NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
भारत
राजनीति
‘सूर्य नमस्कार’ के बहाने ‘हिंदुत्व’ को शिक्षा-संस्थानों में घुसाने की कोशिश करती सरकार!
सरकार द्वारा “आज़ादी” के “अमृत महोत्सव” के अवसर पर 1 जनवरी से 7 जनवरी के बीच स्कूलों में करवाए जा रहे 'सूर्य नमस्कार' कार्यक्रम पर प्रबुद्ध समाज ने सवाल किया है कि “क्या यह कार्यक्रम चुनावों से पहले “ध्रुवीकरण” को जन्म नहीं देगा?”
असद रिज़वी
05 Jan 2022
सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य : उम्मीद

देशभर के स्कूलों में आयोजित किए जा रहे ‘सूर्य नमस्कार’ कार्यक्रम को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रबुद्ध समाज का कहना है कि यह कार्यक्रम केवल “भगवा” राजनीति का एक हिस्सा है। ‘सूर्य नमस्कार’ कार्यक्रम संविधान और “वैज्ञानिक स्वभाव” के विरुद्ध हैं।

सरकार द्वारा “आज़ादी” के “अमृत महोत्सव” के अवसर पर 1 जनवरी से 7 जनवरी के बीच स्कूलों में करवाए जा रहे 'सूर्य नमस्कार' कार्यक्रम पर प्रबुद्ध समाज ने सवाल किया है कि “क्या यह कार्यक्रम चुनावों से पहले “ध्रुवीकरण” को जन्म नहीं देगा?” 

उधर “मुस्लिम समाज” ने कहा है कि ‘सूर्य नमस्कार’ सेक्युलर देश में “अनिवार्य” नहीं किया जा सकता है। मुस्लिम नेताओं का कहना है की अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) “हिंदुत्व” को शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश कराने की कोशिश कर रही है।

उल्लेखनीय है कि “स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगांठ” पर 1 जनवरी से 7 जनवरी के बीच स्कूलों में 'सूर्य नमस्कार' कार्यक्रम आयोजित करने के सरकार के निर्देश जारी किए गए हैं। जिसमें पहले चरण में 30 हजार स्कूलों को शामिल किया गया है जहाँ 01 जनवरी से 07 जनवरी तक स्कूलों में “सूर्य नमस्कार” कराया जा रहा है।

यह आदेश ऐसे समय में आया है जब देश के पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। भाजपा पूरा प्रयास कर रही है कि “हिंदुत्व” चुनावी चर्चा के केंद्र में रहे, ताकि उसको ध्रुवीकरण का लाभ हो सके। इसलिये सरकार के इस आदेश का “भगवा राजनीति” के दृष्टिकोण से भी विश्लेषण किया जा रहा है।

राजनीति के जानकार मानते हैं कि विपक्ष की खामोशी के कारण “दक्षिणपंथी विचारधारा” को बढ़ावा मिल रहा है। लखनऊ विश्वविद्यालय में राजनीतिकशास्त्र के विभागाध्यक्ष रहे, प्रो. रमेश दीक्षित, कहते है, विश्वविद्यालय के पाठक्रम में बदलाव और सूर्य नमस्कार दोनो एक ही “भगवा ऐजेंडा” का हिस्सा हैं। प्रो. दीक्षित के अनुसार विपक्ष ने जन-आंदोलन करना बंद कर दिये और स्वयं को “सोशल मीडिया” तक सीमित कर लिया है। यही कारण है कि “सूर्य नमस्कार” जैसे कार्यक्रम कर धीरे-धीरे, देश को “हिंदू राष्ट्र” बनाने की कोशिश तेज़ हो गई है।

राजनीतिक शास्त्री प्रो. दीक्षित आगे कहते हैं, भाजपा विकास के मोर्चे पर विफ़ल रही है। इसलिए अब औरंगज़ेब, शिवाजी और मुस्लिम नरसंहार के सहारे ध्रुवीकरण का महौल बनाया जा रहा है।इसी की एक कड़ी, सूर्य नमस्कार भी है, जो संविधान के ख़िलाफ़ है।

