NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
आम हड़ताल से जुड़ी दस अहम बातें
आज यानी 8 जनवरी को देश की दस प्रमुख ट्रेड यूनियनों सहित अन्य संगठनों ने देशव्यापी हड़ताल की। इस हड़ताल में बड़ी संख्या में मज़दूर और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। इस हड़ताल से जुड़ी कुछ अहम बातें जिसे जानना आपके लिए ज़रूरी है
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
08 Jan 2020
all india general strike

1. देश भर के ट्रेड यूनियनों ने मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ 8 जनवरी को राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया था। आज की इस हड़ताल में लाखों औद्योगिक मजदूर, कर्मचारी, किसान, खेतिहर मजदूर, छात्र और बैंक कर्मचारी शामिल हैं। इनका कहना है कि मोदी सरकार ने आर्थिक नीतियों को पूरी तरह से बदल दिया है जो मज़दूर विरोधी है और देश की अर्थव्यस्व्था को बर्बाद कर रही है। मोदी सरकार एक ऐसी अर्थव्यवस्था का निर्माण कर रही है जिससे आर्थिक असमानता की खाई बढ़ती जा रही है। हड़ताल में शामिल लोगों ने संविधान पर हो रहे हमले के खिलाफ आवाज बुलंद की। उनका कहना है कि सरकार समाज में साम्प्रदायिक जहर घोल रही है। साथ ही उन्होंने नागरिकता कानून के विरोध में जमकर हमला बोला।

2. इस हड़ताल का आह्वान सितंबर 2019 में लगभग सभी स्वतंत्र राष्ट्रीय यूनियनों के साथ-साथ 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा आयोजित नेशनल मास कन्वेंशन ऑफ वर्कर्स में किया गया था। नवंबर 2019 में अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के राष्ट्रीय सम्मेलन द्वारा इस आह्वान को समर्थन दिया गया। ज्ञात हो कि एआईकेएससीसी 100 से अधिक किसान संगठनों का एक मंच है। इसके बाद 70 से अधिक छात्र संगठन भी इसके साथ आए और हड़ताल का समर्थन किया।

3. ये हड़ताल सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के निजीकरण, विदेशी पूंजी के आमंत्रण, श्रमिक विरोधी कोड की शुरूआत और बढ़ी बेरोज़गारी को लेकर किया गया। सरकार की ये नीति अर्थव्यवस्था और भविष्य को नष्ट कर रही है। इस हड़ताल की मुख्य मांगों में मज़दूरी में वृद्धि करने मांग शामिल है।

4.ट्रेड यूनियन के नेताओं कहा कहना है कि आर्थिक मोर्चे पर विफल मोदी सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों को बेचने की योजना के साथ भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) जैसे लाभ कमाने वाले उद्यमों को भी बेचने की योजना बना रही है। इसने रक्षा उत्पादन क्षेत्र, रेलवे, बैंकों आदि के विनिवेश की भी शुरुआत की है।

5. उनका कहना है कि मोदी सरकार ने मौजूदा श्रम क़ानूनों में कई बदलाव भी किए हैं जिसके चलते नौकरी की सुरक्षा, मज़दूरी और विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर डर बना हुआ है। वास्तव में नया लेबर कोड काम के अधिक घंटे, अधिक कार्यभार, नौकरियों को बचाए रखने के लिए मालिकों पर अधिक निर्भरता और शोषणकारी प्रथाओं को क़ानूनी रूप से चुनौती देने के लिए कम अधिकार या कोई अधिक अधिकार प्रदान नहीं करता है।

नया क़ानून जिसे आने वाले महीनों में लागू किया जाना है वे क़ानूनों के उल्लंघन पर प्रबंधन को दिए जाने वाले दंड को कम करेंगे, श्रमिकों के मामले में होने वाले उल्लंघन पर क़ाबू पाना मुश्किल होगा, यह श्रम जांच प्रणाली को खोखला कर देगा जो इन क़ानूनों को लागू करने वाली संस्था है और इससे कहीं अधिक और बेलगाम शोषण का मार्ग प्रशस्त होगा। सरकार ने श्रम कानूनों को खत्म कर यह वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट सहित 44 श्रम कानूनों को नष्ट कर देगी। यह श्रमिकों के शोषण को बढ़ाएगा, उनकी मज़दूरी को कम करेगा और ट्रेड यूनियनों के गठन के उनके अधिकारों का हनन करेगा। यह बड़े औद्योगिक घरानों और विदेशी कंपनियों को देश में सस्ते और उचित श्रम का आश्वासन देकर उन्हें खुश करने के लिए किया जा रहा है। श्रम कानूनों में हुए इस बदलाव को लेकर भी लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं।

6.जहां तक किसानों की बात है तो पिछले कुछ वर्षों में किसानों की लगातार बदतर होती हालत, किसानों की जमीनों को हड़पने की नीति, एमएनसी को देश में कृषि-उपज को डंप करने की अनुमति, इसके अलावा बीमा कंपनियों की लूट और अन्य ऐसे शोषणकारी निर्णयों के ख़िलाफ़ किसान संघर्ष करते आ रहे हैं। इन किसानों ने भी मजदूरों के साथ कदम बढ़ाकर इस संघर्ष में हिस्सा लिया।

