NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
पर्यावरण
भारत
राजनीति
तमिलनाडु: नागापट्टिनम में पेट्रोकेमिकल संयंत्र की मंजूरी का किसानों ने किया विरोध
द्रमुक सरकार इस संयंत्र को डेल्टा क्षेत्र में लगाने की तैयारी कर रही है, जिसे 2020 में हाइड्रोकार्बन निष्कर्षण और इसका किसानों पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभाव के विरोध के बाद संरक्षित विशेष कृषि क्षेत्र घोषित किया गया था। तब विपक्ष में रहते हुए द्रमुक ने 2020 में इसका विरोध किया था।
नीलाबंरन ए
10 Nov 2021
tamil nadu
फ़ोटो सौजन्य: द हिंदू

तमिलनाडु के किसान संगठनों और विपक्ष ने प्रदेश की द्रमुक सरकार से आह्वान किया है कि कावेरी डेल्टा के नागपट्टिनम जिले में एक पेट्रोकेमिकल क्लस्टर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने को लेकर एमएसएमई व्यापार और निवेश संवर्धन ब्यूरो (एमटीआईपीबी) के 26 अक्टूबर के अनुरोध को तत्काल वापस लिया जाए। 

चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CPCL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) द्वारा नौ मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) रिफाइनरी स्थापित करने की प्रक्रिया में तमिलनाडु सरकार तेजी ला रही है, जबकि 2020 में हाइड्रोकार्बन निष्कर्षण और उसके बाद के दुष्प्रभाव के मद्देनजर किसानों के विरोध के बाद, इस डेल्टा क्षेत्र को संरक्षित विशेष कृषि क्षेत्र (PSAZ) घोषित किया गया था। हालांकि इस क्षेत्र में पेट्रोकेमिकल उद्योग और मौजूदा औद्योगिक परियोजनाओं से संबंधित गतिविधियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया था। 

अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) ने सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) पर किसानों के अधिकारों की रक्षा के मसले पर दोहरे मानदंड का आरोप लगाते हुए सरकार के इस कदम की आलोचना की है। 

मौजूदा रिफाइनरी और क्लस्टर का विस्तार

फीडर सुविधा वाला एक एमएमटीपीए संयंत्र पहले से ही नागपट्टिनम के नरीमनम गांव में काम कर रहा है। इसे 'नागापट्टिनम रिफाइनरी' या 'कावेरी रिफाइनरी' के रूप में जाना जाता है। इस संयंत्र को लघु श्रेणी के रूप में वर्गीकृत किया गया है। स्थानीय कच्चे तेल को संसाधित करने के लिए सीपीसीएल ने 31,580 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से इसकी डिजाइन तैयार की थी।

अधिक भूमि के अधिग्रहण, बुनियादी ढांचे के निर्माण और निवेश के साथ नौ एमएमटीपीए के विस्तार करने की तैयारी है। डीपीआर की स्थिति के बारे में कहा गया है, "इसके लिए भूमि अधिग्रहण और पूंजी निवेश की व्यवस्था पहले ही शुरू हो चुकी है और राज्य सरकार का अगले चार वर्षों के भीतर अतिरिक्त क्षमता को संचालित करने का लक्ष्य है।"

तमिलनाडु साइंस फोरम के एक सदस्य वी सेथुरमन ने डीपीआर की मांग पर सवाल उठाया। उन्होंने न्यूज़क्लिक को बताया, "क्षेत्र में ऐसे उद्योगों के खिलाफ पूर्व के आंदोलन के इतिहास को देखते हुए क्लस्टर के लिए डीपीआर की मांग पर सवालिया निशान लग गया है।" किसान संगठनों और पर्यावरणविदों ने त्रिची और करूर जिलों को संरक्षित विशेष कृषि क्षेत्र से छूट दिए जाने का विरोध किया था, भले ही वे डेल्टा क्षेत्र में क्यों न हों। 

सेथुरमन ने यह भी दावा किया कि सरकार पीएसएजेड में मौजूदा उद्योगों के लिए छूट का फायदा उठा रही है। उन्होंने कहा कि “मौजूदा रिफाइनरी छोटी है और उसका प्रभाव न्यूनतम रहा है। संयंत्र के पास पहले से ही पर्यावरण मंजूरी मिली हुई है और इसलिए इस मामले में किसी जनसुनवाई की जरूरत नहीं होगी।" 

किसान और विपक्ष ने की द्रमुक सरकार की आलोचना 

थमिज़गा अखिल किसान संगठन समन्वय समिति ने प्रस्तावित पेट्रोकेमिकल क्लस्टर पर एक श्वेत पत्र जारी करने की मांग की थी। यहां तक कि द्रमुक ने भी फरवरी 2020 में पिछली अन्नाद्रमुक सरकार द्वारा प्रस्तावित पेट्रोलियम, रसायन और पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र (पीसीपीआइआर) का विरोध किया था। 

सेथुरमन ने कहा," कुड्डालोर और नागापट्टिनम जिलों में पीसीपीआइआर का विचार फरवरी 2020 में ही छोड़ दिया गया था और इस क्षेत्र को सीमांकित कर दिया गया था, जिसके बाद किसानों के संघर्ष का अंत हो गया था। क्लस्टर के लिए डीपीआर का आह्वान संभवत: किसान विरोध को ताजा करेगा।”

