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तमिलनाडु चुनाव: एआईएडीएमके, डीएमके ने लोकलुभावन वायदों की परंपरा को बरक़रार रखा है
एआईएडीएमके द्वारा अपने पिछले घोषणापत्र में किये गए वादों की लंबित सूची काफी बड़ी है, जिनमें कई अन्य वादों के साथ-साथ राशन कार्डधारकों को सेलफोन वितरण, सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना की पुनर्वापसी, सार्वजनिक स्थलों पर मुफ्त वाई-फाई मुहैया कराने का वादा अभी भी सिर्फ घोषणापत्र के पन्नों पर ही अंकित हैं।
श्रुति एमडी
17 Mar 2021
Tamil Nadu

2021 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में नामांकन दाखिल करने के लिए सिर्फ तीन दिन बचे हैं, और सारे राजनीतिक दलों के लगभग सभी उम्मीदवारों की घोषणा हो चुकी है, और चुनाव प्रचार का काम पूरे जोरो-शोरों पर चल रहा है।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में मौजूद एआईडीएमके, जिन 179 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, उसमें से सिर्फ कन्याकुमारी जिले में पद्मनाभपुरम निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार की घोषणा की जानी बाकी है। इस बीच पट्टली मक्कल कच्ची (पीएमके) ने 10 मार्च को विधानसभा चुनावों के लिए अपने 10 उम्मीदवारों की पहली सूची ही जारी की, जबकि बाकी के 13 नामों की घोषणा का इंतजार है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जिन 20 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, उनमें से उसने 14 मार्च को 17 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी थी। गठबंधन में देर से शामिल हुई तमिल मनिला कांग्रेस (टीएमसी) ने हालाँकि 12 मार्च को ही अपने सभी छह उम्मीदवारों के नामों को घोषित कर दिया था।

वहीँ धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) में द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम (डीएमके) ने एक बार में ही अपनी सभी 173 सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। कांग्रेस ने 13 मार्च को 21 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी थी, जबकि चार और की घोषणा अभी की जानी शेष है। वहीँ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, सीपीआई(मार्क्सवादी) और मरुमलार्ची द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम में से प्रत्येक ने अपने-अपने छह निर्वाचन क्षेत्रों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है।

इसी के साथ ही विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा अपने-अपने चुनावी घोषणापत्रों को भी जारी किया जा रहा है। डीएमके और एआईडीएमके ने एक के बाद एक कर अपने घोषणापत्र 13 और 14 मार्च को जारी किये। नवीनतम सूचना के अनुसार 16 मार्च को कांग्रेस ने भी अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है।

भाजपा की मुश्किलें 

तमिलनाडु में भाजपा की ओर से अभी तक घोषित किये गए उम्मीदवारों में से कुछ प्रमुख चेहरे इस प्रकार से हैं।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एल मुरुगन, तिरुपुर जिले के धारापुरम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। भाजपा की महिला ईकाई की राष्ट्रीय अध्यक्ष, वनाथी श्रीनिवासन को कोयम्बटूर दक्षिण की सीट दी गई है, जहाँ पर उन्हें मक्कल निधि माईअम (एमएनएम) के प्रमुख कमल हासन का सामना करना होगा। पूर्व राष्ट्रीय सचिव एच राजा, जो कि 2001 में कराईकुडी से निर्वाचित हुए थे, को एक बार फिर से वहां से नामित किया गया है।

अभी तक जिन 17 नामों की घोषणा की गई है, उनमें खुशबू सुन्दर सहित कुल तीन महिला उम्मीदवार हैं, जो चेन्नई में थाउजेंड लाइट्स से चुनाव लड़ेंगी।

भाजपा में शामिल होने के कुछ घंटों बाद ही थिरुपराकुंदराम के निवर्तमान विधायक डॉ पी सरवनन को उम्मीदवार सूची में शामिल कर लिया गया। इससे पहले वे डीएमके में थे। हालाँकि यह चपलता हैरान करने वाली थी, लेकिन इसने भाजपा की हताशा को उघाड़कर रख दिया है। हकीकत तो यह है कि राज्य में पार्टी का मजबूत जनाधार नहीं है, और उसे महत्वपूर्ण चेहरों को ढूंढने के लिए जूझना पड़ रहा है।

अन्नाद्रमुक के पूर्व मंत्री और तमिलनाडु भाजपा के उपाध्यक्ष नैयनार नागेन्द्रन ने भाजपा द्वारा प्रदेश के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी किये जाने से पहले ही 12 मार्च के दिन तिरुनेलवेली विधानसभा क्षेत्र से अपना नामांकन दाखिल कर लिया था। हालाँकि उनका नाम भी उम्मीदवारों की सूची में शामिल है, लेकिन इसने पार्टी के भीतर चल रहे आंतरिक कलह पर संदेह करने के लिए भौहें खड़ी करने का अवसर मुहैय्या करा दिया है।

इसके अलावा राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह द्वारा दिल्ली से हिंदी और अंग्रेजी में उम्मीदवारों की सूची जारी करने पर भी आलोचना हो रही है, क्योंकि इस दक्षिण राज्य में हिंदी को थोपे जाने के विरुद्ध भावनाएं काफी प्रबल रूप से मौजूद हैं।

