संज्ञान लिए गए मुद्दे से भटक रहे हैं।

पीठ ने कहा, ‘‘हम सीएए या एनआरसी पर विचार नहीं कर रहे हैं। हम स्कूलों में पाकिस्तानी जैसी गालियों पर भी विचार नहीं कर रहे हैं।’’ 
पीठ ने स्पष्ट किया कि वह किसी की भी आवाज नहीं दबा रही है।

इसने कहा, ‘‘हम किसी की आवाज नहीं दबा रहे हैं। यह शीर्ष अदालत द्वारा सही तरीके से की जा रही स्वत: संज्ञान की कार्यवाही है।’’
दो महिला अधिवक्ताओं ने कहा कि वे पत्रकार और कार्यकर्ता जॉन दयाल तथा दो बच्चों की मां की ओर से इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहती हैं।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

Shaheen Bagh
Supreme Court
CAA
NRC
NPR
Citizenship Amendment Act
Protest against CAA
BJP
modi sarkar

Related Stories

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

शाहीन बाग से खरगोन : मुस्लिम महिलाओं का शांतिपूर्ण संघर्ष !

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

लंबे संघर्ष के बाद आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायक को मिला ग्रेच्युटी का हक़, यूनियन ने बताया ऐतिहासिक निर्णय


बाकी खबरें

  • Sudha Bhardwaj
    भाषा
    एल्गार परिषद : बंबई उच्च न्यायालय ने वकील सुधा भारद्वाज को ज़मानत दी
    01 Dec 2021
    अदालत ने भारद्वाज को इस आधार पर ज़मानत प्रदान कि उनके ख़िलाफ़ निश्चित अवधि में आरोपपत्र दाखिल नहीं हुआ इसलिए वह ज़मानत की हकदार हैं। भारद्वाज वर्ष 2018 में गिरफ़्तारी के बाद से विचाराधीन कैदी के तौर पर…
  • palestine prisoner
    पीपल्स डिस्पैच
    फ़िलिस्तीनी प्रशासनिक बंदी लोय अल-अश्क़र ने रिहाई पर हुए समझौते के बाद भूख हड़ताल ख़त्म की
    01 Dec 2021
    इजरायल ने दो अन्य फिलिस्तिनियों-हिशाम अबू ह्वाश और निदाल बॉलआउट को हिरासत में रखा हुआ है और इस अवैध प्रशासनिक हिरासत के ख़िलाफ़ ये दोनों इस समय बंदी भूख हड़ताल पर हैं। वे क्रमश: 104 दिनों और 31 दिनों…
  • AICCTU
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: ऐक्टू ने किया निर्माण मज़दूरों के सवालों पर प्रदर्शन
    30 Nov 2021
    कार्यक्रम की शुरुआत सुश्रुत ट्रामा सेंटर से मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की ओर जुलूस निकालकर हुई। दिल्ली पुलिस द्वारा मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय तक का रास्ता बंद किये जाने के चलते सड़क पर ही सभा की गई।
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    नीति आयोग की MPI रिपोर्ट, निर्माण मज़दूरों की हड़ताल और अन्य ख़बरें
    30 Nov 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी नीति आयोग की ग़रीबी पर रिपोर्ट, निर्माण मज़दूरों की हड़ताल और अन्य ख़बरों पर।
  • Protest
    मुकुंद झा
    दिल्ली: बैंक कर्मचारियों के 'बैंक बचाओ, देश बचाओ' अभियान को ट्रेड यूनियनों, किसान संगठन का मिला समर्थन  
    30 Nov 2021
    बैंक कर्मियों की भारत यात्रा मंगलवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर समाप्त हुई। जिसमें सरकार को चेताया गया कि अगर सरकार ने अपने निजीकरण के निर्णय को वापस नहीं लिया तो आंदोलन और तेज़ होगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License