समाजशास्त्री मानते हैं कि ऐसे कार्यक्रम समाज को धर्म के आधार पर बाँटने के लिये किये जाते हैं। प्रसिद्ध समाजशास्त्री डॉ. प्रदीप शर्मा के अनुसार सूर्य नमस्कार “हिन्दू” धर्म का एक अनुष्ठान है, इसको किसी दूसरे धर्म के अनुयायी पर थोपा नहीं जा सकता है। यह कार्यक्रम संविधान के ख़िलाफ़ है और वैज्ञानिक स्वभाव से भी दूर करता है। डॉ. शर्मा माँग करते हैं कि सरकार अविलम्ब वापिस लेना चाहिए है। क्योंकि इस कार्यक्रम का उपदेश वोटों के लिए देश को बाँटने की साज़िश लगता है।

राजनीति पर नज़र रखने वाले मानते हैं कि चुनावों से पहले ऐसे कार्यक्रम जिसपर “अल्पसंख्यक” समाज को एतराज़ है, सिर्फ़ “बाँटो और राज्य” जैसी नीति का हिस्सा लगता है। सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर नज़र रखने वाले राजनीतिक टिप्पणीकार, सिद्धार्थ कलहँस कहते है, “योग” तक बात ठीक थी, लेकिन “सूर्य नमस्कार” करना पूरी तरह से “असंवैधानिक” है। इसपर केवल मुस्लिम समाज ही नहीं बल्कि दूसरे अल्पसंख्यको को भी एतराज़ होगा।

कलहँस आगे कहते है “संविधान ने राज्य और धर्म को अलग रखा है, सरकार को इन दोनों को मिलाना नहीं चाहिए है”। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे कार्यक्रम केवल “विवाद” को जन्म देते हैं। यह चुनाव का समय है, भाजपा अपने पाँच सालों के कामों का हिसाब जनता के सामने पेश करे, न कि विवाद खड़े करे।

इस कार्यक्रम पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी विरोध जताया है और स्कूलों में सूर्य नमस्कार का कार्यक्रम भारत के संविधान के खिलाफ है।

बोर्ड के महासचिव ख़ालिद सैफ़उल्लाह रहमानी का कहा है कि, सरकार को ध्यान रखना चाहिए है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष, बहु-धार्मिक और बहु-सांस्‍कृतिक देश है, इन्‍हीं सिद्धान्‍तों के आधार पर हमारे संविधान में लिखा गया है। स्‍कूल के पाठ्यचार्या और अपाठचर्याओं में भी इसका ध्‍यान रखने का निर्देश दिया है। रहमनी के अनुसार आंध्रप्रदेश में सभी ज़िला शिक्षा अधिकारीयों को केंद्र द्वारा इस कार्यक्रम (सूर्य नमस्कार) के लिए निर्देशित किया गया है। जिसे रहमानी एक असंवैधानिक कृत और देशप्रेम का झूठा प्रचार मानते हैं। 

न्यूज़क्लिक से फ़ोन पर बात करते हुए बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य क़ासिम रसूल इलियास ने कहा कि संविधान इस बात की अनुमति नहीं देता की सरकारी स्कूलो में किसी धर्म विशेष की शिक्षाओं को दिया जाये, या विशेष समूह की मान्यताओं पर आधारित कार्यक्रमों का आयोजन किया जाये। इलियासी ने कहा कि सरकार संविधान के बताये रास्ते से भटक रही है और बहुसंख्यक समाज की परम्पराओं को दूसरों पर थोपना चाहती है।

