NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
तेलंगाना: टीएसआरटीसी हड़ताल का 10वां दिन, सरकार अपनी ज़िद पर अड़ी, अब तक 6 मौते
तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (टीएसआरटीसी) की यूनियनों की अनिश्चितकालीन हड़ताल सोमवार को दसवें दिन भी जारी है। नौकरी जाने के डर से और आर्थिक तंगी से परेशान होकर 6 लोग अब तक अपनी जान गँवा चुके हैं, लेकिन सरकार पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
14 Oct 2019
TSRTC strike
Image courtesy:Times Now

तेलंगाना राज्य सड़क परिवहन निगम (टीएसआरटीसी) की यूनियनों की अनिश्चितकालीन हड़ताल सोमवार को दसवें दिन भी जारी है। आंदोलनकारी एक व्यक्ति की रविवार को मौत होने के बाद खम्मम जिले में बंद आयोजित किया गया है।

टीएसआरटीसी के खम्मम डिपो से जुड़े चालक 55 वर्षीय डी श्रीनिवास रेड्डी ने शनिवार को खुद को आग लगा ली थी। रविवार को एक अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया।

रेड्डी की मौत के बाद, करीब 50 वर्षीय एक परिचालक सुरेंद्र गौड़ ने रविवार की रात अपने घर पर फांसी लगा कर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली।

रविवार को वारंगल जिले के नरसामपेट डिपो से जुड़े एक चालक ने भी पेट्रोल डालकर खुद को आग लगा ली थी लेकिन पुलिस के तत्काल दखल से उनकी जान बच गई।

रेड्डी की मौत के बाद टीएसआरटीसी की संयुक्त कार्यसमिति और कई सियासी दलों ने खम्मम बंद का आह्वान किया था। इस दौरान हड़ताली कर्मचारियों ने प्रदर्शन किए जबकि विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों के कार्यकर्ताओं ने खम्मम और कोठगुड़म जिलों में प्रदर्शन रैलियों में हिस्सा लिया।

खम्मम के पुलिस आयुक्त तफसीर इकबाल ने पीटीआई-भाषा को बताया कि बंद शांतिपूर्ण है और हालात सामान्य हैं।  
अब तक 6 लोगो की मौत

रेड्डी की मौत पर आंदोलनकारियों ने राज्य में डिपो और बस स्टैंड पर शोक बैठकें की। लेकिन यूनियन नेताओ ने बताया कि यह कोई पहली मौत नहीं है। इससे पहले भी नौकरी जाने के डर से और आर्थिक तंगी से परेशान होकर कई लोग अपनी जान गँवा चुके हैं। रविवार की इस घटना को मिलकर अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक 6 लोगों की मौत हो चुकी है।

यूनियन नेताओं के मुताबिक 10 अक्टूबर को, चेंपीचेरला डिपो में बस चालक डी कुमरैया की हैदराबाद के उप्पल में विरोध करने के दौरान दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी डिपो में एक और ड्राइवर, शेख खलील मिया की मृत्यु हो गई क्योंकि वह अपनी नौकरी जाने को लेकर  चिंतित थे। पद्मा के पति रघु, जो हकीमपेट डिपो में एक कंडक्टर के रूप में काम कर रही थी, को डर था कि उनकी पत्नी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा, इस वजह से दिल का दौरा पड़ने से उनकी मृत्यु हो गई। अगले दिन, मियापुर डिपो में ड्राइवर के रूप में काम कर रहे इरुक्ली लक्ष्मय्या की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।  

हड़ताली कर्मचारियों को अन्य श्रमिक संगठनों का भी समर्थन

यह आंदोलन लगातार जारी है, हड़ताली कर्मचारियों को अन्य कर्मचारी संघों ने भी अपना समर्थन दिया। सोमवार को रेवन्यू विभाग के कर्मचारियों ने भी अपना समर्थन दिया।  इससे पहले शिक्षक संघ ,बिजली विभाग शीट कई अन्य विभाग के कर्मचारियों सहित सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियन ने भी अपना समर्थन दिया है।

इसके अलावा राज्य के सभी विपक्षी दलों ने भी उनके पक्ष में अपनी एकजुटता जाहिर की है। लेकिन इन सबके बावजूद सरकार पर कोई असर नहीं हो रहा है।

सरकार अपनी ज़िद पर अड़ी

टीएसआरटीसी की विभिन्न यूनियनों के करीब 49,000 कर्मचारियों के काम का बहिष्कार करने और सरकारी बसों के सड़कों से नदारद होने से यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

राज्य सड़क परिहवन निगम (आरटीसी) के सरकार में विलय, वेतन समीक्षा, विभिन्न पदों पर भर्ती समेत कई मांगों को लेकर संयुक्त कार्य समिति ने हड़ताल का आह्वान किया था जिसके बाद पांच अक्टूबर से टीएसआरटीसी के कर्मचारी संघ और विभिन्न कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे।