7.ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति ने देश के लगभग सभी ज़़िलों में सड़क ब्लॉक करने, विरोध प्रदर्शन करने और कामबंदी के साथ ग्रामीण भारत बंद के तौर पर हड़ताल कर रहे हैं। इनकी प्रमुख मांगों में न्यूनतम समर्थन मूल्य शामिल हैं जो उत्पादन की कुल लागत के साथ 50% अधिक है। सभी किसान ऋणों की पूरी तरह छूट, फसल क्षति से प्रभावी संरक्षण, आपदा मुआवजा, वन अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन समेत अन्य मांग इनमें शामिल हैं।

8.छात्रों ने भी लगातार शिक्षा और शिक्षण संस्थानों पर हो रहे हमले चाहे वो फीस वृद्धि का मामला हो या फंड की कटौती और सीट की कमी से जुड़ा, इन सभी को लेकर वे भी देशभर में किए जा रहे हड़ताल में शामिल रहे।

9. देश में 7.3 करोड़ से अधिक लोग जिसमें ज़्यादातर युवा हैं वे मौजूदा समय में बेरोज़गार हैं। यह शायद बेरोज़गारों की सबसे बड़ी सेना है जिसकी तरफ सरकार ने शायद ही कभी देखा है। ये बेरोज़गार युवा वर्ग निश्चित रूप से दुनिया की सबसे बड़ी बेरोज़गारों की फौज है। यह सब मोदी सरकार के अदूरदर्शी नीतियों का परिणाम है। युवाओं को रोजगार देने की मांग को इस हड़ताल में प्रमुखता से शामिल किया गया।

10. हड़ताल में शामिल लोगों ने इन मांगो के साथ समाज में सरकार द्वारा फैलाई जा रही नफरत की हर कार्रवाई के खिलाफ आवाज बुलंद किया। सरकार द्वारा संविधान की मूल भावना से खिलवाड़ करने से लेकर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी जैसे देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों पर किए जा रहे हमलों के खिलाफ आवाज बुलंद की गई

All India General Strike
Bharat band
BJP
modi sarkar
Modi Sarkar Policies
economic crises
unemployment
trade unions
privatization

Related Stories

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

दक्षिण अफ्रीका में सिबन्ये स्टिलवाटर्स की सोने की खदानों में श्रमिक 70 दिनों से अधिक समय से हड़ताल पर हैं 

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • सत्यम् तिवारी
    वाद-विवाद; विनोद कुमार शुक्ल : "मुझे अब तक मालूम नहीं हुआ था, कि मैं ठगा जा रहा हूँ"
    16 Mar 2022
    लेखक-प्रकाशक की अनबन, किताबों में प्रूफ़ की ग़लतियाँ, प्रकाशकों की मनमानी; ये बातें हिंदी साहित्य के लिए नई नहीं हैं। मगर पिछले 10 दिनों में जो घटनाएं सामने आई हैं
  • pramod samvant
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेकः प्रमोद सावंत के बयान की पड़ताल,क्या कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार कांग्रेस ने किये?
    16 Mar 2022
    भाजपा के नेता महत्वपूर्ण तथ्यों को इधर-उधर कर दे रहे हैं। इंटरनेट पर इस समय इस बारे में काफी ग़लत प्रचार मौजूद है। एक तथ्य को लेकर काफी विवाद है कि उस समय यानी 1990 केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी।…
  • election result
    नीलू व्यास
    विधानसभा चुनाव परिणाम: लोकतंत्र को गूंगा-बहरा बनाने की प्रक्रिया
    16 Mar 2022
    जब कोई मतदाता सरकार से प्राप्त होने लाभों के लिए खुद को ‘ऋणी’ महसूस करता है और बेरोजगारी, स्वास्थ्य कुप्रबंधन इत्यादि को लेकर जवाबदेही की मांग करने में विफल रहता है, तो इसे कहीं से भी लोकतंत्र के लिए…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    फ़ेसबुक पर 23 अज्ञात विज्ञापनदाताओं ने बीजेपी को प्रोत्साहित करने के लिए जमा किये 5 करोड़ रुपये
    16 Mar 2022
    किसी भी राजनीतिक पार्टी को प्रश्रय ना देने और उससे जुड़ी पोस्ट को खुद से प्रोत्सान न देने के अपने नियम का फ़ेसबुक ने धड़ल्ले से उल्लंघन किया है। फ़ेसबुक ने कुछ अज्ञात और अप्रत्यक्ष ढंग
  • Delimitation
    अनीस ज़रगर
    जम्मू-कश्मीर: परिसीमन आयोग ने प्रस्तावों को तैयार किया, 21 मार्च तक ऐतराज़ दर्ज करने का समय
    16 Mar 2022
    आयोग लोगों के साथ बैठकें करने के लिए ​28​​ और ​29​​ मार्च को केंद्र शासित प्रदेश का दौरा करेगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License