उन्होंने कहा कि देश संविधान के सम्मान में सरकार को सूर्य नमस्कार का निर्देश वापिस लेना चाहिए है। इसके अलावा देशप्रेम के जज़्बे को बढ़ाने के लिये, छात्रों से राष्ट्रगान पढ़वाएँ। इलियासी ने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता, बढ़ती बेरोज़गारी, महँगाई और देश की सीमाओं की सुरक्षा होनी चाहिए।

ये भी पढ़ें: अति राष्ट्रवाद के भेष में सांप्रदायिकता का बहरूपिया

surya namaskar
Hindutva Agenda
hindutva in schools
hindu vs Hindutava
bjp. nda
RSS
rss agenda in schools

Related Stories

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

इस आग को किसी भी तरह बुझाना ही होगा - क्योंकि, यह सब की बात है दो चार दस की बात नहीं

बढ़ती हिंसा व घृणा के ख़िलाफ़ क्यों गायब है विपक्ष की आवाज़?

बहस: क्यों यादवों को मुसलमानों के पक्ष में डटा रहना चाहिए!

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव परिणाम: हिंदुत्व की लहर या विपक्ष का ढीलापन?

कश्मीर फाइल्स: आपके आंसू सेलेक्टिव हैं संघी महाराज, कभी बहते हैं, और अक्सर नहीं बहते

जनादेश-2022: रोटी बनाम स्वाधीनता या रोटी और स्वाधीनता

विचार: बिना नतीजे आए ही बहुत कुछ बता गया है उत्तर प्रदेश का चुनाव

हम भारत के लोगों की असली चुनौती आज़ादी के आंदोलन के सपने को बचाने की है

विचार: राजनीतिक हिंदुत्व के दौर में सच्चे साधुओं की चुप्पी हिंदू धर्म को पहुंचा रही है नुक़सान


बाकी खबरें

  • bitcoin
    सोनिया यादव
    कर्नाटक: बिटकॉइन घोटाला ने सियासत में हलचल क्यों मचा दी है?
    20 Nov 2021
    इस स्कैम ने राज्य की राजननीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। एक ओर सीएम बोम्मई पार्टी के भीतर की चुनौती से परेशान हैं तो वहीं दूसरी ओर सुस्त जांच को लेकर विपक्ष सरकार पर जमकर निशाना साध रहा है।
  • Modi
    राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष : भक्तों के बीच “थैंक्यू मोदी जी!” का नया शिड्यूल घोषित
    20 Nov 2021
    देख लीजिए, कोविड-19 की तरह, किसान आंदोलन की आपदा में से भी मोदी जी ने अवसर निकाल ही लिया। राजधानी में थैंक्यू मोदी जी सभाओं का शिड्यूल आ गया है। बाकी राज्यों में भी आज-कल में यह सिलसिला शुरू हो जाएगा…
  • Punjab
    तृप्ता नारंग
    पंजाब: अपने लिए राजनीतिक ज़मीन का दावा करतीं महिला किसान
    20 Nov 2021
    पुरुषों और महिलाओं द्वारा पारंपरिक तौर पर जो भूमिका निभाई जाती रही है, उसमें आमूलचूल बदलाव देखने को मिला है, क्योंकि किसान आंदोलन में महिलाओं ने जमकर भागीदारी की है। हालांकि नेतृत्वकारी भूमिका में…
  • The stakes of talks between the President of America and China and the period of peace on the pretext of Afghanistan
    न्यूज़क्लिक टीम
    अमेरिका और चीन के राष्ट्रपति के बीच वार्ता का दांव और अफ़ग़ानिस्तान के बहाने शांति का दौर
    20 Nov 2021
    “पड़ताल दुनिया भर की’ में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने बातचीत की न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से। मुद्दा रहा अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हुई…
  • nonaligned movement
    एन.डी.जयप्रकाश
    गुटनिरपेक्ष आंदोलन ने अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को कैसे बदला? : भाग 1
    20 Nov 2021
    उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद का संगठित विरोध 1920 के दशक के अंत में शुरू हुआ था। जवाहरलाल नेहरू ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन के ज़रिए महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License