अन्नाद्रमुक और पट्टाली मक्कल काची ने डेल्टा क्षेत्र में इस तरह की परियोजना की स्थापना के विचार के लिए द्रमुक सरकार की आलोचना की। पूर्व मुख्यमंत्री और अन्नाद्रमुक के समन्वयक ओ पनीरसेल्वम ने कहा कि नए प्रस्ताव ने द्रमुक के दोहरे मापदंड को उजागर कर दिया है। पीएसएजेड विधेयक पारित होने के दौरान सभी औद्योगिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने को लेकर तत्कालीन विपक्षी नेता एमके स्टालिन के आह्वान का उल्लेख करते हुए सेल्वम ने कहा, "द्रमुक सरकार एक ऐसे व्यवसाय को बढ़ावा दे रही है, जिसका वह विपक्ष में रहते हुए विरोध कर रही थी।" 

अन्नाद्रमुक ने पीएसएजेड में 2020 में पेट्रोकेमिकल उद्योगों पर प्रतिबंध लगाने की द्रमुक की मांग को कभी नहीं माना था। अब, द्रमुक उसके जैसे ही और उससे भी बड़ी परियोजना का प्रस्ताव कर रही है।

पर्यावरण प्रदूषण का खतरा

9 एमएमटीपीए की क्षमता बढ़ाने के साथ और कई सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के स्थापित होने की उम्मीद है, जिसके पर्यावरण प्रदूषण का खतरा मंडरा रहा है। सेथुरमन ने कहा,“वर्तमान संयंत्र के लिए अधिग्रहित भूमि को बंजर करार दिया गया था जबकि डेल्टा क्षेत्र में कोई बंजर भूमि है ही नहीं । खेती योग्य भूमि को जानबूझकर बंजर भूमि में बदल दिया गया और पर्यावरण प्रदूषण का भी अधिक खतरा है। ” 

उत्तरी चेन्नई क्षेत्र के उच्च प्रदूषण का एक बड़ा उदाहरण होने के साथ पेट्रोकेमिकल उद्योग अक्सर उत्सर्जन मानदंडों के उल्लंघन की वजह से प्रचंड ताप का सामना करते हैं। सेथुरमन ने कहा, "सीपीसीएल और आइओसी द्वारा नौ गुना विस्तार की योजना बनाई जा रही है, जिससे गंभीर वायु और भूमि प्रदूषण हो सकता है, जो भूजल को भी दूषित करेगा।"

अंग्रेजी में मूल रूप से प्रकाशित लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें

https://www.newsclick.in/TN-Farmers-Oppose-DMK-Petrochem-Plant-Proposal-Nagapattinam-Opposed-2020

tamil nadu
DMK
Petroleum
environment degradation

Related Stories

रामेश्वरम द्वीप पर जल-मृदा प्रदूषण की वजह झींगा के फार्म

तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में 10-11 नवंबर को बहुत भारी बारिश की चेतावनी

उत्तराखंड: विकास के नाम पर 16 घरों पर चला दिया बुलडोजर, ग्रामीणों ने कहा- नहीं चाहिए ऐसा ‘विकास’

पर्यावरणीय पहलुओं को अनदेखा कर, विकास के विनाश के बोझ तले दबती पहाड़ों की रानी मसूरी

अगर पेड़ों पर जीवन टिका है तो एक पेड़ की कीमत ₹75 हज़ार से ज़्यादा तय होने पर खलबली क्यों नहीं?


बाकी खबरें

  • Supreme Court
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मध्यप्रदेश ओबीसी सीट मामला: सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला अप्रत्याशित; पुनर्विचार की मांग करेगी माकपा
    20 Dec 2021
    मध्य प्रदेश पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण समाप्त करने, अन्य पिछड़े समुदायों के लिए निर्धारित और आरक्षित पदों पर चुनाव रोकने, उनकी बहुसंख्या को सामान्य सीटों में परिवर्तित करने का निर्देश देने वाले…
  • CAA
    ज़ाकिर अली त्यागी
    CAA हिंसा के 2 साल: मायूसियों के बीच इंसाफ़ की जद्दोजहद करते मृतकों के परिजन!
    20 Dec 2021
    20 दिसंबर 2019 को पूरे देश मे CAA के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए, उसी प्रदर्शन के दौरान उत्तर प्रदेश में 23 लोगों की जान गई। आज 2 साल बाद मृतकों के परिवारों का क्या हाल है, कैसे जी रहे हैं वो, उनकी न्याय की…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 6,563 नए मामले, ओमिक्रॉन के मामले बढ़कर 157 हुए
    20 Dec 2021
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 47 लाख 46 हज़ार 838 हो गयी है। देश में ओमिक्रॉन के मामलों की संख्या भी तेजी से बढ़ती जा रही है। ओमिक्रॉन अब तक 12 राज्यों में फैल चुका है।
  • Modi rally
    राज कुमार
    दो टूक: ओमिक्रॉन का ख़तरा लेकिन प्रधानमंत्री रैलियों में व्यस्त
    20 Dec 2021
    जैसे ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया को ओमिक्रॉन के ख़तरे से सावधान किया तो प्रधानमंत्री ने भी ट्वीट करके लोगों को शारीरिक दूरी बनाए रखने और मास्क पहनने की सीख दे डाली। लेकिन अगले ही पल विशाल…
  • agri
    डॉ सुखबिलास बर्मा
    कृषि उत्पाद की बिक़्री और एमएसपी की भूमिका
    20 Dec 2021
    भारत सरकार ने 2000 के दशक की शुरुआत में किसानों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए एमएसपी तय करके बाज़ार हस्तक्षेप नीति का पालन किया था। इस तरह,एमएसपी सरकार की परिकल्पित मूल्य नीति का प्रमुख घटक बन गयी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License