NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
तमिलनाडु: दलदली या रिहायशी ज़मीन? बेथेल नगर के 4,000 परिवार बेदखली के साये में
एक एनजीओ ने बेथेल नगर के निवासियों के खिलाफ दलदली क्षेत्र के अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए दूसरी जनहित याचिका दायर की है और उन्हें यहां से बेदखल करने की मांग की है। इससे पीड़ित होने वाले परिवार इसके विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे हैं और अपने अधिकार की कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
श्रुति एमडी
13 Oct 2021
eviction
संभावित बेदखली का विरोध कर रहे बेथेल नगर निवासी। फोटो सौजन्य: अरुल

चेन्नई: दक्षिण चेन्नई के शोलिंगनल्लूर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के इंजंबक्कम इलाके के बेथेल नगर में हजारों परिवार अपने घरों के छीने जाने को लेकर आशंकित हैं और वे अनिश्चितता के वातावरण में जी रहे हैं। एक एनजीओ कार्यकर्ता ने पर्यावरणीय कारणों का हवाला देते हुए यह चाहता है कि इन परिवारों को उनके घरों से बेदखल किया जाए। 

हालांकि ​156 ​एकड़ में फैला इस क्षेत्र को कई विभिन्न अवसरों पर आवासीय उद्देश्यों के लिए उपयुक्त माना गया है, जबकि एक मामला दायर कर आरोप लगाया गया है कि यह जमीन दलदली भूमि का ही विस्तार है, जिस पर "अतिक्रमण" कर लोगों ने अपने घर बना लिए हैं, लिहाजा अदालत इन्हें यहां से हटा दे। हालांकि, बेथेल नगर के निवासियों का तर्क है कि वे अतिक्रमणकारी नहीं हैं और यह जमीन आज से 20 वर्ष से काफी पहले से पंचायत से खरीदी गई थी। 

वास्तव में, यह पुराना महाबलीपुरम रोड आईटी हब से सटे हुए और ईस्ट कोस्ट रोड से लगे कई समृद्ध कई इलाकों का संपन्न परिवेश है, जहां पर रिसॉर्ट्स तथा समुद्र तट पर घर बने हुए हैं। यह स्थल दक्षिण चेन्नई के आसपास के अन्य क्षेत्रों से भी जुड़ा है। बेथेल नगर में रहने वाले निम्न-आय वाले परिवार के लोग हैं, जो बेदखल करने पर आमादा राज्य सरकार, कॉरपोरेट्स और कॉर्पोरेट-वित्त पोषित गैर सरकारी संगठनों से अदालतों में लड़ने के लिए जैसे-तैसे अपने संसाधन को जमा किया है।

‘हम अतिक्रमणकारी नहीं हैं’

बेथेल नगर के 10,000 निवासियों में से एक व्यक्ति का कहना है कि उन्हें यहां से बेदखल करने के उद्देश्य से लंबे समय से कोर्ट में केस चलाया जा रहा है, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। ​

बेथेल नगर पाधुगप्पू पेरवई के सचिव नारायणन ने बताया, “2016 में, जब हमारे क्षेत्र में एक जनगणना की गई थी, तो हम इसके बारे में पूछने के लिए कलेक्टर कार्यालय गए थे और तभी हमें इस मुकदमे के बारे में जानकारी मिली।"

बेथेल नगर पाधुगप्पू पेरवई उस इलाके में श्रमिकों, व्यापारियों और निवासियों के संघों का एक महासंघ है, जो बेथेल नगर को बचाने और इससे संबंधित अदालती मामलों को लड़ने के उद्देश्य से एकजुट है। 

बेथेल नगर के एक निवासी अरुल ने कहा, "20 वर्ष से भी ज्यादा समय पहले, जब इसके आस-पास के इलाकों में जगहें सिकुड़ने लगी थीं, तब पंचायत ने इस चरागाह की पहचान की थी,  इसका सर्वेक्षण किया था और इसे तीन समुदायों-पटियाल, मुधलियार और मछुआरों को आवंटित कर दिया था। तभी यह जमीन हमलोगों ने खरीदी थी। इसलिए हम अतिक्रमणकारी नहीं हैं।”

‘यह दलदली भूमि नहीं है’

फेडरेशन का तर्क है कि इंजंबक्कम में बेथेल नगर की कुल ​156 एकड़ भूमि दलदली नहीं है, बल्कि मुख्य रूप से यह आरक्षित चरागाह (मेइकल पोराम्बोके) की जमीन है। 