इस पूरे मामले पर सरकार का रुख बहुत ही चिंताजनक है। इन मौतों के बाद भी सरकार अपने फैसले पर अड़ी हुई है। मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने कहा था कि आंदोलनरत कर्मचारी खुद ही बर्खास्त हो गए हैं। इस मामले पर मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपना रखा है और साफ कर दिया है कि आरटीसी का सरकार में विलय नहीं होगा।

इससे पहले, मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने शनिवार को कहा था कि हड़ताल कर रहे कर्मचारियों से बातचीत करने या उन्हें वापस लेने का कोई सवाल नहीं उठता।

ये समस्या जल्द हल होती नहीं दिख रही है क्योंकि सरकार ने कर्मचारी यूनियन से बातचीत करने से साफ इंकार कर दिया है। बल्कि हड़ताल को खत्म करने के लिए नए तत्कालिक लोगो को भर्ती करने का आदेश निकला और कहा इन नए कर्मचारियों से बसों का संचालन करेगी। इससे कर्मचारी में और अधिक गुस्सा है। कर्मचारियों ने कहा की कोई बस सड़क नहीं उतरने नहीं देंगे।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)

Telangana
10th day of TSRTC strike
Telangana State Road Transport Corporation
Indefinite Strike
Workers Strike
workers protest
Workers Rights in India

Related Stories

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?

लुधियाना: PRTC के संविदा कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू

#Stop Killing Us : सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का मैला प्रथा के ख़िलाफ़ अभियान

दिल्ली: बर्ख़ास्त किए गए आंगनवाड़ी कर्मियों की बहाली के लिए सीटू की यूनियन ने किया प्रदर्शन

देशव्यापी हड़ताल को मिला कलाकारों का समर्थन, इप्टा ने दिखाया सरकारी 'मकड़जाल'

स्कीम वर्कर्स संसद मार्च: लड़ाई मूलभूत अधिकारों के लिए है

मध्य प्रदेश : आशा ऊषा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन से पहले पुलिस ने किया यूनियन नेताओं को गिरफ़्तार

झारखंड: हेमंत सरकार की वादाख़िलाफ़ी के विरोध में, भूख हड़ताल पर पोषण सखी

आंगनवाड़ी की महिलाएं बार-बार सड़कों पर उतरने को क्यों हैं मजबूर?


बाकी खबरें

  • अजय कुमार
    मोदी जी की नोटबंदी को ग़लत साबित करती है पीयूष जैन के घर से मिली बक्सा भर रक़म!
    29 Dec 2021
    मोदी जी ग़लत हैं। पीयूष जैन के घर से मिला बक्से भर पैसा समाजवादी पार्टी के भ्रष्टाचार का इत्र नहीं बल्कि नोटबंदी के फ़ैसले को ग़लत साबित करने वाला एक और उदाहरण है।
  • 2021ः कोरोना का तांडव, किसानों ने थमाई मशाल, नफ़रत ने किया लहूलुहान
    न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
    2021ः कोरोना का तांडव, किसानों ने थमाई मशाल, नफ़रत ने किया लहूलुहान
    29 Dec 2021
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने साल 2021 के उन उजले-स्याह पलों का सफ़र तय किया, जिनसे बनती-खुलती है भारतीय लोकतंत्र के भविष्य की राह।
  • जानिए: अस्पताल छोड़कर सड़कों पर क्यों उतर आए भारतीय डॉक्टर्स?
    रवि शंकर दुबे
    जानिए: अस्पताल छोड़कर सड़कों पर क्यों उतर आए भारतीय डॉक्टर्स?
    29 Dec 2021
    यह हड़ताली रेजिडेंट डॉक्टर्स क्या चाहते हैं, क्यों चाहते हैं, अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरना इनके लिए क्यों ज़रूरी है। आइए, क्रमवार जानते हैं-
  • सोनिया यादव
    जेएनयू: ICC का नया फ़रमान पीड़ितों पर ही दोष मढ़ने जैसा क्यों लगता है?
    29 Dec 2021
    नए सर्कुलर में कहा गया कि यौन उत्पीड़न के मामले में महिलाओं को खुद ही अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। महिलाओं को यह पता होना चाहिए किए इस तरह के उत्पीड़न से बचने के लिए उन्हें अपने पुरुष दोस्तों के…
  • कश्मीरी अख़बारों के आर्काइव्ज को नष्ट करने वालों को पटखनी कैसे दें
    एजाज़ अशरफ़
    कश्मीरी अख़बारों के आर्काइव्ज को नष्ट करने वालों को पटखनी कैसे दें
    29 Dec 2021
    सेंसरशिप अतीत की हमारी स्मृतियों को नष्ट कर देता है और जिस भविष्य की हम कामना करते हैं उसके साथ समझौता करने के लिए विवश कर देता है। प्रलयकारी घटनाओं से घिरे हुए कश्मीर में, लुप्त होती जा रही खबरें…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License