अन्नाद्रमुक की ओर से नए-नए और वादे   

लगातार तीसरी बार विधानसभा चुनावों में जीत की आस लगाये हुए एआईडीएमके ने एक बार फिर से अपने चुनावी घोषणापत्र को कई लोकलुभावन योजनाओं से भर दिया है। अन्य बातों के अलावा इस सूची में सभी के लिए अम्मा वाशिंग मशीन, महिलाओं के लिए यात्रा करने पर रियायत, प्रत्येक परिवार में कम से कम एक व्यक्ति के लिए सरकारी नौकरी, शैक्षिक ऋण माफ़ी, अम्मा बैंकिंग कार्ड योजना, एमजीआर ग्रीन ऑटो और अम्मा हाउसिंग स्कीम जैसे लंबे-चौड़े वायदों को शामिल किया गया है।

उनके पिछले घोषणापत्र में किये गये लंबित वादों की सूची भी काफी लंबी-चौड़ी है। राशन कार्डधारकों को सेलफोन वितरित करने का वादा, सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन स्कीम पर वापसी, सार्वजनिक स्थलों पर मुफ्त वाई-फाई की सुविधा के साथ कई अन्य वादे अभी भी घोषणापत्र के पन्नों पर ही धूल फांक रहे हैं।

अन्नाद्रमुक, जिसने तीन साल पहले नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) कानून पारित किये जाते वक्त भाजपा के समर्थन में मतदान किया था, ने अब इसके निरस्तीकरण की कसम खाई है। खबर है कि यह गठबंधन में सहयोगी भाजपा के लिए शर्मिंदगी का विषय बना हुआ है।

चुनावी वायदों के तहत एआईडीएमके ने यह भी कहा है कि वह केंद्र सरकार से ईंधन की कीमतों में भारी कमी लाने का अनुरोध करेगी।

घोषणापत्र में शामिल वायदों की लंबी-चौड़ी सूची को देखते हुए स्वाभाविक प्रश्न उठ खड़ा होता है कि आख़िरकार क्यों एआईडीएमके सरकार इनमें से कई वादों को अपने निवर्तमान कार्यकाल में पूरा कर पाई।

इस सूची में किये गए वादों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए डीएमके प्रमुख स्टालिन का कहना था “वे (एआईडीएमके) तो यहाँ तक घोषणा कर सकते हैं कि हर एक को एक हवाई जहाज और एक हेलीकॉप्टर दिया जायेगा। वे कुछ भी कह सकते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि वे इन चुनावों में जीत हासिल करने नहीं जा रहे हैं।”

डीएमके और कांग्रेस की ओर से किये जाने वाले व्यापक वादे  

बड़े-बड़े वादे करने के मामले में डीएमके भी बहुत पीछे नहीं है। पार्टी की ओर से यदि सत्ता में आते हैं तो कोविड-19 से प्रभावित राशन कार्डधारकों के लिए 4,000 रूपये की आर्थिक सहायता, निजी क्षेत्र में रोजगार में आरक्षण, सिटी बसों में महिलाओं के लिए फ्री बस पास की सुविधा, राज्य भर में नौकरियों में तमिलनाडु के निवासियों के लिए 75% आरक्षण और पहली पीढ़ी के स्नातकों को सरकारी नौकरियों में भर्ती में प्राथमिकता देने का वादा किया गया है।

डीएमके ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी क्रमशः 5 रूपये और 4 रूपये प्रति लीटर और घरेलू गैस सिलिंडर की कीमत में 100 रूपये तक की कटौती का वादा किया है।

पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की मौत की यथोचित जांच का वादा भी घोषणापत्र में देखने को मिलता है।

तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष के एस अझागिरी ने 16 मार्च को पार्टी का चुनावी घोषणापत्र जारी किया। पार्टी ने रोजगार बढ़ाने और स्टार्टअप्स के लिए कम से कम पांच वर्षों तक कर मुक्ति का वादा किया है। घोषणापत्र में शराब की दुकानों को बंद करने, हॉनर किलिंग पर रोकथाम लगाने के लिए अलग से कानून बनाने सहित नीट परीक्षा को खत्म करने जैसे कदम उठाने जैसे वादों को शामिल किया गया है। 

तीसरा मोर्चा, चौथा मोर्चा...

सीटों के बंटवारे को लेकर उठे विवाद पर एआईडीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन से बाहर निकलने के कुछ दिन बाद, अभिनेता से नेता बने विजयकांत की डीएमडीके ने 14 मार्च को टीटीवी दिनाकरन की अम्मा मक्कल मुन्नेत्र कझगम (एएमएमके) के साथ चुनावी साझेदारी को अंतिम रूप दे दिया था। पार्टी गठबंधन में 60 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

इस खेमे में शामिल अन्य पार्टियों में असदुद्दीन ओवैशी की आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) (3) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (एसडीपीआई) (6) सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं।

इस घोषणा के बाद कि मक्कल निधि माईअम (एमएनएन) 154 निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ेगी, इसके संस्थापक कमल हासन ने कोयम्बटूर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से अपना पर्चा दाखिल किया। पार्टी को 2019 के संसदीय चुनावों में इस क्षेत्र में अच्छे-खासे वोट हासिल करने में सफलता प्राप्त हुई थी।

जैसा कि प्रचलन में रहा है, तमिल राष्ट्रवादी पार्टी नाम तमिलर कच्ची (एनटीके) राज्य के सभी 234 विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ रही है। पार्टी ने महिला उम्मीदवारों को 50% सीटें आवंटित की हैं। पार्टी के पास मुख्यतया तमिलनाडु के ग्रामीण इलाकों में अपेक्षाकृत 4% की स्थिर वोटों में हिस्सेदारी है।

 

(तालिका एवं चित्र में योगदान: आर. प्रकाश द्वारा)

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

https://www.newsclick.in/TN-elections-AIADMK-DMK-keep-up-tradition-populist-promises

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