​"​भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास के विशेषज्ञों की एक टीम 2016 में उच्च न्यायालय में एक रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें साबित किया गया था कि बेथेल नगर की भूमि पल्लिकरनई दलदली भूमि का विस्तार नहीं है,”बेथेल नगर निवासी राजसिम्हन ने यह बताया। 

नारायणन ने कहा, “​इसके बाद,एम करुणानिधि सरकार के अंतिम कार्यकाल में, एक नीतिगत निर्णय लिया गया कि चेन्नई की सीमा के भीतर कोई चरागाह भूमि नहीं होगी। इस निर्णय के आधार पर भी बेथेल नगर की जमीन आवासीय उद्देश्यों के लिए उपयुक्त हो जाता है।”

बेथेल नगर को नाथम पोरोम्बोक के रूप में वर्गीकृत करने का विरोध। फोटो सौजन्य: अरुल 

उस समय लिए गए नीतिगत निर्णय के कारण, सरकार को चरागाह भूमि को नाथम पोरोम्बोक में यानी आवास के लिए बने क्षेत्र में परिवर्तित करने का अधिकार है। 

उन्होंने आगे कहा, “​​​जिला कलेक्टर, गजलक्ष्मी ने इस मामले में दो रिपोर्टें दायर की थी- एक अदालत में और दूसरी राजस्व विभाग को। यह दोहराते हुए कि यह भूमि आवासीय उद्देश्यों के लिए उपयुक्त है, उन्होंने प्रस्ताव दिया था कि प्रत्येक परिवार को 2 सेंट पर बासगीत का पट्टा दिया जा सकता है और जो इससे अधिक जमीन रखे हुए हैं, उनसे सरकार जमीन ले सकती है।”

फॉर्म-7 वितरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन। छवि सौजन्य: राजसिम्हन 

हालांकि बार-बार यह साबित किया जा चुका है कि मौजूदा बेथेल नगर विस्तारित दलदली भूमि पर स्थित नहीं है, फिर भी सरकार ने हाल में यहां के बाशिंदों को फॉर्म-7 वितरित किया है। इस फॉर्म के अनुसार, निवासियों को इसका कारण बताना होगा कि उन्हें इस जमीन से क्यों नहीं बेदखल किया जाना चाहिए। लोगों ने इस फार्म को भरने से इनकार कर दिया और इस कदम का विरोध किया। 

अगला कदम प्रपत्र ​6​​ है, जो बेदखली नोटिस है। 

एनजीओ चाहता है कि लोग यहां से बेदखल हों

अदालत में जारी मामले के जरिए यह साबित करने का प्रयास किया जा रहा है कि बेथेल नगर पल्लिकर्नई दलदली भूमि का विस्तार है। हालांकि यहां के परिवारों को उजाड़ने की दिशा में यह कोई पहला प्रयास नहीं है। 

नारायणन ने बताया कि कैसे उसी व्यक्ति आइएच सेकर ने 2008 में "एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें पोरम्बोक भूमि का उपयोग पार्क और स्कूल जैसे अन्य उद्देश्यों के लिए किए जा सकने” के तर्क के आधार पर बेथेल नगर के निवासियों को बेदखल करने की मांग की थी। उन्होंने बताया, “मद्रास उच्च न्यायालय ने 2010 में इस मुकदमे को खारिज कर दिया था।”

इसके कुछ साल बाद ​​2015​ में आइएच सेकर ने एक अन्य मामला दायर किया, जो अभी चल रहा है।

आइएच शेखर इंजंबक्कम में मछुआरा समुदाय से आते हैं और खुद को एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पहचानते हैं। वे एक गैर सरकारी संस्था नेचर ट्रस्ट के संस्थापक हैं, जिसे पर्यावरण और विभिन्न प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के उद्देश्य से बनाया गया था। उन्होंने इंजंबक्कम में "अतिक्रमण" के हल के लिए भी इस तरह के अन्य मामले भी दर्ज करा रखे हैं। 

नारायणन आश्चर्य करते हैं कि "अदालतों में मामले केवल उन्हीं जगहों के लिए क्यों दायर किए जाते हैं, जहां हम जैसे साधारण लोग रहते हैं? बकिंघम नहर के किनारे बने बड़े-बड़े कार्यालयों और बंगलों के बारे में क्या विचार है? अमीरों और अमीरों के खिलाफ कभी मामले दर्ज नहीं किए जाते। इसलिए यह विश्वास करना मुश्किल है कि एनजीओ वास्तव में पर्यावरणीय कारणों से ये संघर्ष कर रहा है।”

यह नहीं भूलना चाहिए कि इंजंबक्कम ईस्ट कोस्ट रोड पर स्थित है, जहां अचल संपत्ति का मूल्य बहुत अधिक है। 

2021 में यहां से डीएमके विधायक उम्मीदवार ने चुनाव जीता था, जिन्होंने बेथेल नगर के निवासियों को घर-घर पट्टे देने का वादा किया था। लिहाजा, यहां के बाशिंदे अब उनसे आग्रह कर रहे हैं कि उन्हें उखाड़ने के मकसद से किए जा रहे तमाम प्रयासों पर अब पूर्ण विराम लगाया जाए।

अंग्रेजी में मूल रूप से लिखे गए लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें 

https://www.newsclick.in/TN-marshland-housing-land-eviction-uncertainty-shrouds-4000-families-bethel-nagar

tamil nadu
Eviction
Protests
Chennai
DMK

Related Stories

हापुड़ अग्निकांड: कम से कम 13 लोगों की मौत, किसान-मजदूर संघ ने किया प्रदर्शन

झारखंड: नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन सत्याग्रह जारी, संकल्प दिवस में शामिल हुए राकेश टिकैत

सूडान में तख्तापलट के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन जारी, 3 महीने में 76 प्रदर्शनकारियों की मौत

कोरोना काल में भी वेतन के लिए जूझते रहे डॉक्टरों ने चेन्नई में किया विरोध प्रदर्शन

अफ़ग़ानिस्तान में सिविल सोसाइटी और अधिकार समूहों ने प्रोफ़ेसर फ़ैज़ुल्ला जलाल की रिहाई की मांग की

जानिए: अस्पताल छोड़कर सड़कों पर क्यों उतर आए भारतीय डॉक्टर्स?

सूडान : 10 लाख से ज़्यादा नागरिक तख़्तापलट के विरोध में सड़कों पर आए

वेतन संशोधन समझौते: तमिलनाडु के मज़दूरों ने जीतीं अहम लड़ाइयां 

तमिलनाडु: नियुक्तियों में हो रही अनिश्चितकालीन देरी के ख़िलाफ़ पशु चिकित्सकों का विरोध प्रदर्शन

"ना ओला ना ऊबर, सरकार अपने हाथ में ले नियंत्रण- तमिलनाडु के ऑटो चालकों की मांग


बाकी खबरें

  • srilanka
    न्यूज़क्लिक टीम
    श्रीलंका: निर्णायक मोड़ पर पहुंचा बर्बादी और तानाशाही से निजात पाने का संघर्ष
    10 May 2022
    पड़ताल दुनिया भर की में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने श्रीलंका में तानाशाह राजपक्षे सरकार के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन पर बात की श्रीलंका के मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. शिवाप्रगासम और न्यूज़क्लिक के प्रधान…
  • सत्यम् तिवारी
    रुड़की : दंगा पीड़ित मुस्लिम परिवार ने घर के बाहर लिखा 'यह मकान बिकाऊ है', पुलिस-प्रशासन ने मिटाया
    10 May 2022
    गाँव के बाहरी हिस्से में रहने वाले इसी मुस्लिम परिवार के घर हनुमान जयंती पर भड़की हिंसा में आगज़नी हुई थी। परिवार का कहना है कि हिन्दू पक्ष के लोग घर से सामने से निकलते हुए 'जय श्री राम' के नारे लगाते…
  • असद रिज़वी
    लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी का हंगामा: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत चंदन का घेराव, धमकी
    10 May 2022
    एक निजी वेब पोर्टल पर काशी विश्वनाथ मंदिर को लेकर की गई एक टिप्पणी के विरोध में एबीवीपी ने मंगलवार को प्रोफ़ेसर रविकांत के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया। उन्हें विश्वविद्यालय परिसर में घेर लिया और…
  • अजय कुमार
    मज़बूत नेता के राज में डॉलर के मुक़ाबले रुपया अब तक के इतिहास में सबसे कमज़ोर
    10 May 2022
    साल 2013 में डॉलर के मुक़ाबले रूपये गिरकर 68 रूपये प्रति डॉलर हो गया था। भाजपा की तरफ से बयान आया कि डॉलर के मुक़ाबले रुपया तभी मज़बूत होगा जब देश में मज़बूत नेता आएगा।
  • अनीस ज़रगर
    श्रीनगर के बाहरी इलाक़ों में शराब की दुकान खुलने का व्यापक विरोध
    10 May 2022
    राजनीतिक पार्टियों ने इस क़दम को “पर्यटन की आड़ में" और "नुकसान पहुँचाने वाला" क़दम बताया है। इसे बंद करने की मांग की जा रही है क्योंकि दुकान ऐसे इलाक़े में जहाँ पर्यटन की कोई जगह नहीं है बल्कि एक स्कूल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License